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विठ्ठलाच्या पायी वीट अभंग लिरिक्स (Vitthalachya payi veet Abhang Lyrics in Hindi) - Marathi Bhajan

विठ्ठलाच्या पायी वीट अभंग मराठी आणि हिंदी लिरिक्स यहाँ पढ़ें। भगवान विठ्ठल की भक्ति में लीन करने वाले इस सुंदर अभंग का भावार्थ और अर्थ सहित आनंद लें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

विठ्ठलाच्या पायी वीट अभंग लिरिक्स (Vitthalachya payi veet Abhang Lyrics in Hindi and English) -

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant
पहाताच होती दंग आज सर्व संत
Phatach Hoti Dang Aaj Sarva Sant

पहाताच होती दंग आज सर्व संत
Phatach Hoti Dang Aaj Sarva Sant
विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant
युगे अठ्ठावीस उभा विठू विटेवर�
Yuge Athavis Ubha Vithu Veetevari

युगे अठ्ठावीस उभा विठू विटेवर�
Yuge Athavis Ubha Vithu Veetevari
धन्य झाली चंद्रभागा धन्य ती पंढर�
Dhanya Zali Chandrabhaga Dhanya Ti Pandhari

धन्य झाली चंद्रभागा धन्य ती पंढर�
Dhanya Zali Chandrabhaga Dhanya Ti Pandhari
अनाथांचा नाथ हरी असे कृपावंत
Anathancha Nath Hari Ase Krupavant

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant
विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant

कुठली ती होती माती कोण तो कुंभार
Kuthali Ti Hoti Mati Kon To Kumbhar
कुठली ती होती माती कोण तो कुंभार
Kuthali Ti Hoti Mati Kon To Kumbhar

घडविता उभा राही पहा विश्वंभर
Ghadvita Ubha Rahi Paha Vishvambhar
घडविता उभा राही पहा विश्वंभर
Ghadvita Ubha Rahi Paha Vishvambhar

तिच्यामुळे पंढरपूर झाले कीर्तिवंत
Tichyamule Pandharpur Zale Kirtivant
तिच्यामुळे पंढरपूर झाले कीर्तिवंत
Tichyamule Pandharpur Zale Kirtivant

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant
विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant

पाहुनिया विटेवरती विठू भगवंत
Pahuniya Veetevarti Vithu Bhagvant
पाहुनिया विटेवरती विठू भगवंत
Pahuniya Veetevarti Vithu Bhagvant

दत्ता म्हणे मन माझे होई येथे शांत
Datt Mahne Man Maze Hoi Yethe Shant
दत्ता म्हणे मन माझे होई येथे शांत
Datt Mahne Man Maze Hoi Yethe Shant

गुरुकृपे साधीयला मी आज हा सुपंथ
Gurukrupe Sadhiyla Mi Aaj Supanth
गुरुकृपे साधीयला मी आज हा सुपंथ
Gurukrupe Sadhiyla Mi Aaj Supanth

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant
विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant

पहाताच होती दंग आज सर्व संत
Phatach Hoti Dang Aaj Sarv Sant
पहाताच होती दंग आज सर्व संत
Phatach Hoti Dang Aaj Sarv Sant

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant
विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत
Vitthalachya Payi Veet Zali Bhagyavant

 

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत

पहाताच होती दंग आज सर्व संत

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत

युगे अठ्ठावीस उभा विठू विटेवरी

धन्य झाली चंद्रभागा धन्य ती पंढरी

अनाथांचा नाथ हरी असे दयावंत

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत

कुठली ती होती माती कोण तो कुंभार

घडविता उभा राही पहा विश्वंभर

तिच्यामुळे पंढरपूर झाले कीर्तिवंत

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत

पाहुनिया विटेवरती विठू भगवंत

दत्ता म्हणे मन माझे होई येथे शांत

गुरुकृपे साधीयला मी आज हा सुपंथ

विठ्ठलाच्या पायी वीट झाली भाग्यवंत ||

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "विठ्ठलाच्या पायी वीट अभंग लिरिक्स (Vitthalachya payi veet Abhang Lyrics in Hindi) - Marathi Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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