घरे अईली मयरिया (Ghare Aili Mayariya) - Ritika Pandey Devigeet Bhakti Song | Mata Bhajan
सनातन संस्कृति और लोक परंपरा में आदिशक्ति माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती की आराधना का विशेष स्थान है। विशेष रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्र के पावन अवसरों पर भोजपुरी अंचल में गाए जाने वाले देवी गीत जन-जन के मन में भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं। प्रसिद्ध गायिका ऋतिका पांडेय (Ritika Pandey) द्वारा प्रस्तुत यह मनमोहक देवी गीत "घरे अईली मयरिया (Ghare Aili Mayariya)" माता के आगमन, उनके स्वागत और घर-परिवार में होने वाले मंगलमय उत्सव का अत्यंत सजीव चित्रण करता है। जब भक्त यह अनुभव करता है कि जगत जननी माँ अम्बे उसके द्वार पर स्वयं पधार चुकी हैं, तो उसका हृदय कृतज्ञता और आनंद से भर जाता है। यह भजन केवल एक संगीतिक प्रस्तुति नहीं है, अपितु यह साधक के अंतःकरण में विराजमान अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर दिव्यता और करुणा का प्रकाश फैलाने वाला एक पावन आध्यात्मिक संकीर्तन है।
भजन की मुख्य विशेषता
यह गीत भोजपुरी लोक संगीत की मिठास और शास्त्रीय भक्ति भाव का अद्भुत संगम है। इसमें माता के ममतामयी रूप को अपनी बेटी या मातृत्व स्वरूप मानकर स्वागत करने की ग्रामीण एवं पारंपरिक लोक-संस्कृति की सोंधी खुशबू मिलती है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
|| मुखड़ा ||
निबिया के गाछी मयरिया झूले ली झुलुवा,
अइली हे मयरिया हमार घरे अइली मयरिया!
सोना के कटोरवा में अरवा चउरवा,
अइली हे मयरिया हमार घरे अइली मयरिया!
|| प्रथम अंतरा ||
लौट के आईल बा नवरात के बरिया,
खोल दिहलू माई अपने भवनवा के किवरिया!
दर्शन पा के धन्य भइल भाग हमार,
गूंजे जयकारा सेs सगरी नगरिया!
अइली हे मयरिया हमार घरे अइली मयरिया!
|| द्वितीय अंतरा ||
लाल-लाल चुनरिया माई के सोहे पाँव में,
महावर रंगल बा माँ के चरण पाँव में!
ऋतिका पुकारे तोहरे चरनन के धूर,
हरि लियs माई हमार संकट तमाम दूर!
अइली हे मयरिया हमार घरे अइली मयरिया!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
ऋतिका पांडेय द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय देवी गीत का भावार्थ अत्यंत गहरा और हृदयस्पर्शी है। इस भजन की पंक्तियाँ उस समय का वर्णन करती हैं जब भक्त के जीवन में साधना और श्रद्धा का प्रतिफल मिलने का समय आता है।
मुखड़े का भावार्थ:
भक्त माता का आह्वान करते हुए कहता है कि नीम के वृक्षों के नीचे (जो माँ शीतला और दुर्गा का वास स्थान माना जाता है) माता का झूला झूल रहा है। हे माता! आज आप हमारे घर पधारी हैं। आपके स्वागत के लिए सोने के कटोरे में पवित्र अरवा चावल और पूजन सामग्री तैयार है। यह आगमन साधक के जीवन में सबसे बड़ा सौभाग्य बनकर आया है।
अंतरा का भावार्थ:
साधक कहता है कि वर्ष भर प्रतीक्षा के पश्चात पुनः नवरात्र का पवित्र समय लौट आया है। माता ने अपनी कृपा का द्वार खोल दिया है, जिससे संपूर्ण वातावरण में माँ के जयकारों की गूंज फैल गई है। माता के चरणों में लाल चुनरी और महावर सुशोभित हो रहा है। गायिका ऋतिका पांडेय माता से प्रार्थना करती हैं कि वे अपने चरणों की धूल हमें प्रदान करें और हमारे समस्त दुखों एवं संकटों का नाश करें।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
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लोक संस्कृति का जीवंत रूप: यह भजन भोजपुरी लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और ग्रामीण अंचल की श्रद्धा को पूरी जीवंतता के साथ प्रस्तुत करता है।
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मातृत्व भाव की प्रधानता: इसमें माता को केवल एक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि घर की अपनी बेटी या ममतामयी माँ के रूप में याद किया गया है।
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सकारात्मक ऊर्जा का संचार: नवरात्र और विशेष पूजा के अवसरों पर इस गीत को सुनने से घर का वातावरण पवित्र और ऊर्जावान बनता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
देवी गीतों का आनंद और उनका आध्यात्मिक लाभ विशेष अवसरों पर बढ़ जाता है:
उचित समय
शारदीय और चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में, प्रातःकाल की पूजा के समय या संध्याकालीन आरती के पश्चात इस भजन का श्रवण अत्यंत फलदायी होता है।
श्रवण विधि
माता की चौकी लगाते समय, कलश स्थापना के पावन अवसर पर या सामूहिक भजन-सत्संग में इसे प्रेम और समर्पण भाव के साथ सुनना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल अर्थ | सांस्कृतिक संदर्भ |
|---|---|---|
| मयरिया | माता / अम्बे | भोजपुरी में स्नेहपूर्वक माता को पुकारने का संबोधन |
| निबिया के गाछी | नीम का वृक्ष | माता दुर्गा और शीतला का प्रिय वास स्थल |
| अरवा चउर | बिना उबला हुआ शुद्ध चावल | पूजा-पाठ और अनुष्ठान में प्रयुक्त पवित्र धान्य |
| किवरिया | कपाट / दरवाज़ा | भक्ति और कृपा के द्वार खुलना |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | घरे अईली मयरिया (Ghare Aili Mayariya) |
|---|---|
| गायक / कलाकार | ऋतिका पांडेय (Ritika Pandey) |
| विधा | भोजपुरी देवी गीत / माता भजन |
| भाषा | भोजपुरी एवं हिंदी |
| मुख्य विषय | माता का आगमन, नवरात्र उत्सव और भक्ति |
| उपयुक्त अवसर | शारदीय नवरात्र, चैत्र नवरात्र, माता की चौकी, जागरण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख भक्तलोक (Bhaktilok.in) की धार्मिक सामग्री निर्माण नीति के अंतर्गत पारंपरिक लोकगीतों और देवी संगीत की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें प्रयुक्त गीत के बोल, भावार्थ और संदर्भ पूरी तरह से लोक परंपरा और कलात्मक अभिव्यक्ति पर आधारित हैं।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री | अंतिम नवीनीकरण: वर्ष 2026 | नीति निर्देश: भारतीय सनातन संस्कृति एवं भक्ति संगीत का प्रचार-प्रसार।
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