Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Hath Seer to Na Chakki Datiye

कुमार संजीव द्वारा गाए प्रसिद्ध देवी भजन 'हथ सिर तों ना चक्की दातिए' के लिरिक्स, अर्थ और महत्व की संपूर्ण जानकारी संदर्भ सहित यहाँ पढ़ें।

"हथ सिर तों ना चक्की दातिए" (Hath Seer to Na Chakki Datiye) एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी पंजाबी देवी भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध गायक कुमार संजीव (Kumar Sanjeev) ने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज में गाया है। यह भजन आदिशक्ति, जगत जननी मां दुर्गा के प्रति पूर्ण समर्पण, अटूट विश्वास और अनन्य भक्ति का जीवंत प्रतीक है। सनातन धर्म में देवी उपासना का विशेष महत्व है, जहां मां को केवल एक शक्ति के रूप में ही नहीं, बल्कि एक ममतामयी माता के रूप में पूजा जाता है जो अपने बच्चों के सभी कष्टों को हर लेती हैं। इस भजन का मुख्य स्वर 'शरणागति' (Surrender) का है, जिसमें भक्त अपनी असमर्थता को स्वीकार करते हुए देवी मां से प्रार्थना करता है कि वे अपना वरदहस्त (आशीर्वाद का हाथ) उसके सिर से कभी न हटाएं। यह भजन विशेष रूप से पंजाब और उत्तर भारत के देवी जागरणों, चौकियों और नवरात्र उत्सवों में श्रद्धापूर्वक गाया और सुना जाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के लिरिक्स, भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ हथ सिर तों ना चक्की दातिए ॥

हथ सिर तों ना चक्की दातिए,
असीं तेरे सहारे जीउंदे हां।
तेरे चरणां च बह के मैया जी,
असीं दुख सुख अपने रोंदे हां॥

हथ सिर तों ना चक्की दातिए...

तेरी महिमा अपरम्पार मैया,
तू जग दी पालनहार मैया।
साडे सिर ते मेहर दा हथ रख दे,
असीं दर तेरे ते आउंदे हां॥

हथ सिर तों ना चक्की दातिए...

कोई होर सहारा नहीं साडा,
इक तू ही सहारा है मैया।
साडी बेड़ी पार लगा दे तू,
असीं आस तेरी ही लाउंदे हां॥

हथ सिर तों ना चक्की दातिए...

कुमार संजीव दी अरदास मैया,
रख चरणां दे ही पास मैया।
साडी झोली खुशियां नाल भर दे,
असीं महिमा तेरी गाउंदे हां॥

हथ सिर तों ना चक्की दातिए,
असीं तेरे सहारे जीउंदे हां।
तेरे चरणां च बह के मैया जी,
असीं दुख सुख अपने रोंदे हां॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त और भगवान के बीच के अत्यंत घनिष्ठ और निश्छल संबंध को दर्शाता है। यहाँ भक्त अपनी माता (दातिए - देने वाली, दात्री) से याचना कर रहा है कि हे मां! मेरे सिर से अपना आशीर्वाद रूपी हाथ कभी मत उठाना, क्योंकि मेरा यह जीवन केवल और केवल तुम्हारे ही सहारे चल रहा है।

भजन के प्रथम भाग में भक्त कहता है कि इस संसार की भूलभुलैया और कठिनाइयों के बीच यदि कोई एकमात्र सुरक्षित स्थान है, तो वह मां के चरण हैं। भक्त मां के चरणों में बैठकर अपने जीवन के सभी सुख और दुख उनके साथ साझा करता है। यहाँ 'दुख सुख अपने रोंदे हां' का अर्थ केवल रोना नहीं है, बल्कि मां के समक्ष अपने हृदय को पूरी तरह से खोलकर रख देना है, जहाँ किसी प्रकार का संकोच या भय नहीं होता।

आगे के अंतरे में भक्त मां की महिमा का गुणगान करते हुए उन्हें संपूर्ण जगत की 'पालनहार' (सृष्टि का भरण-पोषण करने वाली) स्वीकार करता है। वह जानता है कि सांसारिक रिश्ते-नाते अस्थाई हो सकते हैं, परंतु मां का प्रेम शाश्वत है। इसलिए वह अपनी जीवन रूपी नैया (बेड़ी) को भवसागर से पार लगाने की प्रार्थना करता है। यह भजन साधक को सिखाता है कि जब हम अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण रूप से मां के चरणों में समर्पित हो जाते हैं, तब मां स्वयं हमारे जीवन का दायित्व अपने हाथों में ले लेती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भजन "हथ सिर तों ना चक्की दातिए" केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक साधना है जो भक्त को सीधे दिव्य चेतना से जोड़ती है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • समर्पण भाव (Sharanagati): यह भजन पूर्ण शरणागति का संदेश देता है। जब भक्त यह मान लेता है कि उसका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है और वह पूरी तरह से मां पर निर्भर है, तब उसका अहंकार नष्ट हो जाता है।
  • वात्सल्य रस की प्रधानता: इस भजन में देवी मां को एक करुणामयी माता के रूप में चित्रित किया गया है, जो अपने बच्चों के आंसू पोंछती हैं और उन्हें अपनी गोद में स्थान देती हैं।
  • सरलता और सुगमता: पंजाबी भाषा के सरल और कर्णप्रिय शब्दों का प्रयोग होने के कारण यह भजन सीधे हृदय को छूता है। इसे गाने या सुनने के लिए किसी कठिन शास्त्रीय ज्ञान की आवश्यकता नहीं है, केवल शुद्ध भाव ही पर्याप्त है।
  • मानसिक शांति का प्रदाता: आधुनिक जीवन के तनाव और चिंताओं से घिरे मनुष्य के लिए यह भजन एक थेरेपी की तरह काम करता है। इसे सुनने से मन को असीम शांति और सुरक्षा का अनुभव होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि मां की भक्ति के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण का विशेष फल निम्नलिखित अवसरों पर मिलता है:

  • नवरात्रि महोत्सव: चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रों के दौरान इस भजन का श्रवण और कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • माता का जागरण एवं चौकी: उत्तर भारत में आयोजित होने वाले माता के जागरणों और रात्रिकालीन चौकियों में इस भजन को गाकर भक्त भाव-विभोर हो उठते हैं।
  • दैनिक संध्या आरती: प्रतिदिन शाम के समय घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर इस भजन को सुनने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • साधना विधि: शांत चित्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित करें और पूर्ण श्रद्धा के साथ इस भजन का मानसिक या वाचिक जप करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित है, जिन्हें पंजाब और पहाड़ी क्षेत्रों में 'माता चिंतपूर्णी', 'माता वैष्णो देवी', 'माता ज्वाला जी' और 'माता कांगड़ा वाली' के रूप में पूजा जाता है। सनातन ग्रंथों के अनुसार, देवी मां ममता और करुणा की प्रतिमूर्ति हैं।

इस भजन के माध्यम से गायक कुमार संजीव ने उस प्राचीन सूफी और भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाया है, जहां ईश्वर को माता या प्रियतम मानकर पुकारा जाता है। पंजाब की धरती गुरुओं, पीरों और संतों की भूमि रही है, जहां बाबा फरीद, बुल्ले शाह और गुरु नानक देव जी ने भी परमात्मा के प्रति इसी प्रकार के अनन्य समर्पण का संदेश दिया है। यह भजन उसी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का एक आधुनिक और सुरीला रूप है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

पंजाबी देवी भजनों का इतिहास अत्यंत समृद्ध है। पहाड़ों में स्थित सिद्धपीठों (जैसे वैष्णो देवी, चिंतपूर्णी, नैना देवी) की यात्रा के दौरान भक्तों द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक गीतों से ही इन भजनों का उद्गम हुआ है। गायक कुमार संजीव ने इस पारंपरिक लोक-धुनों को आधुनिक संगीत के साथ पिरोकर युवा पीढ़ी के लिए भी सुलभ और आकर्षक बनाया है।

इस भजन की पृष्ठभूमि में वह तड़प और पुकार है जो एक बच्चा अपनी मां के लिए महसूस करता है। जब जीवन में चारों ओर अंधकार दिखाई देता है और कोई मार्ग नहीं सूझता, तब भक्त इस भजन के माध्यम से मां को पुकारता है। कुमार संजीव की अनूठी गायकी और संगीत संयोजन ने इस भजन को हर घर की प्रार्थना का हिस्सा बना दिया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, ठेठ और मधुर पंजाबी है, जो अपनी मिठास के लिए जानी जाती है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'प्रार्थना गीत' या 'विनय पद' है। इसमें निम्नलिखित साहित्यिक तत्वों का सुंदर समन्वय देखा जा सकता है:

  • रूपक अलंकार: 'मेहर दा हथ' (कृपा का हाथ) और 'साडी बेड़ी' (जीवन रूपी नाव) में रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है, जो आध्यात्मिक अर्थ को गहराई प्रदान करता है।
  • लयबद्धता और छंद: भजन की लय अत्यंत सुगम है, जिससे इसे सामूहिक रूप से गाना बहुत आसान हो जाता है। कोरस के साथ जब 'हथ सिर तों ना चक्की दातिए' गाया जाता है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
  • भावुकता: शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि वे सीधे श्रोता के अंतःकरण को झंकृत करते हैं और आंखों में प्रेमाश्रु ला देते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:

जीवन सीख (Life Lesson) भजन का संदर्भ (Bhajan Context) व्यावहारिक जीवन में महत्व (Practical Application)
अहंकार का त्याग "असीं तेरे सहारे जीउंदे हां" यह समझना कि हम अपनी शक्ति से नहीं, बल्कि उस परम चेतना की कृपा से जीवित हैं। इससे मानसिक तनाव और घमंड दूर होता है।
धैर्य और विश्वास "साडी बेड़ी पार लगा दे तू" कठिन परिस्थितियों में घबराने के बजाय ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना कि वे हमें हर संकट से बाहर निकाल लेंगे।
सुख-दुख में समभाव "असीं दुख सुख अपने रोंदे हां" अपने सुख और दुख दोनों को ईश्वर के चरणों में अर्पित कर देना, जिससे जीवन में समता और संतुलन बना रहता है।
कृतज्ञता का भाव "असीं महिमा तेरी गाउंदे हां" ईश्वर द्वारा दिए गए जीवन और आशीर्वाद के प्रति सदैव आभारी रहना और शिकायत करने की प्रवृत्ति को छोड़ना।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

पंजाबी शब्द/वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक संदर्भ
हथ (Hath) हाथ (वरदहस्त) सुरक्षा, आशीर्वाद और मार्गदर्शन का प्रतीक।
चक्की (Chakki) हटाना / उठाना कृपा या ध्यान को हटा लेना। भक्त प्रार्थना करता है कि मां अपना ध्यान उससे न हटाएं।
दातिए (Datiye) देने वाली / दात्री (मां दुर्गा) वह देवी जो बिना मांगे ही अपने बच्चों को सब कुछ प्रदान कर देती हैं।
असीं (Asseen) हम / हम सब भक्तों का सामूहिक और व्यक्तिगत प्रतिनिधित्व।
जीउंदे हां (Jiunde Haan) जीवित हैं जीवन की निरंतरता और प्राण शक्ति का मां की कृपा पर निर्भर होना।
बेड़ी (Bedi) नाव / नैया मनुष्य का जीवन जो इस संसार रूपी भवसागर में तैर रहा है।
अरदास (Ardaas) प्रार्थना / विनती हृदय से की गई विनम्र पुकार।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "हथ सिर तों ना चक्की दातिए, असीं तेरे सहारे जीउंदे हां।"
हे जगत जननी मां! मेरे सिर पर रखा अपना वरदहस्त कभी मत हटाना। हम सभी बच्चे केवल और केवल तुम्हारी ही कृपा और सहारे के बल पर इस संसार में जीवित हैं। तुम्हारे बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं है।

2. "तेरे चरणां च बह के मैया जी, असीं दुख सुख अपने रोंदे हां।"
हे मैया! जब हम तुम्हारे पावन चरणों की शरण में बैठते हैं, तो हमें एक असीम सुरक्षा का अनुभव होता है। हम अपने जीवन के सारे दुख-दर्द और खुशियां तुम्हारे सामने रोकर और हंसकर व्यक्त कर देते हैं, क्योंकि तुम ही हमारी सच्ची हितैषी हो।

3. "तेरी महिमा अपरम्पार मैया, तू जग दी पालनहार मैया।"
हे मां! तुम्हारी महिमा का वर्णन करना किसी भी मनुष्य या देवता के वश में नहीं है, वह अनंत है। तुम ही इस संपूर्ण चराचर जगत का पालन-पोषण करने वाली आदि शक्ति हो।

4. "साडे सिर ते मेहर दा हथ रख दे, असीं दर तेरे ते आउंदे हां।"
हम सब भक्त बड़ी आशा और श्रद्धा के साथ तुम्हारे पावन द्वार पर आए हैं। कृपा करके हमारे सिर पर अपना दया और करुणा का हाथ सदा बनाए रखना।

5. "कोई होर सहारा नहीं साडा, इक तू ही सहारा है मैया।"
इस मतलबी और नश्वर संसार में हमारा तुम्हारे अलावा कोई दूसरा रक्षक या सहारा नहीं है। केवल तुम ही हमारी अंतिम शरण हो।

