Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

प्रभु दया करो भजन लिरिक्स (Prabhu Daya Karo Lyrics in Hindi) - Sonu Singh Sameer Anjaan Siddhant Madhav

गायक सोनू सिंह का भावपूर्ण भजन 'प्रभु दया करो' (Prabhu Daya Karo Lyrics)। पढ़ें सम्पूर्ण भजन के लिरिक्स, हिंदी भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व Bhaktilok पर।

प्रभु दया करो भजन लिरिक्स (Prabhu Daya Karo Lyrics in Hindi) भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रति पूर्ण समर्पण, शरणागति और करुणा की याचना का एक अत्यंत भावपूर्ण और मधुर भजन है। इस भजन को सुप्रसिद्ध गायक सोनू सिंह ने अपनी सुमधुर आवाज में गाया है, जबकि इसके हृदयस्पर्शी शब्दों की रचना महान गीतकार समीर अंजान ने की है और इसे संगीत से सजाया है सिद्धांत माधव ने। यह भजन जीवात्मा की उस व्याकुलता को दर्शाता है, जब वह संसार के मायाजाल से थककर अपने परमपिता परमात्मा के चरणों में शरण पाना चाहती है। सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा में इस भजन का विशेष स्थान है, क्योंकि इसके बोल सीधे हृदय को छूते हैं और साधक के भीतर भक्ति, वैराग्य और समर्पण का भाव जाग्रत करते हैं। इस लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, उसका विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी शास्त्रीय मान्यताओं का सविस्तार वर्णन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

प्रभु दया करो, प्रभु दया करो

प्रभु दया करो, प्रभु दया करो,
अपने चरणों की धूल बना लो, प्रभु दया करो।
भव सागर में नैया डोले, पार लगा दो प्रभु,
प्रभु दया करो, प्रभु दया करो...

तुम बिन मेरा कौन है जग में, तुम ही मीत हमारे,
भटक रहा हूँ अंधियारे में, दे दो हाथ सहारे।
मन मंदिर में ज्योति जला दो, राह दिखा दो प्रभु,
प्रभु दया करो, प्रभु दया करो...

काम क्रोध मद लोभ ने घेरा, मैं हूँ अति अज्ञानी,
शरण तिहारी आया स्वामी, करुणा करो कल्याणी।
पाप हमारे सब हर लीजे, अपना बना लो प्रभु,
प्रभु दया करो, प्रभु दया करो...

राधा रमन हे दीन दयाला, तुम हो पालनहारे,
सोनू गाए महिमा तुम्हारी, समीर शरण तिहारे।
भक्ति का वरदान दे दो, मुक्ति दिला दो प्रभु,
प्रभु दया करो, प्रभु दया करो...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन जीवात्मा और परमात्मा के बीच के शाश्वत संबंध को उजागर करता है। भजन की शुरुआत ही 'प्रभु दया करो' की पुकार से होती है, जो भक्त की दीनता और भगवान की दयालुता को प्रदर्शित करती है। भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि हे प्रभु! मुझे अपने चरणों की धूल बना लो। चरणों की धूल बनने का अर्थ है अपने अहंकार को पूरी तरह से समाप्त कर देना और भगवान के चरणों में विलीन हो जाना।

भजन के अगले भाग में भक्त संसार को एक विशाल और अशांत सागर (भव सागर) के रूप में देखता है, जहाँ उसकी जीवन रूपी नैया डगमगा रही है। इस संसार रूपी सागर से पार उतरने का एकमात्र साधन ईश्वर की कृपा ही है। भक्त स्वीकार करता है कि इस भौतिक संसार में ईश्वर के अतिरिक्त उसका कोई सच्चा मित्र या रक्षक नहीं है। वह अज्ञानता के अंधकार में भटक रहा है और भगवान से प्रार्थना करता है कि वे अपना वरदहस्त बढ़ाकर उसे सहारा दें और उसके मन के मंदिर में ज्ञान की ज्योति जलाकर उसे सही मार्ग दिखाएं।

आगे भक्त अपनी कमजोरियों को स्वीकार करता है। वह कहता है कि वह काम, क्रोध, मद और लोभ जैसे विकारों से घिरा हुआ है और अत्यंत अज्ञानी है। वह अपनी समस्त बुराइयों और पापों को भगवान के चरणों में समर्पित कर उनसे क्षमा की याचना करता है। अंत में, वह भगवान श्री कृष्ण (राधा रमन) को पुकारता है और उनसे भक्ति तथा मुक्ति का वरदान मांगता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से अलग और विशेष बनाती हैं:

