Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

बड़ा नटखट हे रे कृष्ण कन्हैया भजन इन हिंदी लिरिक्स

भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की लीलाओं से भरा भजन 'बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया' हिंदी लिरिक्स, अर्थ और आध्यात्मिक महत्व के साथ पढ़ें।

परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रस्तुत मधुर एवं भावपूर्ण भजन "बड़ा नटखट हे रे कृष्ण कन्हैया" सनातन धर्म के आराध्य, जगतगुरु भगवान श्री कृष्ण और गोकुल की बाल लीलाओं को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय संकीर्तन पद है। वैष्णव संप्रदाय, विशेषकर पुष्टिमार्ग और गौड़ीय वैष्णव परंपरा में बालकृष्ण रूप (लला) की उपासना का विशेष महत्व है। भगवान श्री कृष्ण का यह बालस्वरूप भक्तों के हृदय में वात्सल्य और माधुर्य भाव को जागृत करता है। इस भजन के माध्यम से भक्त यशोदा मैया के उस मातृत्व भाव और ब्रज की उन अलौकिक लीलाओं का स्मरण करते हैं, जहाँ ब्रह्मांड के नायक यशोदा के आंगन में घुटनों के बल चलते हैं और माखन चुराते हैं। भजन का मुख्य भाव वात्सल्य रस से ओतप्रोत है, जहाँ भक्त भगवान की नटखट हरकतों से मुग्ध होकर भी उनकी रक्षा की कामना करता है। जब साधक या भक्त प्रातःकाल या संध्या वंदन के समय इस भजन का गान करते हैं, तो उनका मन सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर वृंदावन की कुंज-गलियों और नन्द भवन के दिव्य वातावरण से जुड़ जाता है। इस भजन का श्रवण और गायन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि भगवान के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण की भावना को भी दृढ़ करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

नंद लाला की बाल लीलाओं का स्मरण कराते हुए इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल नीचे दिए गए हैं:


बड़ा नटखट हे रे कृष्ण कन्हैया,
का करे यशोदा मैया...
ढूंढे री अँखियाँ उसे चहुँ और,
जाने कहाँ छुप गया नन्द किशोर,
उड़ गया ऐसे जैसे पुरवैया,
का करे यशोदा मैया... !!

आ तोहे मैं गले से लगा लूँ,
लागे न किसी की नज़र मन मे छुपा लूँ,
धुप जगत है रे ममता है छैयाँ,
का करे यशोदा मैया... !!

मेरे जीवन का तू एक ही सपना,
जो कोई देखे तोहे समझे वो अपना,
सब का है प्यारा, हो सब का प्यारा बंसी बजैया,
का करे यशोदा मैया... !!

वृंदावन की कुंज गलियन में शोर मचे,
मैया यशोदा के आँगन में माखन बचे,
ग्वाल बाल सखा संग जोड़े कन्हैया,
का करे यशोदा मैया... !!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की प्रत्येक पंक्ति में वात्सल्य रस और भक्त-भगवान के अगाध प्रेम की पराकाष्ठा दिखाई देती है। भजन के आरंभ में भक्त कहता है कि यशोदा मैया का लाडला कृष्ण इतना नटखट और चंचल है कि मैया भी कभी-कभी समझ नहीं पाती हैं कि वे उसके बाल स्वभाव के साथ क्या करें। ब्रज के घरों में माखन चुराना, ग्वाल-बालों के साथ हुड़दंग करना और फिर यशोदा मैया की डाँस से बचने के लिए छिप जाना उनकी नित्य की लीला है। भक्त की आँखें चहुंओर अपने प्रिय कन्हैया को ढूँढती हैं, परंतु वे पवन के झोंके (पुरवैया) की तरह पलभर में कहीं गायब हो जाते हैं।

