Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मेरा दिल तुझपे कुर्बा मुरलिया वाले रे अब तो हो जा मेहरबान मुरलिया वाले रे लिरिक्स (Mera Dil Tujhpe Kurba Muraliya Vale Re Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan

मेरा दिल तुझपे कुर्बा मुरलिया वाले रे कृष्ण भजन के बोल और भावार्थ पढ़ें। श्री कृष्ण भक्ति का यह सुंदर भजन Bhaktilok पर उपलब्ध है।

मेरा दिल तुझपे कुर्बा मुरलिया वाले रे - परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

"मेरा दिल तुझपे कुर्बा मुरलिया वाले रे" एक अत्यंत भावपूर्ण, हृदयस्पर्शी और आनंददायक कृष्ण भजन है, जो भगवान श्री कृष्ण के प्रति एक निश्छल भक्त के अगाध प्रेम, समर्पण और विरह की व्याकुलता को बड़े ही सुंदर शब्दों में व्यक्त करता है। भक्ति संगीत की यह अनमोल रचना कलयुग में भगवान की शरण में जाने, उनके मधुर स्वरूप का स्मरण करने और सांसारिक मोह-माया के बंधनों से ऊपर उठकर प्रेम के दिव्य लोक में गोता लगाने का मार्ग प्रशस्त करती है। ब्रज संस्कृति और मुरली मनोहर की वंशी की तान पर सर्वस्व न्योछावर कर देने का यह भाव केवल एक गीत नहीं, बल्कि जीव और ब्रह्म के मिलन की उस परम छटपटाहट का प्रतीक है जहाँ भक्त अपने आराध्य के सिवाय कुछ और देखना या पाना नहीं चाहता। कृष्ण जन्माष्टमी, एकादशी, रात्रिकालिन सत्संग और विभिन्न धार्मिक उत्सवों के पावन अवसरों पर इस भजन का गायन और श्रवण करने से मन को असीम शांति और भक्ति रस की अनुभूति होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मेरा दिल तुझपे कुर्बा मुरलिया वाले रे,
अब तो हो जा मेहरबान मुरलिया वाले रे ॥

मैं तो तेरा एक दीदार चाहूँ,
दीवाना तेरा तेरा प्यार चाहूँ ॥
मुरलिया वाले रे सावरिया प्यारे रे,
मेरे दिल की तू दुनिया मुरलिया वाले रे ॥

देखी है जब से यह तस्वीर तेरी,
तब से बदल गयी है तकदीर मेरी ॥
मुरलिया वाले रे सावरिया प्यारे रे,
मेरा दिल बाग़-बाग़ मुरलिया वाले रे ॥

तेरी मुरलिया की धुन पे मैं तो बलिहारी जाऊँ,
तेरे चरणों में अपना जीवन बिताऊँ ॥
मुरलिया वाले रे सावरिया प्यारे रे,
अब ले ले सुध मेरी मुरलिया वाले रे ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की हर एक पंक्ति में भक्त की अपने आराध्य बांकेबिहारी के प्रति अनन्य भावना झलकती है। 'मेरा दिल तुझपे कुर्बा मुरलिया वाले रे' के माध्यम से भक्त यह स्वीकार करता है कि उसका यह हृदय अब संसार के प्रपंचों में नहीं, बल्कि केवल मुरलीवाले की वंशी की धुन पर ही समर्पित है। वह भगवान से विनती करता है कि हे प्रभु! अब तो मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि डाल दीजिए, क्योंकि आपके बिना जीवन का कोई अन्य उद्देश्य शेष नहीं बचा है।

