"श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा" हिंदू सनातन धर्म का एक अत्यंत लोकप्रिय, पावन और हृदयस्पर्शी भजन है। यह भजन भगवान श्री कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण, भक्ति और शरणागति का जीवंत प्रतीक है। वैष्णव संप्रदाय में इस संकीर्तन का विशेष स्थान है, क्योंकि इसमें भगवान के विभिन्न कल्याणकारी नामों का उच्चारण किया गया है जो साधक के अंतःकरण को शुद्ध करते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त अपने आराध्य श्री कृष्ण को माता, पिता, स्वामी और सखा के रूप में स्वीकार करता है। यह भजन न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि जीवन के झंझावातों में भगवान की उपस्थिति का अहसास भी कराता है। चाहे जन्माष्टमी का पावन पर्व हो, दैनिक संध्या आरती हो या सामूहिक सत्संग, इस भजन का गायन भक्तों को भाव-विभोर कर देता है। आधुनिक समय में जुबिन नौटियाल सहित कई प्रतिष्ठित गायकों ने इसे अपनी सुमधुर आवाज में गाकर युवा पीढ़ी के बीच भी लोकप्रिय बनाया है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी भजन
॥ कोरस ॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा।
पितु मात स्वामी सखा हमारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
॥ अंतरा - 1 ॥
बंदीगृह में तुमने जन्म लिया है,
गोकुल में तुमने रास रचाया है।
यशोदा के प्यारे, नंद के दुलारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
॥ अंतरा - 2 ॥
द्रौपदी ने जब तुमको पुकारा,
चीर बढ़ाकर तुमने लाज को उबारा।
भक्तों के रक्षक, दुष्टों के शिक्षक,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
॥ अंतरा - 3 ॥
गीता का पावन ज्ञान सुनाया,
अर्जुन को अपना रूप दिखाया।
हे पार्थ सारथी, हे विश्वकर्मा,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
॥ अंतरा - 4 ॥
राधा के श्याम, मीरा के गिरधर,
शबरी के राम, सुदामा के सखा वर।
दीनों के बंधु, करुणा के सागर,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
प्रस्तुत भजन "श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी" का भावार्थ अत्यंत गहरा और दार्शनिक है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति जीवात्मा और परमात्मा के अटूट संबंध को दर्शाती है। जब हम कहते हैं "श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी", तो हम भगवान के उन रूपों को याद करते हैं जिन्होंने कंस और मुर जैसे राक्षसों का संहार कर धर्म की स्थापना की। "हे नाथ नारायण वासुदेवा" कहकर भक्त भगवान को अपना स्वामी और संपूर्ण जगत का आधार स्वीकार करता है।
भजन का मुख्य संदेश शरणागति (Surrender) है। "पितु मात स्वामी सखा हमारे" पंक्ति के माध्यम से भक्त भगवान से कहता है कि हे प्रभु! इस संसार में मेरा आपके अतिरिक्त कोई अन्य आश्रय नहीं है। आप ही मेरे पिता हैं, आप ही मेरी माता हैं, आप ही मेरे स्वामी हैं और आप ही मेरे सच्चे मित्र हैं। यह भाव श्रीमद्भगवद्गीता के अनन्य भक्ति के सिद्धांत से मेल खाता है, जहां भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि सब कुछ छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व बहुआयामी है:
- नाम संकीर्तन की महिमा: कलयुग में नाम संकीर्तन को ही मोक्ष का सबसे सरल साधन माना गया है। इस भजन में श्री कृष्ण, गोविंद, हरि, मुरारी, नाथ, नारायण और वासुदेव जैसे सात परम पावन नामों का एक साथ उच्चारण होता है।
- सर्व-संबंध प्रदाता: यह भजन ईश्वर के साथ किसी भी एक संकुचित संबंध में बंधने के बजाय उन्हें माता, पिता, सखा और स्वामी के रूप में पूजने की स्वतंत्रता देता है।
- संकटमोचन भाव: द्रौपदी के चीरहरण और अर्जुन के विषाद योग के प्रसंगों के माध्यम से यह भजन सिखाता है कि जब मनुष्य चारों ओर से संकटों से घिर जाता है, तब केवल भगवान का नाम ही उसका रक्षक बनता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि भगवान के नाम स्मरण के लिए किसी विशेष समय की बाध्यता नहीं होती, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि को सर्वोत्तम माना गया है:
- ब्रह्ममुहूर्त या संध्याकाल: सुबह सूर्योदय से पूर्व या शाम को संध्या आरती के समय इस भजन का गायन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- ध्यान और एकाग्रता: शांत चित्त होकर, आंखें बंद करके भगवान श्री कृष्ण की छवि का हृदय में ध्यान करते हुए इसका मानसिक या धीमे स्वर में जप करना चाहिए।
- विशेष अवसर: कृष्ण भजन के रूप में इसे जन्माष्टमी, राधाष्टमी, कार्तिक मास और प्रत्येक एकादशी के दिन विशेष रूप से गाया जाना चाहिए।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। इसके साथ ही इसमें माता यशोदा, नंद बाबा, द्रौपदी, अर्जुन, और राधा रानी का भी स्मरण किया गया है। सनातन परंपरा में इस भजन की जड़ें अत्यंत प्राचीन हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण और विष्णु पुराण में वर्णित भगवान के नामों को संकलित कर इस भजन का निर्माण किया गया है। चैतन्य महाप्राभु और अन्य वैष्णव संतों ने इस प्रकार के नाम संकीर्तन को जन-जन तक पहुंचाया था।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन की मूल पंक्तियां सदियों पुरानी पारंपरिक प्रार्थनाओं और स्तोत्रों से प्रेरित हैं। "हे नाथ नारायण वासुदेवा" मंत्र का उल्लेख प्राचीन संतों की वाणियों में मिलता है। आधुनिक युग में, जब इस भजन को सुगम संगीत और सुरीले वाद्यों के साथ पिरोया गया, तो यह वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हो गया। विशेष रूप से रामानंद सागर के ऐतिहासिक धारावाहिक 'श्री कृष्णा' में इस भजन के प्रयोग ने इसे हर हिंदू घर की पहचान बना दिया। वर्तमान में जुबिन नौटियाल के संस्करण ने इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक नया जीवन दिया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी है, जिसमें संस्कृत के तत्सम शब्दों (जैसे- वासुदेव, नारायण, बंदीगृह, सारथी) का प्रचुरता से प्रयोग किया गया है। इसकी काव्य शैली "गेय" (गाए जाने योग्य) है। इसमें प्रयुक्त छंद और लयबद्धता ऐसी है कि कोई भी सामान्य व्यक्ति इसे आसानी से याद कर गुनगुना सकता है। इसमें करुण रस और शांत रस का अद्भुत सम्मिश्रण है, जो भक्त के भीतर अश्रु और आनंद दोनों को एक साथ जाग्रत करता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला एक महान उपदेश है:
- अहंकार का त्याग: जब हम भगवान को अपना सर्वस्व मान लेते हैं, तो हमारे भीतर का 'मैं' या अहंकार समाप्त हो जाता है।
- सच्ची मित्रता का महत्व: सुदामा और अर्जुन के प्रसंग से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चा मित्र वही है जो संकट के समय सही मार्गदर्शन करे और निस्वार्थ प्रेम करे।
- कर्मयोग की प्रेरणा: अर्जुन को गीता का ज्ञान देने वाले प्रसंग से हमें यह संदेश मिलता है कि हमें फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| गोविंद | गौओं और इंद्रियों के स्वामी | जो हमारी इंद्रियों को सही दिशा प्रदान करते हैं। |
| मुरारी | 'मुर' नामक राक्षस के शत्रु | हमारे भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार और विकारों का नाश करने वाले। |
| वासुदेव | वसुदेव के पुत्र / सर्वव्यापी ईश्वर | जो कण-कण में व्याप्त हैं और सबके हृदय में निवास करते हैं। |
| चीर | वस्त्र | द्रौपदी की लाज बचाने के लिए भगवान द्वारा अनंत वस्त्र का रूप धारण करना। |
| पार्थ सारथी | अर्जुन के रथ के चालक | जीवन रूपी रथ को सही दिशा में ले जाने वाले मार्गदर्शक। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
1. "श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा"
हे सच्चिदानंद स्वरूप श्री कृष्ण! हे गौओं और इंद्रियों के रक्षक गोविंद! हे भक्तों के कष्टों को हरने वाले हरि! हे मुर दैत्य का संहार करने वाले मुरारी! हे संपूर्ण सृष्टि के स्वामी नारायण! हे वासुदेव नंदन! मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।
2. "पितु मात स्वामी सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा"
हे प्रभु! इस नश्वर संसार में मेरा आपके अतिरिक्त कोई नहीं है। आप ही मेरे जन्मदाता पिता हैं, आप ही ममतामयी माता हैं, आप ही मेरे जीवन के स्वामी हैं और आप ही मेरे सबसे प्रिय सखा (मित्र) हैं।
3. "बंदीगृह में तुमने जन्म लिया है, गोकुल में तुमने रास रचाया है"
हे प्रभु! आपने कंस के कारागार (बंदीगृह) की विपरित परिस्थितियों में जन्म लेकर यह सिद्ध किया कि आप हर बंधन से मुक्त हैं। और गोकुल में गोपियों के साथ दिव्य रास रचाकर आपने जीव और ब्रह्म के मिलन का मार्ग प्रशस्त किया।
