Chhath Puja Geet मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मोना सिंह छठ पूजा गीत - Mona Singh Chhath Puja Bhakti Song New (Chhathpuja Geet)

पढ़ें Chhathpuja Geet 2021 | मोना सिंह छठ पूजा गीत - Mona Singh Bhojpuri Chhath Puja Bhakti Song New का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि

सनातन धर्म के सबसे कठिन और पवित्र महापर्वों में से एक 'छठ पूजा' केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य देव और छठी मैया के प्रति अगाध श्रद्धा, समर्पण और शुचिता का जीवंत प्रतीक है। इस महापर्व की आत्मा इसके पारंपरिक लोकगीतों में बसती है। वर्ष 2021 में रिलीज हुआ "Chhathpuja Geet 2021 | मोना सिंह छठ पूजा गीत - Mona Singh Bhojpuri Chhath Puja Bhakti Song New" इसी पावन परंपरा की एक अत्यंत मधुर और भावपूर्ण प्रस्तुति है। भोजपुरी लोक गायिका मोना सिंह की सुरीली आवाज में सजा यह गीत छठी मैया के प्रति अनन्य भक्ति, विरह, समर्पण और लोक-संस्कृति के विभिन्न रंगों को समेटे हुए है। यह गीत न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन गीत के बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और महापर्व छठ की पावन परंपराओं का सांगोपांग विवेचन करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ कांच ही बांस के बहंगिया ॥

कांच ही बांस के बहंगिया, बहँगी लचकत जाए।
कांच ही बांस के बहंगिया, बहँगी लचकत जाए॥
होई ना बलम जी कहँरिया, बहँगी घाट पहुँचाए।
होई ना बलम जी कहँरिया, बहँगी घाट पहुँचाए॥

बाँस के जेकरा में दउरवा, सजले फल-फूल से।
बाँस के जेकरा में दउरवा, सजले फल-फूल से॥
केरवा के पात पर उगेलन सुरुज देव, झाँकेले झूल से।
केरवा के पात पर उगेलन सुरुज देव, झाँकेले झूल से॥

छठी मैया के बरतिया, जे करेला नेम-धरम से।
छठी मैया के बरतिया, जे करेला नेम-धरम से॥
ओकरा के देहु आशीष मैया, भरि द झोरी करम से।
ओकरा के देहु आशीष मैया, भरि द झोरी करम से॥

सुरुज देव के अरघ देवे, चलली सुहागिन नारी।
सुरुज देव के अरघ देवे, चलली सुहागिन नारी॥
मोना सिंह गावेली गीतिया, महिमा बा तोहार भारी।
मोना सिंह गावेली गीतिया, महिमा बा तोहार भारी॥

कांच ही बांस के बहंगिया, बहँगी लचकत जाए।
होई ना बलम जी कहँरिया, बहँगी घाट पहुँचाए॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

मोना सिंह द्वारा गाया गया यह छठ गीत अत्यंत मार्मिक और पारंपरिक है। यह गीत एक व्रती (महिला) की मनोदशा और उसकी श्रद्धा को दर्शाता है। आइए इसके प्रत्येक अंतरे का विस्तृत भावार्थ समझते हैं:

प्रथम अंतरा: "कांच ही बांस के बहंगिया..." इस पंक्ति में व्रती महिला कहती है कि जो बहँगी (बांस का बना हुआ ढांचा जिसमें पूजा की सामग्री रखी जाती है) बनाई गई है, वह कच्चे और लचीले बांस की है। वह इतनी भारी और पवित्र सामग्रियों से भरी है कि वह लचक रही है। व्रती अपने पति (बलम) से अनुरोध करती है कि वे 'कहँरिया' (बहँगी उठाने वाले) बन जाएं और इस पावन बहँगी को नदी या तालाब के घाट तक सुरक्षित पहुंचाएं। यह पंक्ति दांपत्य जीवन में सहयोग और मिलकर ईश्वर की आराधना करने के महत्व को दर्शाती है।

द्वितीय अंतरा: "बाँस के जेकरा में दउरवा..." इस भाग में पूजा की थाली या टोकरी (दउरा) का वर्णन है, जो बांस से बनी है और जिसमें विभिन्न प्रकार के मौसमी फल, फूल, ठेकुआ और अन्य नैवेद्य सजाए गए हैं। केले के पत्तों के बीच से उदित होते हुए सूर्य देव (सुरुज देव) अपनी दिव्य किरणों से संपूर्ण सृष्टि को आलोकित कर रहे हैं। यह दृश्य अत्यंत मनोरम और प्रकृति के साथ मनुष्य के सीधे जुड़ाव को प्रदर्शित करता है।

