Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा लिरिक्स भजन (Aa Maa Aa Tujhe Dil Ne Pukara Lyrics in Hindi ) - GULSHAN KUMAR DeviBhajan

आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा भजन के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। गुलशन कुमार द्वारा गाए इस प्रसिद्ध देवी भजन के भावार्थ और भक्तिमय शब्दों का आनंद लें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

प्रस्तावना एवं परिचय

आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा ।
दिल ने पुकारा तू है मेरा सहारा माँ ॥
शेरांवाली जोतांवाली मेहरांवाली माँ ।
आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा ॥
प्रेम से बोलो जय माता दी ।
सारे बोलो जय माता दी ।
मिल के बोलो जय माता दी ।
फिर से बोलो जय माता दी ।
मैंने मन से तेरी पूजा की है सांझ सवेरे ।
मुझ को दर्शन दे के मैया भाग जगा दे मेरे ।
मैंने मन से तेरी पूजा की है सांझ सवेरे ।
मुझ को दर्शन दे के मैया भाग जगा दे मेरे ।
मैया मैया बोले मेरा मन एक तारा माँ ॥
॥ आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा...॥
तूने ही पाला है मुझको तू ही मुझे संभाले ।
तूने ही मेरे जीवन मे पल पल किये उजाले ।
तूने ही पाला है मुझको तू ही मुझे संभाले ।
तूने ही मेरे जीवन मे पल पल किये उजाले ।
चरणों मे तेरे मैंने तन मन वारा माँ ॥
॥ आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा...॥
मान ले मेरी विनती मैया एक झलक दिखला दे ।
रूप की शीतल किरणों से नयनो के द्वार सजा दे ।
मान ले मेरी विनती मैया एक झलक दिखला दे ।
रूप की शीतल किरणों से नयनो के द्वार सजा दे ।
नो को रूप तेरा लगता है प्यारा माँ ॥
॥ आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा...॥
जय माता दी जय माता दी ।
कष्ट निवारे शेरों वाली ।
पार लगादे शेरों वाली ।
है दुःख हरनी शेरों वाली ।
बिगड़ी बना दे शेरों वाली ।
प्रेम से बोलो जय माता दी ।
सारे बोलो जय माता दी ।
जोर से बोलो जय माता दी ।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा लिरिक्स भजन (Aa Maa Aa Tujhe Dil Ne Pukara Lyrics in Hindi ) - GULSHAN KUMAR DeviBhajan - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।

भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?

यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?

माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?

हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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