Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

निमिया पे झुलेली मईया (Nimiya Pe Jhuleli Maiya ) - Pushpa Rana

निमिया पे झुलेली मईया भजन देवी की कृपा का प्रतीक है, जो भक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है और भक्तों को मानसिक एवं आत्मिक जागरूकता प्रदान करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

निमिया पे झुलेली माँ: माँ की कृपा का संगम

गौरी मां पर यह भजन भक्ति का प्रतीक है, जो प्रेम और अटूट श्रद्धा से भरा है।

निमिया पे झुलेली मईया, निमिया पे झुलेली माँ। गगा-गंगा के तीर पर, मइया धारण कइले बानी। सारे बिधि के संतानन, महीमा तोहर बखानी। करिया काजल लागल आंखि, मइया तोहरी मुस्कान। कंज विदल गुनगुनावे, नीर-नीर नंदनी बानी। निमिया पे झुलेली मईया, निमिया पे झुलेली माँ। कुमारी कन्या सदा सुखी, भव-बन्धन से छूटे। बंदे पति-पत्नी - जियो, मइया प्रेम से एकठूं। मइया से हम सदा रइहें, ध्यान करीं दिन-रात। स्वर्ण-मय स्थळ मं उगे, मइया काजल बिन। निमिया पे झुलेली मईया, निमिया पे झुलेली माँ। पार्वती से हर देवि, सृष्टि के हर काहे। जग के सुख-दुख में, मइया सबके सहारे। कष्ट कइसे करीं मिटाए, मइया का नाम स्मरण। सबके मंगल में मइया, भक्ति के मधुशाला। निमिया पे झुलेली मईया, निमिया पे झुलेली माँ।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'निमिया पे झुलेली मईया' देवी की अनंत कृपा और प्रेम का प्रतीक है। निमिया के वृक्ष के नीचे झूलती हुई माता की छवि, भारतीय श्रद्धा में गहरी बसी है। मां की उपस्थिति को महसूस करते हुए, भक्त उनके प्रति असीम श्रद्धा व्यक्त करते हैं। इसके शुरुआती शेर में माता की सुंदरता और उनकी दिव्यता का वर्णन है, जिसमें कहा गया है कि गंगा के किनारे माँ ने विशेष सौंदर्य धारण किया है। 'सारे बिधि के संतानन, महीने तोहर बखानी' की पंक्ति देवत्व की महिमा को दर्शाती है, जहाँ भक्त मां के प्रति अपनी भक्ति के साथ-साथ उनकी शक्तियों का बखान करते हैं। यह भजन केवल श्रद्धा भक्ति नहीं, बल्कि भक्त और देवी के बीच एक गहरा संबंध स्थापित करता है।

इस भजन का एक गहरा भावार्थ है, जो भक्तों को जीवन के संघर्षों में सांत्वना प्रदान करता है। 'कुमारी कन्या सदा सुखी, भव-बन्धन से छूटे' का भाव, कन्याओं के सुख और शांति के लिए मां से विनती करना दर्शाता है। यह भक्तों को प्रोत्साहित करता है कि वे सदा मां की शरण में रहें। भावना यह है कि मइया एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में हैं जो दुःख, संकट और समस्याओं में सहारे बनती हैं। मां की कृपा की बात करते हुए, यह भजन यह निर्देश देता है कि यदि हम सच्चे मन से भक्ति करते हैं, तो समस्त सांसारिक दुखों से मुक्ति पा सकते हैं।

इस भजन का तत्व ज्ञान भक्तिभाव के प्रसार की शिक्षा देता है। 'हर देवि, सृष्टि के हर काहे' की पंक्ति से हम समझते हैं कि सभी देवियां, सभी जीवों की भलाई के लिए हैं। भक्ति मार्ग की अद्भुतता यही है कि सच्चा भक्त अपनी समस्त कठिनाइयों में मां के गुणों को याद करता है। मां का नाम लेने से भक्त को उनके ज्ञान और मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस भजन के माध्यम से, हम एकतरफा पूजा से निकलकर जीवन में नियमित भक्ति को अपनाने की प्रेरणा लेते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति की गहराइयों में स्थित माँ की शक्ति और करुणा का परिचायक है। देवी भागवत और अन्य पुराणों में माँ की महिमा को विशेष महत्व दिया गया है। पार्वती जी का अर्थ है, जो सभी दुखों और संतापों का नाश करती हैं। रामायण और महाभारत में मां के विभिन्न रूपों की प्रशंसा की गई है। देवी के प्रत्येक रूप में माता का गुण देते हुए, यह भजन दर्शकों को ध्यान और साधना की प्रेरणा देता है। भक्ति से प्राप्त ज्ञान और उनके प्रति प्रेम हमें मोह-बंधन से मुक्ति प्रदान करते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप करने से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का अनुभव होता है। नियमित रूप से इसे सुनने या गाने से मानसिक तनाव कम होता है, जिससे आत्मा को शांति और सुख का अनुभव होता है। इसके साथ ही, जीवन में आने वाली कठिनाइयों में मां का सहारा हमेशा भक्तों को बल प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह-सुबह या शाम में करना शुभ माना जाता है। भक्तों को चाहिए कि वे अपनी आत्मा की शांति के लिए एक दीया जलाएं और माता की तस्वीर के सामने बैठकर ध्यान लगाएं। सही मुद्रा में बैठकर सच्चे मन से मां की भक्ति करें, ताकि हृदय में सच्चा प्रेम खिल सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

निमिया पे झुलेली मईया का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है मां की अनंत कृपा और भक्ति मार्ग का पालन करने की प्रेरणा। भक्त को विश्वास दिलाया जाता है कि मां हमेशा अपने भक्तों के साथ हैं।

इस भजन को गाने का सही समय क्या है?

इस भजन को दिन की सुखद संध्या या सुबह के समय गाना बेहतर रहता है। इस समय का वातावरण भक्ति और ध्यान के लिए अधिक अनुकूल होता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष लाभ है?

इस भजन का जाप मानसिक शांति, सुख और आत्मिक बल प्रदान करता है। भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि लाने में मां की कृपा सुनिश्चित होती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!