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तेरे सदके तू भेज दे बुलावा लिरिक्स (Tere sadke tu bhej de bulawa Lyrics in Hindi) - Durga Bhajan

माँ दुर्गा का प्रसिद्ध भजन 'तेरे सदके तू भेज दे बुलावा' के लिरिक्स और भावार्थ यहाँ पढ़ें। नवरात्रि और वैष्णो देवी यात्रा के लिए यह एक अत्यंत भावपूर्ण भजन है।

"तेरे सदके तू भेज दे बुलावा" माँ दुर्गा (शेरावाली) को समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय भजन है। यह भजन भक्त के हृदय की उस व्याकुलता, श्रद्धा और अनन्य समर्पण को दर्शाता है, जहाँ वह अपनी आराध्य देवी माँ भगवती के दर्शनों के लिए लालायित है। इस भजन में 'शरणागति भाव' (Surrender) और 'विनय भाव' की प्रधानता है, जो वैष्णो देवी यात्रा और नवरात्रि के पावन अवसरों पर भक्तों के बीच विशेष रूप से गाया जाता है। इस गीत के माध्यम से भक्त यह स्वीकार करता है कि इस संपूर्ण सृष्टि का संचालन माँ की इच्छा और उनके दिव्य प्रकाश (नूर) से ही हो रहा है। जब तक माँ का बुलावा नहीं आता, तब तक जीव उनके द्वार पर नहीं पहुँच सकता। यह भजन न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक के भीतर विनम्रता और अटूट विश्वास का संचार भी करता है। आइए, इस पावन भजन के लिरिक्स, इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, और इसके दार्शनिक महत्व को विस्तार से समझें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जय माता दी जय माता दी
सारे बोलो जय माता दी

तेरे सदके तू भेज दे बुलावा
दोनों हाथ जोड़ के मैं आऊं शेरावालिये
मांगू और क्या मैं इसके इलावा
छोड़ के ना दर तेरा जाऊं शेरावालिये.....

शेरावाली मैहरवाली ज्योतावाली लाटावाली
शेरावाली मैहरवाली ज्योतावाली लाटावाली....

धरती क्या आकाश है क्या सब तेरे इशारों से चलते हैं
तेरे इशारों से चलते हैं
चाँद सितारों के दीपक भी तेरे नूर से ही चलते हैं
तेरे नूर से ही चलते हैं
हम बन्दों की हस्ती क्या है तेरी दया पर ही पलते हैं
तेरी दया पर ही पलते हैं

शेरावाली मैहरवाली ज्योतावाली लाटावाली
शेरावाली मैहरवाली ज्योतावाली लाटावाली....

तेरे सदके तू भेज दे बुलावा
दोनों हाथ जोड़ के मैं आऊं शेरा वालिये
मांगू और क्या मैं इस के इलावा
छोड़ के ना दर तेरा जाऊं शेरा वालिये.....

रोता आये हँसता जाए तेरे दर की रीत यही है
तेरे दर की रीत यही है
नित नित तेरे दर्शन करना हम भक्तो की प्रीत यही है
हम भक्तो की प्रीत यही है
जिस को चाहे उसको बुलाये मैया तेरी रीत यही है
मैया तेरी रीत यही है

शेरावाली मैहरवाली ज्योतावाली लाटावाली
शेरावाली मैहरवाली ज्योतावाली लाटावाली....

तेरे सदके तू भेज दे बुलावा
दोनों हाथ जोड़ के मैं आऊं शेरावालिये
मांगू और क्या मैं इसके इलावा
छोड़ के ना दर तेरा जाऊं शेरावालिये.....

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन देवी भक्ति की पराकाष्ठा को प्रदर्शित करता है। इसका मुख्य भावार्थ यह है कि भक्त स्वयं को पूरी तरह से जगदम्बा के चरणों में समर्पित कर चुका है। वह कहता है कि "हे माता! मैं तुझ पर न्योछावर हूँ, तू मुझे अपने पास आने का निमंत्रण भेज। मैं अत्यंत श्रद्धापूर्वक दोनों हाथ जोड़कर तेरे दरबार में उपस्थित होना चाहता हूँ।" भक्त के लिए माँ के चरणों की सेवा से बढ़कर संसार में कोई दूसरा सुख नहीं है। वह माँ से प्रार्थना करता है कि उसे ऐसी कृपा मिले जिससे वह कभी भी माँ के पावन द्वार को छोड़कर कहीं और न जाए।

भजन के दूसरे भाग में सृष्टि की सर्वोच्च सत्ता के रूप में आदिशक्ति की महिमा गाई गई है। भक्त स्वीकार करता है कि यह पृथ्वी, आकाश, चंद्रमा और तारे सब कुछ माँ के एक सूक्ष्म इशारे पर ही गतिमान हैं। ब्रह्मांड के समस्त प्रकाश स्रोतों में माँ का ही दिव्य तेज (नूर) समाहित है। हम मनुष्यों का अस्तित्व अत्यंत सूक्ष्म और नगण्य है; हम केवल माँ की असीम अनुकंपा और दया पर ही जीवित हैं।

