Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

सोजा मेरो नन्दलाल मोहे ना निहारो (Soja Mero Nandlal Lyrics in Hindi) - Krishna Lori Varsha Shrivastava

सोजा मेरो नन्दलाल मोहे ना निहारो लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। वर्षा श्रीवास्तव द्वारा गाई गई प्रसिद्ध कृष्ण लोरी का संपूर्ण पाठ एवं भावार्थ जानें।

हिंदू सनातन धर्म की समृद्ध भक्ति परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आराधना का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। वात्सल्य भाव की पराकाष्ठा को दर्शाने वाला ऐसा ही एक अत्यंत मधुर और हृदयस्पर्शी भजन है—"सोजा मेरो नन्दलाल मोहे ना निहारो" (Soja Mero Nandlal Lyrics in Hindi)। सुप्रसिद्ध गायिका वर्षा श्रीवास्तव द्वारा गाए गए इस भजन में यशोदा मैया के उस अनन्य और निश्छल प्रेम को दर्शाया गया है, जिसमें वे अपने नन्हे कन्हैया को सुलाने का प्रयास कर रही हैं। वैष्णव संप्रदाय में भगवान को एक बालक के रूप में मानकर उनकी सेवा करना, उन्हें लोरी सुनाना और उन्हें सुलाना (शयन सेवा) साधना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग माना गया है। यह भजन न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि साधक के हृदय में वात्सल्य रस का संचार कर उसे सीधे गोकुल की पावन भूमि और मैया यशोदा के आंगन से जोड़ देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

सोजा मेरो नन्दलाल मोहे ना निहारो

सोजा मेरो नन्दलाल मोहे ना निहारो
मोहे ना निहारो .......
मीठी मीठी निंदिया अँखियों में धारो
सोजा मेरो नन्दलाल मोहे ना निहारो
मोहे ना निहारो .......

लाड दुलार प्यार मिलेगा
एक दिन सारा संसार मिलेगा
सूरज चंदा लाडला तू ही म्हारो
सोजा मेरो नन्दलाल मोहे ना निहारो
मोहे ना निहारो .......

लाल गोपाल नन्द लाल मेरो है
नटखट चंचल लाल मेरो है
खूब नाम होगो एक दिन थारो
सोजा मेरो नन्दलाल मोहे ना निहारो
मोहे ना निहारो .......

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस सुंदर कृष्ण लोरी का भावार्थ अत्यंत गहरा और भावपूर्ण है। मैया यशोदा अपने बाल-गोपाल को गोदी में लेकर सुलाने का यत्न कर रही हैं। वे कन्हैया से कहती हैं कि हे मेरे नन्हे नन्दलाल! अब तुम सो जाओ और अपनी इन चंचल, बड़ी-बड़ी आंखों से मुझे इस तरह मत निहारो। यदि तुम मुझे इस तरह देखते रहोगे, तो मैं तुम्हारी इस मनमोहक छवि में खो जाऊंगी और तुम्हें सुला नहीं पाऊंगी। तुम अपनी इन सुंदर आंखों में मीठी-मीठी नींद को धारण कर लो।

मैया आगे कहती हैं कि मेरे लाल, तुम्हें इस घर में तो अपार लाड-प्यार मिल ही रहा है, परंतु एक दिन ऐसा आएगा जब यह संपूर्ण संसार तुमसे प्रेम करेगा, तुम्हारी भक्ति में लीन होगा और तुम्हें अपना आराध्य मानेगा। तुम ही मेरे लिए सूर्य और चंद्रमा के समान प्रकाशमान और अनमोल हो। तुम मेरे जीवन के एकमात्र सहारे हो।

