Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

नन्द के घर जन्मे कन्हैया लिरिक्स (Nand Ke Ghar Janme Kanhaiya Lyrics in Hindi) - Krishna hajan

नंद के घर जन्मे कन्हैया लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष लोकप्रिय भजन, भावार्थ और संदर्भ सहित विशेष सामग्री।

नंद के घर जन्मे कन्हैया लिरिक्स (Nand Ke Ghar Janme Kanhaiya Lyrics in Hindi) भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव और उनकी बाल लीलाओं का स्मरण कराने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय और ऊर्जा से परिपूर्ण भजन है। सनातन धर्म में कृष्ण जन्मोत्सव यानी श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत उल्लास के साथ मनाया जाता है। जब ब्रज में नंद बाबा के घर आनंद की वर्षा हुई और त्रिभुवन के स्वामी नन्दनंदन के रूप में पधारे, तो संपूर्ण गोकुल और ब्रह्मांड में उत्सव का वातावरण बन गया। यह भजन उसी अलौकिक आनंद, परमानंद और गोकुल के उल्लास को जीवंत करता है। इस भक्ति रचना के माध्यम से साधक अपने अंतर्मन में वात्सल्य रस, प्रेम और कृष्ण भक्ति के भाव को जागृत करता है। श्री कृष्ण के बाल रूप का ध्यान करने से मनुष्य के जीवन के सभी संताप दूर होते हैं और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:

नंद के घर जन्मे कन्हैया, जय हो यशोदा के लाल की!
ब्रज में बाजे बधाई, धूम मची है गोपाल की!
नंद के घर जन्मे कन्हैया, जय हो यशोदा के लाल की!

अंतरा 1:

सोने चांदी के थाल सजाए, ग्वाल बालों ने मंगल गाए!
नाच रहे सब ब्रज के नारी, सुध-बुध बैठी सब विसारि!
दर्शन पाकर भई निहाल, जय हो यशोदा के लाल की!
नंद के घर जन्मे कन्हैया, जय हो यशोदा के लाल की!

अंतरा 2:

यशोदा मैया नजर उतारे, बाबा नंद लुटाए भंडारे!
बरसत फूलों की फुहारें, झूमे धरती और अंबर सारे!
गूंज रही मुरली की तान, जय हो यशोदा के लाल की!
नंद के घर जन्मे कन्हैया, जय हो यशोदा के लाल की!

अंतरा 3:

काले-काले घुंघराले बारे, भक्तन के हैं प्राण हमारे!
दीनन के दुख हरणैया, आए ब्रज के बंसैया!
सुध लो मेरे भी गोपाल, जय हो यशोदा के लाल की!
नंद के घर जन्मे कन्हैया, जय हो यशोदा के लाल की!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य उत्सव यानी जन्मोत्सव के आनंद को अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में प्रस्तुत करता है। जब भगवान श्रीकृष्ण ने माता देवकी और वासुदेव के यहाँ कारागार में जन्म लेने के बाद गोकुल में नंद बाबा और यशोदा मैया के यहाँ बाल रूप में प्रवेश किया, तो ब्रजवासियों के आनंद की कोई सीमा नहीं रही।

भजन के मुखड़े में 'नंद के घर जन्मे कन्हैया' कहकर इस शाश्वत सत्य को रेखांकित किया गया है कि भगवान भक्तों के प्रेम के वशीभूत होकर उनके यहाँ प्रकट होते हैं। ब्रज में बज रही बधाइयाँ और गोपाल की धूम इस बात का प्रतीक है कि जब परमात्मा मनुष्य के हृदय में बस जाते हैं, तो जीवन का प्रत्येक पल उत्सव बन जाता है। ग्वाल-बालों और ब्रज की नारियों का मंगल गीत गाना और सुध-बुध खोकर झूमना जीवात्मा की परमात्मा के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण को दर्शाता है।

यशोदा मैया द्वारा नजर उतारना और नंद बाबा द्वारा भंडारे लुटाना इस बात का परिचायक है कि भगवान की प्राप्ति से बड़ा कोई आनंद नहीं है। इस प्रकार यह भजन साधक को सांसारिक दुखों से ऊपर उठकर भगवान की बाल-लीलाओं और उनके प्रेम रस में डूब जाने की प्रेरणा देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • वात्सल्य और भक्ति रस का संगम: यह भजन भगवान कृष्ण के बाल रूप के प्रति वात्सल्य भाव और अगाध भक्ति को प्रकट करता है।
  • उत्सवधर्मी संस्कृति: सनातन संस्कृति में हर पर्व और उत्सव को ईश्वर से जोड़ने की परंपरा को यह भजन जीवंत करता है।
  • मानसिक शांति और आनंद: इस भजन के नियमित गायन या श्रवण से अंतर्मन को असीम शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
  • सत्संग और संकीर्तन का महत्व: भजन के माध्यम से सामूहिक संकीर्तन की महत्ता को दर्शाया गया है जो कलयुग में मुक्ति का सरल मार्ग है।

अधिक जानने के लिए आप हमारे पावन श्री कृष्ण भजन संग्रह और जन्माष्टमी व्रत कथा के लेखों का अध्ययन कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु श्री कृष्ण जन्माष्टमी, गोकुलाष्टमी, एकादशी, और किसी भी सत्संग या उत्सव के अवसर पर इसका विशेष महत्व है। सुबह की पूजा या संध्या कालीन आरती के पश्चात इसे गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता का संचार होता है। इसे ताल, मंजीरे और मृदंग के साथ सामूहिक रूप से गाने पर इसका आनंद कई गुना बढ़ जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में लीलापुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण, माता यशोदा और नंद बाबा हैं। साथ ही, ब्रज के समस्त ग्वाल-बाल और गोपियाँ इस परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। सूरदास, मीराबाई और रसखान जैसे महान संतों ने भी कृष्ण की बाल लीलाओं का अपने पदों में अद्भूत वर्णन किया है, जो हमें इस प्रकार के भजनों को गाने की प्रेरणा देता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन लोक परंपरा और ब्रज संस्कृति के गर्भ से निकला हुआ एक पारंपरिक संकीर्तन है। पीढ़ियों से इसे संतों, भक्तों और लोक गायकों द्वारा गाया जाता रहा है। इसकी भाषा इतनी सरल और मधुर है कि बच्चा-बच्चा इसे सहज ही कंठस्थ कर लेता है और आनंदित हो उठता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल हिंदी और ब्रजभाषा के मधुर शब्दों का मिश्रण है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे 'सोने चांदी के थाल सजाए' और 'बरसत फूलों की फुहारें'। यह काव्य शैली श्रोताओं के मन पर सीधा प्रभाव डालती है और उन्हें भक्ति रस में सराबोर कर देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि ईश्वर से प्रेम करना और उनके गुणों का गान करना ही मनुष्य जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है। जिस प्रकार ब्रजवासी अपने सभी दुखों को भूलकर नंदलाल के जन्म में मग्न हो गए, उसी प्रकार साधक को भी सांसारिक चिंताओं को छोड़कर ईश्वर की शरण में आनंदित रहना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ
नंदनंदन / कन्हैया भगवान श्री कृष्ण नंद बाबा के पुत्र के रूप में
बधाई शुभ समाचार और उत्सव गीत आनंद प्रकट करने का अवसर
निहाल होना परम संतुष्ट या कृतार्थ होना प्रभु दर्शन का फल
बंसैया बंसुरी बजाने वाले श्री कृष्ण का एक नाम

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"नंद के घर जन्मे कन्हैया, जय हो यशोदा के लाल की!"
इस पंक्ति का भाव यह है कि समस्त जगत के पालनहार जब यशोदा जी की गोद में बालक बनकर आते हैं, तो भक्तजन उस परम सौभाग्यशाली माता और नंद बाबा की जय-जयकार करते हैं।

"सोने चांदी के थाल सजाए, ग्वाल बालों ने मंगल गाए!"
इसका अर्थ है कि उत्सव के उल्लास में सभी ने कीमती थालियों में उपहार और शगुन सजाए और मंगल गीत गाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के स्मरण के साथ निम्नलिखित महामंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी माना गया है:

"कृकृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणा क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥"

साथ ही, आप हमारी राधा कृष्ण स्तोत्र और श्रीमद्भगवद्गीता सार से जुड़ी पावन सामग्री भी पढ़ सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम नंद के घर जन्मे कन्हैया (Nand Ke Ghar Janme Kanhaiya)
देवता / आराध्य भगवान श्री कृष्ण
रचनाकार / परंपरा पारंपरिक लोक भजन
भाषा हिंदी एवं ब्रजभाषा
मुख्य थीम कृष्ण जन्मोत्सव और वात्सल्य प्रेम
भाव (Bhava) आनंद, उल्लास और भक्ति रस
उपयुक्त अवसर श्री कृष्ण जन्माष्टमी, सत्संग, उत्सव

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से श्री कृष्ण जन्माष्टमी, नंदोत्सव और किसी भी धार्मिक सत्संग या उत्सव के अवसर पर गाया जाता है।

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम, वात्सल्य और उनके जन्मोत्सव के आनंद को अपने जीवन में उतारना है।

हाँ, इसे आप घर पर अकेले या परिवार के साथ पूजा के समय और संगीत के साथ आसानी से गा सकते हैं।

इस भजन से हृदय में वात्सल्य, प्रेम, उल्लास और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य समर्पण का भाव जागृत होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन परंपरा, लोक भजनों के संकलन और प्रामाणिक धार्मिक साहित्य के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और भावपूर्ण भजन लिरिक्स प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (দশम स्कंध - कृष्ण जन्म प्रसंग)
  • पारंपरिक ब्रज लोकगीत एवं संकीर्तन परंपरा
  • भक्ति साहित्य और सनातन संगीत कोष

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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