hari bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जय जय नारायण नारायण हरि हरि लिरिक्स ( jay jay naaraayan naaraayan hari hari Lyrics in Hindi) - Hari Darshan

जय जय नारायण नारायण हरि हरि भजन के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ एवं महिमा पढ़ें। हरि दर्शन फिल्म का यह प्रसिद्ध भजन Bhaktilok पर उपलब्ध है।

सनातन धर्म की समृद्ध संकीर्तन परंपरा में भगवान श्रीहरि विष्णु के नाम का जप सर्वोपरि माना गया है। "जय जय नारायण नारायण हरि हरि" (Jay Jay Narayan Narayan Hari Hari) एक ऐसा ही कालजयी और परम पावन भजन है, जो साधक के हृदय में भक्ति, शांति और समर्पण का संचार करता है। यह भजन न केवल ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम को दर्शाता है, बल्कि कलयुग में नाम संकीर्तन की महिमा को भी प्रतिपादित करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवर्षि नारद निरंतर अपनी वीणा की झंकार के साथ इसी महामंत्र का गान करते हुए तीनों लोकों में विचरण करते हैं। इस भजन को प्रसिद्ध पौराणिक फिल्म "हरि दर्शन" (Hari Darshan) में अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया था, जिसे महान गायक हरिहरन (Hariharan) और अन्य कलाकारों ने अपनी दिव्य आवाज से सजाया है। यह विस्तृत लेख इस भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ और इसके गायन से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभों पर प्रकाश डालता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जय जय नारायण नारायण हरि हरि।
स्वामी नारायण नारायण हरि हरि।

भक्तन के प्यारे नारायण नारायण हरि हरि।
दीन दयाला नारायण नारायण हरि हरि।
जय जय नारायण नारायण हरि हरि।
स्वामी नारायण नारायण हरि हरि।

अलख निरंजन भवभय भंजन नारायण नारायण हरि हरि।
सृष्टि के पालनकर्ता तुम हो नारायण नारायण हरि हरि।
जय जय नारायण नारायण हरि हरि।
स्वामी नारायण नारायण हरि हरि।

करुणा सागर संकट हरता नारायण नारायण हरि हरि।
शरण पड़े की लाज बचाओ नारायण नारायण हरि हरि।
जय जय नारायण नारायण हरि हरि।
स्वामी नारायण नारायण हरि हरि।

ज्ञान प्रदाता मुक्ति विधाता नारायण नारायण हरि हरि।
मन मंदिर में वास करो प्रभु नारायण नारायण हरि हरि।
जय जय नारायण नारायण हरि हरि।
स्वामी नारायण नारायण हरि हरि।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान नारायण (विष्णु) की स्तुति और उनके प्रति पूर्ण शरणागति का जीवंत दस्तावेज है। इसका मुख्य संदेश यह है कि संसार के समस्त कोलाहल और दुखों से मुक्ति का एकमात्र साधन भगवान के नाम का निरंतर जप है। "नारायण" शब्द का अर्थ है - जो संपूर्ण सृष्टि का आश्रय है, और "हरि" का अर्थ है - जो अपने भक्तों के समस्त पापों, कष्टों और अज्ञान का हरण कर लेता है।

इस भजन के माध्यम से भक्त प्रार्थना करता है कि हे प्रभु! आप दीन-दुखियों पर दया करने वाले हैं, भक्तों को अत्यंत प्रिय हैं, और इस संपूर्ण चराचर जगत के स्वामी हैं। आप अलख (जो सामान्य आंखों से दिखाई न दे) और निरंजन (जो माया से परे और शुद्ध है) हैं। आप ही इस संसार के जन्मदाता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। जब भी कोई भक्त सच्चे मन से आपकी शरण में आता है, आप उसके संकटों का निवारण करते हैं और उसकी लाज बचाते हैं। इस भजन का नियमित श्रवण और गायन मनुष्य के अंतःकरण को शुद्ध करता है और उसे सांसारिक बंधनों से मुक्त कर परम शांति की ओर ले जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से विशिष्ट और अत्यंत प्रभावशाली बनाती हैं:

