Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

नटवर नागर नंदा भजो रे मन गोविंदा भजन लिरिक्स (natavar naagar nanda bhajo re man govinda Lyrics) - Rakesh Kala Krishna Bhajan

नटवर नागर नंदा भजो रे मन गोविंदा भजन के संपूर्ण लिरिक्स और हिंदी भावार्थ पढ़ें। राकेश काला के इस लोकप्रिय कृष्ण भजन से मन को शांति और भक्ति प्राप्त करें।

हिंदू सनातन धर्म में नाम-संकीर्तन की महिमा को सर्वोपरि माना गया है। "नटवर नागर नंदा भजो रे मन गोविंदा" एक ऐसा ही कालजयी और अत्यंत लोकप्रिय पारंपरिक कृष्ण भजन है, जो भक्त के हृदय में दिव्य प्रेम, समर्पण और आनंद का संचार करता है। इस भजन में भगवान श्री कृष्ण के 'नटवर' (सर्वश्रेष्ठ नर्तक व लीलाधर) और 'नागर' (चतुर व रसिक शिरोमणि) स्वरूप की आराधना की गई है। यह भजन मुख्य रूप से 'माधुर्य भाव' और 'शांत-सख्य रस' से ओतप्रोत है, जो चंचल मन को सांसारिक प्रपंचों से हटाकर गोविंद के पावन चरणों में लीन होने की प्रेरणा देता है। राकेश काला जी की मधुर आवाज में गाया गया यह भजन मंदिरों, दैनिक पूजा-अर्चना, संकीर्तन सभाओं और विशेषकर श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भक्तों द्वारा अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है। आइए, इस दिव्य भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ और इसके गहरे आध्यात्मिक संदेश को समझें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

नटवर नागर नंदा भजो रे मन गोविंदा।
श्याम सुंदर मुख चंदा भजो रे मन गोविंदा॥

तूं ही नटवर तूं ही नागर, तूं ही बाल मुकन्दा।
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा॥

सब देवन में कृष्ण बड़े हैं, ज्यों तारा विच चंदा।
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा॥

सब सखियन में राधाजी बड़ी हैं, ज्यों नदियां वींच गंगा।
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा॥

ध्रुव तारे प्रह्लाद उबारे, नरसिंह रूप धरंता।
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा॥

कालीदह में नाग ज्यों नाथों, फण-फण निरत करंता।
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा॥

वृन्दावन में रास रचायो, नाचत बाल मुकन्दा।
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा॥

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, काटो जम का फंदा।
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा॥

तूं ही नटवर तूं ही नागर, तूं ही बाल मुकन्दा।
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा॥

नटवर नागर नंदा भजो रे मन गोविंदा।
श्याम सुंदर मुख चंदा भजो रे मन गोविंदा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन जीवात्मा और परमात्मा के बीच के मधुर संबंध को दर्शाता है। यहाँ कवि अपने स्वयं के मन को संबोधित करते हुए कहता है कि हे चंचल मन! तू व्यर्थ की चिंताओं और सांसारिक बंधनों को छोड़कर उस नंदनंदन, नटवर नागर श्री गोविंद का भजन कर।

मन को गोविंद नाम की प्रेरणा: भजन की शुरुआत ही मन को जगाने से होती है। 'गोविंद' का अर्थ है इंद्रियों के स्वामी और गायों के रक्षक। जब मन गोविंद के नाम में रमता है, तो वह स्वतः ही शांत और आनंदित हो जाता है। भगवान का मुखमंडल पूर्णिमा के चंद्रमा के समान शीतल और प्रकाशमान है, जो भक्त के जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को तत्क्षण दूर कर देता है।

सर्वोच्च सत्ता और अनन्य भक्ति: भजन में भगवान श्री कृष्ण को सभी देवताओं में उसी प्रकार सर्वश्रेष्ठ बताया गया है जैसे टिमटिमाते तारों के बीच चंद्रमा अपनी पूर्ण आभा के साथ चमकता है। इसी प्रकार, श्री राधा रानी को सभी सखियों और गोपियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, जैसे सभी पवित्र नदियों में मां गंगा का स्थान सर्वोपरि है। यह उपमा भक्त को यह सिखाती है कि हमारी भक्ति में भी अनन्यता और सर्वोच्च समर्पण होना चाहिए।