अंतिम पंक्तियों में माता यशोदा के गर्व और वात्सल्य का अनूठा संगम दिखता है। वे कहती हैं कि यह नन्हा गोपाल, यह नन्दलाल मेरा ही पुत्र है। यद्यपि यह अत्यंत नटखट और चंचल है, फिर भी यह मेरा प्राणप्रिय है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि एक दिन संपूर्ण सृष्टि में तुम्हारा नाम गूंजेगा और तुम्हारी कीर्ति चारों दिशाओं में फैलेगी। इसलिए मेरे प्यारे लाल, अब तुम शांति से सो जाओ।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक सामान्य लोरी नहीं है, बल्कि यह श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित वात्सल्य भाव की जीवंत अभिव्यक्ति है। इसके मुख्य आध्यात्मिक बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • वात्सल्य रस की प्रधानता: भक्ति मार्ग में ईश्वर को विभिन्न रूपों में भजा जाता है। इस भजन में भगवान को पुत्र रूप में मानकर उनकी सेवा की जा रही है, जो जीव और ब्रह्म के बीच की दूरी को समाप्त कर देती है।
  • शयन सेवा का महत्व: पुष्टिमार्ग और अष्टछाप कवियों की परंपरा में ठाकुर जी की अष्टयाम सेवा का विधान है, जिसमें 'शयन सेवा' (सुलाने की सेवा) अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भजन उसी शयन सेवा के समय गाए जाने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
  • भक्त और भगवान का अनूठा संबंध: यहां भगवान यशोदा मैया के अधीन होकर एक साधारण बालक की भांति सोने का अभिनय कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि भगवान केवल प्रेम और भक्ति के भूखे हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को गाने और सुनने का कोई निश्चित बंधन नहीं है, परंतु भक्ति परंपरा के अनुसार निम्नलिखित समय पर इसका गायन विशेष फलदायी और आनंददायक होता है:

  • रात्रि काल (शयन आरती के समय): जब आप अपने घर के मंदिर में लड्डू गोपाल को सुलाने की तैयारी कर रहे हों, तब इस भजन को अत्यंत शांत और मधुर स्वर में गाएं।
  • जन्माष्टमी उत्सव: कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के पावन अवसर पर अर्धरात्रि को भगवान के प्राकट्य के पश्चात उन्हें पालने में झुलाते समय इस लोरी का गायन किया जाता है।
  • दैनिक पूजा: संध्याकालीन आरती के बाद जब बाल गोपाल को भोग लगाकर विश्राम कराया जाता है, तब इस भजन का श्रवण मन को असीम शांति प्रदान करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity & Tradition

यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप (लड्डू गोपाल) को समर्पित है। वैष्णव संप्रदाय, विशेषकर वल्लभ संप्रदाय (पुष्टिमार्ग) में बालकृष्ण की आराधना का विशेष महत्व है। सूरदास, रसखान और मीराबाई जैसे महान संतों ने भी भगवान के इसी बाल स्वरूप की लीलाओं का गान किया है। यह भजन उसी समृद्ध संत परंपरा की आधुनिक और सुरीली कड़ी है, जो आज के युग में भी भक्तों को उसी दिव्य रस का अनुभव कराती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा राजस्थानी और ब्रजभाषा के सुंदर मिश्रण से बनी है। "म्हारो", "थारो", "निंदिया", "निहारो" जैसे शब्द ब्रज और राजस्थान की लोक संस्कृति की मिठास को दर्शाते हैं। इसकी काव्य शैली अत्यंत सरल, सुबोध और लयात्मक है। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं (जैसे सूरज-चंदा) माता यशोदा के हृदय की अगाध ममता को सहजता से व्यक्त करती हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message

यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर को पाने के लिए किसी कठिन तपस्या या जटिल कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है। यदि हमारे हृदय में मैया यशोदा जैसा निष्काम और निश्छल प्रेम हो, तो स्वयं पूर्ण ब्रह्म परमात्मा भी हमारे घर में बालक बनकर आने को विवश हो जाते हैं। यह भजन समर्पण, वात्सल्य, और ईश्वर के प्रति अनन्य विश्वास का संदेश देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
नन्दलाल नन्द बाबा के पुत्र (श्रीकृष्ण) आनंद प्रदान करने वाले परमात्मा
निहारो एकटक देखना / निहारना भगवान की मनमोहक चितवन
निंदिया नींद विश्राम और शांति की अवस्था
म्हारो / थारो मेरा / तुम्हारा (राजस्थानी शब्द) अपनत्व और आत्मीयता का भाव
लाडला अत्यंत प्रिय पुत्र भक्त का आराध्य के प्रति लाड

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सोजा मेरो नन्दलाल मोहे ना निहारो..."
हे मेरे प्यारे कन्हैया, तुम अब सो जाओ। अपनी इन नशीली और सुंदर आंखों से मेरी तरफ मत देखो, क्योंकि तुम्हारी चितवन मुझे सम्मोहित कर देती है और मैं तुम्हें सुलाने का अपना कर्तव्य भूल जाती हूं।