  • नाम संकीर्तन की महिमा: श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, कलयुग में केवल भगवान के नाम का कीर्तन करने मात्र से ही जीव भवसागर से पार उतर जाता है। यह भजन उसी नाम-महिमा को सरल शब्दों में व्यक्त करता है।
  • देवर्षि नारद की भक्ति का प्रतीक: यह भजन सुनते ही देवर्षि नारद का स्वरूप आंखों के सामने आ जाता है। नारद जी निष्काम भक्ति के प्रतीक हैं, और उनका यह प्रिय मंत्र हमें निष्काम भाव से ईश्वर की आराधना करना सिखाता है।
  • मानसिक शांति और तनाव मुक्ति: इस भजन की लय और धुन अत्यंत शांत और मधुर है। इसके नियमित जप से मस्तिष्क में सकारात्मक तरंगों का प्रवाह होता है, जिससे मानसिक तनाव और चिंता का नाश होता है।
  • सर्वव्यापी स्वीकार्यता: यह भजन किसी विशेष संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण सनातन धर्म में भगवान विष्णु, कृष्ण और राम के भक्तों द्वारा समान रूप से गाया और सराहा जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान के नाम का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष समय और विधियां अत्यधिक फलदायी मानी गई हैं:

  • ब्रह्ममुहूर्त और संध्याकाल: सुबह सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय इस भजन का गान करने से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
  • एकादशी और विशेष व्रत: एकादशी, पूर्णिमा, और विष्णु पूजा के विशेष अवसरों पर इस भजन का संकीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • गायन की विधि: शांत चित्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। यदि संभव हो तो हाथ में करताल या तुलसी की माला लेकर भगवान विष्णु की प्रतिमा के सम्मुख इस भजन का सस्वर पाठ करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्रीमन नारायण (विष्णु) को समर्पित है। भगवान विष्णु हिंदू त्रिदेवों में से एक हैं, जिन्हें सृष्टि का पालनकर्ता माना गया है। उनके साथ ही, यह भजन देवर्षि नारद से गहराई से जुड़ा हुआ है। नारद जी को भगवान विष्णु का अनन्य मानस पुत्र और परम भक्त माना जाता है। वे निरंतर "नारायण नारायण" का जाप करते हुए ब्रह्मांड के कल्याण के लिए कार्य करते हैं। इसके अतिरिक्त, मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के संतों जैसे चैतन्य महाप्रभु और मीराबाई ने भी नाम संकीर्तन की इसी परंपरा को आगे बढ़ाया था।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि अत्यंत प्राचीन और पौराणिक है, परंतु आधुनिक समय में इसे लोकप्रियता फिल्म "हरि दर्शन" (1972) के माध्यम से मिली। इस फिल्म में भगवान विष्णु की महिमा और उनके परम भक्त प्रहलाद की कथा को दर्शाया गया था। इस भजन के माध्यम से यह दिखाया गया है कि कैसे ईश्वर का नाम हर परिस्थिति में भक्त की रक्षा करता है। संगीतकार और गीतकारों ने पारंपरिक वैदिक मंत्रों और संकीर्तन पद्धतियों को मिलाकर इस सुमधुर भजन की रचना की, जो आज भी हर मंदिर और घर में गूंजता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें संस्कृत के तत्सम शब्दों जैसे "नारायण", "निरंजन", "भवभय भंजन" का अत्यंत सुंदर समन्वय किया गया है। इसकी काव्य शैली "संकीर्तन शैली" है, जिसमें मुख्य पंक्तियों (मुखड़ा) को बार-बार दोहराया जाता है ताकि साधक का मन पूरी तरह से उस ध्वनि और भाव में लीन हो सके। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग देखने को मिलता है, जो इसके माधुर्य को और अधिक बढ़ा देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण संदेश और सीख देता है:

  • पूर्ण शरणागति (प्रपत्ति): मनुष्य को अपने अहंकार का त्याग कर ईश्वर के चरणों में खुद को समर्पित कर देना चाहिए। जब हम अपनी सीमाओं को स्वीकार कर ईश्वर की शरण लेते हैं, तो वे हमारे जीवन का दायित्व स्वयं संभाल लेते हैं।
  • समता का भाव: भगवान "दीन दयाला" हैं, अर्थात वे अमीर-गरीब, ऊंच-नीच का भेद किए बिना सभी पर समान रूप से कृपा करते हैं। हमें भी अपने जीवन में सभी के प्रति करुणा और समता का भाव रखना चाहिए।
  • संसार की नश्वरता: "भवभय भंजन" शब्द हमें याद दिलाता है कि यह संसार नश्वर है और यहां के भय भी अस्थायी हैं। केवल परमात्मा की सत्ता ही शाश्वत है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
नारायण जल में निवास करने वाले या संपूर्ण सृष्टि के आश्रयदाता भगवान विष्णु का परम पावन नाम
हरि दुखों और पापों का हरण करने वाले ईश्वर का वह स्वरूप जो भक्त के कष्ट दूर करता है
भवभय भंजन संसार के जन्म-मरण के चक्र और भयों का नाश करने वाले मोक्ष प्रदान करने वाले परमात्मा
अलख निरंजन जो अदृश्य है और माया के विकारों से रहित है परमात्मा का निराकार और शुद्ध स्वरूप
दीन दयाला गरीबों और असहायों पर दया करने वाले ईश्वर की असीम करुणा का सूचक