भक्तवत्सलता और संकट मोचन: भजन के उत्तरार्ध में भगवान के कृपालु और रक्षक रूप का वर्णन है। जिन्होंने ध्रुव और प्रह्लाद जैसे बाल भक्तों की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार धारण किया और कालिया नाग का मर्दन कर यमुना को विषमुक्त किया, वे प्रभु हमारे जीवन के सभी संकटों और यमराज के फंदे (जन्म-मृत्यु के चक्र) को काटने में पूरी तरह सक्षम हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • नाम-स्मरण की शक्ति: कलयुग में केवल नाम-संकीर्तन को ही मोक्ष का सबसे सरल साधन माना गया है। यह भजन इसी सिद्धांत को प्रतिपादित करता है।
  • द्वैत से अद्वैत की यात्रा: भजन में प्रयुक्त उपमाएं (तारा-चंदा, नदी-गंगा) जीवात्मा को परमात्मा की विराटता का बोध कराती हैं।
  • भय से मुक्ति: कालिया नाग के मर्दन और यम के फंदे को काटने का उल्लेख भक्त के मन से मृत्यु और भय का नाश करता है।
  • राधा-कृष्ण का युगल स्वरूप: भजन में राधा और कृष्ण दोनों की महिमा गाई गई है, जो वैष्णव संप्रदाय की युगल उपासना का मुख्य आधार है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए हर क्षण शुभ है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:

  • ब्राह्ममुहूर्त या संध्याकाल: सुबह के समय इस भजन को सुनने से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है। संध्या आरती के समय इसे गाने से घर का वातावरण पवित्र होता है।
  • विशेष पर्व: श्री कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली और कार्तिक मास के दौरान इस भजन का सामूहिक संकीर्तन अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
  • गायन की विधि: इसे गाते समय हाथ में करताल या मंजीरा लेकर, बंद आंखों से भगवान के बाल स्वरूप या रासलीला के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण (गोविंद) और आद्या शक्ति श्री राधा रानी को समर्पित है। भजन की अंतिम पंक्तियों में परम भक्त संत शिरोमणि मीराबाई का उल्लेख आता है। मीराबाई ने आजीवन भगवान श्री कृष्ण को अपना पति और सर्वस्व माना। उनकी भक्ति 'माधुर्य भाव' की पराकाष्ठा थी। इस भजन में मीराबाई के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जो भी गिरधर नागर की शरण में जाता है, प्रभु उसके जन्म-जन्मांतर के बंधन काट देते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन सदियों से भारतीय लोकमानस और वैष्णव समाज में गाया जाने वाला एक पारंपरिक पद है। इसकी रचना की जड़ें मध्यकालीन भक्ति आंदोलन में मिलती हैं। मीराबाई और अष्टछाप के कवियों की परंपरा से प्रेरित होकर इस भजन को जन-जन तक पहुंचाया गया। आधुनिक समय में राकेश काला, चित्रविचित्र जी और अन्य प्रसिद्ध भजन गायकों ने इसे नए संगीत और सुमधुर धुनों के साथ गाकर युवा पीढ़ी के बीच भी लोकप्रिय बना दिया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और मिठास से भरी ब्रजभाषा मिश्रित हिंदी है। इसमें प्रयुक्त काव्य शैली अत्यंत प्रवाहमयी है:

  • उपमा अलंकार: "ज्यों तारा विच चंदा" और "ज्यों नदियां वींच गंगा" में उपमा अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है।
  • गेयता (Musicality): भजन के अंतरे और टेक (रिफ्रेन) इस प्रकार रचे गए हैं कि इन्हें आसानी से याद किया जा सकता है और सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
  • संबोधन शैली: कवि सीधे अपने मन को संबोधित करता है, जिससे यह सीधे सुनने वाले के अंतःकरण को छूता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि इसमें जीवन जीने के महत्वपूर्ण सूत्र छिपे हैं:

