Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

ओ कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तान लिरिक्स (O Kaanha Ab To Murli Ki Madhur Suna Do Taan Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan Runjhun

श्रीकृष्ण भजन 'ओ कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तान' के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। प्रभु भक्ति और मधुर भावार्थ सहित भजन का आनंद लें।

राधा कृष्ण भजन

Krishna Bhajan Runjhun - Bhaktilok

भक्ति और संगीत के पावन संगम में डूबा प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "ओ कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तान" भक्त के हृदय की उस अगाध और व्याकुल पुकार को व्यक्त करता है, जो अपने आराध्य मुरलीमनमोहन श्यामसुंदर से मिलने के लिए हर पल छटपटाता है। वैष्णव संप्रदाय और बृज संस्कृति में मुरली की तान केवल एक संगीत नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा के साथ होने वाले साक्षात् संवाद का प्रतीक है। जब भगवान श्रीकृष्ण अपनी अधर-मणि पर बांसुरी सजाकर उसकी अलौकिक तान छेड़ते हैं, तो चर-अचर, गोपी-ग्वाल और स्वंय प्रकृति सुधि-बुधि खो बैठती है। इस भजन के माध्यम से साधक यह प्रार्थना करता है कि कान्हा अपनी कृपा की फुहार और मधुर मुरली की गूंज से उसके जीवन की सूखी बगिया को फिर से प्रेम और आनंद से हरा-भरा कर दें। राधा कृष्ण भजन संग्रह के अंतर्गत यह रचना भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है, जो मन को एकाग्र करने और भक्ति रस में सराबोर करने की अद्भुत शक्ति रखती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

ओ कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तान,
तुम्हारी बाँसुरी बिन तरसे मेरे प्राण।

वृंदावन की कुंज गलिन में खोजूं मैं हर बार,
राधे-राधे नाम जपे दिल, तुझसे है प्यार अपार।
सुध-बुध भूली बैठी जोगन, सुने री ब्रज की आन,
तुम्हारी बाँसुरी बिन तरसे मेरे प्राण।

मुरली की हर एक धुन में जादू सा छा जाता है,
भक्तों का यह मनवा मोहन, तुममें रम जाता है।
आ जाओ अब दर्शन दे दो, हे मुरली के प्राण,
तुम्हारी बाँसुरी बिन तरसे मेरे प्राण।

राधा रानी संग विराजे श्याम सुंदर मनमोहन,
चरणों में तेरे झुक जाए मेरा यह तन-मन धन।
भवसागर से पार लगा दो, ओ बांके बलवान,
तुम्हारी बाँसुरी बिन तरसे मेरे प्राण।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन जीवात्मा और परमात्मा के बीच के पावन और अनन्य प्रेम का एक जीवंत दस्तावेज है। भजन की शुरुआती पंक्तियों में भक्त अपने आराध्य श्रीकृष्ण से अत्यंत करुणा और विनय के साथ यह गुहार लगाता है कि हे कान्हा! अब और अधिक प्रतीक्षा न कराओ और अपनी उस मोहिनी मुरली की मधुर तान को सुना दो, जिसके बिना उसके प्राण व्याकुल हो रहे हैं। भारतीय सनातन संस्कृति में बांसुरी को शून्य या अहंकारहीनता का प्रतीक माना जाता है—बांसुरी तभी बजती है जब उसके भीतर कोई गांठ या अहंकार नहीं होता। इसी प्रकार भक्त भी अपने हृदय से सभी प्रकार के विकारों को मिटाकर भगवान की कृपा का आकांक्षी बनता है।

