३१+ पावन त्यौहार विक्रम संवत २०८३ शास्त्रसम्मत मुहूर्त व विधियां

सनातन त्यौहार एवं पर्व निर्देशिका २०२६

समस्त हिंदू व्रत, पावन पर्वों एवं उत्सवों की तिथिवार प्रामाणिक सूची, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व शास्त्रोक्त महत्व।

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दैनिक विशेष विषय ०
१५ दिसम्बर २०२७, बुधवार

माँ अन्नपूर्णा अभिषेक, हवन एवं महाआरती (2027): शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा

माँ अन्नपूर्णा साक्षात जगत जननी का वह स्वरूप हैं जो समस्त चराचर जगत को अन्न प्रदान करती हैं। उनके अभिषेक, हवन और मह...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
दैनिक विशेष विषय ०
०१ जनवरी २०२७, शुक्रवार

माँ अन्नपूर्णा मासिक व्रत एवं विशेष पूजन (2027): शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा

माँ अन्नपूर्णा साक्षात जगत जननी का वह स्वरूप हैं जो समस्त चराचर जगत का भरण-पोषण करती हैं। मासिक अन्नपूर्णा व्रत न क...

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दैनिक विशेष विषय ०
०४ मई २०२७, मंगलवार

माँ बगलामुखी (पीताम्बरा) अभिषेक, हवन एवं महाआरती (2027): शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा

माँ बगलामुखी, जिन्हें 'पीताम्बरा' के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में आठवीं शक्ति हैं। यह लेख माँ बगलामुख...

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दैनिक विशेष विषय १
२३ मई २०२७, रविवार

देवर्षि नारद कल्याणकारी साधना व दीपदान (2027): शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा

देवर्षि नारद जयंती और उनकी कल्याणकारी साधना का पर्व ज्ञान, भक्ति और लोक-कल्याण का प्रतीक है। इस लेख में जानें देवर्...

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दैनिक विशेष विषय १
०१ जनवरी २०२७, शुक्रवार

देवर्षि नारद मासिक व्रत एवं विशेष पूजन (2027): शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा

देवर्षि नारद मुनि भगवान विष्णु के अनन्य भक्त और त्रिलोक संचारक हैं। उनकी कृपा से ज्ञान, भक्ति और वाक-सिद्धि की प्रा...

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दैनिक विशेष विषय १
१४ फ़रवरी २०२७, रविवार

माँ नर्मदा मैया कल्याणकारी साधना व दीपदान (2027): शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा

माँ नर्मदा, जिन्हें 'रेवा' भी कहा जाता है, साक्षात मोक्षदायिनी और कल्याणकारी हैं। नर्मदा जयंती और दीपदान का पर्व भक...

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दैनिक विशेष विषय १
१४ फ़रवरी २०२७, रविवार

माँ नर्मदा जयंती 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं महिमा

माँ नर्मदा जयंती माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। यह पावन पर्व साक्षात मोक्षदायिनी नर्मदा मैया...

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दैनिक विशेष विषय १
१४ फ़रवरी २०२७, रविवार

माँ नर्मदा मैया मासिक व्रत एवं विशेष पूजन (2027): शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा

माँ नर्मदा, जिन्हें 'रेवा' के नाम से भी जाना जाता है, साक्षात मोक्षदायिनी और कल्याणकारी हैं। नर्मदा जयंती और मासिक ...

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दैनिक विशेष विषय १
१४ फ़रवरी २०२७, रविवार

माँ नर्मदा जयंती 2027: पावन प्राकट्य उत्सव, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं पौराणिक कथा

माँ नर्मदा जयंती का पावन पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन साक्षात् मोक्षदायिनी मा...

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दैनिक विशेष विषय १
२४ मार्च २०२७, बुधवार

माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी कल्याणकारी साधना व दीपदान (2027): शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा

माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी, जिन्हें 'राजराजेश्वरी' और 'षोडशी' के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में सर्वोच्च स...

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दैनिक विशेष विषय १
२२ मार्च २०२७, सोमवार

माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी अभिषेक, हवन एवं महाआरती (2027): शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा

माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी, जो दस महाविद्याओं में तीसरी और परम सौंदर्य की अधिष्ठात्री हैं, उनकी उपासना मोक्ष और भोग दो...

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दैनिक विशेष विषय १
०१ जनवरी २०२७, शुक्रवार

माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी मासिक व्रत एवं विशेष पूजन (2027): शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा

माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी, जिन्हें 'षोडशी' के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में तीसरी और अत्यंत सौम्य-शक्तिश...

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सनातन पर्व परंपरा एवं वैदिक काल-गणना का विज्ञान

सनातन हिंदू परंपरा में प्रत्येक पर्व और त्यौहार केवल सामाजिक उत्सव नहीं हैं, बल्कि वे सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्रों और ऋतु संक्रमण के गहन खगोलीय सामंजस्य पर आधारित आध्यात्मिक विज्ञान हैं। वैदिक काल से ही हमारे ऋषियों ने मानव जीवन को प्रकृति के साथ लयबद्ध करने हेतु इन पावन पर्वों का निर्धारण किया है।

१. उदया तिथि एवं काल-व्यापिनी तिथि का शास्त्रीय नियम

धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु ग्रंथों के अनुसार, हिंदू धर्म में पर्वों का निर्णय मुख्य रूप से दो प्रमुख आधारों पर होता है:

  • उदया तिथि (Udaya Tithi): जिस तिथि में सूर्योदय होता है, दिनभर सामान्यतः उसी तिथि का प्रभाव माना जाता है (जैसे रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, दशहरा)।
  • काल-विशिष्ट व्यापिनी तिथि (Kala Vyapini): कुछ पर्व विशिष्ट प्रहर में मनाए जाते हैं—जैसे दीपावली का लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त उपरांत) में, महाशिवरात्रि का रुद्राभिषेक निशीथ काल (मध्यरात्रि) में, और करवा चौथ का पारण चंद्रोदय काल में। ऐसे में उस विशिष्ट काल में उपस्थित तिथि को ही ग्रहण किया जाता है।

२. लूनी-सोलर (Lunisolar) समन्वय और अधिकमास

सौर वर्ष ३६५.२४२ दिन का और चंद्र वर्ष ३५४.३६ दिन का होता है। प्रतिवर्ष आने वाले लगभग ११ दिनों के अंतर को संतुलित करने हेतु प्रत्येक ३२ माह १६ दिन (लगभग ३ वर्ष) में चंद्र वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहा जाता है। इसी वैज्ञानिक सामंजस्य के कारण हिंदू त्यौहार हमेशा अपनी प्राकृतिक ऋतुओं के अनुसार ही आते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह सामग्री वैदिक पंचांग, पुराणों एवं प्रतिष्ठित सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा शोधपरक रूप से तैयार की गई है।
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