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "जय जय नारायण नारायण हरि हरि। स्वामी नारायण नारायण हरि हरि।"
हे प्रभु नारायण! आपकी सदा ही जय हो। आप ही इस संपूर्ण जगत के स्वामी और नियंता हैं। मैं बार-बार आपके पावन नाम 'नारायण' और 'हरि' का कीर्तन करता हूँ।

2. "भक्तन के प्यारे नारायण नारायण हरि हरि। दीन दयाला नारायण नारायण हरि हरि।"
आप अपने भक्तों को अत्यंत प्रिय हैं और भक्त आपको प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं। आप दीन-दुखियों, अनाथों और असहायों पर दया करने वाले परम कृपालु देव हैं।

3. "अलख निरंजन भवभय भंजन नारायण नारायण हरि हरि। सृष्टि के पालनकर्ता तुम हो नारायण नारायण हरि हरि।"
आप इंद्रियों से परे (अलख) और माया रहित (निरंजन) हैं। आप इस संसार के जन्म और मृत्यु के भय को नष्ट करने वाले हैं। इस संपूर्ण ब्रह्मांड का पालन-पोषण करने वाले केवल आप ही हैं।

4. "करुणा सागर संकट हरता नारायण नारायण हरि हरि। शरण पड़े की लाज बचाओ नारायण नारायण हरि हरि।"
आप करुणा के असीम सागर हैं और अपने भक्तों के सभी संकटों को हरने वाले हैं। जो भी आपकी शरण में आता है, आप उसकी रक्षा करते हैं और उसका मान बनाए रखते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ भगवान विष्णु के इस प्रसिद्ध महामंत्र और श्लोक का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं,
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जय जय नारायण नारायण हरि हरि
समर्पित देवी-देवता भगवान श्रीमन नारायण (विष्णु)
मुख्य गायक हरिहरन, महेंद्र कपूर (फिल्म 'हरि दर्शन')
भाषा हिंदी (संस्कृत तत्सम युक्त)
भजन का भाव भक्ति भाव, शरणागति, शांत रस
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, एकादशी, विष्णु आराधना, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को कई प्रसिद्ध गायकों ने गाया है, परंतु फिल्म "हरि दर्शन" में इसे महेंद्र कपूर ने अपनी आवाज दी थी। आधुनिक समय में हरिहरन और अन्य शास्त्रीय गायकों के संस्करण भी अत्यंत लोकप्रिय हैं।

"नारायण" का अर्थ है जो संपूर्ण सृष्टि का आश्रय और गंतव्य है। "हरि" का अर्थ है जो अपने भक्तों के पापों, कष्टों, अज्ञान और दुखों का हरण कर लेता है।

इस भजन के नियमित जप से मानसिक शांति मिलती है, नकारात्मक विचारों का नाश होता है, एकाग्रता बढ़ती है और साधक के भीतर भक्ति भाव सुदृढ़ होता है।

हाँ, एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन "जय जय नारायण नारायण हरि हरि" का कीर्तन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है।

यह भजन पारंपरिक भारतीय संकीर्तन शैली में रचित है, जिसमें सरल शब्दों और मधुर धुन के माध्यम से भगवान के नाम को बार-बार दोहराया जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "जय जय नारायण नारायण हरि हरि" भजन के आध्यात्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस सामग्री को तैयार करने के लिए प्रामाणिक वैष्णव ग्रंथों, श्रीमद्भागवत महापुराण और पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों का संदर्भ लिया है। यह लेख पूरी तरह से "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" है, जिसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और ज्ञानवर्धक भक्ति रस प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण - नाम संकीर्तन महिमा अध्याय
  • विष्णु पुराण - भगवान विष्णु के विभिन्न अवतार और नाम महिमा
  • पारंपरिक संकीर्तन संग्रह एवं भजन डायरी

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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