Angarki Sankashti Chaturthi 2026: विघ्नहर्ता गणेश को समर्पित अद्वितीय मंगलवारीय व्रत
Angarki Sankashti Chaturthi, जिसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी या विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है, भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली व्रत है। यह व्रत प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। किंतु जब यह चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'अंगारकी' कहा जाता है, जिसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में यह अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग मंगलवार, 5 मई को बन रहा है। इस दिन व्रत रखने और भगवान गणेश की आराधना करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं, ऋण से मुक्ति मिलती है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
✨ अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व
'अंगारक' मंगल ग्रह का ही एक नाम है। जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को आती है, तो यह भगवान गणेश और मंगल ग्रह दोनों की संयुक्त ऊर्जा से युक्त हो जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती के शरीर के मैल से उत्पन्न होने के कारण भगवान गणेश का संबंध पृथ्वी तत्व से है, और मंगल ग्रह भी पृथ्वी तत्व का कारक है। इसलिए इस दिन की गई साधना साधक को साहस, पराक्रम और भूमि-भवन संबंधी लाभ प्रदान करती है।
शास्त्रों में कहा गया है कि स्वयं भगवान शिव ने इस व्रत का महत्व माता पार्वती को बताया था। अंगारकी संकष्टी का व्रत करने से मंगल दोष का निवारण होता है, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत होती है। इस दिन चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने और भगवान गणेश की पूजा करने से सभी कष्टों का निवारण होता है।
🔭 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि एवं शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में विकट संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ने से अंगारकी बन रही है। चंद्रोदय का समय व्रत पारण के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 4 मई 2026, रात्रि 08:15 बजे से।
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 5 मई 2026, रात्रि 10:28 बजे तक।
- व्रत दिवस: 5 मई 2026, मंगलवार (उदया तिथि अनुसार)।
- चंद्रोदय समय (Moonrise Time for Arghya): 5 मई 2026, रात्रि 09:47 बजे (अनुमानित)।
- चतुर्थी व्रत पारण समय (चंद्र दर्शन के पश्चात): रात्रि 09:47 से 10:28 तक।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:56 से 12:46 तक।
नोट: ये समय नई दिल्ली के लिए हैं। चंद्रोदय का समय स्थानीय क्षितिज के अनुसार 5-10 मिनट तक भिन्न हो सकता है। कृपया स्थानीय पंचांग से सटीक समय की पुष्टि अवश्य करें।
5 मई 2026 को मंगलवार और चतुर्थी तिथि के संयोग से यह व्रत अत्यंत प्रभावशाली हो जाता है। इस दिन ग्रहों की स्थितियाँ मंगल दोष निवारण और साहस वृद्धि के लिए अनुकूल रहेंगी:
- सूर्य (Sun): मेष राशि में उच्च स्थिति में।
- चंद्रमा (Moon): वृश्चिक राशि में अनुराधा नक्षत्र में स्थित।
- मंगल (Mars): मिथुन राशि में स्थित होकर चंद्रमा को देख रहे हैं, जिससे 'चंद्र-मंगल योग' बन रहा है। यह योग व्रत के प्रभाव को दुगना करता है।
- गुरु (Jupiter): वृषभ राशि में स्थित, मंगल पर शुभ दृष्टि डाल रहे हैं।
- योग: इस दिन 'ध्रुव योग' और 'वणिज करण' बन रहे हैं, जो स्थिरता और धन लाभ के कारक हैं।
मंगलवार के दिन चतुर्थी तिथि का होना 'अंगारक योग' कहलाता है। इस दिन किए गए गणेश पूजन से कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति सुदृढ़ होती है और मंगल दोष से उत्पन्न विवाह बाधा, ऋण और भूमि संबंधी विवादों का अंत होता है।
🛕 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि एवं व्रत विधान (Puja Vidhi and Fasting Rules)
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का व्रत निर्जल या फलाहार दोनों तरह से रखा जा सकता है। प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और लाल वस्त्र धारण करें (मंगलवार होने के कारण)। भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
गणेश जी को दूर्वा (दूब घास), लाल पुष्प (गुड़हल या गुलाब), मोदक (लड्डू) और सिंदूर अर्पित करें। इस दिन गणेश चालीसा और संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करना अति उत्तम है। दिन भर व्रत रखें और सूर्यास्त के बाद चंद्रोदय की प्रतीक्षा करें।
चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने की विशेष परंपरा है। एक तांबे या मिट्टी के पात्र में जल, चावल, रोली और पुष्प लेकर चंद्रमा को अर्घ्य दें और 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें। तत्पश्चात भगवान गणेश की आरती करें और फलाहार ग्रहण कर व्रत का पारण करें। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र दोष का भी निवारण होता है।
🗺️ भारत के प्रमुख गणेश मंदिरों में उत्सव (Major Celebrations at Ganesha Temples)
महाराष्ट्र - अष्टविनायक मंदिर
महाराष्ट्र के प्रसिद्ध अष्टविनायक मंदिरों में अंगारकी चतुर्थी के दिन भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। मोरगांव, सिद्धटेक और थेऊर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है।
पुणे - दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर
पुणे के इस ऐतिहासिक मंदिर में अंगारकी चतुर्थी पर विशाल आयोजन होता है। गणपति बप्पा का विशेष श्रृंगार किया जाता है और हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
उत्तर भारत - सिद्धिविनायक मंदिर, दिल्ली
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में स्थित सिद्धिविनायक मंदिरों में संकष्टी चतुर्थी का व्रत बड़ी श्रद्धा से रखा जाता है। शाम को चंद्र दर्शन के बाद विशेष आरती होती है।
कर्नाटक - गोकर्ण गणेश मंदिर
गोकर्ण के प्राचीन गणेश मंदिर में इस दिन विशेष अभिषेक और हवन का आयोजन किया जाता है। भक्तगण दूर्वा और मोदक चढ़ाकर मनोकामना मांगते हैं।
📿 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के प्रमुख मंत्र (Important Mantras)
गणेश मूल मंत्र
'ॐ गं गणपतये नमः।'
अंगारकी चतुर्थी विशेष मंत्र (मंगल शांति हेतु)
'ॐ अंगारकाय नमः।'
संकटनाशन स्तोत्र (चंद्र दर्शन के समय)
'प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्। भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुष्कामार्थसिद्धये।।'
व्रत संकल्प मंत्र
'मम सर्वविघ्ननिवारणपूर्वक सकलमनोरथसिद्धये अंगारकीसंकष्टीचतुर्थीव्रतमहं करिष्ये।'
🍲 व्रत में फलाहार एवं प्रसाद (Fasting Food and Prasad)
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के व्रत में अन्न वर्जित होता है। व्रती चंद्र दर्शन के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत के दिन ये चीजें ग्रहण करना शुभ माना जाता है:
- मोदक या लड्डू: गणेश जी को प्रिय मोदक का प्रसाद व्रत पारण में लेना श्रेष्ठ है।
- फल: केला, नारियल और शरीफा।
- साबूदाना और सिंघाड़े का आटा: इनसे बनी खिचड़ी या पूड़ी खा सकते हैं।
- दूध और दही: इसे फलाहार के साथ लिया जा सकता है।
- मूंगफली और गुड़: यह भी व्रत में खाने योग्य है।
नोट: व्रत में चावल, गेहूं और नियमित नमक का प्रयोग वर्जित है। केवल सेंधा नमक ही उपयोग करें।
🌿 सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का व्रत हमें सिखाता है कि जीवन में आने वाली बाधाएं और संकट स्थायी नहीं होते। भगवान गणेश की आराधना और चंद्रमा की शीतल किरणें मन के सभी क्लेशों का निवारण करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह या मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। मंगलवार के दिन पड़ने वाली यह चतुर्थी साहस और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है। इस दिन हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने अंदर के अहंकार और क्रोध को त्यागकर सद्बुद्धि और विवेक को अपनाएंगे।
💡 महत्वपूर्ण सुझाव (Important Tips for Angarki Sankashti Chaturthi 2026)
- व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक जीवन व्यतीत करें।
- यदि चंद्र दर्शन बादलों के कारण न हो सके, तो पंचांग के अनुसार चंद्रोदय समय पर ही अर्घ्य देकर व्रत खोलें।
- भगवान गणेश को दूर्वा अवश्य चढ़ाएं, लेकिन ध्यान रखें कि दूर्वा 3 या 5 गांठ वाली हो।
- इस दिन तुलसी का प्रयोग गणेश पूजन में वर्जित है।
- शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करें।
- यदि संभव हो तो इस दिन किसी गणेश मंदिर में जाकर दर्शन करें और गरीबों को भोजन कराएं।
🙏 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ
भगवान श्री गणेश की कृपा से आपके जीवन के सभी विघ्न और संकट दूर हों। मंगलवार की यह पावन चतुर्थी आपके जीवन में नई ऊर्जा, साहस और समृद्धि का संचार करे। आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हों और आपके परिवार में सुख-शांति बनी रहे।
गणपति बप्पा मोरया! Happy Angarki Sankashti Chaturthi 2026!