  • शरणागति का भाव: यह भजन पूरी तरह से शरणागति (प्रपत्ति) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसे श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने भक्ति का सर्वोच्च मार्ग बताया है।
  • सरल और मर्मस्पर्शी भाषा: समीर अंजान के लिखे शब्द इतने सरल और गहरे हैं कि कोई भी सामान्य व्यक्ति इनसे जुड़ाव महसूस कर सकता है।
  • मधुर संगीत और गायन: सोनू सिंह की भावपूर्ण आवाज और सिद्धांत माधव का शास्त्रीय व आधुनिक संगीत का मिश्रण श्रोता को ध्यान की अवस्था में ले जाता है।
  • मनोवैज्ञानिक शांति: इस भजन का निरंतर श्रवण और कीर्तन करने से मन को असीम शांति मिलती है और मानसिक तनाव दूर होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए हर समय शुभ है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:

  • ब्रह्ममुहूर्त या संध्या काल: सुबह सूर्योदय से पूर्व या शाम को आरती के समय इस भजन का गायन करने से घर का वातावरण सकारात्मक और पवित्र बनता है।
  • एकांत साधना: शांत स्थान पर बैठकर, आंखें बंद कर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी का ध्यान करते हुए इस भजन को सुनने से अंतर्मन शुद्ध होता है।
  • सामूहिक संकीर्तन: सत्संग, मंदिर या पारिवारिक पूजा के अवसरों पर सामूहिक रूप से इस भजन को गाने से सामूहिक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण के 'राधा रमन' स्वरूप को समर्पित है। राधा रमन का अर्थ है - वे जो श्री राधा रानी के हृदय में रमण करते हैं। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण की युगल सरकार की उपासना को सर्वोपरि माना गया है। इस भजन में भक्त उसी युगल छवि से दया की भीख मांग रहा है। संतों के अनुसार, जब तक राधा रानी की कृपा नहीं होती, तब तक कृष्ण की प्राप्ति असंभव है, इसलिए इस भजन में करुणा की देवी राधा जी और दयालु कृष्ण दोनों की संयुक्त सत्ता से प्रार्थना की गई है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन का निर्माण आधुनिक काल में हुआ है, लेकिन इसकी आत्मा प्राचीन भक्ति आंदोलन से प्रेरित है। इसके रचनाकार समीर अंजान भारतीय संगीत उद्योग के एक अत्यंत प्रतिष्ठित गीतकार हैं, जिन्होंने हजारों लोकप्रिय गीतों की रचना की है। इस भजन में उन्होंने अपनी लेखनी को लौकिक प्रेम से हटाकर अलौकिक और दिव्य प्रेम की ओर मोड़ा है। संगीतकार सिद्धांत माधव ने इसमें रागों की ऐसी संरचना की है जो मन को शांत और अंतर्मुखी बनाती है। गायक सोनू सिंह ने अपनी गायकी में शास्त्रीय शुद्धता और भक्ति रस का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें ब्रजभाषा और संस्कृत के तत्सम शब्दों का सुंदर पुट है। जैसे 'भव सागर', 'राधा रमन', 'दीन दयाला' आदि शब्द भजन को एक शास्त्रीय गरिमा प्रदान करते हैं। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'प्रार्थना गीत' या 'विनय के पद' की श्रेणी में आता है, जिसमें भक्त अपनी दीनता और भगवान की महानता का वर्णन करता है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग देखने को मिलता है, जैसे 'मन मंदिर' में रूपक अलंकार है, जहाँ मन को ही मंदिर मान लिया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि जीवन जीने के महत्वपूर्ण संदेश भी देता है:

  • अहंकार का त्याग: जब तक मनुष्य के भीतर 'मैं' का भाव रहता है, तब तक वह ईश्वर से दूर रहता है। चरणों की धूल बनने की कामना अहंकार के विसर्जन का प्रतीक है।
  • आत्म-अवलोकन: अपनी कमियों (काम, क्रोध, लोभ) को स्वीकार करना ही सुधार की पहली सीढ़ी है। भक्त अपनी कमजोरियों को छुपाता नहीं, बल्कि भगवान के सामने प्रकट करता है।
  • सच्चा मित्र ईश्वर है: संसार के रिश्ते नश्वर और स्वार्थ पर आधारित हो सकते हैं, परंतु ईश्वर ही एकमात्र ऐसा 'मीत' है जो कभी साथ नहीं छोड़ता।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
भव सागर संसार रूपी समुद्र जन्म और मृत्यु का चक्र जिसमें जीवात्मा फंसी रहती है।
मीत मित्र / सखा ईश्वर को अपना परम सखा मानना।
मद अहंकार / घमंड वह विकार जो मनुष्य को सत्य देखने से रोकता है।
राधा रमन श्री कृष्ण राधा जी को आनंदित करने वाले परमेश्वर।
दीन दयाला गरीबों और असहायों पर दया करने वाले ईश्वर का वह स्वरूप जो शरणागत की रक्षा करता है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"प्रभु दया करो, प्रभु दया करो, अपने चरणों की धूल बना लो..."
हे परमेश्वर! मुझ पर अपनी असीम अनुकंपा बरसाइए। मुझे अपने श्रीचरणों में वह स्थान दीजिए जो आपके चरणों की धूल को प्राप्त है, ताकि मैं सदैव आपके सानिध्य में रह सकूं।

