Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मैंने तेरे भरोसे हनुमान नाव पानी में छोड़ दई लिरिक्स (Maine Tere Bharose Hanuman Naav Paani Me Chhod Di Lyrics in Hindi) - by पं श्री चंद्रभूषण जी पाठक

हनुमान जी पर आधारित इस भजन का प्रमुख उद्देश्य भक्ति और समर्पण के माध्यम से जीवन के संकटों को पार करना है।

प्रस्तावना एवं परिचय

हनुमान भक्ति का अद्भुत प्रतीक

हनुमान जी के प्रति असीम श्रद्धा और विश्वास को दर्शाने वाला भजन, जीवन के संकटों में साहस प्रदान करता है।

मैंने तेरे भरोसे हनुमान नाव पानी में छोड़ दई।नाव पानी में छोड़ दई।नाव पानी में छोड़ दई।काहे की नाव बनाई, काहे की पतवार बनाई, काहे की जंजीर नाव पानी में छोड़ दई।लकड़ी की नाव बनाई, चंदन की पतवार बनाई, लोहे की जंजीर नाव पानी में छोड़ दई।कौन नाव में बैठने वाले, कौन नाव को खेवन हारे, कौन लगावे बेड़ा पार, नाव पानी में छोड़ दई।सीता माता बैठन वारी, लक्ष्मण भैया खेवन हार, राम लगावे बेड़ा पार, नाव पानी में छोड़ दई। मैंने तेरे भरोसे हनुमान नाव पानी में छोड़ दई।नाव पानी में छोड़ दई।नाव पानी में छोड़ दई।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय विश्वास और समर्पण है। भजन में गायक कहता है कि उसने अपनी सभी अपेक्षाएँ एवं इच्छाएँ भगवान हनुमान के भरोसे छोड़ दी हैं, जैसे 'नाव पानी में छोड़ दई'। यहाँ नाव का प्रतीक हनुमान जी की कृपा से आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाता है। गायक यह बताता है कि भक्ति में आत्मसमर्पण बहुत महत्वपूर्ण है। वह कहता है कि उसने क्यूं पतवार और जंजीर बनाई, जब वह हनुमान जी की कृपा पर निर्भर कर चुका है। यह हमें यह संदेश भी देता है कि हम अपने जीवन का पुल—जो कभी-कभी बेहद कठिन महसूस होता है—हनुमान जी की मदद से पार कर सकते हैं।

भजन भावनात्मक रूप से गहन है, क्योंकि यह भक्त की हृदय की गहराइयों से उठी पुकार को दर्शाता है। वह कभी भी अपनी मेहनत और प्रयासों की चिंता न करते हुए हनुमान जी के भरोसे अपनी नाव को जल में छोड़ देता है। इसी भाव से भक्त इस बात को स्पष्ट करता है कि केवल तुलसी के राम नाम का स्मरण और हनुमान जी की भक्ति ही व्यक्ति को हर स्थिति में ताकत देती है। गायक के शब्दों में सीता माता और लक्ष्मण का उल्लेख भक्ति और विश्वास को और गहरा बनाता है, यह दिखाते हुए कि भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति के लिए भी हनुमान जी महत्वपूर्ण हैं।

इस भजन का एक और महत्वपूर्ण तत्व हनुमान जी के प्रति भक्ति मार्ग का पीछा करना है। हनुमान जी को एक सच्चे भक्त माना गया है जो संकट के समय में भक्त की सहायता करते हैं। यहाँ पर भक्त ने भक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प किया है और अपनी हर कठिनाई का समाधान हनुमान जी से प्राप्त करने का आश्वासन भी। यह भक्ति का अति साधारण, लेकिन गहरा मार्ग है, जो हर भक्त से अपेक्षा करता है कि वह अपने अज्ञान और भय को त्याग कर भगवान की शरण में आए। इस भजन का पाठ करने से भक्त को आंतरिक शांति, साहस और भक्ति का अनुभव होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन हिन्दू धर्म के धरोहरों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पौराणिक कथाओं में, भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन रामायण में किया गया है। हनुमान जी को संकट के समय में सहायता करने वाले भक्त के रूप में माना जाता है। उनका एक विशेष गुण है—उनका असीम साहस और उदारता। भजन में सीता माता और राम जी का उल्लेख यह दर्शाता है कि कैसे भक्त अपने इष्ट देव की कृपा से हर संकट को पार कर सकता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि धैर्य और भक्ति के साथ हर बाधा को पार किया जा सकता है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। इस भजन का जप या गायन करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक बल में वृद्धि होती है। यह भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और साहस प्रदान करता है, साथ ही उनके जीवन में संकटों का सामना करने की क्षमता को भी बढ़ाता है। हनुमान जी की भक्ति से हृदय में आंतरिक संतोष और सुरक्षा का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या शाम को आरती करते समय करना आदर्श होता है। पूजा के समय एक दीपक जलाना, फूल और अगरबत्ती चढ़ाना, और हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष बैठकर ध्यान करना चाहिए। ध्यान अवस्था में बैठकर भजन का पाठ करें और मन में हनुमान जी की आराधना करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी की भक्ति का महत्व क्या है?

हनुमान जी की भक्ति हमारे जीवन में साहस, धैर्य और संकटों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है। उनकी आराधना से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

इस भजन को कौन गाता है?

यह भजन पं श्री चंद्रभूषण जी पाठक द्वारा गाया गया है, जो कि भक्तिमय गीतों में विशेष पहचान रखते हैं।

क्या यह भजन विशेष अवसर पर गाया जाता है?