"लाड दुलार प्यार मिलेगा, एक दिन सारा संसार मिलेगा..."
हे लाल! आज तो तुम केवल मेरी गोदी में खेल रहे हो, परंतु भविष्य में संपूर्ण सृष्टि तुम्हारे प्रेम के वशीभूत होगी। तुम्हें पूरे संसार का आदर और अनन्य भक्ति प्राप्त होगी।

"लाल गोपाल नन्द लाल मेरो है, नटखट चंचल लाल मेरो है..."
यद्यपि तुम पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हो, लेकिन इस समय तुम केवल मेरे नन्हे, नटखट और चंचल पुत्र हो। तुम्हारी यह बाल-लीलाएं ही मेरा सर्वस्व हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

बालकृष्ण की आराधना करते समय इस प्रसिद्ध श्लोक का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम्।
वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि॥

अर्थ: जो अपने कर-कमल से चरण-कमल को पकड़कर उसे अपने मुख-कमल में डालते हैं और वटवृक्ष के पत्ते पर शयन करते हैं, उन बालमुकुन्द का मैं मन से स्मरण करता हूं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण का क्षेत्र महत्वपूर्ण जानकारी
भजन का नाम सोजा मेरो नन्दलाल मोहे ना निहारो
मुख्य देवी-देवता भगवान श्रीकृष्ण (बाल स्वरूप / लड्डू गोपाल)
स्वर (Singer) वर्षा श्रीवास्तव (Varsha Shrivastava)
गीतकार (Lyricist) ऋषि किरण झा (Rishi Kiran Jha)
संगीतकार (Music) विजय नंदा (Vijay Nanda)
भाषा (Language) हिंदी (ब्रज और राजस्थानी पुट के साथ)
मुख्य रस / भाव वात्सल्य रस (Maternal Devotion)
उपयुक्त अवसर लड्डू गोपाल शयन सेवा, जन्माष्टमी, संध्या काल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत मधुर और भावपूर्ण भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका वर्षा श्रीवास्तव (Varsha Shrivastava) ने अपनी सुरीली आवाज में गाया है।

इस भजन के सुंदर शब्द ऋषि किरण झा द्वारा लिखे गए हैं और इसका कर्णप्रिय संगीत विजय नंदा द्वारा तैयार किया गया है।

लड्डू गोपाल की शयन सेवा के समय उन्हें सुलाने के लिए इस लोरी का गायन किया जाता है। यह भजन घर के वातावरण को शांत, पवित्र और वात्सल्य रस से सराबोर कर देता है।

इस भजन में मुख्य रूप से 'वात्सल्य भाव' (माता का संतान के प्रति प्रेम) की प्रधानता है, जो वैष्णव भक्ति मार्ग का एक अत्यंत ऊंचा स्तर माना जाता है।

हां, यदि आपके घर में लड्डू गोपाल विराजमान हैं, तो आप प्रतिदिन रात्रि को उनकी शयन सेवा के समय इस भजन को गा सकते हैं या बजा सकते हैं।

इसका अर्थ है "मुझे मत देखो"। यशोदा मैया कन्हैया से कहती हैं कि तुम मुझे अपनी चंचल आंखों से मत देखो, अन्यथा मैं तुम्हारे रूप पर मोहित होकर तुम्हें सुला नहीं पाऊंगी।

यह भजन सरल हिंदी में है, जिसमें ब्रजभाषा और राजस्थानी लोक भाषा के शब्दों (जैसे म्हारो, थारो, निहारो) का अत्यंत सुंदर प्रयोग किया गया है।

यह भजन प्रसिद्ध संगीत लेबल "युकी म्यूजिक" (Yuki Music) और भक्ति वंदना के बैनर तले जारी किया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की समीक्षा करते हुए हमारे विद्वान संपादकों ने पाया कि यह आधुनिक युग में पारंपरिक वात्सल्य रस को पुनर्जीवित करने वाला एक उत्कृष्ट भजन है। इसके शब्द और संगीत का संयोजन श्रोता को तुरंत ध्यान की अवस्था में ले जाता है। इस लेख में दी गई जानकारी पूर्णतः प्रामाणिक स्रोतों, वैष्णव ग्रंथों और संगीत के आधिकारिक विवरणों पर आधारित है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (दशम स्कंध - बाललीला प्रसंग)
  • पुष्टिमार्गीय सेवा पद्धति एवं अष्टयाम सेवा नियम
  • युकी भक्ति वंदना आधिकारिक संगीत विवरण

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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