प्रेम तुमसे किया तो गलत क्या किया - संजय मित्तल कृष्ण भजन परिचय
भक्ति और अनुराग के पावन सागर में गोता लगाने वाला अत्यंत लोकप्रिय भजन "प्रेम तुमसे किया तो गलत क्या किया लिरिक्स (prem tumse kiya to galat kya kiya Lyrics in Hindi)" प्रसिद्ध भजन गायक संजय मित्तल जी की मधुर वाणी में गाया गया एक ऐसा दिव्य गीत है, जो हर प्रेमी भक्त के हृदय को सीधा स्पर्श करता है। सनातन धर्म, विशेषकर पुष्टिमार्ग और गौड़ीय वैष्णव परंपरा में भगवान श्री कृष्ण और राधारानी के प्रति अनन्य प्रेम, आत्मसमर्पण और माधुर्य भाव को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जब एक जीवात्मा इस भौतिक संसार के बंधनों से ऊपर उठकर अपनी मूल परम सत्ता यानी बांकेबिहारी श्री कृष्ण से अहेतुक प्रेम करती है, तो समाज और संसार की परवाह किए बिना उसका यह समर्पण ही उसकी सबसे बड़ी साधना बन जाता है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति में एक भक्त की विह्वल पुकार, कन्हैया के प्रति अनन्य निष्ठा और उस परब्रह्म के साथ आत्मीयता का अत्यंत सुंदर चित्रण मिलता है। इसे प्रातःकालीन बेला में, संध्या वंदन के समय, एकांत साधना में या किसी भी सत्संग और संकीर्तन के अवसर पर अत्यंत भाव-विभोर होकर गाया व सुना जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को भौतिक दुखों से मुक्त कर दिव्यता और प्रेम रस से भर देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:
स्थाई (Mukhda):
प्रेम तुमसे किया तो गलत क्या किया,
सांवरे तुझसे दिल जो लगाया तो क्या गलत किया?
दुनिया वाले तो कुछ भी कहें सांवरे,
मैंने तुझको अपना बनाया तो क्या गलत किया?
प्रेम तुमसे किया तो गलत क्या किया...
अंतरा 1:
लोग कहते हैं दुनिया बड़ी बेवफा,
तूने तो कभी ना दी हमको कोई सजा।
मैंने पत्थर को दिल में बसाया नहीं,
तेरी मूरत को दिल में सजाया है क्या गलत किया?
दुनिया वाले तो कुछ भी कहें सांवरे,
मैंने तुझको अपना बनाया तो क्या गलत किया?
अंतरा 2:
लोग दौलत के पीछे मचलते रहे,
हम तो तेरी मोहब्बत में जलते रहे।
और लोग दुनिया के मेले में खोते रहे,
मैंने तेरा ही दामन पकड़ा तो क्या गलत किया?
प्रेम तुमसे किया तो गलत क्या किया...
अंतरा 3:
तू कहे तो मैं दुनिया भुला दूँ अभी,
तेरे चरणों में सर को झुका दूँ अभी।
लोग पूजा करें अपनी शोहरत के वास्ते,
मैंने तुझसे ही प्रीत लगाई तो क्या गलत किया?
प्रेम तुमसे किया तो गलत क्या किया,
सांवरे तुझसे दिल जो लगाया तो क्या गलत किया?
