ईद-उल-अज़हा 2026: 27-28 मई को बकरीद का पर्व | Eid al-Adha 2026: The Festival of Sacrifice on May 27-28
ईद-उल-अज़हा, जिसे बकरीद भी कहा जाता है, इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। यह पैगंबर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) द्वारा अल्लाह के आदेश पर अपने पुत्र इस्माइल की कुर्बानी देने के इरादे की याद में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह त्योहार 27 या 28 मई 2026 को मनाए जाने की संभावना है, जो चाँद (ज़ुल-हिज्जा का चाँद) दिखने पर निर्भर करेगा।
🐏 ईद-उल-अज़हा का इतिहास और महत्व (History & Significance)
क़ुरआन के अनुसार, अल्लाह ने पैगंबर इब्राहीम को सपने में अपनी सबसे प्यारी चीज़ की कुर्बानी देने का आदेश दिया। इब्राहीम ने अपने बेटे इस्माइल को कुर्बान करने का फैसला किया, लेकिन अल्लाह ने उनकी नीयत की परीक्षा ले ली और इस्माइल के बदले एक दुम्बा (भेड़) भेज दिया। तब से मुसलमान अल्लाह की राह में कुर्बानी देते हैं और यह त्योहार त्याग, समर्पण और अल्लाह के प्रति पूर्ण आस्था का प्रतीक है।
📅 ईद-उल-अज़हा 2026: संभावित तारीख और मुहूर्त (Expected Dates & Timings)
- ज़ुल-हिज्जा चाँद रात (संभावित): 17 मई 2026 (रविवार) या 18 मई (सोमवार) की शाम
- अरफ़ा का दिन (9 ज़ुल-हिज्जा): 26 मई 2026 (मंगलवार) या 27 मई (बुधवार)
- ईद-उल-अज़हा (10 ज़ुल-हिज्जा): 27 मई 2026 (बुधवार) या 28 मई 2026 (गुरुवार)
- ईद की नमाज का समय: सूर्योदय के 15-20 मिनट बाद से लेकर ज़वाल (दोपहर ढलने) से पहले तक (आमतौर पर सुबह 6:30 से 8:00 बजे के बीच)
🕋 हज और अरफ़ात का दिन (Hajj & Day of Arafah)
ईद-उल-अज़हा से एक दिन पहले (9 ज़ुल-हिज्जा) को "यौम-अरफ़ा" कहा जाता है। इस दिन हज के दौरान लाखों मुसलमान मक्का के पास अरफ़ात के मैदान में एकत्र होते हैं और अल्लाह से दुआ माँगते हैं। जो लोग हज पर नहीं होते, वे भी इस दिन रोज़ा रखते हैं, क्योंकि यह साल का सबसे अहम दिन माना जाता है। 2026 में अरफ़ा का दिन 26 या 27 मई को होगा।
🕌 ईद की नमाज और कुर्बानी (Eid Prayer & Sacrifice)
- ईद की नमाज: मुसलमान सुबह जल्दी उठकर नहाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, और ईदगाह या मस्जिद जाते हैं। ईद की नमाज दो रकात होती है, उसके बाद इमाम खुतबा (उपदेश) देते हैं। नमाज से पहले कुर्बानी नहीं की जाती।
- कुर्बानी: नमाज के बाद जो भी मुसलमान साहिब-ए-निसाब (संपन्न) है, वह बकरा, भेड़, गाय या ऊँट की कुर्बानी देता है। कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बाँटा जाता है: एक हिस्सा परिवार के लिए, एक रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, और एक गरीबों और जरूरतमंदों के लिए।
🌍 विभिन्न देशों में ईद-उल-अज़हा (Global Celebrations)
भारत
देशभर की मस्जिदों में नमाज, कुर्बानी, और खास पकवान (बिरयानी, कबाब, सीख, कोरमा) बनते हैं। पुरानी दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, हैदराबाद में विशेष रौनक होती है।
सऊदी अरब
मक्का और मदीना में लाखों हाजी होते हैं। कुर्बानी के बाद मांस का वितरण व्यवस्थित तरीके से किया जाता है।
तुर्की
यहाँ इसे "कुर्बान बेरामी" कहते हैं। लोग मवेशी खरीदते हैं और कुर्बानी करते हैं, मांस जरूरतमंदों में बाँटा जाता है।
बांग्लादेश/पाकिस्तान
बड़े पैमाने पर कुर्बानी होती है, सड़कों पर जानवरों के बाज़ार सजते हैं। पारंपरिक मीठे व्यंजन बनते हैं।
🍛 ईद के खास व्यंजन (Special Eid Dishes)
- बिरयानी (चिकन/मटन): खुशबूदार चावल और मांस का मिलन, ईद की शान।
- कबाब और सीख: चिकन या मटन के कबाब, शमी कबाब, तंदूरी सीख।
- कोरमा और कढ़ाई मीट: गाढ़ी ग्रेवी वाले व्यंजन।
- हलीम: गेहूं, जौ, मांस और दालों से बना पौष्टिक व्यंजन।
- शीर खुर्मा: सेवइयाँ, दूध, खजूर, मेवे से बनी मिठाई, जो ईद-उल-फितर की तरह ही यहाँ भी बनती है।
- फिरनी, जलेबी, बाकरखानी: अन्य पारंपरिक मिठाइयाँ।
💡 ईद-उल-अज़हा 2026 के लिए सुझाव (Tips for Eid al-Adha 2026)
- चाँद की खबर के लिए स्थानीय मस्जिद या रुएत-ए-हिलाल कमेटी से जुड़े रहें।
- यदि कुर्बानी कर रहे हैं, तो जानवर की अच्छी देखभाल करें और उसे तकलीफ न पहुँचाएँ।
- गरीबों और जरूरतमंदों को मांस का एक हिस्सा देना न भूलें।
- ईद की नमाज के बाद रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलें, गले मिलें और मिठाइयाँ बाँटें।
- पर्यावरण का ध्यान रखें – कुर्बानी के कचरे को साफ-सुथरे तरीके से निपटाएँ।
🙏 ईद-उल-अज़हा 2026 की मुबारकबाद
अल्लाह आपकी कुर्बानी और नेकियों को कबूल फरमाए, और आपके जीवन में खुशियाँ और बरकत लाए।
ईद-उल-अज़हा 2026 मुबारक! बकरीद की बधाई!