Krishna Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे भजन लिरिक्स (Pakad Lo Hath Banwari Nahi Toh Doob Jayenge Lyrics in Hindi) - Radha Krishna Bhajan

पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे भजन लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित सुंदर राधा कृष्ण भजन का आनंद लें।

राधा कृष्ण भजन

पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे भजन लिरिक्स (Pakad Lo Hath Banwari Nahi Toh Doob Jayenge Lyrics in Hindi)

भक्ति, समर्पण और विनय से परिपूर्ण 'पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे' एक अत्यंत भावुक और लोकप्रिय राधा-कृष्ण भजन है। वैष्णव संप्रदाय और सनातन भक्ति परंपरा में आराध्य और भक्त के बीच का संबंध अत्यंत अनूठा और कोमल माना गया है। जब संसार रूपी भवसागर के थपेड़ों से जीवात्मा विचलित हो जाती है, तब एकमात्र बांकेबिहारी श्री कृष्ण की शरण ही उसका संबल बनती है। इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त के भीतर की आर्त पुकार और परमेश्वर के प्रति अनन्य विश्वास को प्रकट करता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, गायन की विधि, दार्शनिक महत्व और इससे जुड़ी आध्यात्मिक गहराइयों का रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मखड़ा):

पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे,
चरण में आपके हमको, सहारे की जरूरत है।
भवर में फंस गई नैया, किनारे अब लगा देना,
तुम्हीं खेवैया मेरे हो, तुम्हें मेरी खबर लेना॥

प्रथम अंतरा:

सुना है आपकी महिमा, दयालु आप कहलाते,
गरीबों के हो रखवाले, पुकारत जो चले आते।
तुम्हारी बंसी की धुन पर, फिदा सारा जमाना है,
हमारे दिल की धड़कन में, तुम्हारा ही ठिकाना है॥
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे...

द्वितीय अंतरा:

भटकते-भटकते जीवन की, ये शाम होने को आई,
न कोई अपना दीदार हुआ, न कोई प्रीत अपनाई।
चले आए हैं तेरी दर पे, झोली को पसारे हम,
कृपा की एक नजर कर दो, सताए हैं सहारे हम॥
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे...

तृतीय अंतरा:

राधा रानी के प्यारे हो, मुरلي वाले कन्हैया हो,
भक्तों की हर एक मुश्किल के, तुम ही तो खिवैया हो।
उम्मीदों का ये दामन हम, कभी ना हाथ से छोड़ेंगे,
जो तुम रुठ गए हमसे, तो किससे नाता जोड़ेंगे॥
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

'पकड़ लो हाथ बनवारी' भजन केवल शब्दों की माला नहीं है, बल्कि यह एक साधक की उस आंतरिक स्थिति का चित्रण है जहाँ वह स्वयं को पूरी तरह असमर्थ पाकर अपने प्रियतम श्री कृष्ण को समर्पित कर देता है। इस भजन का गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थ है:

भवसागर से तारण की पुकार: भजन के मुखड़े में भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि जीवन रूपी अथाह सागर में उसकी नौका भंवर में फंस चुकी है। माया के प्रपंच और मोह-माया के बंधनों से स्वयं को छुड़ाने में असमर्थ भक्त भगवान के सम्मुख अपने दोनों हाथ जोड़कर उनके कर-कमलों का आश्रय मांगता है।

शरणागति का भाव: सनातन संस्कृति में 'शरणागति' (पूर्ण समर्पण) को मोक्ष का मार्ग बताया गया है। जब जीव अपनी चतुराई और अहंकार का त्याग करके भगवान से कहता है—"तुम्हीं खेवैया मेरे हो"—तो भगवान की कृपा स्वतः ही प्रवाहित होने लगती है। यह भजन साधक के भीतर के अहंकार को मिटाकर दीनता और विनय का भाव जगाता है।

