Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं ना दूजा कोई लिरिक्स (Tere Dar ko Mai Chhod Kaha Jau Na Duja Koi Lyrics in Hindi) - Lakhvir Singh Lakkha

तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं भजन से भगवान की कृपा की प्राप्ति और अद्भुत भक्ति का अनुभव करें।

प्रस्तावना एवं परिचय

परमकृपालु का आश्रय: तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं

यह भजन भक्ति भाव से भरा है, इसे गाकर भगवान के दर पर शरण लेने का गुणगान करें।

तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं ना दूजा कोई द्वार ना दिखे तुझ बिन जीना भी क्या जीना तेरा दर ही मेरा ठिकाना हो तेरे दर को मै....||तेरा दर्शन जब मै पाऊ दुनिया के गम भूल ही जाऊ हो तेरे दर को मै....||इतनी कृपा बस हम पर कर दे नाम तेरा गाऊ मुझे यही वर दे हो तेरे दर को मै....||
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त अपनी भक्ति का अभिव्यक्ति करते हुए कहते हैं कि वे भगवान के दर को छोड़कर कहीं और नहीं जा सकते। "तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं ना दूजा कोई" से स्पष्ट है कि भक्ति में वह सुरंगित हैं, जहाँ भगवान के अलावा अन्य किसी भी विकल्प को अस्वीकार किया जाता है। यह भावाकांस है जिसमें वे प्रभु को अपना एकमात्र सहारा मानते हैं। अगली पंक्ति में, "तुझ बिन जीना भी क्या जीना" से दर्शाता है कि प्राणी के लिए जीवन का वास्तविक अर्थ केवल ईश्वर के साथ रहना है। यह भजन सच्चाई में भगवान को अपना सबकुछ मानने की प्रेरणा देता है, जहाँ भक्त का निस्वार्थ प्रेम प्रकट होता है।

आध्यात्मिक संदर्भ में देखें तो यह भजन सच्चे भक्ति मार्ग की एक ज्वलंत मिसाल है। जब भक्त कहता है, "तेरा दर्शन जब मै पाऊ, दुनिया के गम भूल ही जाऊ", यह दर्शाता है कि जब भक्त अपने प्रिय ईश्वर के दर्शन करता है, तो सारी सांसारिक चिंता और दुःख क्षणभर में मिट जाते हैं। यहाँ भक्त की श्रद्धा और भक्ति की गहराई का प्रमाण मिलता है। भक्त की आत्मा इस भजन में भगवान के प्रति तड़प और अर्पण का भाव दर्शाते हुए एक गहन प्रेम स्वरूप में लिपटी हुई है।

यह भजन भक्ति के गुरु सिद्धांतों की भी व्याख्या करता है, जहाँ भक्त अपने ज्ञान और अनुभव से यह मानता है कि सच्चा सुख केवल ईश्वर की कृपा में ही है। भक्ति मार्ग की कठिनाइयों के बावजूद, भक्त की यह आस्था उन्हें स्थिरता और साहस प्रदान करती है। "इतनी कृपा बस हम पर कर दे" प्रार्थना बताती है कि भक्त ईश्वर से कृपा की याचना करता है, और इस धरती पर उसकी कृपा के बिना सब अधूरा लगता है। यह दिखाता है कि भक्ति का मार्ग क्या है; यह प्यार, समर्पण और असीम विश्वास का एक अनंत यात्रा है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

पारंपरिक भारतीय पवित्र ग्रंथों में भक्ति का महत्व अत्यधिक होता है। भक्तिपाठ, जैसे कि यह भजन, पुराणों में साक्षात दृष्टांत के रूप में देखे जाते हैं। महाभारत व रामायण में यह स्पष्ट है कि संत और भक्त जब हृदय से अपने ईश्वर का गुणगान करते हैं, तब उन्हें अपनी जीवन यात्रा में सच्चा उदासीनता और अनुकम्पा प्राप्त होती है। भक्तिपाठ से निश्चित रूप से आत्मा को शांति एवं संतोष की प्राप्ति होती है, जो व्यक्ति को अंततः मोक्ष की ओर ले जाती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। नियमित रूप से यह भजन गाने से मन में श्रद्धा और भक्ति की भावना जागृत होती है, जिससे आत्मा को सच्चा सुख और शांति मिलती है। यह भक्त को हर प्रकार के मानसिक और शारीरिक तनाव से दूर करने में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का साधना सुबह या शाम के समय करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसे गाने के पहले एक दीपक जलाना, फूल अर्पित करना, और ध्यान की मुद्रा में बैठना चाहिए। भक्त को सकारात्मक मनोवृत्ति और अटूट श्रद्धा के साथ इसे गाना चाहिए, जिससे साधना का फल उत्तम मिल सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन को किसी विशेष पर्व पर गाना उचित है?

यह भजन किसी भी धार्मिक पर्व या दिन के विशेष अवसर पर गाया जा सकता है, क्योंकि यह भक्ति और अपने प्रिय के प्रति आत्मसमर्पण का प्रतीक है।

क्या यह भजन केवल व्यक्तिगत साधना के लिए है?

नहीं, इसे सामूहिक स्वरूप में भी गाया जा सकता है, जिससे सामूहिक भक्ति और एकता की भावना का अनुभव होता है।

क्या इसे सुनने से मानसिक शांति मिल सकती है?

हां, नियमित रूप से इस भजन को सुनकर मानसिक शांति और स्थिरता का अनुभव किया जा सकता है। यह मन को नकारात्मकता से दूर करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!