Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरी तस्वीर दिल मैं मोहन जाने कब से सजाये हुए है (Teri tasveer dil me mohan Lyrics in Hindi) - Radha Krishna Bhajan

भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति को प्रकट करता भजन, जो भक्तों को प्रेम और आस्था का अनुभव कराता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

मोहन की छवि: भक्ति की अनमोल अनुभूति

राधा-कृष्ण की भक्ति में डूबकर गाएं, हृदय में प्रेम की ज्योति जगाएं।

तेरी तस्वीर दिल में मोहन जाने कब से सजाये हुए हैं। तेरी तस्वीर दिल में मोहन जाने कब से सजाये हुए हैं। तेरे बिना जीना नहीं, तेरे बिना जीना नहीं। इस दिल की धड़कन में तेरा नाम लिवाए हुए हैं। तेरी तस्वीर दिल में मोहन जाने कब से सजाये हुए हैं। चाहे छाया हो अंधेरा, क्यों ना हो तेरा सहारा, तेरे आने से ही रोशन, ये जीवन बनाए हुए हैं। तेरी तस्वीर दिल में मोहन जाने कब से सजाये हुए हैं। साक्षात हो तुम मुरलीधर, मन में तुम्हारा भव्य नूर, मेरे अंतस के हर कण में तेरे अंश समाए हुए हैं। तेरी तस्वीर दिल में मोहन जाने कब से सजाये हुए हैं।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के बोलों में एक गहरी भक्ति की भावना प्रकट होती है। 'तेरी तस्वीर दिल में मोहन जाने कब से सजाये हुए हैं' यह पंक्ति दर्शाती है कि भक्त के दिल में भगवान कृष्ण की छवि सजी हुई है। यह दर्शाता है कि भक्त ने अपने हृदय में कृष्ण के प्रति अपार प्रेम और भक्ति को संजो रखा है। भक्त का यह भाव कि 'तेरे बिना जीना नहीं' हमें यह सिखाता है कि भगवान की उपस्थिति भक्त के जीवन में कितनी महत्वपूर्ण है। है। यह संकेत करता है कि भक्ति एक ऐसा साधन है जिसके माध्यम से हम अपने जीवन के उद्देश्यों को और अधिक स्पष्टता से समझ सकते हैं।

भजन की दूसरी पंक्तियाँ जैसे 'चाहे छाया हो अंधेरा, क्यों ना हो तेरा सहारा' हमारे जीवन की कठिनाइयों की ओर इशारा करती हैं। जब सम्पूर्ण जीवन में संकट या मुसीबत आती है, तब भakti ही एक ऐसा मार्ग है जो हमें संजीवनी प्रदान करता है। यहाँ भगवान कृष्ण को सहारा मानकर एक अद्भुत प्रेम का अनुभव किया जाता है। यह भाव भक्त के अंतर्मन के अधुरापन और उसके प्रयास को दर्शाता है; क्योंकि वह समझता है कि केवल कृष्ण की कृपा से ही वह अपने सारे दुःख-दर्द को पार कर सकता है।

कृष्ण के प्रति यह भक्ति मार्ग जीवन की सभी शास्वत सच्चाइयों को दर्शाती है। भजन में कृष्ण का नाम लेना और उन्हें हृदय में सजाना मूलतः भक्ति के गहरे सिद्धांतों की पुष्टि करता है। भक्ति मार्ग में, भक्त भगवान को अपना सर्वस्व सौंप देता है और आस्था के साथ उनके चरणों में समर्पित हो जाता है। यह भजन भक्त को प्रोत्साहित करता है कि सच्चा प्रेम और भक्ति ही हमें जीवन की सच्ची सफलता की ओर ले जा सकता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन राधा-कृष्ण की प्रेम भक्ति को दर्शाता है और पौराणिक कथाओं से जुड़ा है। 'गोपियाँ' एवं राधा के संग भगवान कृष्ण की लीला कथाओं में इस प्रकार के भजन गाए जाते हैं। यह भजन भक्तों को प्रेरित करता है कि वे अपने हृदय में भगवान कृष्ण की आश्वासनपूर्ण छवि को सजाएं। महाभारत एवं भागवत पुराण में भगवान कृष्ण की लीलाएँ भक्तों को मिला देती हैं। इस भक्ति भजन में, हमें यह अनुभव होता है कि भक्ति में केवल भक्ति भाव की उपासना ही नहीं, बल्कि असमान्य प्रेम भी है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। यह भजन गाने से मानसिक शांति, आंतरिक स्थिरता और नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति मिलती है। जब भक्त प्रेम से भजन गाता है, तब उसका मन और हृदय खुशी और संतोष से भर जाता है। इससे आत्मसाक्षात्कार की संभावना बढ़ती है और भक्त अपनी दैनिक जीवन में उत्साह एवं प्रेरणा महसूस करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना बहुत लाभकारी है। पूजा के दौरान एक दीप जलाना और भगवान कृष्ण के समक्ष फूल, मुरली जैसी वस्तुओं का अर्पण करना चाहिए। मन को शांति देकर, भक्त एक शांत आसन पकड़कर ध्यान लगाते हैं, जिससे भजन की गहराई को सही रूप में अनुभव कर सकें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में तेरी तस्वीर का क्या अर्थ है?

इस भजन में 'तेरी तस्वीर' का अर्थ है भक्त के हृदय में भगवान कृष्ण की छवि। यह दर्शाता है कि भक्त का संपूर्ण जीवन श्री कृष्ण के प्रति अर्पित है।

कौन से भाव इस भजन में प्रमुख हैं?

इस भजन में प्रेम, भक्ति, और विश्वास के भाव प्रमुख हैं। भक्त अपने जीवन के हर पल में भगवान कृष्ण की कृपा को अनुभव करता है।

क्या यह भजन संकट समय में भी गाया जा सकता है?

जी हां, यह भजन संकट के समय में गाया जा सकता है। यह भक्त को मानसिक और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है, जिससे वे कठिनाइयों को पार कर सकें।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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