अंतिम पंक्तियों में माँ के दरबार की अलौकिक परंपरा का वर्णन है। माँ का दर वह पावन स्थान है जहाँ दुखी और रोता हुआ व्यक्ति भी आता है, तो वह आनंदित और मुस्कुराता हुआ लौटता है। भक्तों की एकमात्र अभिलाषा यही होती है कि वे प्रतिदिन माँ के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर सकें। अंततः, यह सत्य उद्घाटित होता है कि माँ जिसे चाहती हैं, उसे ही अपने पास बुलाती हैं; उनकी इच्छा के बिना कोई भी उनके धाम की यात्रा नहीं कर सकता।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • समर्पण और शरणागति: यह भजन जीव के अहंकार को समाप्त कर उसे परमात्मा (आदिशक्ति) के चरणों में समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • ब्रह्मांडीय चेतना का बोध: भजन की पंक्तियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि प्रकृति की प्रत्येक हलचल और खगोलीय पिंडों का संचलन माँ जगदम्बा की शक्ति से ही संभव है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: "रोता आये हँसता जाए" की पंक्ति भक्तों में आशावाद और मानसिक संबल का संचार करती है, जिससे अवसाद दूर होता है।
  • सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: इसकी लय और ताल इतनी मधुर हैं कि यह जागरण और चौकी में सामूहिक रूप से गायन के लिए अत्यंत लोकप्रिय है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि माँ भगवती की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधियाँ विशेष रूप से फलदायी मानी गई हैं:

  • नवरात्रि महोत्सव: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान इस भजन का गायन करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।
  • संध्या आरती व जागरण: संध्याकाल की पूजा के समय या माता की चौकी/जागरण में इस भजन को ढोलक, मंजीरे और चिमटे की थाप पर सामूहिक रूप से गाना चाहिए।
  • मानसिक शांति हेतु: जब भी मन अशांत हो या जीवन में कठिनाइयाँ महसूस हो रही हों, तब शांत चित्त से इस भजन को सुनने से आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात् आदिशक्ति माँ दुर्गा, विशेष रूप से उनके वैष्णो देवी (शेरावाली) स्वरूप को समर्पित है। वैष्णो देवी को त्रिशक्ति (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती) का एकीकृत रूप माना जाता है। इस भजन में प्रयुक्त शब्द जैसे "ज्योतावाली" और "लाटावाली" सीधे तौर पर कांगड़ा की माँ ज्वाला जी और जम्मू की माँ वैष्णो देवी के विग्रहों की ओर संकेत करते हैं। इस प्रकार के भजनों को उत्तर भारत के महान देवी भक्तों और संतों ने अपनी साधना के दौरान लोकभाषा में प्रचारित किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक रूप से उत्तर भारतीय लोक-भक्ति संगीत का हिस्सा रहा है। इसे विभिन्न प्रसिद्ध गायकों, विशेष रूप से नरेंद्र चंचल जी और लखबीर सिंह लख्खा जी ने अपनी ओजस्वी और भावपूर्ण आवाज देकर जन-जन तक पहुँचाया। इसकी पृष्ठभूमि वैष्णो देवी की कठिन चढ़ाई और वहाँ पहुँचने की उत्कंठा से जुड़ी है। मान्यता है कि माँ वैष्णो देवी की यात्रा तब तक पूरी नहीं होती जब तक स्वयं माता रानी का "बुलावा" न आए, इसी लोक-मान्यता को इस भजन में मुख्य आधार बनाया गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें पंजाबी और उर्दू (जैसे 'सदके', 'नूर', 'हस्ती') के शब्दों का बहुत ही सुंदर समन्वय किया गया है। इसकी काव्य शैली "प्रार्थना गीत" या "विनय पद" की है। इसमें अंत्यानुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है (जैसे बुलावा-इलावा, चलते हैं-पलते हैं), जिससे यह सुनने में अत्यंत कर्णप्रिय और याद रखने में सरल हो जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पाठ सिखाता है:

