प्रस्तावना एवं परिचय
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 बालाजी थारी कृपा से – मेरा चले कारोबार
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
(Balaji Thari Kripa Se – Kanhaiya Mittal Bhajan)
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
बोल के जय श्री राम,
ओढ़ के राम दुशाला,
खोल दिया बालाजी ने मेरी,
किस्मतों का ताला,
राखे हर पल ध्यान मेरा,
मेरा बालाजी रखवाला,
अला बला सब दूर करे,
मेरा बालाजी सोटे वाला।
॥ स्थायी ॥
मेरा चले कारोबार है,
मौज बहार,
बालाजी थारी किरपा से,
बड़ा घर बड़ी कार है,
खुश परिवार,
बालाजी थारी कृपा से।।
॥ अंतरा १ ॥
जिस दिन से गल्ले पे लिखाया,
बालाजी महाराज की जय,
छोटा मोटा व्यापारी था,
सेठ शहर का हो गया मैं,
जहाँ जाऊँ मिले सत्कार,
हो जय जयकार,
बालाजी थारी कृपा से।
मेरा चले कारोबार है,
मौज बहार,
बालाजी थारी कृपा से,
बड़ा घर बड़ी कार है,
खुश परिवार,
बालाजी थारी कृपा से।।
॥ अंतरा २ ॥
ऐसी नजर उतारी मेरी,
बालाजी थारे सोटे ने,
छोड़ दिया मेरा पीछा करना,
हर टोने हर टोटके ने,
सौ मांगू मिले हज़ार,
मुझे हर बार,
बालाजी थारी कृपा से।
मेरा चले कारोबार है,
मौज बहार,
बालाजी थारी किरपा से,
बड़ा घर बड़ी कार है,
खुश परिवार,
बालाजी थारी कृपा से।।
संकट कटे मिटे सब पीरा,
जो सुमिरे हनुमत बलवीरा।।
🎤 गायक : कन्हैया मित्तल
✍️ रचनाकार : रवि चोपड़ा
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत लोकप्रिय भजन बालाजी (हनुमान जी) की कृपा से जीवन में आई समृद्धि, सफलता और खुशहाली का वर्णन करता है। “बोल के जय श्री राम, ओढ़ के राम दुशाला” – भक्त राम-भक्ति में लीन होकर बालाजी की शरण में आता है, और बालाजी उसकी किस्मत के ताले खोल देते हैं। “राखे हर पल ध्यान मेरा, मेरा बालाजी रखवाला” – बालाजी हर पल उसकी रक्षा करते हैं, और “अला-बला सब दूर करे, मेरा बालाजी सोटे वाला” – उनकी गदा (सोटा) सभी बाधाओं और विपत्तियों को दूर करती है।
“मेरा चले कारोबार है, मौज बहार, बालाजी थारी कृपा से” – भक्त कहता है कि बालाजी की कृपा से उसका व्यापार फल-फूल रहा है, उसके पास बड़ा घर, बड़ी कार और सुखी परिवार है। यह सब उन्हीं की कृपा का परिणाम है।
पहले अंतरे में भक्त कहता है – “जिस दिन से गल्ले पे लिखाया, बालाजी महाराज की जय” अर्थात जिस दिन से उसने बालाजी का नाम अपने हृदय में बसा लिया, वह एक छोटे व्यापारी से शहर का सेठ बन गया। जहाँ भी जाता है, उसे सत्कार और जयकार मिलती है।
दूसरे अंतरे में “ऐसी नजर उतारी मेरी, बालाजी थारे सोटे ने” – बालाजी की गदा ने उसकी बुरी नज़र उतार दी। सभी टोने-टोटके, शत्रु बाधाएँ दूर हो गईं। अब वह सौ माँगता है और हज़ार पाता है।
अंत में “संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलवीरा” – यह संकटमोचन हनुमान जी के स्वरूप का स्मरण कराता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
व्यापार-सफलता का प्रेरणादायक भजन: यह भजन विशेष रूप से व्यापारियों, उद्यमियों और नौकरीपेशा लोगों में अत्यधिक लोकप्रिय है। “मेरा चले कारोबार” की पंक्ति इसे उन्नति और समृद्धि की कामना करने वालों का प्रिय भजन बनाती है।
राजस्थानी मिश्रित भाषा: “थारी कृपा”, “गल्ले पे लिखाया”, “ऐसी नजर उतारी” जैसे शब्द राजस्थानी लोक भाषा के मिश्रण से भजन को और भी प्रभावशाली बनाते हैं।
बालाजी – रखवाला और सोटे वाला: “रखवाला” और “सोटे वाला” संबोधन हनुमान जी के रक्षक एवं शक्तिशाली स्वरूप को दर्शाते हैं। भक्त का विश्वास है कि बालाजी की गदा सभी विघ्नों, बुरी शक्तियों और नज़र दोष को दूर करती है।
💖 भक्ति रस का संगम
🎯 संदेश
बालाजी की कृपा से ही जीवन में सच्ची समृद्धि और सुख-शांति आती है। उनके प्रति कृतज्ञता और समर्पण ही सफलता की कुंजी है। छोटी शुरुआत भी उनकी कृपा से बड़ी उपलब्धि बन सकती है।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है जो कठिन परिश्रम के साथ-साथ ईश्वरीय कृपा में विश्वास रखता है। बालाजी की कृपा से जीवन में हर क्षेत्र में उन्नति संभव है।
🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय बालाजी ।। जय श्री राम ।।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "बालाजी थारी कृपा से (कन्हैया मित्तल) भजन लिरिक्स | Balaji Thari Kripa Se Kanhaiya Mittal Lyrics in Hindi" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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