Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

माँ बाप की कमाई(Maa Baap Ki Kamaai Lyrics in Hindi)

माँ बाप की कमाई भजन माता-पिता के संपूर्ण त्याग और प्रेम का गुणगान करता है, जो जीवन के वास्तविक मूल्यों को जगाता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ बाप की कमाई: सच्चे प्रेम का उत्थान

यह भजन माता-पिता के प्रेम और त्याग को समर्पित है, जिससे जीवन की महानता का अनुभव होता है।

माँ बाप की कमाई(Maa Baap Ki Kamaai Lyrics in Hindi) | माँ बाप के अपने बच्चो पर उपकार | Bharti Kumawat माँ बाप ने अपनी कमाई बच्चो पे लुटाई अपना निवाला वो छोड़ भूख सबकी मिटाई दुनिया में आया है तो किसके पीछे आया है माँ ने अगर ये सोचा जनम तूने पाया है अब सोच ले तू एक बार उपकार किया है कहा है ये हमने सभी से माँ ही एक रचैया है पिता के ना जैसा कोई और ना खिवैया है जीवन भी दिया है उधार उसका क़र्ज़ चुका ले कहती है भारती जग से माँ के जैसा कोई नहीं सब कुछ तो मिल जाता है माँ के जैसा प्यार नहीं संदीप करे है प्रचार अब समझ ले प्यारे माँ बाप ने अपनी कमाई .............
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ और पिता की महिमा को अत्यंत श्रद्धापूर्वक प्रस्तुत किया गया है। माँ और पिता की मेहनत और त्याग को दर्शाते हुए गीत में कहा गया है कि 'माँ बाप ने अपनी कमाई बच्चो पे लुटाई।' इसका अर्थ है कि माता-पिता ने अपनी सारी कमाई अपने बच्चों के लिए खर्च की। उनका प्यार, समर्पण और बलिदान जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है। जब बच्चा इस संसार में आता है, तो उसके पीछे माता का हृदय और पिता का समर्थन होता है, जो उनके जीवन को अर्थ देता है। भजन में 'जीवन भी दिया है उधार उसका क़र्ज़ चुका ले' यह संकेत करता है कि माता-पिता का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता, क्योंकि उनका प्यार अनमोल है। इसका भावार्थ यह है कि हमें उनके प्रति हमेशा आभारी रहना चाहिए।

यह भजन केवल माता-पिता के प्रति सम्मान का ही नहीं, बल्कि उनके प्रेम और बलिदान का भी एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसे सुनते समय मन में भावनाओं का सैलाब उमड़ता है, जब हम सोचते हैं कि कैसे माता-पिता ने अपने सुख और आराम को त्यागकर हमें बड़ा करने की मेहनत की। इस भजन में दर्शित भावना हमें याद दिलाती है कि संघर्ष और प्रेम के माध्यम से ही जीवन का असली अर्थ मिलता है। माता का प्यार 'माँ के जैसा प्यार नहीं' की पंक्ति से व्यक्त होता है, जो हमें बताता है कि इस जीवन में हमें माँ-पिता से बेहतर कोई सहारा नहीं मिल सकता। इस प्रकार, यह भजन हमें अपने परिवार के प्रति कृतज्ञता और सेवा का पाठ पढ़ाता है।

भक्ति मार्ग में माता-पिता का स्थान सर्वोच्च है। यह भजन उस अध्यात्मिक सत्य को प्रस्तुत करता है कि किस प्रकार माता-पिता के प्रति श्रद्धा और प्रेम के माध्यम से हमें आत्मज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। 'कहा है ये हमने सभी से माँ ही एक रचैया है' यह पंक्ति हमें माता के अद्वितीय स्थान का एहसास कराती है, जिस पर हमें ध्यान देना चाहिए। भक्ति में समर्पण और प्रेम की शक्ति होती है, जो सच्चे साधक को उच्चतम स्वरूप तक ले जाती है। माँ और पिता के प्रति भक्ति एक ऐसा मार्ग है, जो हमें जीवन में सही दिशा और उद्देश्य प्रदान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

माँ बाप की कमाई पर इस भजन का गहरा महत्व है, क्योंकि यह हमारे भारतीय समाज की मूलभूत रीति-रिवाजों और परंपराओं को प्रकट करता है। कई पुराणों में माता और पिता के बलिदान का महत्व बताया गया है, जैसे कि महाभारत में पितृ ऋण का उल्लेख है। रामायण में माता सीता और माता कौशल्य का भी उल्लेख किया गया है, जहाँ माता-पिता के प्रति अपने कर्तव्यों और उनके प्यार की महत्ता को बताया गया है। इस भजन के माध्यम से हम यह समझ सकते हैं कि माता-पिता हमारे जीवन में आधारस्तंभ की तरह होते हैं, जिनके बिना हमारे जीवन का कोई अर्थ नहीं होता।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और पारिवारिक संबंधों में सुधार लाने में सहायक होता है। माता-पिता के प्रति श्रद्धा बढ़ाने से मन में कृतज्ञता की भावना जागृत होती है, जो समर्पण और भक्ति के मार्ग को आसान बना देती है। नियमित रूप से इसे गाने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सही समय सुबह या संध्या में होता है, जब मन शांति और ध्यान की स्थिति में होता है। एक दीप जलाकर और फूल चढ़ाकर इसे गाना चाहिए। ध्यान का अभ्यास करते हुए, एक स्थिर और सहज मुद्रा में बैठकर इस भजन को गाने से ऊर्जा का संचार होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का विशेष महत्व है?

हाँ, यह भजन माता-पिता के त्याग और बलिदान को सम्मानित करता है, जो हमें जीवन में प्रेरणा देती है।

किस प्रकार से इसे गाना चाहिए?

इस भजन को शांति से, मन में श्रद्धा रखते हुए गाना चाहिए। सुबह या शाम का समय सबसे उत्तम है।

क्या इससे कोई विशेष लाभ होता है?

इस भजन का जाप करने से मन की शांति और पारिवारिक संबंधों में मजबूती आती है। यह हमें जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!