hari bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

रट ले हरि का नाम रे प्राणी रट ले हरि का नाम लिरिक्स (Rut Le Hari Ka Naam Re Prani Rat Le Hari Ka Naam Lyrics in Hindi) - Hari Bhajan

रट ले हरि का नाम रे प्राणी रट ले हरि का नाम लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित यह प्रेरणादायी हरि भजन Bhaktilok पर उपलब्ध है।

Hari Bhajan

प्रकाशित तिथि: 2026 | श्रेणी: हरि भजन, भक्ति संगीत, संत वाणी | वाचन अवधि: 10 मिनट

कलयुग के इस भौतिक और मायावी संसार में मानव जीवन अत्यंत दुर्लभता से प्राप्त होता है। मनुष्य अपनी दिनचर्या में इस प्रकार उलझ जाता है कि वह अपने जीवन के परम लक्ष्य यानी भगवत्प्राप्ति और आत्मिक शांति को भूल बैठता है। "रट ले हरि का नाम रे प्राणी रट ले हरि का नाम" एक अत्यंत प्रेरणादायी, चेतावनियों से परिपूर्ण और भक्ति रस से सराबोर हरि भजन है। यह भजन हमें नश्वर संसार की वास्तविकताओं से परिचित कराते हुए निरंतर भगवान श्री हरि (विष्णु, कृष्ण, राम) के पावन नामों का स्मरण करने का उपदेश देता है। इस संपूर्ण मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, जीवन में इसके महत्व और नियमपूर्वक इसके श्रवण-गायन के लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| रट ले हरि का नाम रे प्राणी रट ले हरि का नाम ||

रट ले हरि का नाम रे प्राणी रट ले हरि का नाम,
सब छोड़ दे उल्टे काम रे बैरी छोड़ दे उल्टे काम रे,
रट ले हरि का नाम रे प्राणी रट ले हरि का नाम।

जिस दौलत पर तुझे है भरोसा, जाने कब तुझे दे जाये धोखा,
लुट जाये सरेआम रे प्राणी लुट जाये सरेआम रे,
रट ले हरि का नाम रे प्राणी रट ले हरि का नाम।

देख क्यों हँसता सुंदर काया, चिंता बीच जब जाए जलाया,
तेरा माँस रहेगा ना चाम रे प्राणी माँस रहेगा ना चाम रे,
रट ले हरि का नाम रे प्राणी रट ले हरि का नाम।

पाप करे और गंगा नहाए, किससे तू अपने पाप छिपाए,
तेरा होगा बुरा अंजाम रे प्राणी होगा बुरा अंजाम रे,
रट ले हरि का नाम रे प्राणी रट ले हरि का नाम।

मथुरा और काशी घूमे, मन काँटे का काँटा चूमे,
तेरा बीते है उम्र तमाम रे प्राणी बीते है उम्र तमाम रे,
रट ले हरि का नाम रे प्राणी रट ले हरि का नाम।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल कुछ पंक्तियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना को जागृत करने वाला एक अत्यंत गंभीर दार्शनिक संदेश है। इसके प्रत्येक चरण में जीवन के कड़वे सत्यों और भगवान के नाम की महत्ता को उजागर किया गया है:

मुखड़ा और प्रारंभिक पंक्तियाँ

भजन के आरंभ में रचनाकार प्राणी को चेतावनी देते हुए कहता है कि हे मनुष्य! इस संसार के प्रपंचों और मायावी बंधनों में फंसकर अपने बहुमूल्य समय को व्यर्थ मत गंवाओ। सांसारिक कुकर्मों और उल्टे मार्गों को त्यागकर केवल और केवल परमपिता परमात्मा श्री हरि के पावन नाम की रट लगा लो। यही नाम इस भवसागर से पार लगाने का एकमात्र अचूक साधन है।

