Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

कीजो केसरी के लाल लिरिक्स (Keejo Kesari Ke Laal Lyrics in Hindi) - By LAKHBIR SINGH LAKKHA Hanuman Bhajan

लखबीर सिंह लक्खा द्वारा गाए प्रसिद्ध हनुमान भजन 'कीजो केसरी के लाल' के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ और भावार्थ यहाँ पढ़ें। संकटमोचन की भक्ति में डूबें।

भक्ति और समर्पण के पावन शिखर पर आसीन, संकटमोचन पवनसुत हनुमान जी की आराधना का यह अनुपम भजन 'कीजो केसरी के लाल' (Keejo Kesari Ke Laal Lyrics in Hindi) प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा की सुरीली और भावपूर्ण आवाज में अमर हो चुका है। कलयुग के जागृत देवता माने जाने वाले बजरंगबली की महिमा का गुणगान करते हुए इस भजन में एक भक्त की अपने आराध्य के प्रति अनन्य विनय, करुणा की पुकार और पूर्ण शरणागति का अद्भुत भाव झलकता है। जब कोई साधक या भक्त जीवन के दुखों, कठिनाइयों और संकटों से घिर जाता है, तब केसरी नंदन हनुमान जी का स्मरण उसे संबल प्रदान करता है। लखबीर सिंह लक्खा जी की शैली में गाए जाने वाले इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त के हृदय के अंतःस्थल से निकलकर सीधे साकेत धाम तक पहुँचने की शक्ति रखता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन के अवसर और इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालेंगे, जिससे साधक अपने इष्ट के चरणों में और अधिक प्रगाढ़ भक्ति का अनुभव कर सके।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भजन का मूल पाठ शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:


कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा यह काम,
मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम!
मैं राम संग जपता तुम्हारा सदा नाम,
अपने राम जी से कह देना जय सिया राम॥

दीन हीन के सहारे महावीर तुम हो,
अपने भक्तो की जगाते तकदीर तुम हो।
हर दुखिया का हाथ तुम लेते हो थाम,
मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम॥

महाबली महायोधा महासंत तुम हो,
लाते सूखे हुए बागो में बसंत तुम हो।
तेरी भक्ति से आत्मा को मिलता आराम,
मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम॥

पूरी सदा ही हमारी हर आस करना,
बाबा भक्तो को कभी ना निराश करना।
दोनों चरण तुम्हारे हैं 'लख्खा' के सुखदाम,
मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम॥

कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा यह काम,
मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम!
मैं राम संग जपता तुम्हारा सदा नाम,
अपने राम जी से कह देना जय सिया राम॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक भक्त और उसके स्वामी के बीच के पवित्र संवाद का जीवंत दस्तावेज है। भजन की पंक्तियों में भक्त हनुमान जी से अत्यंत विनम्र भाव से निवेदन करता है कि हे केसरी पुत्र! मेरा यह छोटा सा कार्य अवश्य पूर्ण कर देना। भक्त का यह 'छोटा सा काम' वस्तुतः सांसारिक बंधनों से मुक्ति, प्रभु श्री राम के चरणों में स्थान और जीवन के कष्टों से त्राण पाना है। भक्त कहता है कि मैं निरंतर आपके आराध्य प्रभु श्री राम के नाम के साथ आपका भी स्मरण करता हूँ, इसलिए हे महावीर! आप कृपा करके मेरे प्रभु श्री राम तक मेरा यह संदेश और प्रणाम पहुँचा देना।