भक्त आगे कहता है कि उसे दुनिया की किसी भी भौतिक वस्तु या वैभव की लालसा नहीं है, वह तो केवल अपने सांवरे का एक दीदार करना चाहता है और उनके प्रेम का दीवाना बनकर जीना चाहता है। वह भगवान को अपने हृदय की पूरी दुनिया मानता है। जब से उसने श्री कृष्ण की अलौकिक छवि और मनमोहक तस्वीर देखी है, तब से उसकी भाग्यात्मक स्थिति और तकदीर ही पूरी तरह बदल गई है। निराशा के बादल छट गए हैं और जीवन का हर कोना खुशी से बाग़-बाग़ हो उठा है। यह भजन अंत में यह संदेश देता है कि भगवान के चरणों में समर्पण और उनकी मुरली की तान पर सर्वस्व न्योछावर कर देने से ही जीवन की सार्थकता सिद्ध होती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह कृष्ण भजन अपनी मधुर लय, भाव-प्रधान शब्दावली और सुलभता के कारण भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • अनन्य समर्पण का भाव: भजन में भक्त द्वारा अपने दिल और जीवन को श्री कृष्ण पर कुर्बान करने का प्रसंग भक्त और भगवान के अटूट रिश्ते को दर्शाता है।
  • मुरली की महिमा: भगवान श्री कृष्ण की मुरली केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि ब्रह्मांड को आकर्षित करने वाली योगमाया का प्रतीक है, जिसका वर्णन इस भजन में प्रमुखता से किया गया है।
  • दर्शन की लालसा: 'दीदार' और 'प्यार' की यह पुकार शुद्ध सात्विक प्रेम (प्रेम-भक्ति) का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करती है।
  • आंतरिक आनंद: भजन के श्रवण मात्र से हृदय में सकारात्मक ऊर्जा, परमानंद और भक्ति भाव का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु इसकी पूर्ण अनुभूति के लिए निम्नलिखित समय और विधियां उत्तम मानी जाती हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्याकाल: प्रातः काल उठकर या शाम के समय दीप प्रज्वलित करने के पश्चात एकांत में इस भजन का स्मरण करने से मानसिक एकाग्रता बढ़ती है।
  • सत्संग एवं संकीर्तन: मंदिर परिसरों, घरों में आयोजित होने वाले साप्ताहिक सत्संग या राधा कृष्ण भजन संध्या के दौरान समूह में इसे गाना अत्यंत आनंददायक होता है।
  • विशेष पर्व: कृष्ण जन्माष्टमी, एकादशी, गोवर्धन पूजा और शरद पूर्णिमा के पावन अवसरों पर इस भजन का विशेष रूप से गायन किया जाता है।
  • मानसिक जप एवं ध्यान: आप चाहें तो इसे गुनगुनाते हुए अपने आराध्य की मूर्ति या तस्वीर का ध्यान कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में ब्रज के प्राण, लीलाधारी भगवान श्री कृष्ण (मुरली मनोहर, सांवरिया प्यारे) हैं। सनातन संस्कृति में श्री कृष्ण को प्रेम, आनंद, करुणा और योगेश्वर का अवतार माना गया है। ब्रज परंपरा में मीराबाई, सूरदास और रसखान जैसे महान संतों ने इसी प्रकार के पदों और भजनों के माध्यम से भगवान के प्रति अपनी अनन्य भक्ति प्रकट की थी। यह भजन उसी महान संप्रदाय और भावधारा की एक आधुनिक किंतु उतनी ही प्रामाणिक कड़ी है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भक्ति संगीत की इस विधा का उद्गम पारंपरिक ब्रज लोक संगीत और आधुनिक संकीर्तन परंपरा के संगम से हुआ है। अनाम और श्रद्धावान भक्तों द्वारा रचे गए ऐसे भजन मौखिक परंपरा और संकीर्तन मंडलियों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कलयुग के थके-मारे इंसानों को भगवान के सरल स्वरूप से जोड़ना और उनके चेहरों पर भक्ति का आनंद लाना है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और मधुर हिंदी तथा ब्रजभाषा के मिश्रित रूपों से सुसज्जित है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे 'दिल बाग़-बाग़ होना' और 'मुरलिया वाले रे'। शब्दों की लयात्मकता ऐसी है कि कोई भी बच्चा या वृद्ध इसे आसानी से याद कर सकता है और सुर-ताल में गा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं है, बल्कि इससे हमें जीवन जीने के कई गहरे आध्यात्मिक संदेश मिलते हैं:

  • अहंकार का त्याग: जब तक व्यक्ति अपने 'मैं' और 'मेरे' (अहंकार) का त्याग करके सब कुछ भगवान को समर्पित नहीं करता, तब तक सच्ची शांति नहीं मिल सकती।
  • दृष्टि का बदलाव: भगवान की तस्वीर और उनके विचारों को जीवन में बसाने से व्यक्ति का दृष्टिकोण नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बदल जाता है।
  • प्रेम ही सबसे बड़ी शक्ति: सांसारिक मोह-माया के चक्रव्यूह से निकलने का एकमात्र मार्ग ईश्वर के प्रति निश्छल प्रेम है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदರ್ಭ / प्रसंग
कुर्बा (कुर्बान) न्योछावर करना, समर्पित करना भगवान पर अपना सब कुछ वारी कर देना
दीदार दर्शन करना भगवान श्री कृष्ण के मुखारविंद को देखना
तकदीर भाग्य, किस्मत भगवान की कृपा से जीवन का सौभाग्य बदलना
बाग़-बाग़ होना अत्यधिक प्रसन्न होना, गदगद होना हृदय में आनंद और उल्लास का संचार
सुध लेना खबर लेना, संभालना भक्त द्वारा भगवान से अपनी सुध रखने की प्रार्थना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मेरा दिल तुझपे कुर्बा मुरलिया वाले रे, अब तो हो जा मेहरबान मुरलिया वाले रे"
इस शुरुआती पंक्ति में भक्त अपने पूर्ण समर्पण की घोषणा करते हुए मुरलीधर से अपनी कृपा बरसाने की भीख मांगता है। उसका दिल अब इस नश्वर संसार में नहीं रमता, केवल कान्हा के पास है।