"भव सागर में नैया डोले, पार लगा दो प्रभु..."
यह संसार दुखों और कठिनाइयों का एक विशाल महासागर है, जिसमें मेरी जीवन रूपी नौका डगमगा रही है। हे प्रभु! आप ही इसके खेवनहार बनिए और मुझे सुरक्षित किनारे पर पहुंचाइए।

"तुम बिन मेरा कौन है जग में, तुम ही मीत हमारे..."
इस नश्वर संसार में आपके अतिरिक्त मेरा कोई वास्तविक रक्षक या हितैषी नहीं है। आप ही मेरे सच्चे सखा और मार्गदर्शक हैं।

"काम क्रोध मद लोभ ने घेरा, मैं हूँ अति अज्ञानी..."
मैं सांसारिक विकारों और अज्ञानता के जाल में फंसा हुआ हूँ। मेरी बुद्धि सीमित है, इसलिए मैं आपकी शरण में आया हूँ ताकि आप मुझे इन बंधनों से मुक्त करें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भावों को और अधिक गहराई से समझने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक अत्यंत प्रासंगिक है, जहाँ भगवान अर्जुन से पूर्ण शरणागति की बात कहते हैं:

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुचः॥

अर्थ: सभी धर्मों (कर्तव्यों और आश्रयों) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत करो।

इसके साथ ही, भगवान श्री कृष्ण के इस पावन महामंत्र का जाप इस भजन के बाद करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम प्रभु दया करो (Prabhu Daya Karo)
मुख्य गायक सोनू सिंह (Sonu Singh)
गीतकार समीर अंजान (Sameer Anjaan)
संगीतकार सिद्धांत माधव (Siddhant Madhav)
मुख्य देवता भगवान श्री कृष्ण (राधा रमन)
भजन का भाव करुणा, समर्पण, शरणागति (विनय भाव)
भाषा हिंदी (तत्सम प्रधान)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के सुप्रसिद्ध लेखक और गीतकार समीर अंजान (Sameer Anjaan) हैं, जिन्होंने अपने गहरे आध्यात्मिक अनुभवों को इन शब्दों में पिरोया है।

इस भजन को अपनी मधुर आवाज से सोनू सिंह (Sonu Singh) ने सजाया है और इसका दिव्य संगीत सिद्धांत माधव (Siddhant Madhav) द्वारा तैयार किया गया है।

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण के 'राधा रमन' स्वरूप को समर्पित है, जो करुणा और प्रेम के सागर हैं।

"भव सागर" का अर्थ है संसार रूपी समुद्र, जिसमें जन्म, मृत्यु, सुख, दुख और माया का चक्र निरंतर चलता रहता है और जिससे पार पाने के लिए ईश्वर की कृपा आवश्यक है।

इस भजन के श्रवण और कीर्तन से मन शांत होता है, अहंकार का नाश होता है, और साधक के भीतर भगवान के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण का भाव जाग्रत होता है।

हाँ, इस भजन को आप अपनी दैनिक सुबह या शाम की पूजा, आरती के बाद या ध्यान के समय गा और सुन सकते हैं। यह मन को एकाग्र करने में सहायक है।

'मीत' का अर्थ मित्र या सखा है। यहाँ भक्त भगवान को अपना सबसे करीबी और सच्चा मित्र मानता है, जो हर परिस्थिति में उसका साथ देता है।

इसका अर्थ है कि हमारे भीतर जो अज्ञानता का अंधकार फैला हुआ है, उसे दूर कर ईश्वर अपने ज्ञान और भक्ति की दिव्य ज्योति हमारे हृदय में प्रज्वलित करें।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस भजन के साहित्यिक, संगीत और आध्यात्मिक पहलुओं का गहन विश्लेषण किया है। समीर अंजान की उत्कृष्ट रचनाधर्मिता और सोनू सिंह के भावपूर्ण गायन ने इस भजन को आधुनिक युग के सर्वश्रेष्ठ प्रार्थना गीतों में से एक बना दिया है। इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति है, जो सनातन धर्म के भक्ति मार्ग का मूल आधार है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 18, श्लोक 66 - शरणागति योग)
  • वैष्णव भक्ति परंपरा और संकीर्तन पद्धति
  • सोनू सिंह और समीर अंजान के आधिकारिक भक्ति एल्बम और साक्षात्कार

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन पसंद आया है, तो आप हमारी वेबसाइट पर निम्नलिखित संबंधित लेख और भजन भी पढ़ सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!