आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला 'भाई दूज' केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच के पवित्र बंधन को सुदृढ़ करने वाला एक आध्यात्मिक अनुष्ठान है। इसे 'यम द्वितीया' के नाम से भी जाना जाता है। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन यमुना जी ने अपने भाई यमराज को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया था। यमराज ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर भोजन करेगा और तिलक लगवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
पंचांग एवं शुभ मुहूर्त (2027)
| विवरण | समय/तिथि |
|---|---|
| तिथि | कार्तिक शुक्ल द्वितीया |
| शुभ मुहूर्त (तिलक) | दोपहर 01:10 से 03:20 तक |
| अमृत चौघड़िया | प्रातः 09:30 से 11:00 तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 11:45 से 12:30 तक |
पूजा विधि एवं संकल्प
भाई दूज के दिन बहनें प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर चावल के घोल से चौक पूरें। एक चौकी पर यमराज और यमुना जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपने भाई की दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना करते हुए संकल्प लें।
- तिलक विधि: भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। बहनें रोली, चंदन और अक्षत से भाई का तिलक करें।
- मंत्रोच्चार: तिलक करते समय 'ॐ यमाय नमः' या विशेष भाई दूज मंत्र का जाप करें।
- आरती: भाई की आरती उतारें और उन्हें मिठाई खिलाएं।
आवश्यक पूजा सामग्री
रोली, अक्षत (बिना टूटे चावल), चंदन, कलावा (मौली), पान का पत्ता, सुपारी, नारियल, मिठाई, ऋतुफल, और जल का पात्र।
पौराणिक व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्यदेव की पत्नी संज्ञा की दो संतानें थीं- यमराज और यमुना। यमराज मृत्यु के देवता हैं और यमुना पवित्र नदी। यमुना अपने भाई यमराज से बहुत प्रेम करती थीं और उन्हें बार-बार अपने घर आने का निमंत्रण देती थीं। एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज यमुना के घर पहुंचे। बहन ने उनका भव्य स्वागत किया और भोजन कराया। यमराज ने प्रसन्न होकर बहन से वर मांगने को कहा। यमुना ने वर मांगा कि 'जो भाई आज के दिन अपनी बहन के हाथ का भोजन करे और तिलक लगवाए, उसे यमलोक का भय न हो।' यमराज ने 'तथास्तु' कहा। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
सावधानी और नियम
इस दिन भाई को अपनी बहन के घर जाकर भोजन करना चाहिए। यदि बहन न हो, तो किसी नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है।
निष्कर्ष
भाई दूज का पर्व हमें सिखाता है कि प्रेम और विश्वास ही जीवन के सबसे बड़े आधार हैं। यह दिन यमराज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और अपने भाई-बहनों के प्रति प्रेम को समर्पित करने का है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री
यह लेख धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु व सनातन पंचांग परंपराओं के संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा संकलित किया गया है।