hari bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हरिवरासनम (Harivarasanam lyrics in Tamil) - ஹரிவராஸனம் விஶ்வமோஹனம்

हरिवरासनम भजन अयप्पा की कृपा, सुरक्षा, और आंतरिक शांति हेतु एक उत्कृष्ट स्तोत्र है, जो भक्तों को अत्यधिक प्रेरित करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

हरिवरासनम: अयप्पा की कृपा का अनमोल स्तोत्र

इस भक्ति गीत के माध्यम से भक्त भगवान अयप्पा की शरण में जाकर उनकी कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा | शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा || हरिवरासनम् विश्वमोहनम् हरिताथैश्वरं अरदयपादुगम् | अरिविमर्थानां नित्यनार्दनम् हरिहरात्मजं देववमाश्रये || 1 || शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा | शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा || शरणाकीर्तनं भक्तमनसमपनरानोलुबम् नरधनालसम | अरूणाबासुरं पूतनायकं हरिहरात्मजं देववमाश्रये || 2 || प्राणायासत्यकं प्राणनायगं प्राणतगल्पगं सुप्रापाऽजितम् | प्रणवमन्त्रिरं कीर्तनप्रियम् हरिहरात्मजं देववमाश्रये || 3 || शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा | शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा || दुरगावाहनं सुंदरानं वरकातौयुथं वेदवर्णितम् | गुरुगुरुभगाराम कीर्तनप्रियम् हरिहरात्मजं देववमाश्रये || 4 || त्रिपुवनरसीदं देवतात्मगं त्रिनयनप्रभुम् दिव्यदेऽशिगम | दृष्टशपूजितं सिंदिताप्रथाम् हरिहरात्मजं देववमाश्रये || 5 || शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा | शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा || पावपपयपहम पवुकुवगम्भुवनमोहनं भूदीपुशनम् | द्वलवाहनं दिव्यवरणम् हरिहरात्मजं देववमाश्रये || 6 || कालमरुदुस्मिथं सुंदरानं कलापकोमलं कात्रमोहनम् | कलापकेसरीवजिवहनम हरिहरात्मजं देववमाश्रये || 7 || शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा | शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा || श्रीदाजनाप्रियं सिन्थप्रतम् श्रीदिविभूषणं साधुजीवनम् | श्रुतिमनोहरं गी़तललसम् हरिहरात्मजं देववमाश्रये || 8 || शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा | शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा ||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त अयप्पा स्वामी की शरण में जाते हैं, जो सभी जीवों के लिए आंतरिक शांति और सुरक्षा का स्रोत हैं। भजन की पहली पंक्तियां, 'शरणम अयप्पा स्वामी शरणम अयप्पा', श्रद्धा और भक्ति के साथ अयप्पा के प्रति अपने समर्पण को व्यक्त करती हैं। अयप्पा की दिव्यता का वर्णन करते हुए, 'हरिवरासनम् विश्वमोहनम् हरिताथैश्वरं' वाक्य का अर्थ है कि वे सभी को मोहित करने वाले और जीवन में हर प्रकार की ऐश्वर्य का अनुभव कराने वाले हैं। यह सुनिश्चित करता है कि अयप्पा अपनी भक्ति में लीन भक्तों की हर परेशानी को दूर करते हैं। भजन में 'हरिहरात्मजं देववमाश्रये' की पंक्ति अयप्पा की दिव्यता और उनके कष्ट निवारक स्वरूप को प्रतिष्ठित करती है।

भजन के अगले चरणों में, भक्त अपने हृदय की गहराइयों से अयप्पा के प्रति अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हैं। पंक्ति 'शरणाकीर्तनं भक्तमनसमपनरानोलुबम् नरधनालसम' यह दर्शाता है कि अयप्पा की भक्ति अपार प्रेम और समर्पण से भरी है। भक्तों की मानसिकता की शुभता और ईश्वर के प्रति निरंतर प्रेरणा का बोध कराती है। 'अरणाबासुरं पूतनायकं' शब्दों में अयप्पा की दिव्यता का ही उल्लेख है जो उन्हें संसार के अंधकार से निकालते हैं। इस भजन की भावनाएं भक्तों को अयप्पा के प्रति और अधिक देखकर तथा संकल्पित करती हैं कि वे हमेशा उनके मार्गदर्शन में रहें।

इस भजन का धार्मिक और दार्शनिक महत्व बहुत गहरा है। 'प्राणायासत्यकं प्राणनायगं' कहते हुए, यह ध्यान दिलाता है कि अयप्पा केवल भक्ति के रूप में नहीं, अपितु जीवन के सत्य और सत्यता के रूप में हैं। यहाँ तो यह भी दर्शाया गया है कि भक्ति मार्ग का अनुसरण करने से भक्त अपने अंदर की आत्मा की पहचान कर सकते हैं। भजन का 'दुरगावाहनं सुंदरानं वरकातौयुथं' का संदर्भ भक्तों के लिए एकजुटता है, जिससे वे अयप्पा में आस्था रखते हुए जीवन की कठिनाइयों का सामना कर सकें। इसका शाश्वत संदेश यही है कि ईश्वर की कृपा से ही व्यक्ति को मुक्ति और संतोष प्राप्त होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हरिवरासनम भजन का विशेष संबंध उन भक्तों के साथ है जो भगवान अयप्पा की पूजा करते हैं, विशेष रूप से श्रावण मास में। यह भजन विभिन्न पुराणों में भी मिलता है, जैसे कि संस्थान से संबंधित किंवदंतियाँ, जहाँ अयप्पा ने अपने भक्तों की रक्षा की। इसके तहत अयप्पा की शक्ति और उनके प्रति भक्तों की भक्ति का अनूठा उदाहरण देखने को मिलता है। यह प्रमाणित करता है कि ईश्वर की कृपा से सभी संकट समाप्त होते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। हरिवरासनम का पाठ करने से मानसिक शांति, आंतरिक संतोष, और आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति होती है। भक्त इस भजन के माध्यम से अयप्पा की कृपा और आर्शीवाद को अपने जीवन में अनुभव कर सकते हैं, जो उन्हें सकारात्मक दिशा में प्रेरित करता है। यह भजन जीवन के संकटों से लड़ने का साहस और शक्ति भी प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हरिवरासनम का उचित पाठ सुबह या शाम के समय करना श्रेयस्कर है। पूजा स्थान पर एक दीप जलाना, फूलों और फल का अर्पण करना चाहिए। ध्यान मुद्रा में बैठकर इस भजन का उच्चारण करने से भक्त अयप्पा की कृपा को अपने जीवन में अनुभव कर सकते हैं। मन में पूर्ण ध्यान और श्रद्धा के साथ पाठ करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हरिवरासनम का महत्व क्या है?

हरिवरासनम भजन अयप्पा की भक्ति का सर्वोत्तम रूप है, जो भक्तों को शांति और सुरक्षा की अनुभूति कराता है।

क्या हरिवरासनम का पाठ निरंतर करना चाहिए?

हाँ, हरिवरासनम का नियमित पाठ करने से मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

इस भजन का पाठ करने का उचित समय क्या है?

हरिवरासनम का पाठ सुबह या शाम के समय करना सर्वोत्तम होता है, जिससे मन और आत्मा शांत हो।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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