अगले चरण में भक्त हनुमान जी के लोक-कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन करते हुए उन्हें 'दीन-हीन का सहारा' और 'तकदीर जगाने वाला' बताता है। संसार में जो भी व्यक्ति दुखों से पीड़ित है, हनुमान जी उसका हाथ थामकर उसे भवसागर से पार लगाते हैं। उन्हें महाबली, महायोधा और महासंत कहकर संबोधित किया गया है, जो अपनी कृपा से निराश जीवन रूपी सूखे उपवनों में भी भक्ति रूपी बसंत का संचार कर देते हैं। अंत में, गायक 'लख्खा' जी अपने आराध्य के चरणों को ही अपने जीवन का एकमात्र सुखधाम बताते हुए प्रार्थना करते हैं कि हे बाबा! अपने किसी भी भक्त को कभी निराश मत करना। यह भावार्थ साधक के मन में अगाध विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा भर देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन हनुमान भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है और इसकी कई प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • भक्ति रस की प्रधानता: इस भजन में दास्य और साख्य भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है, जहाँ भक्त अपने इष्ट को मित्र और रक्षक दोनों रूप में देखता है।
  • श्री राम से जुड़ाव: हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सुगम मार्ग प्रभु श्री राम का स्मरण माना गया है, और इस भजन की मूल भावना यही है कि राम भक्त को मनाने से हनुमान जी स्वयं प्रसन्न होते हैं।
  • मानसिक शांति और संबल: संकट के समय इस भजन का श्रवण या गान करने से मन को असीम शांति और आत्मबल प्राप्त होता है।
  • सार्वभौमिक लोकप्रियता: लखबीर सिंह लक्खा जी की मधुर वाणी और सरल शब्दावली के कारण इसे हर आयु वर्ग के लोग आसानी से गा और समझ सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है, परंतु इसके विशेष अवसर और विधियाँ निम्नलिखित हैं:

  • मंगलवार और शनिवार: हनुमान जी के इन दोनों वारों पर सुबह या संध्या के समय स्नान कर दीप प्रज्वलित करने के पश्चात इस भजन का गान अत्यंत फलदायी होता है।
  • हनुमान जयंती और दीपावली: विशेष पर्वों पर मंदिर या घर में होने वाले संकीर्तन और जागरण के दौरान इस भजन को मुख्य प्रस्तुति के रूप में गाया जाता है।
  • दैनिक पूजा के उपरांत: संध्या आरती के समय जब भक्त बजरंगबली के समक्ष धूप-दीप अर्पित करते हैं, तब इस भजन का मानस पाठ विशेष आनंद देता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में संकटमोचन महाबली श्री हनुमान जी हैं, जिन्हें भगवान शिव का रुद्रावतार और माता अंजनी तथा केसरी जी का नंदन माना जाता है। उनके आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम हैं। इस भजन के रचयिता और इसे अपनी जादुई आवाज से अमर बनाने वाले प्रसिद्ध भजन गायक श्री लखबीर सिंह लक्खा हैं, जिन्होंने अपनी अनन्य भक्ति और मधुर गायकी से देश-विदेश के करोड़ों राम-भक्तों को झूमने पर मजबूर किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लखबीर सिंह लक्खा जी द्वारा गाए गए यह भजन हिंदी भाषी क्षेत्रों के हर घर में हनुमान भक्तों की जुबान पर रहते हैं। इस भजन की रचना इस प्रकार की गई है कि यह सीधे आम जनमानस की भावनाओं को छू सके। लोक संगीत की धुनों और आधुनिक भक्ति संगीत के संयोजन से तैयार यह गीत सुनने वाले के भीतर एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर देता है। इसकी पृष्ठभूमि में भारतीय सनातन संस्कृति की वह अटूट परंपरा है, जहाँ संकट के समय सबसे पहले हनुमान जी का ही स्मरण किया जाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सहज और प्रवाहमान हिंदी एवं अवधी मिश्रित बोलचाल की भाषा में रचित है। इसमें जिन उपमाओं और शब्दों का प्रयोग किया गया है, वे सीधे हृदय को स्पर्श करते हैं। 'सूखे हुए बागो में बसंत', 'तकदीर जगाना' और 'हाथ थामना' जैसे काव्यात्मक प्रयोग इस रचना को अत्यंत जीवंत और प्रभावती बनाते हैं। छंद और लय का ऐसा सुंदर मेल है कि कोई भी श्रोता अनायास ही गुनगुनाने लगता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक पाठ पढ़ाता है:

  • पूर्ण शरणागति: भगवान के चरणों में अपनी कमजोरियों को स्वीकार करते हुए पूर्ण रूप से समर्पित हो जाना ही सच्ची भक्ति है।
  • दूसरों की सहायता: जिस प्रकार हनुमान जी दीन-हीनों और दुखियारों का हाथ थामते हैं, हमें भी समाज के जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।
  • निरंतर स्मरण: भगवान का नाम हर परिस्थिति में जपना चाहिए, इससे मन में सकारात्मकता बनी रहती है।
  • आशा और विश्वास: जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, ईश्वर पर से कभी भी भरोसा नहीं उठाना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
केसरी के लाल राजा केसरी के पुत्र (हनुमान जी) हनुमान जी का पारिवारिक परिचय
दीन हीन गरीब, असहाय या पीड़ित व्यक्ति संसार के दुखी प्राणी जिन्हें बजरंगबली का सहारा चाहिए
महाबली अत्यंत बलशाली और पराक्रमी हनुमान जी की असीम शारीरिक व आत्मिक शक्ति
सुखदाम सुखों का धाम या निवास स्थान हनुमान जी या प्रभु श्री राम के चरण
बसंत बहार, उल्लास और नया जीवन निराशा भरे जीवन में आनंद का संचार