राधा रानी और बांकेबिहारी के पावन चरणों में अर्पित यह पद हमें यह सिखाता है कि सांसारिक दुखों और असफलताओं से निराश होने के बजाय, यदि हम सच्चे हृदय से ब्रजनाथ को पुकारें, तो वे किसी न किसी रूप में हमारा हाथ थामने अवश्य आते हैं। ऐसे ही अन्य भावपूर्ण पदों के लिए आप हमारा राधा कृष्ण भजन संग्रह पढ़ सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • इष्ट देव: यह भजन जगत के पालनहार श्री बांकेबिहारी, नंदनंदन श्री कृष्ण और स्वरूपा शक्ति स्वरूपा श्री राधा रानी को समर्पित है।
  • भक्ति का प्रकार: यह 'दैनीय भाव' और 'कान्हा के प्रति अनन्य प्रेम' (सख्य एवं माधुर्य मिश्रित विनय) का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • सांस्कृतिक महत्व: ब्रज मंडल, संकीर्तन मंडलियों और एकाग्रता के लिए सत्संग में इस प्रकार के भजनों का विशेष स्थान है।
  • मानसिक शांति: तनाव और अवसाद के क्षणों में इस भजन का स्मरण करने से मन को असीम शांति और संबल प्राप्त होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत की पवित्रता को बनाए रखने के लिए कुछ नियमों और विधियों का पालन करना लाभकारी होता है:

  1. नियम व समय: इस भजन को प्रातःकालीन बेला में (ब्रह्म मुहूर्त) अथवा संध्याकाल में पूजा के समय गाना या सुनना सबसे उत्तम माना गया है।
  2. स्थान: घर के मंदिर, एकांत कक्ष अथवा किसी शांत और पवित्र स्थान पर बैठकर इसका स्मरण करना चाहिए।
  3. भाव भंगिमा: भजन गाते समय नेत्र बंद करके भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए और करबद्ध होकर प्रार्थना करनी चाहिए।
  4. विशेष अवसर: जन्माष्टमी, राधारानी जन्मोत्सव, एकादशी व्रत या किसी भी सत्संग और कीर्तन के दौरान इस भजन का सामूहिक गान विशेष आनंद देता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

सनातन धर्म में श्री कृष्ण और राधा रानी को प्रेम और भक्ति का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है। श्रीमद्भागवत महापुराण और ब्रज की रसखान, सूरदास, मीराबाई जैसी संत परंपराओं ने इसी विरह और मिलन के भाव को अपने पदों में पिरोया है। जब भक्त स्वयं को दीन-हीन मानकर गोपी भाव या सखा भाव से भगवान को पुकारता है, तो भगवान भक्त की रक्षा के लिए तनिक भी विलंब नहीं करते।

भक्तों के संकटों का निवारण करने के लिए आप हमारी पावन कथाओं जैसे श्री कृष्ण लीला कथा का भी अध्ययन कर सकते हैं, जो आपको भगवान की अहेतु कृपा से अवगत कराती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक संत-संगीत शैली का एक सुंदर मिश्रण है। इसे समय-समय पर विभिन्न प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा अपनी मधुर आवाज में गाया गया है। इसकी सहज भाषा और हृदयस्पर्शी पंक्तियाँ इसे हर वर्ग के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाती हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और लोक-व्यवहार के निकट है। इसमें ब्रजभाषा और खड़ी बोली हिंदी के सुंदर शब्दों का समन्वय किया गया है। काव्य की दृष्टि से इसमें रूपक अलंकार ('भवसागर', 'मैया', 'खेवैया') और अनुप्रास अलंकार का सहज प्रयोग हुआ है, जो इसके सौंदर्य को और अधिक द्विगुणित कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी विपत्ति आ जाए, मनुष्य को अपने बल पर घमंड न करके ईश्वर की शरण में जाना चाहिए।
  • अटूट विश्वास: कठिन परिस्थितियों में भी भगवान पर भरोसा नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि वही अंतिम खेवैया हैं।
  • शरणागति का मार्ग: भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण ही सभी दुखों का एकमात्र औषध है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
बनवारी श्री कृष्ण (वन में विहार करने वाले) भक्त द्वारा आराध्य का संबोधन
भवसागर संसार रूपी सागर / मोह-माया जीवन के दुखों और संघर्षों का प्रतीक
खेवैया नाव चलाने वाला / नाविक भक्त को पार लगाने वाले श्री कृष्ण
शरणागति पूर्ण रूप से शरण में जाना भक्त का ईश्वर के प्रति समर्पण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे..."
इस प्रथम पंक्ति में भक्त अपने इष्ट श्री कृष्ण से निवेदन कर रहा है कि यदि इस संकट की घड़ी में आपने उसका हाथ नहीं थामा, तो वह इस संसार के प्रपंच में पूरी तरह डूब जाएगा।

