"छम छम नाचे देखो वीर हनुमना, कहते हैं लोग इसे राम का दीवाना" - यह सुप्रसिद्ध हनुमान भजन सनातन धर्म के श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी संकीर्तन है। यह भजन संकटमोचन श्री हनुमान जी के अनन्य राम-प्रेम, परम भक्ति और दिव्य आनंद की अवस्था को दर्शाता है। जब कोई भक्त अपने आराध्य के प्रेम में लीन होकर सांसारिक लोक-लाज को त्याग देता है, तब वह भक्ति के उस शिखर पर पहुंच जाता है जहां केवल आनंद और समर्पण शेष रहता है। हनुमान जी का यह नृत्य कोई साधारण नृत्य नहीं है, बल्कि यह उनके हृदय में प्रवाहित हो रही निरंतर राम-नाम की रसधारा का बाह्य प्रकटीकरण है। इस लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति व्याख्या, और हनुमान जी की भक्ति के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ दोहा ॥
भकत बड़े बलवान तुम्ही हो सालासर हनुमान तुम्ही हो।
आया हूँ मैं दर पे तुझको आज पुकारा।
पावो में घुंघरू बाँध के नाचे मेरा बजरंग प्यारा ॥
॥ कोरस ॥
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना।
कहेते है लोग इसे राम का दीवाना ॥
॥ अंतरा 1 ॥
पाँवो मे घुंगूरू बाँध के नाचे रामजी का नाम इन्हे बड़ा प्यारा लागे।
राम ने भी देखो इसे खूब पहचाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना ॥
॥ अंतरा 2 ॥
जहाँ जहाँ कीर्तन होता श्री राम का
लगता है पहेरा वहाँ वीर हनुमान का।
राम के चरण मे है इनका टिकना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना ॥
॥ अंतरा 3 ॥
नाच नाच प्रभु श्री राम को रिझवे
‘बनवारी’ रात दिन नाचता ही जाए।
भक्तो मे भक्त बड़ा दुनिया ने माना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना ॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस सुंदर भजन का मूल भाव "दास्य-भक्ति" और "मधुर-भक्ति" के अद्भुत समन्वय पर आधारित है। भजन की शुरुआत एक अत्यंत भावपूर्ण दोहे से होती है, जिसमें भक्त हनुमान जी को संबोधित करते हुए कहता है कि हे सालासर बालाजी, आप भक्तों में सबसे महान और बलवान हैं। मैं आपके द्वार पर आकर आपको पुकार रहा हूँ। मेरे प्यारे बजरंगबली अपने पैरों में घुंघरू बांधकर प्रभु श्री राम की प्रसन्नता के लिए नृत्य कर रहे हैं।
भजन के मुख्य भाग में हनुमान जी के "राम दीवाने" रूप का वर्णन है। जब हनुमान जी प्रभु श्री राम के नाम का संकीर्तन सुनते हैं, तो वे सुध-बुध खोकर नाचने लगते हैं। संसार उन्हें पागल या दीवाना कहता है, लेकिन यह दीवानगी सांसारिक विषयों के लिए नहीं, बल्कि सच्चिदानंद प्रभु श्री राम के लिए है। प्रभु श्री राम भी अपने इस अनन्य भक्त की निष्काम भक्ति को भली-भांति पहचानते हैं और उन्हें अपने हृदय से लगाकर रखते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए ज्ञान और बल के साथ-साथ हृदय में बालक जैसी सरलता और निष्कपट प्रेम का होना अत्यंत आवश्यक है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल मनोरंजन या सामान्य गायन के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक विज्ञान और साधना पद्धति छिपी हुई है:
- राम-नाम की महिमा: भजन स्पष्ट करता है कि हनुमान जी को "राम नाम" से बढ़कर इस ब्रह्मांड में कुछ भी प्रिय नहीं है। राम-नाम ही उनकी ऊर्जा और आनंद का स्रोत है।
- उपस्थिति का विश्वास: यह सनातन मान्यता है कि जहां भी भगवान राम का संकीर्तन या सुंदरकांड पाठ होता है, वहां हनुमान जी अदृश्य रूप से उपस्थित रहते हैं। यह भजन इस विश्वास को और सुदृढ़ करता है।
- अहंकार का विसर्जन: पैरों में घुंघरू बांधकर नाचना इस बात का प्रतीक है कि हनुमान जी ने अपने समस्त ऐश्वर्य, बल और ज्ञान के अहंकार को प्रभु के चरणों में समर्पित कर दिया है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन का गायन वैसे तो कभी भी किया जा सकता है, क्योंकि भगवान की भक्ति के लिए कोई समय वर्जित नहीं है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है:
