Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

किसने सजाया तुमको मोहन लिरिक्स

किसने सजाया तुमको मोहन भजन श्री कृष्ण के सुंदर स्वरूप का वर्णन करता है, जो प्रेम और भक्ति का दीप जलाता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

मोहन का दिव्य श्रृंगार: एक भक्ति गीत

श्री कृष्ण के सुंदर स्वरूप का वर्णन करते हुए यह भजन अतुलनीय भक्ति और प्रेम का प्रतीक है।

किसने सजाया तुमको मोहन बड़ा प्यारा लागे सावरिया बड़ा सोहना लागे सावरिया॥यह हार गुलाबी सावरिया किसने पहनाया सावरिया॥यह माथ कस्तूरी सावरिया यह तिलक लगाया सावरिया॥सुन्दर छवि पे आ गया मन बड़ा प्यारा लागे सावरिया॥बड़ा सोहना लागे सावरिया किसने सजाया तुमको मोहन॥अध्रो पे मुरली सावरिया मीठी मुस्काने सावरिया॥तेरा रूप देख के सावरिया मैं हुई दीवानी सावरिया॥दूल्हा सा लागे मेरा मोहन बड़ा प्यारा लागे सावरिया॥बड़ा सोहना लागे सावरिया किसने सजाया तुमको मोहन॥मेरे श्याम सलोने सावरिया तुझे दिल में बसा लू सावरिया॥इस प्यारी छवि को सावरिया पलकों में छूपा सावरिया॥देखु ना जग में झूठा चलन बड़ा प्यारा लागे सावरिया॥बड़ा सोहना लागे सावरिया किसने सजाया तुमको मोहन।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में, भक्त ने श्री कृष्ण के अत्यंत सुंदर और आकर्षक रूप का वर्णन किया है। 'किसने सजाया तुमको मोहन' इस पंक्ति से शुरुआत होती है, जो भावनाओं की एक गहरी लहर उठाती है। भक्त श्री कृष्ण को मोहन के रूप में पुकारते हुए इनके विग्रह का न केवल भव्यता, बल्कि इनकी अलौकिक छवि और आंतरिक सौंदर्य का भी बखान करते हैं। इस भजन में रंग-बिरंगे हार की बात की गई है, जो किसी की दुल्हन के समान सजे हुए होते हैं। प्रेम और भक्ति की इस अद्भुत अभिव्यक्ति में, भक्त का मन कृष्ण की छवि में खो जाता है, जब वो बड़ी भक्ति के साथ पूछा जाता है कि 'किसने सजाया तुमको मोहन'। यह केवल एक प्रश्न ही नहीं है, बल्कि यह एक भक्त का भाव है, जो श्री कृष्ण के प्रति अपनी अद्वितीय प्रेम भावना को दर्शाता है।

भजन की भावनात्मक गहराई को समझते हुए, हम देखते हैं कि इसमें श्रावक की भावनाएँ और आध्यात्मिक अनुभूतियाँ प्रकट होती हैं। 'तेरा रूप देख के सावरिया, मैं हुई दीवानी सावरिया' इस पंक्ति में भक्त का असीम प्रेम और भक्ति प्रकट होती है। भक्त केवल कृष्ण की सुंदरता को नहीं देखता, बल्कि अपने ह्रदय में उनकें स्वरूप को सहेजने की भी इच्छा प्रकट करता है। 'दूल्हा सा लागे मेरा मोहन' यह दर्शाता है कि कृष्ण के प्रति भक्ति का यह भाव कितना गहरा है, जैसे कोई दुल्हन अपने दूल्हे की सुंदरता का उल्लेख करती है। यह भजन कृष्ण के प्रति भक्तों के हृदय में छिपे प्रेम का अद्भुत चित्रण करता है, जो हमें भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की एक गहरी समझ का संकेत मिलता है। भक्त श्री कृष्ण के प्रति जिस तरह का प्रेम दर्शाते हैं, वह उसी भक्ति ज्ञान का प्रमाण है जिसे संत और ज्ञानी हमेशा महत्वपूर्ण मानते आए हैं। 'मेरे श्याम सलोने सावरिया, तुझे दिल में बसा लू सावरिया' यह दर्शाता है कि भक्त का लक्ष्य केवल कृष्ण की पूजा करना नहीं, बल्कि उन्हें अपने हृदय का केंद्र बनाना है। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति में मन और विचार का समर्पण कितना महत्वपूर्ण है। भक्ति मार्ग पर चलना एक व्यवस्था और दिशा का अनुसरण करना है जहाँ भक्त अपने मन और हृदय को पूरी तरह से भगवान के प्रति समर्पित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में श्री कृष्ण की महिमा का एक जीवंत उदाहरण है। पौराणिक कथाओं में, भगवान कृष्ण को प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक माना गया है। उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं का वर्णन महाभारत और भागवत पुराण में किया गया है। कृष्ण का बाल लीला, राधा के साथ प्रेम, और उन्हें गोपियों से स्नेह, यह सभी विषय हमें भक्ति और साक्षात्कार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। श्री कृष्ण की महिमा विशेषकर भक्ति मार्ग के अनुयायियों के लिए एक उच्च आदर्श प्रस्तुत करती है। यह भजन भी समय-समय पर कृष्ण की अपार प्रेम भावना को दर्शाते हुए हमें उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव विकसित करने में सहायता करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। यह भक्ति गीत व्यक्ति को आत्मिक संतोष और शुभता का अनुभव कराने में मदद करता है, जिससे मानसिक विषाद दूर होता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से हृदय में प्रेम और सद्भावना का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या शाम को पूजा के समय करना सर्वोत्तम माना जाता है। पूजा स्थान पर एक दीया जलाएँ और भगवान कृष्ण के चरणों में फूल अर्पित करें। अपनी आँखें बंद करके ध्यान में स्थित हों और मन में भाव जलाएँ। अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ इस भजन का उच्चारण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

किसने सजाया तुमको मोहन का क्या महत्व है?

यह भजन श्री कृष्ण के भव्य स्वरूप और उनके प्रति भक्ति का प्रतीक है। भक्त द्वारा उनके सुंदर रूप और आकर्षण की प्रशंसा की जाती है।

क्या इस भजन का जाप विशेष अवसरों पर किया जा सकता है?

हाँ, यह भजन जन्माष्टमी, रक्षाबंधन, और अन्य धार्मिक अवसरों पर विशेष रूप से गाया जाता है, जो कृष्ण के साथ जुड़ा हुआ है।

इस भजन के लाभ क्या हैं?

इस भजन का जाप मानसिक शांति, प्रेम के भाव और आध्यात्मिक विकास में सहायक होता है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और सुख की प्राप्ति होती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!