  1. अहंकार का त्याग: जब हम गाते हैं कि "हम बंदों की हस्ती क्या है", तो हमारे भीतर का कर्ताभाव समाप्त होता है और हम विनम्र बनते हैं।
  2. कृतज्ञता का भाव: यह भजन हमें सिखाता है कि हमारे पास जो कुछ भी है, वह ईश्वर की दया का परिणाम है, इसलिए हमें सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए।
  3. समानता का संदेश: माँ के दरबार में अमीर-गरीब, सुखी-दुखी सभी एक समान हैं। वहाँ सभी के कष्ट दूर होते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
सदके (Sadke) न्योछावर होना या समर्पित होना भक्त का माँ के प्रति पूर्ण आत्मसमर्पण।
बुलावा (Bulawa) आमंत्रण या बुलावा ईश्वरीय कृपा के बिना साधना या दर्शन संभव नहीं हैं।
नूर (Noor) दिव्य प्रकाश या तेज परमात्मा की वह ऊर्जा जिससे संपूर्ण सृष्टि प्रकाशित है।
हस्ती (Hasti) अस्तित्व या वजूद मनुष्य की नश्वरता और उसकी सीमाएं।
रीत (Reet) परंपरा या नियम ईश्वर के दरबार की न्यायप्रियता और दयालुता।
प्रीत (Preet) प्रेम या भक्ति भक्त और भगवान के बीच का अनन्य संबंध।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तेरे सदके तू भेज दे बुलावा, दोनों हाथ जोड़ के मैं आऊं शेरावालिये..."
हे शेरों पर सवारी करने वाली माँ! मैं अपना सर्वस्व तुझ पर न्योछावर करता हूँ। तू बस एक बार मुझे अपने पास आने का संकेत दे दे, मैं अत्यंत श्रद्धा और विनय के साथ दोनों हाथ जोड़कर तेरे सम्मुख उपस्थित हो जाऊँगा।

"धरती क्या आकाश है क्या सब तेरे इशारों से चलते हैं..."
यह भौतिक जगत (धरती) और सूक्ष्म जगत (आकाश) सब कुछ तेरी ही इच्छाशक्ति और नियमों के अधीन संचालित हो रहे हैं। तेरी अनुमति के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता।

"रोता आये हँसता जाए तेरे दर की रीत यही है..."
जो भी व्यक्ति संसार के दुखों से पीड़ित होकर, रोते हुए तेरे चरणों की शरण में आता है, वह यहाँ से परम आनंद और प्रसन्नता लेकर लौटता है। यही तेरे दरबार की शाश्वत परंपरा है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात माँ दुर्गा के इस सिद्ध मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी, सब पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं। आपको नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरे सदके तू भेज दे बुलावा (Tere Sadke Tu Bhej De Bulawa)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / माँ वैष्णो देवी (शेरावाली)
मुख्य भाव समर्पण, विनय, भक्ति और शरणागति
भाषा हिंदी (खड़ी बोली) एवं पंजाबी का मिश्रण
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, माता की चौकी, दैनिक संध्या आरती
मुख्य संदेश ईश्वरीय सत्ता के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति (Surrender) है। यह सिखाता है कि मनुष्य का अस्तित्व ईश्वर की कृपा पर निर्भर है और बिना ईश्वरीय इच्छा के हम उनके करीब नहीं पहुँच सकते।

इसे नवरात्रि के पावन नौ दिनों में, माता के जागरण, चौकी, या वैष्णो देवी की यात्रा के समय गाना और सुनना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

"ज्योतावाली" का अर्थ है अखंड ज्योति के रूप में विराजमान देवी (जैसे माँ ज्वाला जी) और "लाटावाली" का अर्थ है सुंदर केशों या मुकुट की लटों से सुशोभित माँ भगवती।

हाँ, इस भजन की पंक्तियाँ "भेज दे बुलावा" सीधे तौर पर माँ वैष्णो देवी की उस प्रसिद्ध मान्यता से जुड़ी हैं जिसके अनुसार केवल वही व्यक्ति दरबार पहुँच पाता है जिसे माँ बुलाती हैं।

इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण विनम्रता, निष्कपटता और माँ के प्रति अनन्य प्रेम व विश्वास की भावना रखनी चाहिए।

इसका अर्थ है कि सांसारिक कष्टों और दुखों से पीड़ित जीव जब माँ की शरण में आता है, तो माँ की कृपा से उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और वह आनंदित हो जाता है।

पारंपरिक रूप से इसमें ढोलक, तबला, मंजीरा, हरमोनियम और चिमटे का प्रयोग किया जाता है, जो भक्तिमय वातावरण का निर्माण करते हैं।

हाँ, इसकी भाषा सरल और लयबद्ध होने के कारण यह बच्चों को संस्कार और भक्ति मार्ग से जोड़ने के लिए एक उत्तम माध्यम है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्ति और दर्शन के समन्वय के साथ तैयार किया गया है। "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत इस भजन के पाठ की शुद्धता और उसके दार्शनिक पक्षों की गहन समीक्षा की गई है ताकि पाठकों को प्रामाणिक और हृदयस्पर्शी जानकारी प्राप्त हो सके। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि आत्मा की परमात्मा से मिलन की पुकार है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण (आदिशक्ति महिमा प्रसंग)
  • पारंपरिक उत्तर भारतीय भजन संग्रह एवं मौखिक इतिहास
  • भक्तिलोक संपादकीय मंडल की शोधपरक व्याख्या

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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