आगे की पंक्तियों में भक्त अपने आर्त और वात्सल्य भाव को प्रकट करते हुए कहता है— "आ तोहे मैं गले से लगा लूँ, लागे न किसी की नज़र मन में छुपा लूँ।" यह भाव माता यशोदा का भी है और एक सच्चे भक्त का भी जो अपने इष्ट को अपनी पलकों और हृदय में बसा लेना चाहता है। संसार रूपी धूप में भगवान का स्मरण ही ममता की ठंडी छांव प्रदान करता है। भजन के अंतिम चरणों में यह दर्शाया गया है कि कृष्ण केवल यशोदा के ही नहीं, बल्कि संपूर्ण चराचर जगत के प्राणधन हैं। जो भी उन्हें देखता है, वह उन्हें अपना ही मान बैठता है, क्योंकि वह मुरली वाले मोहन सबके सबसे प्यारे सखा और प्रियतम हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • वात्सल्य रस प्रधान: यह भजन भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप और यशोदा मैया के मातृत्व प्रेम को केंद्र में रखकर रचा गया है।
  • भक्ति का सरल मार्ग: इसमें क्लिष्ट दार्शनिक शब्दों के स्थान पर सहज ब्रजभाषा और लोक-संस्कृति के तत्वों का सुंदर प्रयोग किया गया है।
  • मानसिक शांति और आनंद: इसके गायन से चित्त की चंचलता शांत होती है और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • राधा-कृष्ण परंपरा से जुड़ाव: यह भजन राधा कृष्ण भजन परंपरा की उस मधुर धारा का हिस्सा है जो भक्त को सीधे वृंदावन के भाव से जोड़ती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गान किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इसे प्रातःकाल की बेला में, संध्या वंदन के समय, अथवा जन्माष्टमी और राधा अष्टमी जैसे पावन पर्वों पर गाना अत्यंत आनंददायक और फलदायी माना जाता है। इसे मंदिर में पूजा के दौरान, घर में संकीर्तन में अथवा राधा कृष्ण स्टेटस के रूप में सोशल मीडिया पर साझा करके भी अन्य भक्तों तक पहुँचाया जा सकता है। भजन गाते समय हाथों में करताल या मंजीरे का प्रयोग करने से लयबद्धता बढ़ती है और मन पूरी तरह से भक्ति में लीन हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में लीलापुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण और उनकी यशोदा मैया हैं। सनातन परंपरा में भगवान श्री कृष्ण को पूर्ण पुरुषोत्तम माना गया है, जो गीता के उपदेशक भी हैं और गोकुल के नटखट कन्हैया भी। संतों और आचार्यों (विशेषकर वल्लभाचार्य, महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु और मीराबाई) ने भगवान के इस बाल और माधुर्य रूप को ही अपनी साधना का आधार बनाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोक-साहित्य और पारंपरिक संकीर्तन परंपरा से उपजा यह भजन पीढ़ियों से ब्रज और उत्तर भारत के लोक-जीवन में रचा-बसा है। इसे विभिन्न लोक कलाकारों और भजन गायकों ने अपने अनूठे अंदाज में गाया है। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य बाल कृष्ण की नटखट छवियों को मानस पटल पर सजीव करना है, ताकि श्रोता सांसारिक दुखों को भूलकर भगवत प्रेम में मग्न हो सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी, अवधी और ब्रजभाषा के मधुर शब्दों का मिश्रण है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे— "उड़ गया ऐसे जैसे पुरवैया" और "धुप जगत है रे ममता है छैयाँ"। यह काव्य शैली श्रोताओं के हृदय को तुरंत स्पर्श करती है और उन्हें मंत्रमुग्ध कर देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • समर्पण का भाव: जिस प्रकार मैया यशोदा कृष्ण पर सर्वस्व न्योछावर करती हैं, उसी प्रकार भक्त को भी अपना सब कुछ भगवान को समर्पित कर देना चाहिए।
  • नष्काम प्रेम: भगवान से प्रेम किसी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि केवल उनके प्रति अगाध स्नेह के कारण होना चाहिए।
  • आनंद की प्राप्ति: सांसारिक भागदौड़ के बीच भगवान की लीलाओं का स्मरण आंतरिक आनंद और शांति देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
नटखट चंचल, शरारती भगवान की अमानवीय और मोहक बाल लीलाएँ
पुरवैया पूर्व दिशा से चलने वाली ठंडी हवा भगवान की माया का अचानक आना और छिप जाना
धुप जगत यह संसार रूपी संताप या धूप माया और दुखों से भरा संसार
ममता की छैयाँ स्नेह और वात्सल्य की छाया भगवान की कृपा और शरण
बंसी बजैया बांसुरी बजाने वाले समस्त जीवों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले कृष्ण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"बड़ा नटखट हे रे कृष्ण कन्हैया, का करे यशोदा मैया..."
भावार्थ: माता यशोदा का लाडला कान्हा अत्यंत शरारती है, उसकी लीलाओं के आगे मैया भी असमंजस में पड़ जाती हैं कि वे उसे कैसे समझाएं।

