bholenath bhajan lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरे दर जबसे ओ भोले आना जाना हो गया लिरिक्स (Tere Dar Jab Se O Bhole Aana Jana Ho Gaya Lyrics in Hindi) - Bholenath Bhajan

शिव भजन 'तेरे दर जबसे ओ भोले आना जाना हो गया' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। महादेव की भक्ति से सराबोर इस भजन का भावार्थ और महत्व जानें।

Bholenath Bhajan

सनातन धर्म और शिव भक्ति की परंपरा में संकीर्तन, भजन और भगवान आशुतोष के चरणों में अनन्य अनुराग का अत्यंत ऊँचा स्थान है। "तेरे दर जबसे ओ भोले आना जाना हो गया" यह अत्यंत ही पावन, कर्णप्रिय और भावपूर्ण भजन देवों के देव महादेव भगवान शिव (भोलेनाथ) को समर्पित है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक के अंतर्मन को झंकृत करता है और उसमें अनन्य प्रेम, भक्ति रस तथा पूर्ण शरणागति (Surrender) का संचार करता है। जब कोई भक्त अपने जीवन की भागदौड़ और सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर निरंतर देवाधिदेव महादेव के दरबार की ओर उन्मुख होता है, तो उसका जीवन स्वतः ही पावन और सुगम हो जाता है।

कलयुग के इस जटिल कालखंड में प्रभु नाम का स्मरण और शिवजी के चरणों में प्रीति ही भवसागर से पार लगाने का एकमात्र सुलभ मार्ग बताई गई है। इस लेख में हम इसी दिव्य भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ, गायन की विधि, आध्यात्मिक महत्व और जीवन पर पड़ने वाले इसके गहरे प्रभाव का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मखड़ा):

तेरे दर जबसे ओ भोले आना जाना हो गया,
मेरा तो दुनिया में जीना सुहाना हो गया,
ओ भोले बाबा, मेरा जीना सुहाना हो गया!
तेरे दर जबसे ओ भोले आना जाना हो गया...

प्रथम अंतरा:

दुनिया के झंझटों में फंसा था यह मन मेरा,
भटकता रहता था हरपल, नहीं था कोई डेरा।
जबसे पकड़ी है मैंने यह पावन त्रिपुरारी शरण,
मेरे जीवन का हर इक पल बना पावन हवन।
तुझसे लगन जो लगी, दिल दीवाना हो गया,
मेरा तो दुनिया में जीना सुहाना हो गया...

द्वितीय अंतरा:

कैलाश के वासी तू हो दीनबंधु दानी,
तेरी महिमा गाती है यह सारी वेद-वानी।
जो भी तेरे द्वार आया, खाली कभी न लौटा,
किस्मत का सोया हुआ हर भाग्य चक्र है लौटा।
तूने जो थामा हाथ, सब पाना हो गया,
मेरा तो दुनिया में जीना सुहाना हो गया...

तृतीय अंतरा:

विष पीकर संसार बचाया, नीलकंठ कहलाए,
भक्तों की रक्षा करने डमरੂ बजाए।
हे भूतनाथ, हे महेश्वर, तुझको ही ध्याऊं,
जन्म-मजन्मांतर के फेरे अब मैं मिटाऊं।
तेरा ही सिमरन मेरा ठिकाना हो गया,
मेरा तो दुनिया में जीना सुहाना हो गया...

अंतिम चरण / समापन:

तेरे दर जबसे ओ भोले आना जाना हो गया,
मेरा तो दुनिया में जीना सुहाना हो गया,
हर हर महादेव का गूंजे डमरू का नाद,
भक्तों की झोली भर जाते हैं भोलेनाथ!
ओ भोले बाबा, मेरा जीना सुहाना हो गया!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि एक भक्त की अपनी आराध्य के प्रति अगाध निष्ठा और आत्मीय पुकार है। जब साधक कहता है कि "तेरे दर जबसे ओ भोले आना जाना हो गया, मेरा तो दुनिया में जीना सुहाना हो गया", तो इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ यह है कि मनुष्य जब अपने जीवन के दुखों, चिंताओं और भ्रमों को छोड़कर भगवान शिव के चरणों से जुड़ जाता है, तो उसका दृष्टिकोण ही बदल जाता है। संसार के प्रति उसका मोह कम हो जाता है और ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत होता है, जिससे उसका यह कठिन जीवन भी उत्सव और आनंदमय बन जाता है।

भजन के अंतरा में भक्त स्वीकार करता है कि वह पहले संसार की माया और दुखों के झंझटों में उलझा रहता था, लेकिन जब से उसने त्रिपुरारी भगवान शिव की शरण ग्रहण की है, उसके जीवन का प्रत्येक क्षण पवित्र हो गया है। भगवान शिव को 'कैलाशवासी', 'नीलकंठ', 'भूतनाथ' और 'दीनबंधु' कहकर संबोधित किया गया है। नीलकंठ रूप इस बात का प्रतीक है कि भगवान शिव ने संसार के कल्याण के लिए हलाहल विष को अपने कंठ में धारण किया था। इसी प्रकार, जो भक्त उनके दरबार में सच्ची निष्ठा से आता है, उसके सभी कष्ट और भाग्य के अवरोध दूर हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भगवान शिव सनातन धर्म के सबसे आशुतोष (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) और उदार देवता माने गए हैं। शिवभक्ति मनुष्य को भीतर से निर्भय और संतुष्ट बनाती है। इस भजन की विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पूर्ण शरणागति (Surrender): भजन सिखाता है कि अहंकार त्यागकर भगवान के दरबार में जाने मात्र से जीवन की समस्त उलझनें सुलझ जाती हैं।
  • मानसिक शांति: इस भजन का निरंतर गायन या श्रवण करने से मन की चंचलता समाप्त होती है और गहरी शांति की अनुभूति होती है।
  • सुलभ भक्ति: भगवान शिव को रिझाने के लिए कठिन तपस्या की नहीं, बल्कि सच्चे मन से एक लोटा जल और भोले नाम के सिमरन की आवश्यकता होती है।

इस प्रकार के भजनों के माध्यम से सनातन संस्कृति की यह अनमोल परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है और समाज में धार्मिक तथा आध्यात्मिक चेतना का प्रसार होता है। आप इसी प्रकार के अन्य पावन भजनों के लिए भोलेनाथ भजन संग्रह और शिव तांडव स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

शिव भजनों का आनंद और आध्यात्मिक प्रभाव सही समय और उचित भाव से लेने पर कई गुना बढ़ जाता है:

  • ब्रह्ममुहूर्त एवं प्रातःकाल: सुबह स्नान के पश्चात पूजा-अर्चना के समय इस भजन को गाने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।
  • प्रदोष काल एवं संध्याकाल: प्रदोष काल (शाम का समय) भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस समय शिव मंदिर में या घर के पूजा स्थल पर दीप जलाकर इसका गान करें।
  • महाशिवरात्रि एवं सावन मास: सावन के पवित्र महीने में और महाशिवरात्रि के महापर्व पर इस भजन का संकीर्तन विशेष फलदायी होता है।
  • सत्संग और जागरण: किसी भी पारिवारिक धार्मिक अनुष्ठान, शिव जागरण या साप्ताहिक सत्संग में इस भजन को समूह में पूरी तन्मयता के साथ गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में देवों के देव महादेव भगवान शिव और माता पार्वती हैं। शिवजी को संहारक और कल्याणकारी दोनों रूपों में पूजा जाता है। वे योगियों के आदिगुरु और गृहस्थों के पालनहार हैं। शिव परंपरा (शैवागम) में संकीर्तन को चित्त शुद्धि का सबसे सरल साधन माना गया है। प्राचीन काल से ही संत-महात्माओं ने भगवान भोलेनाथ की महिमा का गुणगान अपने पदों और भजनों के माध्यम से किया है। यह भजन उसी महान संकीर्तन परंपरा का एक आधुनिक और अत्यंत लोकप्रिय स्वरूप है जो जन-जन के कंठ में बस चुका है।

भजन की रचना एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी (खड़ी बोली) और लोक-संगीत की शैली में रचित है, जिससे यह आम से लेकर खास हर भक्त की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है। इसमें रूपक अलंकारों और भावपूर्ण शब्दावली का सुंदर समन्वय किया गया है। शब्दों की सरलता ही इस भजन की सबसे बड़ी ताकत है, जो बिना किसी कठिन व्याकरण के सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है। लय और ताल का ऐसा संयोजन है कि इसे ढोलक, मंजीरे या हारमोनियम के साथ बहुत ही मधुरता से गाया जा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें जीवन जीने की अमूल्य शिक्षा मिलती है:

  • चिंता मुक्त जीवन: जब मनुष्य अपने सभी भार और चिंताएं भगवान शिव को सौंप देता है, तो उसका मन हल्का और शांत हो जाता है।
  • धीरज और सहनशीलता: नीलकंठ भगवान शिव से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन के विषैले अनुभवों या दुखों को पचाकर भी दूसरों के कल्याण की भावना रखनी चाहिए।
  • नियमित स्मरण: चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, ईश्वर के दरबार में हाजिरी लगाना (नाम सिमरन करना) कभी नहीं भूलना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
त्रिपुरारी त्रिपुर नामक असुर का वध करने वाले भगवान शिव का एक प्रसिद्ध नाम
नीलकंठ नीले कंठ वाले विष पीने के कारण जिनका गला नीला पड़ गया
सिमरन स्मरण करना या जप करना निरंतर ईश्वर का ध्यान करना
दीनबंधु गरीबों और असहायों के मित्र जो सबकी पुकार सुनते हैं

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तेरे दर जबसे ओ भोले आना जाना हो गया..."
भावार्थ: हे भोलेनाथ! जब से मेरे कदम आपके पावन दरबार की ओर मुड़े हैं और मेरा आपके यहाँ आना-जाना शुरू हुआ है, तब से मेरा जीवन पूरी तरह बदल गया है।

"दुनिया के झंझटों में फंसा था यह मन मेरा..."
भावार्थ: पहले मेरा यह मन संसार की माया, मोह और उलझनों में भटकता रहता था, मुझे कोई सही दिशा या ठिकाना नहीं मिल रहा था।

"विष पीकर संसार बचाया, नीलकंठ कहलाए..."
भावार्थ: आपने समुद्र मंथन के समय कालकूट विष को अपने कंठ में रोककर इस संपूर्ण सृष्टि की रक्षा की, इसीलिए आप 'नीलकंठ' के रूप में पूजे जाते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन के साथ निम्नलिखित महामृत्युंजय मंत्र या शिव पंचाक्षर मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

तथा पंचाक्षर स्तोत्र: ॐ नमः शिवाय

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरे दर जबसे ओ भोले आना जाना हो गया
आराध्य देव भगवान शिव (भोलेनाथ / महादेव)
संगीत विधा भक्ति भजन / संकीर्तन
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-खड़ी बोली मिश्रित
मुख्य भाव प्रेम, शरणागति, आनंद और भक्ति रस
उपयुक्त अवसर सावन मास, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: "तेरे दर जबसे ओ भोले आना जाना हो गया" भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन देवों के देव महादेव भगवान शिव (भोलेनाथ) को समर्पित है।

Q2: इस भजन को किस समय गाना सबसे अच्छा माना जाता है?

इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय, प्रदोष काल (संध्या) या सावन मास एवं महाशिवरात्रि के दौरान गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Q3: क्या इस भजन को घर पर सत्संग के दौरान गाया जा सकता है?

हाँ, यह भजन बहुत ही सरल और कर्णप्रिय है, जिसे परिवार के साथ सत्संग या जागरण में आसानी से गाया जा सकता है।

Q4: शिव भक्ति से जीवन में क्या लाभ मिलता है?

शिव भक्ति से मन को शांति, मानसिक विकारों से मुक्ति और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है।

Q5: भगवान शिव को कौन सा वार सबसे प्रिय है?

भगवान शिव को सोमवार का दिन सबसे प्रिय माना जाता है, इस दिन विशेष पूजा और व्रत रखे जाते हैं।

Q6: क्या इस भजन के बोल हिंदी में उपलब्ध हैं?

जी हाँ, इस लेख में संपूर्ण भजन के बोल देवनागरी लिपि (हिंदी) में उपलब्ध कराए गए हैं।

Q7: भगवान शिव का प्रसिद्ध मंत्र कौन सा है?

"ॐ नमः शिवाय" और महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली मंत्र हैं।

Q8: क्या इस भजन को बिना संगीत के भी गाया जा सकता है?

बिल्कुल, भक्ति भाव प्रधान होने के कारण इसे केवल ताली बजाकर या मन ही मन स्मरण करके भी पूरी तन्मयता से गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म की भजन परंपरा और शिव भक्ति के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध गीत, उसका सरल अर्थ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन पुराण एवं शिव पुराण कथा प्रसंग
  • पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन संग्रह
  • शैव आगम एवं वैदिक स्तोत्र परंपरा

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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