धन और दौलत की नश्वरता

दूसरी पंक्ति में मनुष्य के उस अहंकार पर चोट की जाती है जो वह अपनी धन-दौलत और संपत्ति पर करता है। भौतिक संपत्ति और माया का कोई भरोसा नहीं है। यह आज है तो कल नष्ट हो सकती है, या मृत्यु के समय यहीं धरी रह जाती है। जीवन के अंतिम क्षणों में यही धन व्यक्ति को सबसे बड़ा धोखा देता है जब वह चाहकर भी एक सांस नहीं खरीद सकता। अतः ऐसे नश्वर धन के पीछे भागने के बजाय उस अविनाशी हरि का नाम जपना चाहिए।

शरीर की सुंदरता और नश्वरता

मनुष्य अपने रूप, रंग और सुंदर शरीर पर बहुत गर्व करता है। भजनकार याद दिलाता है कि इस काया (शरीर) पर अहंकार क्यों करते हो? अंत में इस शरीर को चिता की अग्नि में ही जलना है। जब प्राण निकल जाते हैं, तो इस शरीर में न तो माँस शेष रहता है और न ही चाम (त्वचा)। सब कुछ मिट्टी में मिल जाता है। इसलिए इस नश्वर देह के अभिमान को छोड़कर शाश्वत सत्य हरि के नाम से जुड़ना चाहिए।

पाखंड और कर्मों का सिद्धांत

चौथी पंक्ति समाज के उस वर्ग पर कटाक्ष करती है जो दिनभर अनैतिक कार्य और पाप करता है और यह सोचता है कि गंगा स्नान करने से उसके सारे पाप धुल जाएंगे। परमात्मा सर्वज्ञ है, उससे अपने कर्मों को नहीं छिपाया जा सकता। छल-कपट से किए गए पापकर्मों का बुरा परिणाम जीव को भुगतना ही पड़ता है। गंगा स्नान तभी सार्थक है जब हृदय में सच्ची निष्ठा और पवित्रता हो।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

वैराग्य और चेतना का संदेश

यह भजन मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मनिरीक्षण करने की प्रेरणा देता है। इसे सुनने से मन में वैराग्य और भक्ति का भाव स्वतः जागृत होता है।

हरि नाम संकीर्तन की महिमा

सनातन धर्म में कलयुग के संदर्भ में कहा गया है कि 'हरि स्मरण' ही मोक्ष का द्वार है। यह भजन उसी नाम संकीर्तन की सर्वोपरि महिमा का गान करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रकार के संतों और महात्माओं द्वारा रचित भजनों को गाने या सुनने के लिए किसी कठोर नियमों की आवश्यकता नहीं होती, तथापि यदि इसे विधिपूर्वक किया जाए तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

  • ब्रह्म बेला (प्रातःकाल): सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर शांत चित्त से इस भजन का स्मरण करने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।
  • संध्या वंदन एवं सत्संग: शाम के समय पूजा घर में दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात पारिवारिक सत्संग के दौरान इस भजन का सामूहिक गायन अत्यंत आनंददायक होता है।
  • एकादशी एवं व्रत के दिन: भगवान विष्णु के विशेष पावन दिवसों (एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा) पर हरि नाम संकीर्तन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु (तथा उनके अवतारों यथा श्री राम और श्री कृष्ण) को समर्पित है। संत परंपरा में नाम स्मरण (नाम जप) को सबसे बड़ा योग माना गया है। इस भजन की शैली लोक-संतों और पारंपरिक भजन गायकों की उस महान परंपरा का हिस्सा है जो आम जनमानस को सरल शब्दों में वेदों और उपनिषदों के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराते हैं। इसी प्रकार के अन्य पावन भजनों के स्मरण के लिए आप श्री हरि भजन संग्रह का अवलोकन कर सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
रट ले निरंतर स्मरण करना भगवान के नाम को सांसारिक कार्यों के बीच भी मन में बसाए रखना।
काया शरीर / देह नश्वर भौतिक शरीर जिसपर मनुष्य अहंकार करता है।
चाम त्वचा / चर्म शरीर का बाहरी आवरण जो मृत्यु के पश्चात नष्ट हो जाता है।
भवसागर संसार रूपी सागर जन्म-मृत्यु के चक्र से पार पाने का मार्ग।
सत्संग सत्य का साथ / संगति संतों और भगवान की कथाओं का श्रवण।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें निम्नलिखित अमूल्य जीवन सीख मिलती हैं:

  1. अहंकार का त्याग: धन, यौवन और शक्ति क्षणिक हैं; इन पर कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए।
  2. कर्म की शुद्धता: केवल बाहरी तीर्थाटन या दिखावे से पाप नहीं मिटते, उसके लिए सच्चे मन से प्रायश्चित और सत्कर्म आवश्यक हैं।
  3. नश्वरता का बोध: शरीर एक दिन मिट्टी में मिल जाना है, इसलिए आत्मा के कल्याण और भगवद्भक्ति को प्राथमिकता दें।
  4. हरि नाम की शरण: विपत्ति और सुख दोनों अवस्थाओं में भगवान का स्मरण ही मनुष्य का सच्चा साथी है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

हरि नाम स्मरण की पुष्टि करने वाले पावन वैदिक एवं पौराणिक श्लोक:

"हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥"

-- कलियुगोद्धार महामंत्र --

"विष्णोः स्मरणे संततो मुनिभिः कथितं परमं साधनम्।"

-- भगवान विष्णु के स्मरण को मुनियों ने समस्त साधनों में श्रेष्ठ बताया है --

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम रट ले हरि का नाम रे प्राणी (Rut Le Hari Ka Naam Re Prani)
श्रेणी / विधा हरि भजन / संत वाणी / वैराग्य गीत
मुख्य आराध्य भगवान श्री हरि विष्णु / श्रीराम / श्री कृष्ण
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित लोक भाषा
प्रमुख भाव वैराग्य, चेतावनी, भक्ति एवं आत्मसमर्पण
उपयुक्त अवसर प्रातः स्मरण, सत्संग, एकादशी पूजन, धार्मिक अनुष्ठान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि यह संसार और शरीर नश्वर हैं। धन, यौवन और काया पर अहंकार करना व्यर्थ है। मनुष्य को अपने सभी दुखों और बंधनों से मुक्त होने के लिए निरंतर भगवान श्री हरि का नाम जपना चाहिए।

इस भजन को प्रातःकाल ब्रह्म बेला में, संध्या वंदन के समय, अथवा एकादशी जैसे पावन अवसरों पर शांत चित्त से सुनना या गाना सबसे उत्तम माना जाता है। इससे मन को गहरी शांति मिलती है।

हाँ, यह एक अत्यंत मधुर और पारिवारिक सत्संगोपयोगी भजन है। इसे बच्चों और परिवार के सदस्यों के साथ सामूहिक रूप से गाने से घर में सकारात्मक और धार्मिक वातावरण का निर्माण होता है।

यहाँ 'काया' का अर्थ भौतिक शरीर से है और 'चाम' का अर्थ त्वचा या चमड़ी से है। भजन के माध्यम से यह समझाया गया है कि मृत्यु के पश्चात यह सुंदर शरीर और उसकी त्वचा सब अग्नि में भस्म हो जाती है, इसलिए शरीर पर घमंड नहीं करना चाहिए।

हरि नाम के निरंतर स्मरण से मन का भटकना बंद होता है, मानसिक तनाव कम होता है, पापों से मुक्ति मिलती है और अंत समय में परम गति अथवा मोक्ष की प्राप्ति होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य सनातन संस्कृति, संत वाणी और पारंपरिक भजनों के माध्यम से पाठकों तक शुद्ध आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक संदेश पहुंचाना है। सभी पंक्तियों और अर्थों को प्रामाणिक धार्मिक परंपराओं के आधार पर सरल हिंदी में संकलित किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • • सनातन धर्म के पारंपरिक लोक भजन एवं संत वाणी संग्रह
  • • श्रीमद्भागवत गीता एवं पुराणों में वर्णित नाम संकीर्तन महिमा
  • • पारंपरिक वैष्णव भजन परंपरा एवं लोक साहित्य

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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