Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री राधे (Ek kor kripa ki kar do ladli shri radhe Lyrics in Hindi) - Baldev Kishan Sehgal Krishna Bhajan

श्री राधे का यह प्यारा भजन 'एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री राधे' लिरिक्स, अर्थ और भावार्थ सहित पढ़ें। Bhaktilok पर भक्तिमय गीत का आनंद लें।

प्रस्तावना एवं परिचय

श्री राधा की कृपा की करुणामय प्रार्थना

भक्ति की गहराइयों में उतरकर श्री राधे की सच्ची कृपा की शिविर पर पहुँचे।

एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री राधे। दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥ मैं तो राधा राधा सदा ही रटूं कभी द्वारे से लाडली के ना हटूं मेरे शीश कमल पग धर दो स्वामिनी श्री राधे। मेरी आस ना टूटने पाए कभी इस तन से प्राण जाएँ तभी मुझे निज दर्शन का वर दो स्वामिनी श्री राधे। मुझे प्रीती की रीति सिखा दीजिए निज नाम का मन्त्र बता दीजिए मेरे मन की व्यथा सब हर दो स्वामिनी श्री राधे।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य संदेश है श्री राधा से कृपा की प्रार्थना करना। यह गीत भक्ति भाव से भरा हुआ है, जहाँ भक्त राधा के प्रति अनन्य भक्तिभाव प्रकट करता है। पहले पद में, भक्त प्रार्थना करता है कि राधा की कृपा से उसकी झोली भर दी जाए। यहाँ 'दासी' का संदर्भ उस भक्ति का प्रतीक है, जहाँ समर्पण और सेवा की भावना मुख्य होती है। जब भक्त कहता है, 'मैं तो राधा राधा सदा ही रटूं', तो यह एक महत्वपूर्ण अनुभव को दर्शाता है—भक्त का अपने इष्टदेव के प्रति अटूट प्रेम और साक्षात्कार की प्रबल इच्छा। भक्त का यह अनुरोध कि राधा के चरणों में मन की शांति मिले, इस बात की ओर भी इशारा करता है कि राधा का स्मरण ही आत्मा को शांति प्रदान करता है।

भक्त का यह विकट प्रयास जिस प्रकार से राधा की कृपा की याचना करता है, वह भावनात्मक गहराई को दर्शाता है। 'मेरे आस ना टूटने पाए कभी' इस पंक्ति में भक्त की निर्वाण की आकांक्षा छिपी हुई है। यहाँ भक्त का अर्थ है कि चाहे जीवन में कितनी भी कठिनाई आ जाए, राधा के दर्शन के बिना उसकी आत्मा को शांति नहीं मिल सकती। यह प्रार्थना उस अद्भुत प्रेम का प्रतीक है, जो भक्त को राधा के प्रति जोड़े रखता है। भक्त कहता है, 'मुझे प्रीती की रीति सिखा दीजिए', जो यह दर्शाता है कि वह राधा से गहरे संबंध की इच्छा करता है और प्रेम की असली व्याख्या समझना चाहता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का गहराई से अनुभव किया जा सकता है। भक्त का राधा के प्रति प्रेम और उन्हें अपने जीवन का केंद्र बनाना दर्शाता है कि भक्ति में आत्मसाक्षात्कार की गहराई है। राधा का चित्रण एक प्रेमिका के रूप में किया गया है, जो दासी की भावना से पूर्ण है। यह भक्ति मार्ग, सच्चे प्रेम और समर्पण का मार्ग बताता है, जहाँ भक्त राधा के चरणों में निवास करना चाहता है। भक्ति का यह मार्ग, व्यक्ति को आत्मा की शुद्धि, मन की शांति और ईश्वरीय प्रेम के निकट पहुँचाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवती राधा का स्थान भारतीय संस्कृति और धार्मिक ग्रंथों में अद्वितीय है। राधा-कृष्ण की प्रेम कथा को पौराणिक संदर्भों में महत्वपूर्ण माना गया है। भागवत पुराण और गीता में राधा के प्रति प्रेम और भक्तिरस का वर्णन है। राधा को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है, जिसके बिना कृष्ण की लीला अधूरी है। इस भजन में राधा से सहायता और कृपा का आह्वान किया गया है, जो यह दर्शाता है कि प्रेम और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा इसी कृपा से मिलती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का श्रवण और उच्चारण करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और आंतरिक संतुलन बना रहता है। भक्ति भाव से इसे गाने से मन में सकारात्मकता और सच्चे प्रेम की भावना जगती है। यह शरीर और मन दोनों को ऊर्जा प्रदान करता है, साथ ही आत्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप करने का सर्वश्रेष्ठ समय सुबह का ब्रह्म मुहूर्त है। पूजा स्थान पर एक दीपक जलाकर और फूलों के साथ राधा-कृष्ण की आराधना करते हुए इस भजन का उच्चारण करना चाहिए। मन को एकाग्र करते हुए भगवान की कृपा की भावना को मन में अनुभव करते हुए भजन गाना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य विषय क्या है?

इस भजन का मुख्य विषय राधा की कृपा की याचना करना है। भक्त राधा से एकाग्रता और प्रेम की शिक्षाएँ प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करता है।

क्या यह भजन केवल गाने के लिए है या ध्यान में भी उपयोगी है?

यह भजन न केवल गाने के लिए है, बल्कि ध्यान में भी प्रभावी है। इसे गुनगुनाने से मन में संतुलन और शांति बनी रहती है।

भजन के समय कौन-सी पूजा विधि का पालन करना चाहिए?

इस भजन के समय पूजा करते समय दीपक जलाना और फूलों का अर्पण करना उचित है। ध्यानपूर्वक भजन का उच्चारण करते हुए राधा से कृपा की प्रार्थना करनी चाहिए।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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