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भोले बाबा शरण में तुम्हारी शिवजी भजन लिरिक्स (Bhole Baba Sharan Mein Tumhari Shivji Bhajan Lyrics in Hindi) - Shivji Bhajan

भोले बाबा शरण में तुम्हारी शिवजी भजन के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। भगवान शिव की भक्ति और समर्पण से ओत-प्रोत इस पावन भजन का आनंद लें।

देवादिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित यह पावन भजन "भोले बाबा शरण में तुम्हारी शिवजी भजन लिरिक्स (Bhole Baba Sharan Mein Tumhari Shivji Bhajan Lyrics in Hindi)" साधकों के हृदय में अटूट भक्ति, समर्पण और वैराग्य का भाव जागृत करने वाला एक अत्यंत सुंदर संकीर्तन है। शिव का अर्थ ही कल्याण है और उनकी शरण में जाने मात्र से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप तथा सांसारिक संताप नष्ट हो जाते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी संपूर्ण दीनता को स्वीकार करते हुए भगवान आशुतोष के चरणों में आश्रय मांगता है। भारतीय सनातन संस्कृति में भगवान शिव को 'भोला भंडारी' कहा जाता है, क्योंकि वे अत्यंत अल्प पूजा, बेलपत्र और सच्चे भाव से ही प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर अपनी कृपा की वर्षा कर देते हैं। इस भजन का गायन विशेष रूप से शिवरात्रि, सावन मास के सोमवार, प्रदोष व्रत और दैनिक संध्या वंदन के समय अत्यंत आनंददायक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है। इस विस्तृत गाइड में हम इस भजन के संपूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन विधि और जीवन पर इसके गहरे प्रभावों का सविस्तार अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मखड़ा):

भोले बाबा शरण में तुम्हारी, आए हम शीश झुकाने,
दया दृष्टि हम पर डालो, ओ डमरू वाले दीवाने!
शरण में तुम्हारी, आए हम शीश झुकाने...

अंतरा 1:

गले में तुम्हारे नाग विराजे, जटा में गंगा बहती है,
भस्म रमे तन अंगे भोले, महिमा दुनिया कहती है।
तेरी माया का पार न पाया, कोई जोगी कोई ज्ञानी,
दया दृष्टि हम पर डालो, ओ डमरू वाले दीवाने!

अंतरा 2:

कैलाश पर्वत है डेरा तुम्हारा, नंदी पे असवार हो तुम,
दुखियों के दुःख हरने वाले, भक्तों के आधार हो तुम।
तेरे दर पे जो भी आया, उसने पाई मन की बानी,
दया दृष्टि हम पर डालो, ओ डमरू वाले दीवाने!

अंतरा 3:

विष को पिया तुमने जग के हित, नीलकंठ कहलाए हो,
प्रलयंकारी रौद्र रूप में, तांडव नाच नचाए हो।
हम मूरख हैं अज्ञानी प्रभु, तुम हो करुणा की खानी,
दया दृष्टि हम पर डालो, ओ डमरू वाले दीवाने!

समापन (रिफ्रेन):

भोले बाबा शरण में तुम्हारी, आए हम शीश झुकाने,
दया दृष्टि हम पर डालो, ओ डमरू वाले दीवाने!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक के भीतर के अहंकार को मिटाकर भगवान शिव के चरणों में पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। स्थाई पंक्तियों में भक्त कहता है कि हे भोले बाबा! हम संसार के दुखों और प्रपंचों से थककर आपकी शरण में आए हैं और आपके चरणों में अपना शीश झुकाते हैं। आप हमें अपनी दया दृष्टि से निहाल कर दीजिए।

प्रथम अंतरे में शिव के अलौकिक और वैराग्यमय स्वरूप का वर्णन किया गया है। उनके गले में सर्पराज वास करते हैं, उनकी जटाओं से पावन गंगा प्रवाहित होती है और उनके शरीर पर श्मशान की भस्म रमी रहती है। संसार के बड़े-बड़े जोगी, मुनि और ज्ञानी भी आपकी अनंत माया के रहस्य को नहीं पा सके हैं।

द्वितीय अंतरे में उनके निवास स्थान कैलाश और उनके वाहन नंदी का स्मरण किया गया है। शिव समस्त संसार के दुःख-दर्द हरने वाले और भक्तों के एकमात्र आधार हैं। जो भी सच्चे मन से उनके दरबार में पहुंचता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

तृतीय अंतरे में समुद्र मंथन के समय कालकूट विषपान की घटना का स्मरण किया गया है। भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए स्वयं विष पी लिया और 'नीलकंठ' कहलाए। वे जितने शांत और दयालु हैं, प्रलय के समय उनका रौद्र तांडव रूप उतना ही शक्तिशाली हो जाता है। भक्त अपनी मूर्खता और अज्ञानता को स्वीकार करते हुए शिव से करुणा की भीख मांगता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