प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की विशेष पूजा के समय इस भजन को सामूहिक रूप से गाना चाहिए। हनुमान जयंती, राम नवमी, और सुंदरकांड के समापन के अवसर पर इस भजन को ढोलक, मंजीरे और झांझ के साथ ऊंचे स्वर में गाने से वातावरण अत्यंत पवित्र और ऊर्जावान हो जाता है। गाते समय साधक को अपने मन में यह भाव रखना चाहिए कि वह स्वयं हनुमान जी के सम्मुख बैठकर प्रभु राम की महिमा का गान कर रहा है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी को कलयुग का जाग्रत देव माना गया है, जो अपने भक्तों की पुकार पर तुरंत दौड़े चले आते हैं। इस भजन में उनके साथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का भी निरंतर स्मरण किया गया है। हनुमान जी की भक्ति का स्वरूप ऐसा है कि वे राम जी के बिना अधूरे हैं और राम जी अपने भक्तों के कार्यों के लिए हनुमान जी पर निर्भर रहते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त और भगवान के इसी अनूठे संबंध को दर्शाया गया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन के रचयिता प्रसिद्ध लोक भजन गायक और लेखक 'बनवारी' जी हैं। उन्होंने अपने भजनों में हमेशा सरल शब्दों का प्रयोग किया है ताकि आम जनमानस भी ईश्वर की भक्ति से आसानी से जुड़ सके। इस भजन की पृष्ठभूमि राजस्थान के सुप्रसिद्ध धाम "सालासर बालाजी" से भी प्रेरित है, जहां हनुमान जी दाढ़ी-मूंछ वाले विग्रह के रूप में विराजमान हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। लेखक ने हनुमान जी के इसी कृपालु और भक्तवत्सल रूप को शब्दों में पिरोया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोक-शैली से प्रभावित हिंदी है। इसमें ब्रजभाषा और राजस्थानी लोक-संस्कृति का पुट भी देखने को मिलता है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक "गेय पद" है, जिसे बहुत ही सुंदर ताल और लय में पिरोया गया है। "छम छम" जैसे ध्वन्यात्मक शब्दों का प्रयोग भजन में एक जीवंत दृश्य उत्पन्न करता है, जिससे श्रोता की आंखों के सामने हनुमान जी के नृत्य का चित्र सजीव हो उठता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें दैनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख देता है:
प्रथम सीख यह है कि सच्ची भक्ति में किसी भी प्रकार का संकोच या लोक-लाज का भय नहीं होना चाहिए। जब हम ईश्वर की शरण में जाएं, तो पूरी तरह से समर्पित हो जाएं। दूसरी सीख यह है कि सेवा भाव ही सबसे बड़ा धर्म है। हनुमान जी इतने शक्तिशाली होने के बाद भी स्वयं को राम जी का दास ही मानते हैं। यह विनम्रता हमें अपने जीवन में अपनानी चाहिए ताकि हम सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी जमीन से जुड़े रहें।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| वीर हनुमना | पराक्रमी हनुमान जी | बल और बुद्धि के प्रदाता |
| राम का दीवाना | श्री राम के प्रेम में लीन | परम भक्ति की पराकाष्ठा |
| घुंघरू | पैरों में बांधे जाने वाले वाद्य | समर्पण और आनंदमय नृत्य का प्रतीक |
| कीर्तन | ईश्वर के नामों का सामूहिक गान | कलयुग में मोक्ष प्राप्ति का सरल साधन |
| रिझवे | प्रसन्न करना / रिझाना | भक्त द्वारा भगवान को प्रेम से मनाना |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
1. "भकत बड़े बलवान तुम्ही हो सालासर हनुमान तुम्ही हो..."
हे हनुमान जी, आप सालासर धाम में विराजमान हैं और आप ही इस संसार के सबसे बलवान भक्त हैं। आपकी शरण में आने वाले भक्त को कभी कोई भय नहीं सताता।
2. "पाँवो मे घुंगूरू बाँध के नाचे रामजी का नाम इन्हे बड़ा प्यारा लागे..."
हनुमान जी अपने पैरों में घुंघरू बांधकर नाच रहे हैं क्योंकि उन्हें प्रभु श्री राम का नाम अत्यंत प्रिय लगता है। राम-नाम सुनते ही उनका रोम-रोम पुलकित हो उठता है।
3. "जहाँ जहाँ कीर्तन होता श्री राम का, लगता है पहेरा वहाँ वीर हनुमान का..."
संसार में जहां कहीं भी भगवान राम का संकीर्तन होता है, वहां हनुमान जी अदृश्य रूप से उपस्थित होकर उस स्थान की रक्षा करते हैं और कीर्तन का आनंद लेते हैं।
4. "नाच नाच प्रभु श्री राम को रिझवे, ‘बनवारी’ रात दिन नाचता ही जाए..."
हनुमान जी अपने नृत्य से प्रभु राम को प्रसन्न कर रहे हैं। कवि बनवारी कहते हैं कि हनुमान जी की यह भक्ति अनवरत है, वे दिन-रात अपने आराध्य की सेवा और संकीर्तन में लीन रहते हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
हनुमान जी की प्रसन्नता के लिए भजन के साथ-साथ इस प्रसिद्ध श्लोक का पाठ भी अत्यंत फलदायी माना जाता है:
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
इसके अतिरिक्त, प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | छम छम नाचे देखो वीर हनुमना |
| मुख्य आराध्य देव | श्री हनुमान जी एवं भगवान श्री राम |
| रचयिता / कवि | पारंपरिक / बनवारी जी |
| भजन की भाषा | सरल हिंदी (लोक शैली) |
| मुख्य रस / भाव | भक्ति रस, दास्य भाव, हर्षोल्लास |
| उपयुक्त अवसर | मंगलवार पूजा, हनुमान जयंती, सुंदरकांड, राम नवमी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "छम छम नाचे वीर हनुमान" भजन के मुख्य रचयिता कौन हैं?
उत्तर: इस भजन के रचयिता सुप्रसिद्ध भजन लेखक और गायक 'बनवारी' जी हैं, जिन्होंने हनुमान जी की भक्ति को बहुत ही सरल और मधुर शब्दों में प्रस्तुत किया है।
प्रश्न 2: हनुमान जी को "राम का दीवाना" क्यों कहा गया है?
उत्तर: हनुमान जी का संपूर्ण जीवन, श्वास और अस्तित्व केवल भगवान राम के नाम और सेवा के लिए समर्पित है। उनके हृदय में राम-नाम के अतिरिक्त अन्य कोई कामना नहीं है, इसी अनन्य प्रेम के कारण उन्हें राम का दीवाना कहा गया है।
प्रश्न 3: क्या सचमुच जहां राम कीर्तन होता है, वहां हनुमान जी आते हैं?
उत्तर: हां, सनातन धर्म ग्रंथों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को चिरंजीवी होने का वरदान प्राप्त है। वे वहां अवश्य उपस्थित होते हैं जहां पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान राम का संकीर्तन या कथा होती है।
प्रश्न 4: इस भजन को गाने से क्या लाभ मिलते हैं?
उत्तर: इस भजन के नियमित श्रवण और गायन से मन का भय दूर होता है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, और साधक के भीतर हनुमान जी की कृपा से भक्ति और शक्ति का उदय होता है।
प्रश्न 5: सालासर हनुमान जी का मंदिर कहाँ स्थित है?
उत्तर: सालासर बालाजी का सुप्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के चुरू जिले में स्थित है। यह देश के सबसे जाग्रत और पूजनीय हनुमान मंदिरों में से एक है।
प्रश्न 6: इस भजन को किस राग या ताल में गाया जाता है?
उत्तर: यह भजन मुख्य रूप से तीव्र और आनंदमयी लोक धुनों पर आधारित है, जिसे कहवा या दादरा ताल के साथ बहुत ही उत्साहपूर्वक गाया जाता है।
प्रश्न 7: हनुमान जी के पैरों में घुंघरू बांधने का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?
उत्तर: घुंघरू बांधना इस बात का प्रतीक है कि भक्त ने अपनी स्वतंत्रता और इच्छाओं को भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया है और वह केवल अपने आराध्य को रिझाने के लिए ही कर्म कर रहा है।
प्रश्न 8: हनुमान जी की पूजा के लिए कौन सा दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है?
उत्तर: हनुमान जी की पूजा और व्रत के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इन दिनों में हनुमान जी की आराधना करने से शनि देव के कुप्रभावों से भी मुक्ति मिलती है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की व्याख्या और इसके पीछे के आध्यात्मिक रहस्यों को विभिन्न प्रामाणिक ग्रंथों जैसे रामचरितमानस, वाल्मीकि रामायण और सालासर धाम की पारंपरिक लोक कथाओं के आधार पर संकलित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, त्रुटिहीन और उच्च गुणवत्ता वाली धार्मिक सामग्री पहुंचाना है ताकि वे अपनी संस्कृति और भक्ति परंपरा से गहराई से जुड़ सकें।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण - सुंदरकांड प्रसंग
- श्रीरामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास
- सालासर बालाजी मंदिर ट्रस्ट की पारंपरिक संकीर्तन पुस्तिकाएं
- भक्ति संप्रदाय के प्रमुख संतों के प्रवचन और व्याख्यान
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