chhath puja song 2021 / पवन सिंह / chhath geet 2021 / आदित मल होइहे सहाय
लोक आस्था के महाकुंभ छठ पर्व की महिमा और महिमामयी छठी मइया तथा सूर्य देव की उपासना का जीवंत रूप वर्ष 2021 में भोजपुरी सिनेमा के पावरस्टार पवन सिंह के इस पावन गीत "आदित मल होइहे सहाय" (Aadit Mal Hoihe Sahaiya) के माध्यम से घर-घर में गूंजा। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और देश-विदेश में बसे पूर्वांचल के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए छठ पर्व केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सूर्योपासना का सर्वोच्च पर्व है। इस गीत में पारंपरिक लोकधुनों की मिठास के साथ-साथ कठिन व्रतों की निष्ठा, सूप-दउरा की सजावट, कांच ही बांस के बहंगिया और छठी मइया के प्रति अगाध प्रेम का ऐसा अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है जो सुनने वाले हर भक्त को भक्ति रस से सराबोर कर देता है। भक्तिकोल के इस विशेष आलेख में हम इसी लोकगीत के संपूर्ण बोल, इसके साहित्यिक एवं आध्यात्मिक निहितार्थ और छठ पर्व की संस्कृति पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
|| मुखड़ा ||
आदित मल होइहे सहाय, छठी मइया होइहे सहाय...
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए,
बहंगी घाटे पहुँचाए दs, छठी मइया होइहे सहाय...
उगा हे सुरुज देव भइले अरघ के बेर,
सुन लs पुकार मोर छोड़ल बानी घेर...
|| अंतरा 1 ||
सूप सजेला दउरा सजेला, फल-फूल के भरमार,
अर्घ्य देवे खातिर उमड़े, भक्तन के संसार,
घाटे गूंजे गीत सुरीला, हर मन हरषाए,
पवन सिंह के स्वर में गूंजे, छठ के पावन गीत,
सूरज देव के महिमा गावे, सारा जग के मीत,
आदित मल होइहे सहाय, छठी मइया होइहे सहाय...
|| अंतरा 2 ||
चार दिनन के कठिन बरतिया, नियम धरम से धारी,
घाटे पहुँचे अचरवा पसार के, सब नर और नारी,
दउरा उठा के भक्त चललन, घाट की ओर प्यारे,
छठी मइया के चरनन में, संकट सब टारे,
आदित मल होइहे सहाय, छठी मइया होइहे सहाय...
|| समापन ||
सूर्य देव की ज्योति जागे, घर-घर उजियार हो,
सबके जीवन में मइया, खुशियों के बहार हो,
आदित मल होइहे सहाय, छठी मइया होइहे सहाय...
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
पवन सिंह द्वारा गाये गए इस लोकप्रिय छठ गीत "आदित मल होइहे सहाय" की हर पंक्ति में पूर्वांचल की संस्कृति, लोक आस्था और सूर्य देव के प्रति पूर्ण समर्पण झलकता है। गीत के शीर्षक और मुखड़े में ही भगवान भास्कर (आदित्य) और प्रकृति की अधिष्ठात्री देवी 'छठी मइया' से यह प्रार्थना की गई है कि वे भक्तों के इस कठिन व्रत को निर्विघ्न पूरा कराएं और अपनी कृपा बनाए रखें।
गीत में पारंपरिक प्रतीक जैसे 'कांच ही बांस के बहंगिया' (कच्चे बांस से बनी बहंगी जिस पर पूजा की टोकरियाँ रखी जाती हैं) का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया है। व्रती और उनके परिवारजन कठिन नियमों का पालन करते हुए नदी या तालाब के घाट तक प्रसाद से भरी बहंगी और दउरा लेकर पहुंचते हैं। यह दृश्य न केवल पारिवारिक एकता का प्रतीक है, बल्कि यह सिखाता है कि किस प्रकार सामूहिक प्रयास से कठिन से कठिन अनुष्ठान भी सहज हो जाते हैं।
गायक पवन सिंह की ओजस्वी और भावुक आवाज इस गीत को एक अलग ही ऊंचाई पर ले जाती है। जब वे गाते हैं कि 'उगा हे सुरुज देव भइले अरघ के बेर', तो ऐसा प्रतीत होता है मानो संपूर्ण ब्रह्मांड सूर्य भगवान के स्वागत के लिए अकुलार हो उठा हो। यह गीत हर उस व्यक्ति के अंतर्मन को छू लेता है जो अपने घर-परिवार से दूर रहकर भी छठ पर्व की पवित्र स्मृतियों से जुड़ा रहता है। इसी प्रकार के अन्य पारंपरिक गीતો के लिए आप छठ पूजा गीत संग्रह पढ़ सकते हैं।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत का केंद्रीय भाव अटूट श्रद्धा, शुचिता और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता है। छठ पर्व पर्यावरण, जल स्रोतों की स्वच्छता और सूर्य की ऊर्जा के प्रति सम्मान का सबसे बड़ा उत्सव है। गीत यह संदेश देता है कि जब मनुष्य अपनी अहंता को छोड़कर प्रकृति और ईश्वर की शरण में जाता है, तो उसके सारे संकट स्वतः दूर हो जाते हैं।
यह गीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोकसंस्कृति को संरक्षित करने का कार्य करता है। यह नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ यह भी सिखाता है कि पर्व-त्योहार हमारे जीवन में किस प्रकार अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। ऐसे पावन पर्वों के दौरान अन्य व्रतों के महत्व को समझने के लिए आप गोवर्धन पूजा व्रत कथा का भी अध्ययन कर सकते हैं।
गीत की जानकारी | Song Information
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| गीत का नाम | आदित मल होइहे सहाय (Aadit Mal Hoihe Sahaiya) |
| वर्ष | 2021 |
| मुख्य गायक | पवन सिंह (Pawan Singh) |
| संगीत शैली | भोजपुरी लोकगीत / छठ पूजा गीत |
| भाषा | भोजपुरी / हिंदी |
| विषय | सूर्य उपासना, छठी मइया की महिमा और छठ व्रत |
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| आदित / आदित मल | आदित्य / सूर्य देव | भगवान सूर्य को संबोधित करते हुए |
| बहंगिया | बांस की बनी वह काँवर जिस पर टोकरी रखकर ढोई जाती है | पूजा सामग्री ले जाने का पारंपरिक साधन |
| दउरा | बांस का बना बड़ा सूप या टोकरी | जिसमें फल और ठेकुआ रखा जाता है|
| अरघ के बेर | अर्घ्य देने का समय (सूर्योस्त या सूर्योदय) | छठ पूजा का मुख्य अनुष्ठान |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ | Editorial Review & Sources
यह आलेख पारंपरिक लोकसंस्कृति, लोकगीतों के साहित्यिक महत्व और सनातन परंपराओं के अध्ययन पर आधारित है। संगीत, संस्कृति और भक्ति के इस संगम को पाठकों तक प्रामाणिक रूप से पहुँचाने के लिए विशेष ध्यान रखा गया है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री
स्रोत एवं संदर्भ
- पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत संग्रह एवं मौखिक परंपराएँ
- छठ पूजा अनुष्ठान और लोक-आस्था के सांस्कृतिक अध्ययन
- वर्ष 2021 के प्रमुख लोक संगीत प्रकाशन एवं आधिकारिक डिजिटल रिलीज
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