Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

काला काला करे गुजरी मत काले का जिक्र करै (kala kala kare gujari mat kaale Lyrics in Hindi) - Radha Krishna Bhajan

काला काला करे गुजरी एक सुंदर भजन है जो राधा और कृष्ण के प्रेम का वर्णन करता है, जिससे भक्तों को भक्ति का अनुभव मिलता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

कृष्ण की कृपा में राधा का सन्देश

इस भजन के माध्यम से राधा-कृष्ण की लीलाओं का गुणगान करें और भक्ति भाव में लीन हो जाएं।

काला काला करे गुजरी मत काले का जिक्र करै, काले रंग पे मोरनी रुदन करै, काला काला करे गुजरी मोटे मोटे नैन राधा के, इसमें यो सुरमा अजब सजै, काले रंग पे मोरनी रुदन करै, काला काला करे गुजरी, लाम्बे लाम्बे केश राधा के, जिसमें या मांग सिंदूर भरै, काले रंग पे मोरनी रुदन करै, काला काला करे गुजरी, लाम्बे लाम्बे पंख मोर के, इसके सिर पर मुकुट सजै, काले रंग पे मोरनी रुदन करै, काला काला करे गुजरी, हरे हरे बासां की हरी मुरलिया, जिसका खोया जग फिरै, काले रंग पे मोरनी रुदन करै, काला काला करे गुजरी, काला सर्प पड़्या बूमबी महँ,जिसका खाया तुरंत मरै, काले रंग पे मोरनी रुदन करै, कुमार सुनील फोक सिंगर, हिसार हरियाणा भारत
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय कृष्ण और राधा की प्रेमकथा एवं उनके गुणों का प्रतिपादन है। 'काला काला करे गुजरी' की अनुगूंज में राधा के गुणों का संगीतमय वर्णन है, जैसे उनके मोटे नैन और लंबे केश हैं। राधा को काले रंग के संदर्भ में प्रस्तुत करना, उनके प्रेम के गहरे भाव को दर्शाता है। यहाँ 'काले रंग पे मोरनी रुदन करै' पंक्ति signifies कृष्ण के प्रति राधा के प्रेम और उनकी मनोदशा को वर्णित करती है। राधा की सुंदरता और कृष्ण की मोहकता भक्ति में गहराई लाती है। भजन में राधा के नैनों का चमत्कार और उनके बालों की लम्बाई इस प्रेम के गहन आभास को प्रदर्शित करते हैं।

इस भजन का भावार्थ गहरी भक्ति भावनाओं को उजागर करता है। यहाँ 'मोटे मोटे नैन राधा के' राधा की अद्भुत सुंदरता को दर्शाता है, जिसमें भक्त को राधा के प्रति अपार प्रेम का अनुभव होता है। राधा और कृष्ण के सम्बन्ध में गहराई से आधारित यह भजन दर्शाता है कि भक्ति केवल पूजा की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह प्रेम और समर्पण का एक गहरा अनुभव है। 'हरे हरे बासां की हरी मुरलिया' में कृष्ण की सुरीली बांसुरी का जिक्र भगवान के प्रति भक्तों के आकर्षण और भक्ति का प्रतीक है, जो संसार को मोह से मुक्ति दिलाने का कार्य करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की सार्थकता प्रदर्शित की गई है। भक्तों को यह प्रेरणा मिलती है कि प्रेम की शक्ति से वे भगवान के निकट पहुंच सकते हैं। राधा का व्यक्तित्व भक्ति की उस उच्चतम अवस्था का परिचायक है, जहाँ प्रेम, समर्पण और निस्वार्थता का मेल होता है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि कृष्ण के प्रति निष्कपट प्रेम, भक्ति मार्ग की एक महत्वपूर्ण धारणा है, जो भक्तों को मोक्ष की ओर अग्रसर करती है। ऐसे भजनों से आगे बढ़ते हुए, भक्तों का हृदय कृष्ण के प्रति प्रेम से पूर्ण होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व विशेष रूप से राधा-कृष्ण की लीलाओं में गहराई से निहित है। पुराणों और उपनिषदों में, राधा और कृष्ण के प्रेम को अद्वितीय बताया गया है। भजन के माध्यम से भक्त राधा की सुंदरता और कृष्ण की दिव्यता का अनुभव करते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि प्रेम और भक्ति की भावना से पारलौकिक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। राधा के रूप में भक्त की आत्मा और कृष्ण के रूप में ईश्वर को देखने की दृष्टि प्रदान करता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और प्रेम भाव का संचार करता है। भक्ति का अनुभव करने से व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। इसके नियमित जाप से मानसिक तनाव कम होता है और मन की स्थिरता में वृद्धि होती है। साथ ही, भक्त की आध्यात्मिक विकास की यात्रा में यह एक महत्वपूर्ण साधना का हिस्सा बन जाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या संध्या समय करना उत्तम माना जाता है। पूजा स्थान पर दीप जलाकर, शुद्ध मन से भजन का गुनगुनाना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर, भक्ति के भाव से इस भजन का जाप करते समय ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिससे मन में दिव्यता का अनुभव हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का क्या महत्व है?

यह भजन राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है और भक्तों को भक्ति के गहरे अनुभव से जोड़ता है।

क्या इस भजन का जाप करने से कोई लाभ होता है?

हाँ, नियमित जाप से मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

कब इस भजन का जाप करना चाहिए?

सुबह के समय या संध्या के समय इस भजन का जाप करना सर्वश्रेष्ठ होता है, जिससे भक्त का मन पवित्र और शांत रहे।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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