"भवर में फंस गई नैया, किनारे अब लगा देना..."
यहाँ जीवन को एक नौका और समस्याओं को भंवर (भंवरजाल) माना गया है, जिससे पार पाने की शक्ति केवल भगवान के पास है।

"जो तुम रुठ गए हमसे, तो किससे नाता जोड़ेंगे..."
यह पंक्ति भक्त के अनन्य प्रेम को दर्शाती है कि इस संसार में श्री कृष्ण के अतिरिक्त उसका अपना कोई नहीं है। ऐसी ही भक्ति की गहराइयों को जानने के लिए आप भक्ति मार्ग और समर्पण पर हमारा विस्तृत लेख पढ़ सकते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भगवान श्री कृष्ण की शरण में जाने के लिए निम्नलिखित महामंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी माना गया है:

"कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणा क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥"

इस मंत्र का नियमित जाप करने से मानसिक संताप दूर होते हैं और भगवान का सानिध्य प्राप्त होता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे भजन लिरिक्स
इष्ट देवता श्री राधा कृष्ण / बांकेबिहारी
संगीत परंपरा वैष्णव भक्ति / संकीर्तन शैली
भाषा सरल हिंदी एवं ब्रजभाषा के शब्द
मुख्य भाव शरणागति, विनय और प्रेम
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग, एकादशी, जन्माष्टमी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. 'पकड़ लो हाथ बनवारी' भजन किस देवी-देवता को समर्पित है?

यह भजन जगत के पालनहार भगवान श्री कृष्ण (बांकेबिहारी) और श्री राधा रानी को समर्पित है।

Q2. इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय कौन सा है?

इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय अथवा संध्याकाल में शांत मन से गाना सबसे उत्तम माना गया है।

Q3. इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति और संकट के समय ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना है।

Q4. क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?

हाँ, इसे घर पर अकेले ध्यान मुद्रा में या परिवार के साथ सामूहिक सत्संग में भी गाया जा सकता है।

Q5. भगवान श्री कृष्ण को 'बनवारी' क्यों कहा जाता है?

'बनवारी' शब्द 'बनवार' से बना है जिसका अर्थ है वन या वृंदावन में विहार करने वाले, जो कि श्री कृष्ण का एक प्रिय नाम है।

Q6. क्या इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है?

निसंदेह, भक्ति संगीत और भगवान के गुणों का स्मरण करने से मन का तनाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है।

Q7. इस भजन में 'खेवैया' किसे कहा गया है?

भजन में 'खेवैया' भगवान श्री कृष्ण को कहा गया है जो जीवन रूपी नौका को भवसागर से पार लगाते हैं.

Q8. ऐसे अन्य लोकप्रिय राधा-कृष्ण भजन कहाँ पढ़ सकते हैं?

आप हमारे पोर्टल Bhaktilok.in पर विभिन्न प्रकार के राधा-कृष्ण भजन, चालीसा और कथाएँ पढ़ सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन भक्ति परंपरा, वैष्णव दर्शन और लोक-संस्कृति के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और भावपूर्ण भजन लिरिक्स के साथ-साथ उसकी आध्यात्मिक गहराई से परिचित कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (प्रकाशन गीताप्रेस गोरखपुर)
  • ब्रज के संत एवं उनकी भक्ति परंपरा
  • पारंपरिक वैष्णव संकीर्तन और लोक भजन संग्रह

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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