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि एक भक्त और भगवान के बीच के उस अटूट संबंध का जीवंत दस्तावेज है जिसे मीराबाई, सूरदास और रसखान जैसे महान संतों ने अपनी रचनाओं में महसूस किया था। भजन की शुरुआत इस मूल प्रश्न से होती है कि यदि मैंने इस नश्वर संसार को छोड़कर त्रिलोकीनाथ भगवान श्री कृष्ण से प्रेम किया, तो इसमें संसार की दृष्टि में कोई भूल कैसे हो सकती है? भक्त कहता है कि हे सांवरे! मैंने दुनिया की तमाम मोह-माया को छोड़कर जब अपना चित्त तुम्हारे श्री चरणों में लगाया, तो मैंने कोई अपराध नहीं किया, बल्कि अपने जीवन को सार्थक किया है।
सांसारिक लोग भौतिक वस्तुओं, धन, वैभव और स्वार्थपूर्ण संबंधों के पीछे भागते हैं, जबकि एक सच्चा भक्त केवल मुरली वाले की अहेतुक कृपा का आकांक्षी होता है। भजन के अगले चरणों में भक्त समाज के तानों का उत्तर देते हुए स्पष्ट करता है कि लोग भले ही मुझे पागल कहें या इस प्रेम को नासमझी कहें, परंतु मेरा यह प्रेम स्वार्थरहित और पवित्र है। मैंने किसी जड़ पत्थर या नश्वर मनुष्य से उम्मीद नहीं लगाई, बल्कि सृष्टि के कण-कण में रमे परमात्मा को अपना सर्वस्व माना है। यह भाव साधक को राधा कृष्ण भजन की उस उच्च अवस्था तक ले जाता है जहाँ द्वैत भाव समाप्त होकर केवल अद्वैत और विशुद्ध प्रेम शेष रहता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- भक्ति का माधुर्य भाव: इस भजन में दास्य या साख्य भाव से अधिक माधुर्य और कांता भाव की झलक मिलती है, जहाँ जीवात्मा अपने प्रियतम कृष्ण से अनन्य प्रेम का दावा करती है।
- संसारिक बंधनों से मुक्ति: यह भजन मनुष्य को बाहरी दिखावे, स्वार्थ और भौतिकता की अंधी दौड़ से निकालकर आंतरिक शांति और ईश्वर की शरण में जाने की प्रेरणा देता है।
- संजय मित्तल की गायन शैली: संजय मित्तल जी ने अपनी डूबती और रुंद्री हुई आवाज़ में इस भजन को गाकर इसके भाव को और अधिक जीवंत बना दिया है।
- मानसिक शांति और संबल: संकट के समय जब मनुष्य चारों तरफ से निराश हो जाता है, तब यह भजन उसे मानसिक संबल और ढांढस बंधाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस प्रकार के भावपूर्ण भजनों का गायन और श्रवण करने के लिए ब्रह्ममुहूर्त (प्रातःकाल 4:00 से 6:00 बजे) या संध्या वंदन का समय सर्वोत्तम माना जाता है। इसे आप अपने घर के पूजा स्थल पर श्री कृष्ण या लड्डू गोपाल के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करके गा सकते हैं। एकांत में बैठकर जब इस भजन को गुनगुनाया जाता है, तो यह ध्यान और योग का काम करता है। एकादशी, जन्माष्टमी, गोपाष्टमी या किसी भी पावन पर्व पर सत्संग के दौरान इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करने से संपूर्ण वातावरण सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति रस से ओत-प्रोत हो जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में लीलापुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण (सांवरे) और उनकी अनन्य शक्ति जगत जननी श्री राधारानी हैं। सनातन धर्म में ब्रज की धरा और वृंदावन के संत-महात्माओं ने हमेशा से इसी प्रेम मार्ग (प्रेमाभक्ति) को मोक्ष का सबसे सरल और सुगम मार्ग बताया है। चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई और वल्लभाचार्य जैसे आचार्यों ने भी इसी 'प्रेम लक्षणा भक्ति' का प्रचार-प्रसार किया था, जहाँ भगवान को पाने का एकमात्र साधन केवल और केवल आर्त प्रेम ही है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
समकालीन भजन रचनाकारों और गीतकारों द्वारा रचे गए ऐसे भजन आधुनिक युग में भी सनातन संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाए रखने का कार्य कर रहे हैं। संजय मित्तल जैसे प्रतिष्ठित भजन गायकों ने अपनी सुमधुर आवाज और शास्त्रीय संगीत की सुगम प्रस्तुति के माध्यम से इस रचना को घर-घर तक पहुँचाया है। इसकी पृष्ठभूमि विशुद्ध रूप से उस आध्यात्मिता पर आधारित है जहाँ एक भक्त सांसारिक आलोचनाओं से परे होकर केवल अपने आराध्य के प्रेम में मग्न रहना चाहता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन अत्यंत सरल, सहज और प्रवाहमयी हिंदी/ब्रज-मिश्रित बोलचाल की भाषा में रचित है, जिसे कोई भी सामान्य व्यक्ति आसानी से समझ सकता है और गा सकता है। इसमें रूपक अलंकार और प्रश्नोत्तरी शैली का बहुत सुंदर प्रयोग किया गया है, जैसे— "प्रेम तुमसे किया तो गलत क्या किया?" यह शैली श्रोता के मन में तुरंत एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती है। शब्दों का चयन इतना कोमल और हृदयस्पर्शी है कि यह सीधे मन की गहराइयों तक उतर जाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- निःस्वार्थ प्रेम: ईश्वर से प्रेम किसी फल की प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि प्रेम के लिए ही होना चाहिए।