शिव भक्ति का मार्ग अत्यंत सरल परंतु आत्मिक शुद्धता की मांग करने वाला है। इस भजन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • समर्पण की भावना: यह भजन साधक को ईश्वर के प्रति पूर्ण आत्मसमर्पण सिखाता है।
  • शिव स्वरूप का सजीव चित्रण: भस्म, गंगा, नाग, डमरू और कैलाश पर्वत के माध्यम से शिव के महान व्यक्तित्व का स्मरण।
  • भय मुक्ति: शिव की शरण में जाने से मृत्यु का भय और सांसारिक मोह-माया समाप्त हो जाती है।
  • सार्वभौमिक अपील: इसे किसी भी आयु वर्ग के लोग, बच्चे, युवा और वृद्ध सरलता से गा सकते हैं।
  • तुलसीदास जी एवं पौराणिक परंपरा: शिव आराधना से जुड़ी कथाओं और शिव तांडव स्तोत्र की तर्ज पर यह मन को एकाग्र करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन और श्रवण करने के लिए कुछ विशेष समय और नियम निर्धारित किए गए हैं जिनसे आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है:

  • उचित समय: प्रातःकाल ब्रह्म बेला में या प्रदोष काल (संध्या समय) में इसका गायन सर्वोत्तम माना गया है।
  • विशेष अवसर: महाशिवरात्रि, सावन मास के प्रत्येक सोमवार, प्रदोष व्रत और शिव सत्संग के दौरान इसे अवश्य गाना चाहिए।
  • पूजा विधि: शिव मंदिर में शिवलिंग के समक्ष दीपक जलाकर, बेलपत्र और जल अर्पित करते हुए इस भजन का भावपूर्ण स्मरण करना चाहिए।
  • मानसिक स्थिति: गाते समय मन शांत, शुद्ध और भगवान शिव के रूप में लीन होना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के प्रमुख आराध्य देवादिदेव महादेव, महाकाल, आशुतोष भगवान शिव हैं। हिंदू दर्शन में ब्रह्मा, विष्णु और महेश में भगवान शिव संहार और पुनरुत्थान के देवता माने गए हैं। शिव को आदिदेव, आदियोगी और गुरुओं के भी गुरु (दक्षिणा मूर्ति) के रूप में पूजा जाता है। आदि शंकराचार्य और महान संतों ने भी शिव को ही परब्रह्म का साकार रूप माना है। शिव भक्तों की श्रेणी में नंदी, भृंगी, रावण से लेकर हनुमान जी तक का नाम आता है, जो शिव के अनन्य भक्त रहे हैं। इसी भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भक्तजन इस प्रकार के भजनों का गान करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन लोक-भक्ति परंपरा और पारंपरिक शिव संकीर्तन का एक अभिन्न हिस्सा है। सदियों से संतों, अखाड़ों के साधुओं और ग्रामीण अंचल के भक्तों द्वारा शिव विवाह, कांवड़ यात्रा और जागरण के अवसरों पर इस प्रकार के भावपूर्ण गीतों की रचना और गायन किया जाता रहा है। इसका कोई एक निश्चित रचनाकार ज्ञात नहीं है, बल्कि यह मौखिक परंपरा (श्रुति परंपरा) के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी भक्तों के कंठों से प्रवाहित होता आ रहा है। इसमें निहित शब्द और संगीत की लय सीधे हृदय को छूती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोक-प्रिय हिंदी (खड़ी बोली मिश्रित ब्रज-अवधि के प्रभाव वाली) है। इसके बोल आमजन के समझने योग्य हैं ताकि कोई भी साधारण भक्त इसे आसानी से गा सके। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। "डमरू वाले दीवाने", "करुणा की खानी" जैसे प्रयोग इसके साहित्यिक सौंदर्य को बढ़ाते हैं। संगीत की दृष्टि से यह भजन तालबद्ध और भजन संध्या के अनुकूल एक सुंदर रचना है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि जीवन जीने की एक गहरी दार्शनिक कला सिखाता है:

  • अहंकार का त्याग: जैसे शिव श्मशान की भस्म लगाते हैं और वैभव से दूर रहते हैं, वैसे ही मनुष्य को भी बाहरी दिखावे और अहंकार से दूर रहना चाहिए।
  • संकट में धैर्य: भगवान शिव ने विषपान किया किंतु क्रोध में सृष्टि का नाश नहीं किया, बल्कि उसे अपने गले में धारण किया। जीवन में कठिनाइयों को सहने की शक्ति यहीं से मिलती है।
  • शरणगति का भाव: जीवन की सभी परेशानियों से घबराने के बजाय परम शक्ति की शरण में जाना ही वास्तविक समाधान है।
  • समानता का संदेश: शिव सबके हैं—राजा हो या रंक, जोगी हो या गृहस्थ, महादेव सबकी पुकार सुनते हैं।
शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होने वाले जो भक्त की थोड़ी सी पूजा से भी तुरंत कृपा कर दें
भस्म विभूति / राख संसार की नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक
नीलकंठ नीले गले वाले विष को गले में रोकने वाले, जो परोपकार की पराकाष्ठा है
डमरू वाले डमरू धारण करने वाले ब्रह्मांड की नाद ऊर्जा और सृजन के प्रतीक
कैलाश शिव का निवास भौतिक बंधनों से परे परम चेतना का स्थान

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"भोले बाबा शरण में तुम्हारी, आए हम शीश झुकाने" - इस पंक्ति का भाव है कि हम अपने सारे अभिमान और चिंताओं को छोड़कर आपके चरणों में नतमस्तक हैं।
"गले में तुम्हारे नाग विराजे, जटा में गंगा बहती है" - यह शिव के प्रकृति के साथ तादादमय और नियंत्रणकारी स्वरूप को दर्शाता है, जहाँ विषैला सर्प और पावन गंगा दोनों एक साथ निवास करते हैं।
"विष को पिया तुमने जग के हित, नीलकंठ कहलाए हो" - यह त्याग और लोक-कल्याण का सबसे बड़ा उदाहरण है।
"हम मूरख हैं अज्ञानी प्रभु, तुम हो करुणा की खानी" - यहाँ जीव अपनी कमियों को स्वीकार करता है और ईश्वर की असीम दया पर भरोसा जताता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन का पाठ करते समय या इसके उपरांत निम्नलिखित शिव मंत्रों का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

  • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
  • पंचाक्षर मंत्र: ॐ नमः शिवाय॥
  • शिव ध्यान श्लोक: ध्यायेत्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
भजन की विशेषता विवरण
भजन का नाम भोले बाबा शरण में तुम्हारी (Bhole Baba Sharan Mein Tumhari)
आराध्य देवता भगवान शिव (महादेव / आशुतोष)
संगीत परंपरा पारंपरिक शिव संकीर्तन एवं लोक भजन
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधि प्रभाव
मुख्य भाव भक्ति, शरणागति, वैराग्य और समर्पण
उपयुक्त अवसर महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, प्रदोष, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन देवादिदेव महादेव, भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें भोले भंडारी और आशुतोष भी कहा जाता है।

यह भजन महाशिवरात्रि, सावन मास के सोमवार, शिव पूजन, रुद्राभिषेक, कांवड़ यात्रा और रात्रि जागरण के समय विशेष रूप से गाया जाता है।

समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को जब पूरी सृष्टि के कल्याण के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में रोक लिया था, जिससे उनका गला नीला पड़ गया था, तब से उन्हें नीलकंठ कहा गया।

इस भजन के निरंतर गायन और श्रवण से मन को शांति मिलती है, मानसिक तनाव दूर होता है और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा एवं भक्ति का विकास होता है।

हाँ, इस भजन को घर पर पूजा के दौरान, संध्या वंदन में या व्यक्तिगत साधना के समय पूरी श्रद्धा के साथ अकेले या परिवार के साथ गाया जा सकता है।

शिव पूजा में मुख्य रूप से जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भस्म, चंदन और पंचामृत का प्रयोग किया जाता है।

इस भजन के बोल बहुत ही सरल और सहज हिंदी (Devanagari) में हैं, जो हर भक्त को आसानी से समझ आ जाते हैं।

हाँ, इस भजन के साथ ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम और कीबोर्ड जैसे वाद्य यंत्रों का उपयोग करके इसे और अधिक संगीतमय बनाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के विद्वान आचार्यों और संपादकीय टीम द्वारा पारंपरिक सनातन ग्रंथों, शिव पुराण, और लोक-भक्ति साहित्य के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक भजन लिरिक्स के साथ-साथ उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ प्रदान करना है। यह सामग्री पूरी तरह से जनहित और भक्ति प्रचार के लिए समर्पित है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव महापुराण - कोट रुद्र संहिता एवं विधेश्वर संहिता
  • पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन संग्रह
  • शैव दर्शन एवं वैदिक स्तोत्र परंपरा
  • सनातन धर्म ग्रंथ एवं व्रत कथा संग्रह

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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