  1. मन पर नियंत्रण: हमारा मन हमेशा बाहरी दुनिया में भटकता रहता है। भजन हमें सिखाता है कि मन को वश में करने का सबसे सरल उपाय उसे गोविंद के नाम में लगा देना है।
  2. समर्पण भाव: जैसे प्रह्लाद और ध्रुव ने पूर्ण समर्पण किया, वैसे ही हमें भी अपने अहंकार को त्यागकर ईश्वर की शरण लेनी चाहिए।
  3. सकारात्मकता: कालिया नाग के फण पर नृत्य करने का अर्थ है कि जीवन की भयंकर से भयंकर परिस्थितियों और विषमताओं पर भी हम ईश्वर के नाम के बल पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
नटवर (Natavar) नटों में श्रेष्ठ, महान नर्तक सृष्टि रूपी रंगमंच पर लीला करने वाले श्री कृष्ण।
नागर (Naagar) चतुर, सभ्य, रसिक भक्तों के मन को अपनी चतुरता से मोह लेने वाले।
गोविंदा (Govinda) गायों और इंद्रियों के स्वामी जो हमारी इंद्रियों को सही दिशा और आनंद प्रदान करते हैं।
बाल मुकन्दा (Bal Mukunda) बाल स्वरूप श्री कृष्ण भगवान का वह बाल रूप जो मुक्ति प्रदान करने वाला है।
कालीदह (Kalidah) यमुना जी का वह गहरा स्थान जहाँ कालिया नाग रहता था मानव मन में छिपे हुए वासना और क्रोध रूपी विष का प्रतीक।
जम का फंदा (Jam Ka Phanda) यमराज का पाश / मृत्यु का भय जन्म और मृत्यु के सांसारिक चक्र से मुक्ति।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "नटवर नागर नंदा भजो रे मन गोविंदा..."
हे मेरे मन! तू नंद के दुलारे, लीलाधर चतुर श्री गोविंद का निरंतर भजन कर। उनका श्याम वर्ण का मुखड़ा पूर्णिमा के चंद्रमा के समान सुंदर और शांतिदायक है।

2. "तूं ही नटवर तूं ही नागर, तूं ही बाल मुकन्दा..."
हे प्रभु! आप ही सृष्टि के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता हैं, आप ही परम चतुर हैं और आप ही बाल मुकुंद के रूप में भक्तों को वात्सल्य रस प्रदान करने वाले हैं।

3. "सब देवन में कृष्ण बड़े हैं, ज्यों तारा विच चंदा..."
जिस प्रकार आकाश में अनगिनत तारों के बीच चंद्रमा अपनी अद्वितीय आभा के कारण सबसे बड़ा और सुंदर दिखाई देता है, उसी प्रकार समस्त देवी-देवताओं में भगवान श्री कृष्ण का स्थान सर्वोपरि है।

4. "सब सखियन में राधाजी बड़ी हैं, ज्यों नदियां वींच गंगा..."
जैसे संसार की समस्त पवित्र नदियों में मां गंगा अपनी पावनता के कारण सर्वश्रेष्ठ हैं, वैसे ही श्री कृष्ण की आह्लादिनी शक्ति श्री राधा रानी सभी गोपियों और सखियों में शिरोमणि हैं।

5. "ध्रुव तारे प्रह्लाद उबारे, नरसिंह रूप धरंता..."
आपने ही बालक ध्रुव को अटल पद दिया और प्रह्लाद की रक्षा के लिए खंभे को फाड़कर नरसिंह अवतार धारण किया। आप अपने शरणागत की रक्षा अवश्य करते हैं।

6. "कालीदह में नाग ज्यों नाथों, फण-फण निरत करंता..."
यमुना के कालीदह में कालिया नाग के अहंकार को चूर-चूर कर, आपने उसके फणों पर अद्भुत नृत्य किया। आप हमारे मन के विकारों का भी इसी तरह दमन करें।

7. "वृन्दावन में रास रचायो, नाचत बाल मुकन्दा..."
आपने वृंदावन की पावन भूमि पर शरद पूर्णिमा की रात को महारास रचाया, जहाँ स्वयं बाल मुकुंद गोपियों के संग दिव्य नृत्य कर रहे थे।