"ढूंढे री अँखियाँ उसे चहुँ and जाने कहाँ छुप गया नन्द किशोर..."
भावार्थ: भक्त की आँखें अपने प्रियतम को चारों तरफ खोजती हैं, परंतु नंदलाल लीला रचकर पलक झपकते ही कहीं छिप जाते हैं।

"धुप जगत है रे ममता है छैयाँ, का करे यशोदा मैया..."
भावार्थ: यह संसार दुखों की धूप के समान है, और भगवान का प्रेम एवं स्मरण उस धूप में ममता की ठंडी छांव के समान है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

कृष्ाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणातः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥

इस महामंत्र के स्मरण से भगवान श्री कृष्ण की कृपा सहज ही प्राप्त होती है और समस्त संताप दूर होते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

श्रेणी (Category) विवरण (Details)
भजन का नाम बड़ा नटखट हे रे कृष्ण कन्हैया भजन इन हिंदी लिरिक्स
आराध्य देव भगवान श्री कृष्ण (बालकृष्ण रूप)
रचना परंपरा पारंपरिक लोक भजन / संत वाणी
भाषा हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित
मुख्य विषय / थीम वात्सल्य रस, बाल लीला, भगवान का प्रेम
प्रमुख भाव वात्सल्य, समर्पण, भक्ति और आनंद
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, दैनिक पूजा, संकीर्तन, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप (कन्हैया) और यशोदा मैया के वात्सल्य प्रेम को समर्पित है।

इस भजन को प्रातःकाल की पूजा के समय, संध्या आरती में या श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर गाना सबसे उत्तम माना जाता है।

हाँ, इसे घर पर अकेले मानसिक शांति के लिए, दैनिक पूजा के दौरान या परिवार के साथ संकीर्तन में पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान के प्रति निष्काम प्रेम, वात्सल्य भाव और उनके बालस्वरूप के स्मरण से मिलने वाले आत्मिक आनंद को प्राप्त करना है।

जी हाँ, इस लेख में संपूर्ण भजन के शुद्ध हिंदी और देवनागरी लिरिक्स उपलब्ध कराए गए हैं ताकि आप आसानी से इसका पाठ कर सकें।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह मार्गदर्शिका और भजन लिरिक्स पाठकों की आध्यात्मिक और devotional आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसमें प्रयुक्त शब्द, अर्थ और भावार्थ पारंपरिक वैष्णव ग्रंथों और लोक कथाओं के आधार पर संकलित किए गए हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि भक्तों को शत-प्रतिशत शुद्ध, त्रुटिहीन और प्रेरणादायक पाठ प्राप्त हो।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (बाल लीला प्रसंग)
  • पारंपरिक ब्रज लोकगीत एवं संकीर्तन परंपरा
  • भक्ति साहित्य और वैष्णव संत वाणी

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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