6. "साडी बेड़ी पार लगा दे तू, असीं आस तेरी ही लाउंदे हां।"
हमारी जीवन रूपी नैया इस संसार के थपेड़ों से डगमगा रही है। हे मां! तुम ही पतवार बनकर इसे पार लगा सकती हो। हम केवल तुमसे ही आस लगाए बैठे हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भावों को और अधिक प्रगाढ़ करने के लिए, देवी भागवत और दुर्गा सप्तशती के निम्नलिखित श्लोकों का संपुट लगाया जा सकता है:

॥ देवी स्तुति ॥

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हो। कल्याणदायिनी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हो, तुम्हें नमस्कार है।


॥ शरणागति मंत्र ॥

शरणामगतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: शरण में आए हुए दीनों एवं पीड़ितों की रक्षा में तत्पर रहने वाली तथा सब की पीड़ा हरने वाली हे देवी नारायणी! तुम्हें नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हथ सिर तों ना चक्की दातिए (Hath Seer to Na Chakki Datiye)
मुख्य देवी-देवता आदिशक्ति मां दुर्गा / माता रानी
मुख्य गायक कुमार संजीव (Kumar Sanjeev)
भाषा पंजाबी (Devotional Punjabi)
भजन का प्रकार देवी भजन / देवी गीत / माता रानी भजन
मुख्य भाव समर्पण भाव (Surrender), वात्सल्य और करुणा
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, माता की चौकी, दैनिक संध्या पूजा
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन के मुख्य गायक कुमार संजीव (Kumar Sanjeev) हैं। उन्होंने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज से इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति (Complete Surrender) है। यह सिखाता है कि मनुष्य को अपने अहंकार को त्यागकर ईश्वर (मां दुर्गा) की इच्छा और कृपा पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि वही हमारी जीवन नैया की खेवनहार हैं।

पंजाबी भाषा में 'दातिए' शब्द का अर्थ 'दात्री' या 'देने वाली' होता है। यहाँ यह शब्द जगत जननी मां दुर्गा के लिए प्रयुक्त हुआ है, जो अपने भक्तों को बिना मांगे ही सुख, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करती हैं।

इस भजन को सुबह या शाम की आरती के समय, विशेषकर नवरात्रि के दिनों में, माता के जागरण या चौकी के दौरान सुनना और गाना अत्यंत फलदायी और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है।

नहीं, यद्यपि यह भजन पंजाबी भाषा में है, लेकिन इसकी सरल शब्दावली और सार्वभौमिक भक्ति भाव के कारण इसे पूरे भारत और विदेशों में भी सभी देवी भक्त अत्यंत श्रद्धा के साथ सुनते हैं। भक्ति की कोई भाषा नहीं होती, केवल भाव प्रधान होता है।

इस पंक्ति का अर्थ है कि भक्त अपनी माता के समक्ष इतना सहज और सुरक्षित महसूस करता है कि वह अपने जीवन के सभी सुख और दुख बिना किसी संकोच के मां के चरणों में बैठकर साझा कर देता है। यह मां और बच्चे के निश्छल प्रेम को दर्शाता है।

इस भजन के श्रवण के साथ आप मां दुर्गा के सिद्ध मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" या "सर्वमंगल मांगल्ये..." श्लोक का जाप कर सकते हैं। इससे साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन के उतार-चढ़ाव में कभी भी विचलित नहीं होना चाहिए। यदि हम सच्चे मन से ईश्वर पर विश्वास रखते हैं, तो वे हर कठिन परिस्थिति में हमारा मार्गदर्शन करते हैं और हमारी रक्षा करते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी विद्वान संपादकीय टीम ने इस भजन के आध्यात्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहलुओं का गहन शोध करने के बाद इसे तैयार किया है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्तों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, श्रद्धा और समर्पण के भाव को जागृत करना है। सनातन परंपरा में कीर्तन और भजन को ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल माध्यम माना गया है, और यह भजन उस मार्ग पर चलने के लिए एक उत्कृष्ट संबल है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: देवी की महिमा और उनके करुणामयी स्वरूप का वर्णन।
  • श्री दुर्गा सप्तशती: शरणागति और रक्षा मंत्रों के शास्त्रीय संदर्भ।
  • पारंपरिक पंजाबी लोक संगीत एवं भजन संग्रह: भजन के मूल बोल और क्षेत्रीय गायन शैलियों का अध्ययन।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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