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा यह काम, मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम!"
भावार्थ: भक्त अपने इष्ट हनुमान जी से विनय करता है कि हे अंजनी पुत्र! मेरे इस छोटे से कार्य को पूर्ण कर दीजिए और जब आप प्रभु श्री राम के दर्शन करें, तो उन्हें मेरा प्रणाम (जय सियाराम) अवश्य पहुँचा दें।

"दीन हीन के सहारे महावीर तुम हो, अपने भक्तो की जगाते तकदीर तुम हो।"
भावार्थ: हे महावीर! आप उन लोगों के एकमात्र आश्रय हैं जो संसार में असहाय हैं। आप ही अपने भक्तों के सोए हुए भाग्य को जगाने वाले सामर्थ्यवान हैं।

"महाबली महायोधा महासंत तुम हो, लाते सूखे हुए बागो में बसंत तुम होतेरी भक्ति से आत्मा को मिलता आराम।"
भावार्थ: आप महान बलवान, श्रेष्ठ योद्धा और ज्ञानी संतों में अग्रणी हैं। आपके आने से नीरस और दुखों से सूखे जीवन में खुशियों की बहार आ जाती है। आपकी भक्ति से हमारी आत्मा को परम शांति मिलती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के स्मरण के साथ निम्नलिखित हनुमान मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम कीजो केसरी के लाल (Keejo Kesari Ke Laal Lyrics)
समर्पित देवता संकटमोचन श्री हनुमान जी
गायक / कलाकार श्री लखबीर सिंह लक्खा
भाषा हिंदी / अवधी मिश्रित
विषय वस्तु भक्ति, विनय, शरणागति और राम स्मरण
मुख्य भाव संकट निवारण और प्रभु श्री राम तक संदेश पहुँचाना
उपयुक्त अवसर मंगलवार, शनिवार, जागरण, और हनुमान जन्मोत्सव

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन के प्रसिद्ध गायक श्री लखबीर सिंह लक्खा जी हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज में इसे गाया है।

यह भजन संकटमोचन भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित है, जिसमें उनके माध्यम से प्रभु श्री राम के प्रति अपनी भक्ति प्रकट की गई है।

इस भजन को मंगलवार और शनिवार के दिन सुबह या संध्या की पूजा के समय, अथवा किसी भी धार्मिक अनुष्ठान व जागरण में गाना अत्यंत फलदायी होता है।

'केसरी के लाल' भगवान हनुमान जी को कहा गया है, क्योंकि उनके पिता का नाम केसरी और माता का नाम अंजनी था।

इस भजन का मुख्य संदेश हनुमान जी के माध्यम से प्रभु श्री राम की शरण में जाना, संकट के समय धैर्य रखना और भगवान पर पूर्ण विश्वास रखना है।

हाँ, इस भजन को घर की दैनिक पूजा, संध्या आरती या हनुमान चाليसा पाठ के पश्चात अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

इसके श्रवण और गायन से मानसिक शांति मिलती है, भय दूर होता है और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

हाँ, इस लेख में संपूर्ण भजन के शुद्ध देवनागरी हिंदी बोल, अर्थ और भावार्थ सहित उपलब्ध कराए गए हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और व्याख्या को पारंपरिक स्रोतों, लोक संस्कृति और हनुमान भक्ति परंपरा के आधार पर अत्यंत सावधानी और शुद्धता के साथ संकलित किया गया है ताकि पाठकों को प्रामाणिक और उच्च कोटि की devotional सामग्री मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं हनुमान कथा परंपरा
  • भक्तिकाल की संत परंपरा और लोक भजन साहित्य
  • श्री लखबीर सिंह लक्खा जी के प्रसिद्ध भक्ति एलबम एवं संकीर्तन संग्रह

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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