Matarani Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मेरे नैनों की प्यास बुझा दे माँ तू मुझे दर्शन दे लिरिक्स (Mere Naino Ki Pyas Bujha De Maa Tu Mujhe Darshan De Lyrics) - Sherawali Bhajan Sonu Nigam

भक्ति भजन "मेरे नैनों की प्यास बुझा दे माँ तू मुझे दर्शन दे लिरिक्स (Mere Naino Ki Pyas Bujha De Maa Tu Mujhe Darshan De Lyrics) - Sherawali Bhajan Sonu Nigam" के हिन्दी लिरिक्स, भावार्थ, माहात्म्य और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)। सनातन भक्ति परंपरा के अनुसार संकीर्तन के लाभ और विधि पढ़ें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

मेरे नैनों की प्यास बुझा दे माँ तू मुझे दर्शन दे लिरिक्स (Mere Naino Ki Pyas Bujha De Maa Tu Mujhe Darshan De Lyrics in Hindi) - 

शेर पे सवार मेरी शेरांवाली माँ
पहाड़ों में बसी मेरी मेहरावाली माँ
रूप हैं तेरे कई ज्योता वाली माँ
नाम है तेरे कई लाटा वाली माँ

जग जननी है मेरी भोली भाली माँ हो
जग जननी है मेरी भोली भाली माँ
जग जननी है मेरी भोली भाली माँ
मेरे नैनों की प्यास बुझा दे माँ तू मुझे दर्शन दे

अपने चरणों का दास बना ले माँ तू मुझे दर्शन दे
शेर पे सवार मेरी शेरांवाली माँ
पहाड़ों में बसी मेरी मेहरावाली माँ
रूप हैं तेरे कई ज्योता वाली माँ

नाम है तेरे कई लाटा वाली माँ
जग जननी है मेरी भोली भाली माँ हो
जग जननी है मेरी भोली भाली माँ
जग जननी है मेरी भोली भाली माँ  

दयालु तू है माँ क्षमा कर देती है
सभी के कष्टों को माँ तू हर लेती है
जय कारा शेरां वाली दा
बोल साचे दरबार की जय

तू ही जग जननी है तू ही जग पालक है
चराचर की मैया तू ही संचालक है
तू ही संचालक है, तू ही संचालक है
अपनी ज्योत में मुझको समा ले

माँ तू मुझे दर्शन दे माँ तू मुझे दर्शन दे 
 नैनों की प्यास बुझा दे
माँ तू मुझे दर्शन दे माँ तू मुझे दर्शन दे
दूर अब तुझसे माँ मैं ना रह पाउँगा

प्यास तेरे दर्शन की माँ अब न सह पाउँगा
जय कारा शेरां वाली दा 
बोल साचे दरबार की जय
आसरा एक तेरा बाकि सब सपना है

तेरे बिन हे मैया कोई ना अपना है
कोई ना अपना है, कोई ना अपना है
मेरे पैरों में पड़ गए छाले
अब तो मुझे दर्शन दे माँ तू मुझे दर्शन दे

मेरे नैनों की प्यास बुझा दे
माँ तू मुझे दर्शन दे माँ तू मुझे दर्शन दे
अपने चरणों का दास बना ले
माँ तू मुझे दर्शन दे माँ तू मुझे दर्शन दे

शेर पे सवार मेरी शेरांवाली माँ
पहाड़ों में बसी मेरी मेहरावाली माँ
रूप हैं तेरे कई ज्योता वाली माँ
नाम है तेरे कई लाटा वाली माँ

जग जननी है मेरी भोली भाली माँ हो
शेर पे सवार मेरी शेरांवाली माँ
पहाड़ों में बसी मेरी मेहरावाली माँ
जय माँ हो माँ शेरावाली माँ मेहरावाली माँ

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सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मेरे नैनों की प्यास बुझा दे माँ तू मुझे दर्शन दे लिरिक्स (Mere Naino Ki Pyas Bujha De Maa Tu Mujhe Darshan De Lyrics) - Sherawali Bhajan Sonu Nigam - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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