यह भजन किसी भी धार्मिक अवसर या संकट के समय गाया जा सकता है, क्योंकि यह आत्मविश्वास और शक्ति का संचार करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (1)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

ह
हनुमान भक्ति का अद्भुत प्रतीक हनुमान जी के प्रति असीम श्रद्धा और विश्वास को दर्शाने वाला भजन, जीवन के संकटों में साहस प्रदान करता है। मैंने तेरे भरोसे हनुमान नाव पानी में छोड़ दई।नाव पानी में छोड़ दई 01 Sep 2026

हनुमान भक्ति का अद्भुत प्रतीक
हनुमान जी के प्रति असीम श्रद्धा और विश्वास को दर्शाने वाला भजन, जीवन के संकटों में साहस प्रदान करता है।

मैंने तेरे भरोसे हनुमान नाव पानी में छोड़ दई।नाव पानी में छोड़ दई।नाव पानी में छोड़ दई।काहे की नाव बनाई, काहे की पतवार बनाई, काहे की जंजीर नाव पानी में छोड़ दई।लकड़ी की नाव बनाई, चंदन की पतवार बनाई, लोहे की जंजीर नाव पानी में छोड़ दई।कौन नाव में बैठने वाले, कौन नाव को खेवन हारे, कौन लगावे बेड़ा पार, नाव पानी में छोड़ दई।सीता माता बैठन वारी, लक्ष्मण भैया खेवन हार, राम लगावे बेड़ा पार, नाव पानी में छोड़ दई। मैंने तेरे भरोसे हनुमान नाव पानी में छोड़ दई।नाव पानी में छोड़ दई।नाव पानी में छोड़ दई।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
इस भजन का मुख्य विषय विश्वास और समर्पण है। भजन में गायक कहता है कि उसने अपनी सभी अपेक्षाएँ एवं इच्छाएँ भगवान हनुमान के भरोसे छोड़ दी हैं, जैसे 'नाव पानी में छोड़ दई'। यहाँ नाव का प्रतीक हनुमान जी की कृपा से आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाता है। गायक यह बताता है कि भक्ति में आत्मसमर्पण बहुत महत्वपूर्ण है। वह कहता है कि उसने क्यूं पतवार और जंजीर बनाई, जब वह हनुमान जी की कृपा पर निर्भर कर चुका है। यह हमें यह संदेश भी देता है कि हम अपने जीवन का पुल—जो कभी-कभी बेहद कठिन महसूस होता है—हनुमान जी की मदद से पार कर सकते हैं।

भजन भावनात्मक रूप से गहन है, क्योंकि यह भक्त की हृदय की गहराइयों से उठी पुकार को दर्शाता है। वह कभी भी अपनी मेहनत और प्रयासों की चिंता न करते हुए हनुमान जी के भरोसे अपनी नाव को जल में छोड़ देता है। इसी भाव से भक्त इस बात को स्पष्ट करता है कि केवल तुलसी के राम नाम का स्मरण और हनुमान जी की भक्ति ही व्यक्ति को हर स्थिति में ताकत देती है। गायक के शब्दों में सीता माता और लक्ष्मण का उल्लेख भक्ति और विश्वास को और गहरा बनाता है, यह दिखाते हुए कि भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति के लिए भी हनुमान जी महत्वपूर्ण हैं।

इस भजन का एक और महत्वपूर्ण तत्व हनुमान जी के प्रति भक्ति मार्ग का पीछा करना है। हनुमान जी को एक सच्चे भक्त माना गया है जो संकट के समय में भक्त की सहायता करते हैं। यहाँ पर भक्त ने भक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प किया है और अपनी हर कठिनाई का समाधान हनुमान जी से प्राप्त करने का आश्वासन भी। यह भक्ति का अति साधारण, लेकिन गहरा मार्ग है, जो हर भक्त से अपेक्षा करता है कि वह अपने अज्ञान और भय को त्याग कर भगवान की शरण में आए। इस भजन का पाठ करने से भक्त को आंतरिक शांति, साहस और भक्ति का अनुभव होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
यह भजन हिन्दू धर्म के धरोहरों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पौराणिक कथाओं में, भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन रामायण में किया गया है। हनुमान जी को संकट के समय में सहायता करने वाले भक्त के रूप में माना जाता है। उनका एक विशेष गुण है—उनका असीम साहस और उदारता। भजन में सीता माता और राम जी का उल्लेख यह दर्शाता है कि कैसे भक्त अपने इष्ट देव की कृपा से हर संकट को पार कर सकता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि धैर्य और भक्ति के साथ हर बाधा को पार किया जा सकता है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। इस भजन का जप या गायन करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक बल में वृद्धि होती है। यह भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और साहस प्रदान करता है, साथ ही उनके जीवन में संकटों का सामना करने की क्षमता को भी बढ़ाता है। हनुमान जी की भक्ति से हृदय में आंतरिक संतोष और सुरक्षा का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या शाम को आरती करते समय करना आदर्श होता है। पूजा के समय एक दीपक जलाना, फूल और अगरबत्ती चढ़ाना, और हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष बैठकर ध्यान करना चाहिए। ध्यान अवस्था में बैठकर भजन का पाठ करें और मन में हनुमान जी की आराधना करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हनुमान जी की भक्ति का महत्व क्या है?
हनुमान जी की भक्ति हमारे जीवन में साहस, धैर्य और संकटों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है। उनकी आराधना से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
इस भजन को कौन गाता है?
यह भजन पं श्री चंद्रभूषण जी पाठक द्वारा गाया गया है, जो कि भक्तिमय गीतों में विशेष पहचान रखते हैं।
क्या यह भजन विशेष अवसर पर गाया जाता है?
यह भजन किसी भी धार्मिक अवसर या संकट के समय गाया जा सकता है, क्योंकि यह आत्मविश्वास और शक्ति का संचार करता है।

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