तृतीय अंतरा: "छठी मैया के बरतिया..." यहाँ छठ व्रत की कठिन साधना और नियमों (नेम-धरम) का उल्लेख है। जो भी भक्त इस 36 घंटे के निर्जला व्रत को पूरी निष्ठा और पवित्रता के साथ करता है, छठी मैया उस पर अपनी असीम कृपा बरसाती हैं। व्रती प्रार्थना करती है कि हे माता! अपनी शरण में आए भक्तों की झोली खुशियों और अच्छे कर्मों के फल से भर दीजिए।

चतुर्थ अंतरा: "सुरुज देव के अरघ देवे..." अंतिम पंक्तियों में सुहागिन महिलाओं द्वारा अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने की महान परंपरा का वर्णन है। गायिका मोना सिंह कहती हैं कि हे छठी मैया और सूर्य देव, आपकी महिमा अपरंपार है। मैं आपके चरणों में इस गीत के माध्यम से अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित कर रही हूँ।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'समर्पण' (Surrender) और 'सामूहिकता' (Collectivism) है। छठ पूजा का पर्व किसी पुरोहित या विशेष कर्मकांड के बिना, सीधे प्रकृति और मनुष्य के बीच का संवाद है। यह गीत संदेश देता है कि:

  • प्रकृति की रक्षा: बांस, मिट्टी के दीये, केले के पत्ते और मौसमी फलों का उपयोग यह दर्शाता है कि हमारी संस्कृति प्रकृति के कितने करीब है।
  • पारिवारिक एकता: पति-पत्नी और पूरा परिवार मिलकर इस कठिन व्रत की तैयारी करते हैं, जो पारिवारिक सामंजस्य को सुदृढ़ करता है।
  • समानता का संदेश: घाट पर अमीर-गरीब, राजा-रंक सभी एक साथ खड़े होकर सूर्य देव की आराधना करते हैं। यहाँ कोई भेदभाव नहीं होता।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Information)
गीत का नाम (Song Name) कांच ही बांस के बहंगिया (Chhathpuja Geet 2021)
गायिका (Singer) मोना सिंह (Mona Singh)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
श्रेणी (Category) छठ पूजा भक्ति गीत (Chhath Puja Bhakti Song)
रिलीज वर्ष (Release Year) 2021
मुख्य विषय (Theme) छठी मैया की महिमा और सूर्य देव की आराधना

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी संगीत जगत में पारंपरिक लोकगीतों को आधुनिक और सुरीले अंदाज में प्रस्तुत करने के लिए मोना सिंह को जाना जाता है। वर्ष 2021 में रिलीज हुए इस छठ गीत में उन्होंने अपनी गायकी से पारंपरिक लोक धुनों की मिठास को जीवंत रखा है। इस गीत का संगीत पारंपरिक वाद्यों जैसे ढोलक, मंजीरा और बांसुरी के सुंदर संयोजन से तैयार किया गया है, जो श्रोताओं के मन में सीधे घाट की पावन अनुभूति कराता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) संदर्भ (Context)
बहंगिया (Bahangiya) बांस से बना हुआ काँवर या ढांचा जिसमें पूजा का प्रसाद रखकर घाट तक ले जाया जाता है।
कहँरिया (Kahariya) कंधे पर बहँगी उठाने वाला व्यक्ति यहाँ व्रती अपने पति को कहँरिया बनने का आग्रह करती है।
दउरवा (Daurwa) बांस की बड़ी टोकरी जिसमें ठेकुआ, फल और पूजा सामग्री सजाई जाती है।
अरघ (Arghya) अर्घ्य (जल या दूध अर्पित करना) सूर्य देव को अस्ताचल और उदय के समय दिया जाने वाला अर्घ्य।
नेम-धरम (Nem-Dharam) नियम और धर्म (पवित्रता) छठ व्रत के दौरान बरती जाने वाली कठोर शुचिता।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का आध्यात्मिक आधार ऋग्वेद और अन्य पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जो संपूर्ण जगत को ऊर्जा और जीवन प्रदान करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी छठ पर्व के दौरान सूर्य की किरणों का शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

