Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

गोपी गीत लिरिक्स (Gopi Geet Lyrics in Hindi) - Devi Chitralekha Ji जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः - भक्तिलोक

मां दुर्गा भजन "गोपी गीत लिरिक्स (Gopi Geet Lyrics in Hindi) - Devi Chitralekha Ji जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः - भक्तिलोक" के हिन्दी लिरिक्स, भावार्थ और शुक्रवार पूजा साधना विधि। माता रानी के भजन की महिमा, शत्रु विजय और सुख-समृद्धि के लाभ पढ़ें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
गोपी गीत लिरिक्स (Gopi Geet Lyrics in Hindi) - Devi Chitralekha Ji 

 गोपी गीत लिरिक्स (Gopi Geet Lyrics in Hindi) - 

॥
गोपीगीतम् ॥

गोप्य ऊचुः ।
जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः
    श्रयत इन्दिरा शश्वदत्र हि ।
दयित दृश्यतां दिक्षु तावका

    स्त्वयि धृतासवस्त्वां विचिन्वते ॥
१ ॥

शरदुदाशये साधुजातस
    त्सरसिजोदरश्रीमुषा दृशा ।
सुरतनाथ तेऽशुल्कदासिका
    वरद निघ्नतो नेह किं वधः ॥

२ ॥
विषजलाप्ययाद्व्यालराक्षसा
    द्वर्षमारुताद्वैद्युतानलात् ।
वृषमयात्मजाद्विश्वतोभया

    दृषभ ते वयं रक्षिता मुहुः ॥
३ ॥

न खलु गोपिकानन्दनो भवा
    नखिलदेहिनामन्तरात्मदृक् ।
विखनसार्थितो विश्वगुप्तये
    सख उदेयिवान्सात्वतां कुले ॥

४ ॥
विरचिताभयं वृष्णिधुर्य ते
    चरणमीयुषां संसृतेर्भयात् ।
करसरोरुहं कान्त कामदं

    शिरसि धेहि नः श्रीकरग्रहम् ॥
५ ॥

व्रजजनार्तिहन्वीर योषितां
    निजजनस्मयध्वंसनस्मित ।
भज सखे भवत्किंकरीः स्म नो
    जलरुहाननं चारु दर्शय ॥

६ ॥
प्रणतदेहिनां पापकर्शनं
    तृणचरानुगं श्रीनिकेतनम् ।
फणिफणार्पितं ते पदांबुजं

    कृणु कुचेषु नः कृन्धि हृच्छयम् ॥
७ ॥

मधुरया गिरा वल्गुवाक्यया
    बुधमनोज्ञया पुष्करेक्षण ।
विधिकरीरिमा वीर मुह्यत�
    रधरसीधुनाऽऽप्याययस्व नः ॥

८ ॥
तव कथामृतं तप्तजीवनं
    कविभिरीडितं कल्मषापहम् ।
श्रवणमङ्गलं श्रीमदाततं

    भुवि गृणन्ति ते भूरिदा जनाः ॥
९ ॥

प्रहसितं प्रिय प्रेमवीक्षणं
    विहरणं च ते ध्यानमङ्गलम् ।
रहसि संविदो या हृदिस्पृशः
    कुहक नो मनः क्षोभयन्ति हि ॥

१० ॥
चलसि यद्व्रजाच्चारयन्पशून्
    नलिनसुन्दरं नाथ ते पदम् ।
शिलतृणाङ्कुरैः सीदतीति नः

    कलिलतां मनः कान्त गच्छति ॥
११ ॥

दिनपरिक्षये नीलकुन्तलै
    र्वनरुहाननं बिभ्रदावृतम् ।
घनरजस्वलं दर्शयन्मुहु
    र्मनसि नः स्मरं वीर यच्छसि ॥

१२ ॥
प्रणतकामदं पद्मजार्चितं
    धरणिमण्डनं ध्येयमापदि ।
चरणपङ्कजं शंतमं च ते

    रमण नः स्तनेष्वर्पयाधिहन् ॥
१३ ॥

सुरतवर्धनं शोकनाशनं
    स्वरितवेणुना सुष्ठु चुम्बितम् ।
इतररागविस्मारणं नृणां
    वितर वीर नस्तेऽधरामृतम् ॥

१४ ॥
अटति यद्भवानह्नि काननं
    त्रुटिर्युगायते त्वामपश्यताम् ।
कुटिलकुन्तलं श्रीमुखं च ते

    जड उदीक्षतां पक्ष्मकृद्दृशाम् ॥
१५ ॥

पतिसुतान्वयभ्रातृबान्धवा
    नतिविलङ्घ्य तेऽन्त्यच्युतागताः ।
गतिविदस्तवोद्गीतमोहिताः
    कितव योषितः कस्त्यजेन्निशि ॥

१६ ॥
रहसि संविदं हृच्छयोदयं
    प्रहसिताननं प्रेमवीक्षणम् ।
बृहदुरः श्रियो वीक्ष्य धाम ते

    मुहुरतिस्पृहा मुह्यते मनः ॥
१७ ॥

व्रजवनौकसां व्यक्तिरङ्ग ते
    वृजिनहन्त्र्यलं विश्वमङ्गलम् ।
त्यज मनाक् च नस्त्वत्स्पृहात्मनां
    स्वजनहृद्रुजां यन्निषूदनम् ॥

१८ ॥
यत्ते सुजातचरणाम्बुरुहं स्तनेष
    भीताः शनैः प्रिय दधीमहि कर्कशेषु ।
तेनाटवीमटसि तद्व्यथते न किंस्वित्

    कूर्पादिभिर्भ्रमति धीर्भवदायुषां नः ॥
१९ ॥

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मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "गोपी गीत लिरिक्स (Gopi Geet Lyrics in Hindi) - Devi Chitralekha Ji जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः - भक्तिलोक" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।
भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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