- लोक-लाज का भय त्याग: जब मार्ग सत्य और भक्ति का हो, तो समाज की नकारात्मक बातों से घबराना नहीं चाहिए।
- पूर्ण शरणागति (शरणागति भाव): अपना सर्वस्व प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना ही सच्ची साधना है।
- धैर्य और सहनशीलता: जीवन में आने वाली कठिनाइयों को प्रभु की इच्छा मानकर हंसते हुए स्वीकार करना।
- अधिक जानकारी के लिए आप श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश का अध्ययन कर सकते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| सांवरे | श्याम वर्ण वाले भगवान श्री कृष्ण | परमात्मा का सगुण और सुंदर स्वरूप |
| बेवफा | जो वादा पूरा न करे / धोखा दे | नश्वर संसार और उसके रिश्ते |
| दामन पकड़ा | शरण ग्रहण करना | पूर्ण शरणागति और आश्रय लेना |
| शोहरत | यश, प्रसिद्धि और मान-सम्मान | अहंकार और भौतिकता के प्रतीक |
| प्रीत | प्रेम, अनुराग और स्नेह | जीवात्मा और परमात्मा का संबंध |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"प्रेम तुमसे किया तो गलत क्या किया, सांवरे तुझसे दिल जो लगाया तो क्या गलत किया?"
इस पंक्ति में भक्त का आत्मविश्वास झलकता है। वह दुनिया से सवाल कर रहा है कि यदि मैंने अपने मन को संसार की असार वस्तुओं में न उलझाकर उस अजर-अमर अविनाशी सांवरे से जोड़ा है, तो इसमें कोई गलती नहीं की है।
"मैंने पत्थर को दिल में बसाया नहीं, तेरी मूरत को दिल में सजाया है क्या गलत किया?"
यहाँ भक्त व्यंग्य और सच्चाई दोनों प्रस्तुत करता है। लोग सांसारिक प्रतिष्ठा या निर्जीव वस्तुओं में सुख ढूंढते हैं, जबकि मैंने तो चैतन्य स्वरूप भगवान की छवि को अपने हृदय मंदिर में स्थापित किया है।
"लोग दौलत के पीछे मचलते रहे, हम तो तेरी मोहब्बत में जलते रहे..."
यहाँ विरह और प्रेम की पराकाष्ठा का वर्णन है। जहाँ दुनिया धन और वैभव के पीछे भागती है, वहीं भक्त प्रेम की अगिन में तपकर कुंदन बनना चाहता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक अत्यंत प्रासंगिक है:
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमुरु।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥
(गीता अध्याय 18, श्लोक 65)
"मुझमें मन लगा, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन कर और मुझे नमस्कार कर। ऐसा करने से तू मुझे ही प्राप्त होगा, यह मैं तुमसे सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ क्योंकि तू मेरा अत्यंत प्रिय है।"
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | प्रेम तुमसे किया तो गलत क्या किया (Prem Tumse Kiya To Galat Kya Kiya) |
| गायक | संजय मित्तल जी (Sanjay Mittal) |
| आराध्य देव | भगवान श्री कृष्ण (सांवरिया / बांकेबिहारी) |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज भाव |
| श्रेणी | कृष्ण भजन / राधा कृष्ण स्टेटस |
| मुख्य भाव | अनन्य प्रेम, भक्ति और शरणागति |
| उपयुक्त अवसर | दैनिक पूजा, सत्संग, एकादशी, जन्माष्टमी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें पाठकों की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रामाणिक बोल, सरल भावार्थ और विस्तृत जानकारी जोड़ी गई है। यह सामग्री पूरी तरह से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसका उद्देश्य सनातन संस्कृति और संकीर्तन परंपरा का प्रसार करना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भगवद्गीता - गीताप्रेस गोरखपुर
- भक्ति रसामृत सिन्धु - रूप गोस्वामी
- पारंपरिक लोक एवं संकीर्तन साहित्य
- संजय मित्तल जी के आधिकारिक भजन संकलन
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें