महामृत्युंजय मंत्र - ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सम्पूर्ण शुद्ध उच्चारण, हिंदी अर्थ, जप विधि एवं लाभ
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर श्वास में सुगंध फैलाते हैं और हमारा पोषण करते हैं। जैसे ककड़ी पकने…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर श्वास में सुगंध फैलाते हैं और हमारा पोषण करते हैं। जैसे ककड़ी पकने…
भावार्थ: समस्त गुरुओं को मेरा बारंबार नमस्कार है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
भावार्थ: मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ, जो इस ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त हैं।
भावार्थ: हम भगवान शिव (त्र्यम्बक) की पूजा करते हैं, जो तीनों लोकों के स्वामी हैं, जो सुगंधित और संपूर्ण जगत का पोषण करने वाले हैं…
भावार्थ: जटाटवी - जटारूपी वन से; गलत् - बहने वाले; जल - जल के; प्रवाह - प्रवाह से; पावित - पवित्र हुए; स्थले - स्थल वाले (कंठ); ग…
भावार्थ: मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ, जो इस ब्रह्मांड के मूल और कल्याणकारी देवता हैं।
भावार्थ: हम भगवान शिव (त्रिनेत्रधारी) की पूजा करते हैं, जो हर कण में सुगंध फैलाते हैं और संपूर्ण जगत का पोषण करते हैं। जिस प्रकार…
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित और सबका पोषण करने वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं। ककड़ी जिस प्रकार अपने डंठल के बंधन से स्…
भावार्थ: मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ, जो इस ब्रह्मांड के मूल आधार हैं।
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले त्रयम्बक (शिव) की पूजा करते हैं, जो सुगंधित और संपूर्ण जगत का पोषण करने वाले हैं। जैसे ककड़ी अपनी बे…
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर श्वास में सुगंध फैलाते हैं और हमारे जीवन को पोषण देते हैं। जिस प्र…
भावार्थ: श्री रुद्र सूक्तम एवं चमकम् का संपूर्ण वैदिक पाठ, अर्थ और महत्व जानें। भगवान शिव की स्तुति में समर्पित इस शक्तिशाली वैदि…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।