मोना सिंह का यह गीत इस महापर्व के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है। जब यह गीत बजता है, तो प्रवासी बिहारियों और पूर्वांचल के लोगों के मन में अपने घर, मिट्टी और घाटों की यादें ताजा हो जाती हैं। यह गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस पावन गीत और छठ महापर्व से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती हैं:

  1. धैर्य और तपस्या: 36 घंटे का निर्जला व्रत हमें सिखाता है कि जीवन में बड़ी उपलब्धियों के लिए कठिन तप और अनुशासन आवश्यक है।
  2. प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: सूर्य, जल और वायु के प्रति आभार व्यक्त करना हमें पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा देता है।
  3. सहयोग की भावना: घाट की सफाई से लेकर प्रसाद बनाने तक, पूरा समाज एकजुट होकर कार्य करता है, जो सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक चलने वाले चार दिवसीय छठ महापर्व के दौरान सुना जाता है।

  • नहाय-खाय (पहला दिन): इस दिन से ही घरों में छठ के पारंपरिक गीत गूंजने लगते हैं।
  • खरना (दूसरा दिन): शाम को प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती महिलाएं सामूहिक रूप से इन गीतों को गाती हैं।
  • संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): जब पूरा परिवार घाट की ओर प्रस्थान करता है, तब यह गीत बहँगी उठाने वाले भक्तों में नया उत्साह भरता है।
  • उषा अर्घ्य (चौथा दिन): उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इन गीतों के माध्यम से छठी मैया से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना की जाती है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का प्रकार पारंपरिक भोजपुरी छठ लोकगीत
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, शहनाई
आध्यात्मिक संदेश प्रकृति पूजा, शुचिता और पारिवारिक सहयोग
लोकप्रियता करोड़ों पूर्वांचल वासियों के दिलों में विशेष स्थान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह गीत अपनी पारंपरिक धुन, सरल भोजपुरी शब्दों और मोना सिंह की सुरीली आवाज के कारण विशेष है। यह छठ महापर्व की सादगी और पवित्रता को पूरी तरह से अभिव्यक्त करता है।

बहँगी बांस से बना एक ढांचा होता है जिसके दोनों सिरों पर टोकरियाँ लटकी होती हैं। इसमें छठ पूजा का पवित्र प्रसाद (दउरा) रखकर पुरुष अपने कंधों पर उठाकर घाट तक ले जाते हैं। यह सेवा और समर्पण का प्रतीक है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया सूर्य देव की बहन (देवसेना) हैं। गीतों में दोनों की संयुक्त आराधना की जाती है, जहाँ सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है और छठी मैया से संतान व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

हाँ, "कांच ही बांस के बहंगिया" एक अत्यंत प्राचीन और पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत है। मोना सिंह ने इसे 2021 में नए संगीत संयोजन के साथ गाकर आधुनिक पीढ़ी के लिए प्रस्तुत किया है।

छठ पूजा का महापर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और समापन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है।

'नेम-धरम' का अर्थ है नियम और धर्म। छठ पूजा में स्वच्छता, सात्विकता और मानसिक पवित्रता के अत्यंत कड़े नियम होते हैं, जिनका पालन हर व्रती को करना अनिवार्य होता है।

छठ गीत व्रतियों को मानसिक शक्ति प्रदान करते हैं और 36 घंटे के कठिन निर्जला उपवास के दौरान उनके कष्ट को कम कर भक्ति भाव में लीन रखने में मदद करते हैं।

बिल्कुल, इस पावन गीत को छठ पूजा की तैयारियों, खरना के समय या घर में मंगल कार्यों के दौरान बजाकर भक्तिमय वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी विशेषज्ञ टीम ने भोजपुरी लोक-संस्कृति, पारंपरिक छठ गीतों और सनातन धर्म की पौराणिक मान्यताओं का गहन अध्ययन करके इस सामग्री को संकलित किया है। इस गीत के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: षष्ठी देवी (छठी मैया) की उत्पत्ति और उनकी पूजा का शास्त्रीय संदर्भ।
  • भविष्य पुराण: सूर्य देव की उपासना और अर्घ्य दान का धार्मिक महत्व।
  • भोजपुरी लोक साहित्य: पारंपरिक लोकगीतों का मौखिक इतिहास और सांस्कृतिक विकास।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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