भजन के अंतरा में वृंदावन की कुंज गलियों और 'राधे-राधे' नाम के स्मरण का जो वर्णन किया गया है, वह यह दर्शाता है कि श्रीकृष्ण तक पहुँचने का सुगम मार्ग राधारानी की भक्ति और बृज की पावन रज से होकर गुजरता है। भगवान कृष्ण ब्रज की हर धड़कन में बसते हैं और जब उनकी मुरली बजती है, तो समय थम जाता है। साधक यह स्वीकार करता है कि भौतिक संसार की भागदौड़ में उसका मन भटक गया था, किंतु अब मुरली की धुन ही उसके जीवन का एकमात्र संबल और मार्गदर्शक बन गई है। यह भजन साधक को यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में भगवान के प्रति अनन्य समर्पण और निरंतर पुकार ही सबसे बड़ा साधन है। श्री कृष्ण स्तोत्र के पाठ के समान ही यह भजन मानसिक शांति और आत्मिक आनंद प्रदान करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • दिव्य प्रेम और समर्पण: भजन में लौकिक बंधनों से ऊपर उठकर पराभक्ति और भगवत्प्रेम का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया गया है।
  • राधा-कृष्ण का युगल स्वरूप: भजन में राधा रानी और श्रीकृष्ण के अखंड प्रेम को केंद्रीय भाव बनाया गया है, जो वैष्णव परंपरा का सार है।
  • मानसिक शांति और एकाग्रता: इस भजन के श्रवण और गायन से मन का संताप दूर होता है और ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है।
  • सत्संग और संकीर्तन उपयोगिता: मंदिर के कार्यक्रमों, जागरण, एकादशी और जन्माष्टमी उत्सवों पर गाने के लिए यह अत्यंत उपयुक्त और मधुर भजन है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति गीतों और भजनों का प्रभाव उनके गायन के समय और आंतरिक भाव पर बहुत अधिक निर्भर करता है। इस भजन को प्रातःकालीन बेला (ब्रह्म मुहूर्त) में या संध्यावंदन के पश्चात शांत चित्त से गाना या सुनना सबसे उत्तम माना जाता है। संध्या के समय जब घर का वातावरण शांत हो, तब दीप प्रज्वलित करके भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के चित्र के समक्ष इस भजन का गान करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और दिव्यता का संचार होता है। एकादशी, जन्माष्टमी, गोपाष्टमी और पूर्णिमा के पावन पर्वों पर विशेष रूप से इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करने से विशेष आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में ब्रजराज भगवान श्रीकृष्ण और स्वरूपा शक्ति जगतजननी श्री राधा रानी हैं। वैष्णव संप्रदाय, विशेषकर गौड़ीय वैष्णव परंपरा में यह मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने भक्तों की पुकार सुनने के लिए हमेशा आतुर रहते हैं, बशर्ते भक्त की पुकार में छल-कपट न होकर निश्छल प्रेम हो। चैतन्य महाप्रभु और मीराबाई जैसे महान संतों ने भी इसी विरह और मिलन के भाव को अपनी रचनाओं का आधार बनाया है। जब भक्त अपनी सुध-बुध खोकर केवल श्याम नाम का सिमरन करता है, तो भगवान स्वयं उसके द्वार पर खिंचे चले आते हैं। भगवद्गीता सार का अध्ययन भी हमें इसी अनन्य भाव से ईश्वर की शरण में जाने की प्रेरणा देता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक और संत वाणी की उस समृद्ध परंपरा से जुड़ा है जो पीढ़ियों से ब्रज मंडल और उत्तर भारत के संकीर्तन प्रेमियों द्वारा गाई जाती रही है। इसकी संरचना अत्यंत सरल और सहज है ताकि संगीत का कोई भी सामान्य जानकार या भक्त इसे आसानी से गुनगुना सके। ब्रज भाषा और खड़ी हिंदी के सुंदर समन्वय से रचित यह पद श्रोताओं के हृदय में सीधे उतर जाता है। रनझून (Runjhun) एल्बम या श्रृंखलाओं के अंतर्गत ऐसे भजनों ने आधुनिक डिजिटल माध्यमों से घर-घर तक अपनी पहुंच बनाई है, जिससे युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ रही है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन में प्रवाहमयी सरल हिंदी और ब्रज भाषा के शब्दों का बहुत ही सुंदर मिश्रण किया गया है। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें 'प्रण', 'तान', 'जान', 'प्राण' जैसे कर्णप्रिय तुकबंदियों (Rhymes) का प्रयोग हुआ है, जो इसके संगीत को और अधिक सम्मोहक बनाते हैं। 'कुंज गलिन', 'सुध-बुध', 'मनवा' जैसे शब्दों का प्रयोग बृज संस्कृति की महक को जीवंत करता है। रूपक और अनुप्रास अलंकारों की प्राकृतिक छटा इस रचना को साहित्यिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से समृद्ध बनाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के लिए एक गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है। पहली सीख यह है कि जीवन की भागदौड़ और दुखों से मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय अपने भीतर के प्रेम और भक्ति भाव को जगाना है। दूसरी सीख यह है कि जैसे बांसुरी अपने अंदर की खालीपन (अहंकार का नाश) के कारण ही मधुर स्वर उत्पन्न कर पाती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने अहंकार का त्याग कर भगवान के हाथों का यंत्र बनना चाहिए। जब जीवन में समर्पण आ जाता है, तो मुरली की तान जैसी दिव्यता स्वतः प्रकट होने लगती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
तान बांसुरी की स्वर लहरी या धुन परमात्मा से मिलन का आह्वान
कुंज गलिन वृंदावन की लता-पताओं से घिरे मार्ग वह पवित्र स्थल जहाँ divine play होता है
जोगन योगी स्त्री या विरहातुरा प्रेमिका ईश्वर के प्रेम में सब कुछ त्याग देने वाली जीवात्मा
बांके बलवान टेढ़े स्वरूप वाले सर्वशक्तिमान कृष्ण समस्त ब्रह्मांड को अपने प्रेम से बाँधने वाले प्रभु