4. "द्रौपदी ने जब तुमको पुकारा, चीर बढ़ाकर तुमने लाज को उबारा"
जब भरी सभा में द्रौपदी असहाय हो गई और उसने अपनी रक्षा के लिए आपको पुकारा, तब आपने अनंत वस्त्र (चीर) बनकर उसकी लाज बचाई। आप सदा अपने शरणागत की रक्षा करते हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के मूल भाव को समझने के लिए श्रीमद्भागवत महापुराण का यह प्रसिद्ध श्लोक अत्यंत प्रासंगिक है:
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥
अर्थ: वासुदेव के पुत्र भगवान श्री कृष्ण, जो भक्तों के दुखों और क्लेशों का नाश करने वाले परमात्मा हैं, उन गोविंद को मैं बार-बार नमस्कार करता हूँ।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी |
|---|---|
| मुख्य आराध्य | भगवान श्री कृष्ण |
| भाषा | हिंदी (संस्कृत के तत्सम शब्दों सहित) |
| मुख्य भाव | शरणागति, अनन्य भक्ति, वात्सल्य और सख्य भाव |
| लोकप्रिय गायक | जुबिन नौटियाल, महेंद्र कपूर, जगजीत सिंह |
| श्रेणी | राधा कृष्ण भजन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी" भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति (Surrender) है। यह सिखाता है कि जब मनुष्य ईश्वर को अपना माता, पिता, स्वामी और मित्र मानकर उनकी शरण में जाता है, तो भगवान उसके सभी कष्टों को हर लेते हैं।
प्रश्न 2: इस भजन में "मुरारी" शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: "मुरारी" दो शब्दों से मिलकर बना है - 'मुर' (एक राक्षस का नाम) और 'अरि' (शत्रु)। अर्थात, मुर नामक राक्षस का वध करने वाले भगवान श्री कृष्ण।
प्रश्न 3: इस भजन को किस समय गाना सबसे उत्तम माना जाता है?
उत्तर: इस भजन को सुबह ब्रह्ममुहूर्त में या शाम की संध्या आरती के समय गाना सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है।
प्रश्न 4: क्या यह भजन बच्चों के लिए भी उपयोगी है?
उत्तर: हाँ, इस भजन की सरल भाषा और मधुर लय के कारण बच्चे इसे आसानी से सीख सकते हैं। इससे उनमें नैतिक मूल्य, भारतीय संस्कृति और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का विकास होता है।
प्रश्न 5: इस भजन का संबंध किस पौराणिक प्रसंग से है?
उत्तर: इस भजन में द्रौपदी चीरहरण, भगवान कृष्ण का कारागार में जन्म, गोकुल की रासलीला और कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता उपदेश देने जैसे महत्वपूर्ण पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख है।
प्रश्न 6: "हे नाथ नारायण वासुदेवा" का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है - "हे संपूर्ण जगत के स्वामी (नाथ), हे सबके आश्रयदाता (नारायण), हे सर्वव्यापी भगवान वासुदेव!" यह भगवान विष्णु और कृष्ण की स्तुति का महामंत्र है।
प्रश्न 7: क्या इस भजन को गाते समय किसी विशेष नियम का पालन करना आवश्यक है?
उत्तर: इसके लिए किसी कठिन नियम की आवश्यकता नहीं है। केवल शुद्ध तन और पवित्र मन से, श्रद्धापूर्वक भगवान का ध्यान करते हुए इसे गाना चाहिए।
प्रश्न 8: जुबिन नौटियाल द्वारा गाए गए इस भजन की क्या विशेषता है?
उत्तर: जुबिन नौटियाल ने इस पारंपरिक भजन को आधुनिक संगीत और अपनी सुरीली आवाज के साथ प्रस्तुत किया है, जिससे यह आज की युवा पीढ़ी के बीच भी अत्यंत लोकप्रिय हो गया है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी भजन इन हिंदी लिरिक्स" के विषय में गहन शोध और प्रामाणिक वैष्णव ग्रंथों के आधार पर तैयार किया गया है। हमारी संपादकीय टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि भजन के बोल और उनके अर्थ पूरी तरह से शुद्ध और त्रुटिहीन हों। यह सामग्री पाठकों को न केवल भजन के लिरिक्स प्रदान करती है, बल्कि उन्हें इसके गहरे आध्यात्मिक और दार्शनिक पहलुओं से भी परिचित कराती है। (संपादकीय रूप से तैयार सामग्री)
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भागवत महापुराण: भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं और उनके नामों की महिमा का मुख्य स्रोत।
- विष्णु पुराण: भगवान विष्णु के अवतारों और नाम संकीर्तन के महत्व का वर्णन।
- पारंपरिक वैष्णव कीर्तन संग्रह: प्राचीन संतों द्वारा गाए जाने वाले भजनों का संकलन।
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