"मैं तो तेरा एक दीदार चाहूँ, दीवाना तेरा तेरा प्यार चाहूँ"
यहाँ भक्त अपनी एकमात्र अभिलाषा प्रकट करता है। उसे सांसारिक ऐश्वर्य नहीं चाहिए, बल्कि भगवान की एक झलक और उनका पावन प्रेम ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है।

"देखी है जब से यह तस्वीर तेरी, तब से बदल गयी है तकदीर मेरी"
भक्त कहता है कि जब से उसकी नजरें श्री कृष्ण के उस मनमोहक स्वरूप पर पड़ी हैं, तब से उसके जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल गई हैं। उसका दुर्भाग्य सौभाग्य में परिवर्तित हो गया है।

"तेरी मुरलिया की धुन पे मैं तो बलिहारी जाऊँ, तेरे चरणों में अपना जीवन बिताऊँ"
भक्त वंशी की मधुर तान पर अपना जीवन वार देने को तैयार है और अपनी अंतिम सांस तक चरणों में सेवा करने की कामना करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने वाला भगवान श्री कृष्ण का अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक:

कृष्णाम् वन्दे जगद्गुरुम् ॥

कस्तूरी तिलकं लालच तट्गं, नासाग्रे मौक्तिकम करे कंकणम्।
सर्वांगे हरिचन्दनेन कलयिता, कंठे च मुक्तावली, गोपस्त्री परिवेष्टितो विजयते गोपाल चूड़ामणिः॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम मेरा दिल तुझपे कुर्बा मुरलिया वाले रे
आराध्य देवता भगवान श्री कृष्ण (मुरली मनोहर / सांवरिया)
रचनाकार / परंपरा पारंपरिक कृष्ण भक्ति लोक भजन
भाषा सरल हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित
मुख्य थीम अनन्य प्रेम, समर्पण और विरह भाव
मुख्य भाव भक्ति, शरणागति और आनंद
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, एकादशी, सत्संग, संकीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन लीलाधारी भगवान श्री कृष्ण (मुरली मनोहर) को समर्पित है।

इस भजन को प्रातः काल पूजा के समय, संध्या वंदन में या किसी भी सत्संग और एकादशी के अवसर पर गाया जा सकता है।

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण और अपनी सभी चिंताओं को प्रभु के चरणों में सौंपना है।

हाँ, कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर रात्रि जागरण और झांकी दर्शन के समय यह भजन अत्यंत हर्षोल्लास के साथ गाया जाता है।

'मुरलिया वाले' भगवान श्री कृष्ण को कहा गया है जो अपने हाथों में बांसुरी (मुरली) धारण करके पूरी सृष्टि को अपनी धुन पर मुग्ध करते हैं।

हाँ, इसकी शब्दावली बहुत ही सरल और लयबद्ध है, जिससे इसे कोई भी बहुत कम समय में याद कर सकता है।

भक्ति संगीत हमारे मन के विकारों और तनाव को दूर करता है। जब हम भगवान के प्रेम में डूबते हैं, तो मन शांत और आनंदित होता है।

अच्युतम केशवम, हरे राम हरे कृष्ण महामंत्र, और श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी जैसे भजन इसके साथ बहुत पसंद किए जाते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्तों की धार्मिक आस्था, पारंपरिक लोक संगीत और सनातन भक्ति परंपरा के अध्ययन पर आधारित है। इसे Bhaktilok.in के संपादकीय दल द्वारा प्रामाणिक और सुंदर प्रस्तुति के साथ तैयार किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण एवं ब्रज की लोक गाथाएं
  • पारंपरिक संकीर्तन एवं भजन संग्रह पुस्तिकाएं
  • वैदिक एवं पौराणिक कृष्ण भक्ति साहित्य

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!