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"ओ कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तान, तुम्हारी बाँसुरी बिन तरसे मेरे प्राण।"
भावार्थ: भक्त अपने प्रियतम कृष्ण से विनती करता है कि हे मुरलीमनमोहन! अब और अधिक परीक्षा न लें। आपकी बांसुरी की वह अमृतमयी तान सुना दीजिए, जिसके बिना मेरे प्राण तड़प रहे हैं।

"वृंदावन की कुंज गलिन में खोजूं मैं हर बार, राधे-राधे नाम जपे दिल, तुझसे है प्यार अपार।"
भावार्थ: मैं वृंदावन की पावन गलियों में आपको हर जगह खोज रहा हूँ। मेरा हृदय हर पल 'राधे-राधे' का जाप करता है क्योंकि हे श्याम! मेरा आपसे अटूट और अगाध प्रेम है।

"मुरली की हर एक धुन में जादू सा छा जाता है, भक्तों का यह मनवा मोहन, तुममें रम जाता है।"
भावार्थ: आपकी मुरली की एक-एक धुन में ऐसा अलौकिक आकर्षण है कि भक्तों का मन संसार से विरक्त होकर पूरी तरह आपमें ही लीन हो जाता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥

अर्थ: वासुदेव के पुत्र भगवान श्रीकृष्ण को बारंबार नमस्कार है, जो समस्त दुखों का नाश करने वाले और गोविंद रूप में सबको आनंद देने वाले हैं।

ॐ श्री राधायै च कृष्णाय नमः॥

अर्थ: राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण के युगल चरणों में मेरा कोटि-कोटि नमन है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ओ कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तान
आराध्य देव श्री राधा-कृष्ण (युगल सरकार)
श्रेणी / परंपरा कृष्ण भजन / वैष्णव संकीर्तन
भाषा हिंदी एवं ब्रज भाषा
मुख्य भाव विरह, समर्पण, प्रेम और विनय
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, एकादशी, सत्संग, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन भगवान श्रीकृष्ण और श्री राधा रानी (युगल सरकार) को समर्पित है, जिसमें उनकी बांसुरी की तान और उनके प्रेम का गुणगान किया गया है।

इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय, संध्या वंदन के दौरान या किसी भी धार्मिक उत्सव जैसे जन्माष्टमी और एकादशी के अवसर पर गाया जा सकता है।

भजन का मुख्य संदेश यह है कि जीवात्मा को परमात्मा से मिलने के लिए अपने अहंकार का त्याग करना चाहिए और निश्छल प्रेम व भक्ति के साथ भगवान कोपुकारना चाहिए।

हाँ, हारमोनियम, ढोलक और मंजीरे के साथ इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करने से घर का वातावरण अत्यंत पवित्र और आनंदमय बनता है।

वृंदावन की कुंज गलियाँ भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली हैं, जहाँ उन्होंने राधारानी और गोपियों के साथ महारास रचाया था। यहाँ स्मरण करने से साधक को दिव्य प्रेम की अनुभूति होती है।

भक्ति संगीत और संकीर्तन मन की तरंगों को शांत करते हैं और तनाव को कम करके सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

निश्चित रूप से, सरल शब्दों और मधुर लय के कारण यह भजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म से जोड़ने में अत्यंत सहायक है।

भक्तिकुल की वेबसाइट पर राधा-कृष्ण भजन, राम भजन, हनुमान चालीसा और विभिन्न स्तोत्रों का विशाल संग्रह उपलब्ध है, जिसे आप आसानी से पढ़ सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री पारंपरिक वैष्णव संकीर्तन साहित्य, ब्रज संस्कृति के लोक गीतों और आध्यात्मिक शोध के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भक्ति भाव, प्रामाणिक लिरिक्स और गहन आध्यात्मिक अर्थ प्रदान करना है। यदि आपको इस लेख में कोई सुझाव देना हो या किसी अन्य भजन के बोल की आवश्यकता हो, तो हमें अवश्य संपर्क करें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (रासलीला एवं गोपी गीत प्रसंग)
  • ब्रज के लोकगीत और पारंपरिक संत वाणी संग्रह
  • गौड़ीय वैष्णव दर्शन एवं संकीर्तन परंपरा
  • पारंपरिक भक्तिकालीन पद एवं भजन ग्रंथ

संबंधित भजन एवं लेख

अच्युतम केशव कृष्ण दामोदर

भगवान श्रीकृष्ण के अत्यंत लोकप्रिय और मधुर स्तोत्र व भजन के बोल और अर्थ।

पूरी पढ़ें →

श्री बांके बिहारी स्तोत्र

वृंदावन के आराध्य श्री बांके बिहारी लाल की महिमा और पावन स्तोत्र पाठ।

पूरी पढ़ें →

राधा कृष्ण स्तुति

युगल सरकार की वंदना और उनके दिव्य स्वरूप का विस्तृत आध्यात्मिक वर्णन।

पूरी पढ़ें →

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!