हनुमान जी गृह क्लेश निवारण मंत्र: विधि, लाभ और शांति उपाय
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), हं (बीज मंत्र), हनुमते (हनुमान जी को), रुद्रात्मकाय (रुद्र के अंश स्वरूप), हुं फट् (अस्त्र मंत्र), स्वाहा …
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), हं (बीज मंत्र), हनुमते (हनुमान जी को), रुद्रात्मकाय (रुद्र के अंश स्वरूप), हुं फट् (अस्त्र मंत्र), स्वाहा …
भावार्थ: ॐ (परम ब्रह्म), नमो (नमस्कार), हनुमते (हनुमान जी को), आवेशाय (मेरे भीतर शक्ति का संचार करें), स्वाहा (पूर्ण समर्पण)। इसक…
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), द्रां (दत्तात्रेय बीज मंत्र), दत्तात्रेयाय (भगवान दत्तात्रेय के लिए), नमः (नमस्कार)। भावार्थ: मैं भगवान दत…
भावार्थ: हनुमान जी के इस सिद्ध बीज मंत्र के माध्यम से आप अपने घर के गृह क्लेश को दूर कर सुख-शांति का वातावरण स्थापित कर सकते हैं।
भावार्थ: ॐ (परमात्मा), नमो (नमस्कार), हनुमते (हनुमान जी को), आवेशाय (मेरे भीतर शक्ति का संचार करें), स्वाहा (पूर्ण समर्पण)। इसका …
भावार्थ: ॐ (परम ब्रह्म), द्रां (दत्तात्रेय बीज), दत्तात्रेयाय (भगवान दत्तात्रेय को), नमः (नमस्कार)। भावार्थ: मैं भगवान दत्तात्रेय…
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), हं (बीज मंत्र), हनुमते (हनुमान जी को), रुद्रात्मकाय (रुद्र के अंश स्वरूप), हुं फट् (अस्त्र मंत्र - बाधाओं …
भावार्थ: ॐ - प्रणव, नमो - नमस्कार, हनुमते - हनुमान जी को, आवेशाय - प्रवेश करो या शक्ति प्रदान करो, स्वाहा - आहुति। भावार्थ: हे हन…
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), द्रां (दत्तात्रेय बीज), दत्तात्रेयाय (भगवान दत्तात्रेय के लिए), नमः (नमस्कार)। भावार्थ: मैं भगवान दत्तात्र…
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), हं (बीज मंत्र), हनुमते (हनुमान जी को), रुद्रात्मकाय (रुद्र के स्वरूप), हुं फट् (शत्रु बाधा और नकारात्मकता …
भावार्थ: ॐ (परमात्मा), नमो (नमस्कार), हनुमते (हनुमान जी को), आवेशाय (प्रकट हों/मेरे भीतर शक्ति का संचार करें), स्वाहा (पूर्ण समर्…
भावार्थ: सहस्रशीर्षा (हजारों सिर वाले), पुरुषः (परम पुरुष), सहस्राक्षः (हजारों नेत्र वाले), सहस्रपात् (हजारों पैर वाले)। वे (परम …
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।