8. "मीरा के प्रभु गिरधर नागर, काटो जम का फंदा..."
आप मीराबाई के वही गिरधर नागर हैं जिन्होंने उनकी हर संकट से रक्षा की। हे प्रभु! आप हमारे भी जन्म-मृत्यु के इस कठिन फंदे को काट दीजिए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ भगवान श्री कृष्ण के निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से भक्ति मार्ग में प्रगति होती है:

"हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥"

"वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम नटवर नागर नंदा भजो रे मन गोविंदा
मुख्य आराध्य भगवान श्री कृष्ण एवं श्री राधा रानी
प्रसिद्ध गायक राकेश काला (Rakesh Kala) एवं अन्य पारंपरिक कलाकार
मुख्य भाव (Bhava) समर्पण, माधुर्य और शांत रस
भाषा ब्रजभाषा मिश्रित सरल हिंदी
उपयुक्त अवसर दैनिक संध्या आरती, जन्माष्टमी, सत्संग, कार्तिक मास
मुख्य संदेश नाम-स्मरण से भवसागर से मुक्ति और मानसिक शांति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपने चंचल मन को सांसारिक मोह-माया से हटाकर भगवान श्री कृष्ण (गोविंद) के नाम-स्मरण में लगाना चाहिए, क्योंकि वही जीवन के सभी दुखों और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाने वाले हैं।

'नटवर' का अर्थ है नटों में श्रेष्ठ यानी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता या नर्तक, जो पूरी सृष्टि को अपनी उंगलियों पर नचाते हैं। 'नागर' का अर्थ है चतुर, रसिक या बुद्धिमान, जो अपने भक्तों के हृदय की बात तुरंत समझ लेते हैं।

जिस प्रकार गंगा नदी सभी नदियों में सबसे पवित्र, पूजनीय और पापों का नाश करने वाली है, उसी प्रकार श्री राधा रानी भगवान श्री कृष्ण की आह्लादिनी शक्ति हैं और सभी गोपियों व भक्तों में उनका स्थान सर्वोच्च और सबसे पावन है।

यह पंक्ति श्रीमद्भागवत महापुराण के 'कालिया नाग मर्दन' प्रसंग से जुड़ी है। भगवान श्री कृष्ण ने यमुना नदी को विषमुक्त करने के लिए अत्यंत विषैले कालिया नाग का दमन किया था और उसके फणों पर नृत्य किया था।

हाँ, यह भजन दैनिक सुबह या शाम की पूजा के समय गाने के लिए अत्यंत उपयुक्त है। इसकी सरल लय और मधुर धुन मन को तुरंत एकाग्र और शांत कर देती है।

राकेश काला के अलावा इस पारंपरिक भजन को चित्रविचित्र जी, अनूप जलोटा जी और कई अन्य शास्त्रीय व लोक गायकों ने अपने-अपने अनूठे अंदाज में गाया है।

'जम का फंदा' का अर्थ है यमराज का पाश, जो मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र को दर्शाता है। भगवान की अनन्य भक्ति करने से जीव इस चक्र से मुक्त होकर मोक्ष (गोलोक धाम) प्राप्त करता है।

इस भजन को सुनते समय मन में पूर्ण शरणागति, वात्सल्य और माधुर्य भाव रखना चाहिए। भगवान को अपना रक्षक और परम सखा मानकर उनके नाम में लीन होना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ, अर्थ और आध्यात्मिक संदर्भों को सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों जैसे श्रीमद्भागवत पुराण और पारंपरिक वैष्णव संकीर्तन पद्धतियों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और त्रुटिहीन भजन के बोल और उनका गहरा दार्शनिक अर्थ पहुंचाना है ताकि उनकी आध्यात्मिक चेतना का विकास हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण: कालिया नाग मर्दन और रासलीला प्रसंग (दशम स्कंध)।
  • भक्तमाल (नाभादास): संत मीराबाई, ध्रुव और प्रह्लाद के भक्ति चरित्र का संदर्भ।
  • पारंपरिक वैष्णव कीर्तन संग्रह: ब्रजभूमि के प्राचीन संकीर्तन पद।

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन पसंद आया है, तो आप हमारी वेबसाइट पर निम्नलिखित दिव्य भजनों और स्तोत्रों के लिरिक्स और भावार्थ भी पढ़ सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!