🙏 सुनो सुनो सांवरे की – बंशी है बाजी
(Suno Suno Saanware Ki Banshi Hai Baaji Lyrics In Hindi) – Krishna Bhajan | Krishna Aur Kans
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
सुनो सुनो सावरे की बंशी है बाजी
सुनो सुनो सावरे की बंशी है बाजी
सुनो सुनो सावरे की बंशी है बाजी
नैनो से धार धार कजरा भए जी
जियरा तरसे नैना तरसे
प्यासी प्यासी अंखिया कहे ऐसे बरसे
॥ सरगम (संगीत) ॥
पनिसानी स सा निसानीसा धनि
निध्मा माँ माँ माँ पमा गमा
रेमपा नि निममापा गमा
॥ अंतरा ॥
धुन सुन बावरि हुई, रैना बीती जागी न सोई
रसवां रेडहे गयी अरे कान्हा, गूंज वो गालिया रोई
संग मेरे जमुना रोई, गैया रोई बछिया रोई
अरे कान्हा मधुबन गूंज तराना
श्याम रंग रूप लुभाना
सिमरन करके हरी अरे ओ कान्हा
तू है निर्मोही मन
भये तुझे मोहे सतना
दरस दिखादे बैरी ओ रे कान्हा
॥ अंतरा (राधा की व्याकुलता) ॥
मोरे श्याम मोरे श्याम मोरे श्याम
ओ सुनो सुनो सावरे की बंसी है बजे
नैनो से धर धर कजरा बहे जी
जियरा तरसे नैना तरसे
प्यासी प्यासी अंखिया कहे से बरसे
सुनो सुनो सव्रे की बंसी है बजे
नैनो से धार धार कजरा भए जी
जियरा तरसे नैना तरसे
जियरा तरसे नैना तरसे
प्यासी प्यासी अंखिया कहे ऐसे बरसे
🎵 संगीतकार: शांतनु मैत्रा
✍️ गीतकार: जावेद अख्तर
🏢 म्यूजिक लेबल: टी-सीरीज़ (T-Series)
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत भावपूर्ण रचना फ़िल्म "कृष्ण और कंस" से ली गई है। श्रेया घोषाल और प्रणब कुमार बिस्वास की मधुर आवाज़ों में यह गीत कृष्ण की बांसुरी के मोहक स्वरों और राधा के विरह की व्याकुलता को बखूबी चित्रित करता है।
"सुनो सुनो सावरे की बंशी है बाजी" – यह मुखड़ा ही श्रोता को उस अद्भुत क्षण में ले जाता है जब कृष्ण की बांसुरी गूंजती है।
"नैनो से धार धार कजरा भए जी, जियरा तरसे नैना तरसे" – नयनों से काजल की धार बहती है, हृदय तरसता है और आँखें प्यासी हैं। यह राधा की उस व्याकुलता को दर्शाता है जो कान्हा के दर्शन के लिए तरसती है।
"धुन सुन बावरि हुई, रैना बीती जागी न सोई" – बांसुरी की धुन सुनकर वह बावली हो गई, रात बीत गई पर उसे नींद नहीं आई। यह प्रेम की उस दिव्य दशा का चित्रण है जहाँ आनंद ही एकमात्र साथी है।
"तू है निर्मोही मन, भये तुझे मोहे सतना, दरस दिखादे बैरी ओ रे कान्हा" – भक्त (राधा) श्याम से निवेदन करती है कि तुम निर्मोही हो, मैं तुमसे सताई जा रही हूँ, अब दर्शन दो।
यह गीत सच्चे प्रेम, आत्मसमर्पण और कृष्ण की बांसुरी के दिव्य आकर्षण का अद्भुत मिश्रण है। यह केवल एक भजन नहीं, बल्कि भक्त की व्याकुलता और श्याम से मिलन की उत्कट इच्छा की अभिव्यक्ति है।
🔍 गीत का विशेष महत्व
फ़िल्मी भजन: यह गीत फ़िल्म "कृष्ण और कंस" का एक प्रमुख भक्ति गीत है। शांतनु मैत्रा के संगीत और जावेद अख्तर के शब्दों ने इसे अमर बना दिया है।
सरगम का प्रयोग: गीत के बीच में सरगम (सा रे ग म प ध नि) का अंश जोड़ा गया है, जो बांसुरी की धुन की शिक्षापरकता को दर्शाता है और पारंपरिक भारतीय संगीत से जोड़ता है।
राधा-कृष्ण के प्रेम का अद्वितीय चित्रण: "गैया रोई बछिया रोई" जैसी पंक्तियाँ समस्त सृष्टि के कृष्ण-वियोग को दर्शाती हैं। यह भाव बताता है कि कृष्ण का प्रेम केवल मानव तक सीमित नहीं, बल्कि समग्र प्रकृति में व्याप्त है।
श्रेया घोषाल और प्रणब कुमार बिस्वास का गायन: दोनों कलाकारों ने इस भजन में प्रेम और विरह की भावना को अद्भुत ढंग से प्रस्तुत किया है। श्रेया घोषाल की सुरीली आवाज़ राधा की पीड़ा और आशा दोनों को एक साथ उभारती है।
💖 बांसुरी की अद्भुत पुकार
🎯 संदेश
यह गीत हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम व्याकुलता लाता है, और वह व्याकुलता ही मिलन की ओर ले जाती है। राधा की पुकार, बांसुरी की धुन, और कृष्ण का रूप – यह सब उस दिव्य प्रेम का प्रतीक है जो सीमाओं से परे है।
✨ श्रद्धा का संगीत
सुनो सुनो सांवरे की केवल एक गीत नहीं, यह कृष्ण-भक्ति का एक अमर अध्याय है। जब भी यह धुन सुनाई देती है, मन में वृन्दावन की यादें ताज़ा हो जाती हैं। यह गीत पीढ़ियों से श्रोताओं को भक्ति के रस में डुबोता आ रहा है।
🙏 हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे || हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे 🙏
गायक: श्रेया घोषाल, प्रणब कुमार बिस्वास | संगीत: शांतनु मैत्रा | गीत: जावेद अख्तर | लेबल: टी-सीरीज़
॥ कृष्ण और कंस (2012) – श्रेया घोषाल का यह अमर भजन आज भी उतना ही प्रिय है ॥