भजन का परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व
"तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये" भारतीय भक्ति संगीत के इतिहास में माँ दुर्गा (शेरावाली) को समर्पित सबसे लोकप्रिय, भावपूर्ण और कालजयी भजनों में से एक है। यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह एक भक्त की अपनी आराध्य माँ के प्रति अनन्य श्रद्धा, समर्पण और व्याकुलता की जीवंत अभिव्यक्ति है। जब भी नवरात्रि का पावन पर्व आता है या वैष्णो देवी की पवित्र यात्रा का स्मरण होता है, तो यह भजन स्वतः ही हर श्रद्धालु के हृदय और जिह्वा पर गूंजने लगता है। इस भजन का मुख्य भाव 'शरणागति' और 'मातृ-भक्ति' है, जहाँ भक्त सांसारिक बंधनों को पीछे छोड़कर माँ के बुलावे पर उनके पावन दरबार की ओर खिंचा चला आता है। प्रस्तुत लेख में हम इस कालजयी भजन के संपूर्ण लिरिक्स, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, साहित्यिक सौंदर्य और इससे जुड़े पावन संदेशों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
साँची ज्योतो वाली माता, तेरी जय जय कार।
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये,
मैं आया मैं आया शेरा वालिये।
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये,
मैं आया मैं आया शेरा वालिये।
ज्योता वालिये, पहाड़ा वालिये, मेहरा वालिये॥
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये,
मैं आया मैं आया शेरा वालिये।
सारा जग है इक बंजारा,
सारा जग है इक बंजारा,
सब की मंजिल तेरा द्वारा।
ऊँचे परबत लम्बा रास्ता,
ऊँचे परबत लम्बा रास्ता,
पर मैं रह ना पाया शेरा वालिये॥
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये...
सूने मन में जल गयी बाती,
तेरी राहों में मिल गए साथी।
मुंह खोलूं क्या तुझ से मांगू,
मुंह खोलूं क्या तुझ से मांगू,
बिन मांगे सब पाया शेरा वालिये॥
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये...
कौन है राजा कौन भिखारी,
एक बराबर तेरे सारे पुजारी।
तुने सब को दर्शन देके,
तुने सब को दर्शन देके,
अपने गले लगाया शेरा वालिये॥
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये,
मैं आया मैं आया शेरा वालिये।
प्रेम से बोलो, जय माता दी।
सारे बोलो, जय माता दी।
आते बोलो, जय माता दी।
जाते बोलो, जय माता दी।
कष्ट निवारे, जय माता दी।
पार उतारे, जय माता दी।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन जीवात्मा और परमात्मा (आदिशक्ति) के बीच के शाश्वत संबंध को दर्शाता है। भजन की शुरुआत माँ की महिमा और उनकी "साँची ज्योत" (सच्ची ज्योति) की जय-जयकार से होती है। यहाँ 'ज्योति' ज्ञान, चेतना और अंधकार के निवारण का प्रतीक है। भक्त कहता है कि हे माता, जब तक आपका बुलावा नहीं आता, तब तक कोई आपके द्वार तक नहीं पहुँच सकता। लेकिन जैसे ही आपका बुलावा आया, मैं सारे सांसारिक बंधनों और बाधाओं को पार करके आपके चरणों में उपस्थित हो गया हूँ।
भजन के प्रथम अंतरे में संसार को एक 'बंजारा' (खानाबदोश या अस्थायी यात्री) कहा गया है। यह दार्शनिक सत्य है कि यह संसार नश्वर है और हम सब यहाँ कुछ समय के लिए आए हैं। हमारी अंतिम मंजिल और परम विश्राम माँ का पावन दरबार ही है। जीवन का मार्ग भले ही ऊंचे पर्वतों की तरह कठिन और लंबा हो, लेकिन माँ की कृपा से भक्त के भीतर वह शक्ति जाग्रत होती है जिससे वह बिना रुके आगे बढ़ता जाता है।
द्वितीय अंतरे में आंतरिक रूपांतरण की बात की गई है। जब भक्त भक्ति के मार्ग पर चलता है, तो उसके सूने और अंधकारमय मन में श्रद्धा की बाती जल उठती है। माँ के मार्ग पर चलने वाले अन्य भक्त उसके सहयात्री बन जाते हैं। सबसे सुंदर भाव यह है कि माँ के सामने कुछ भी मांगने की आवश्यकता नहीं है; वह अंतर्यामी हैं और बिना मांगे ही भक्त की झोली भर देती हैं। अंतिम अंतरे में सामाजिक समरसता का अद्भुत संदेश है, जहाँ राजा और रंक का भेद समाप्त हो जाता है और माँ सभी को समान रूप से गले लगाती हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- शरणागति का सर्वोच्च भाव: यह भजन पूरी तरह से 'प्रपत्ति' यानी ईश्वर के प्रति पूर्ण आत्मसमर्पण पर आधारित है। भक्त मानता है कि उसकी यात्रा उसकी अपनी शक्ति से नहीं, बल्कि माँ की इच्छा और बुलावे से संभव हुई है।
- अद्वैत और समता का संदेश: "कौन है राजा कौन भिखारी" की पंक्तियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि दिव्य चेतना के समक्ष भौतिक संपदा, जाति या सामाजिक स्थिति का कोई महत्व नहीं है। माँ के दरबार में केवल भक्ति ही एकमात्र योग्यता है।
- सांसारिक वैराग्य और सत्य का बोध: संसार को 'बंजारा' कहकर यह भजन हमें याद दिलाता है कि भौतिक सुख-सुविधाएं क्षणभंगुर हैं और आत्मा की वास्तविक शांति केवल परमात्मा के शरण में ही है।
- सामूहिक संकीर्तन की ऊर्जा: भजन के अंत में "जय माता दी" का सामूहिक उद्घोष भक्तों के भीतर एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि माँ की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने जाते हैं:
- नवरात्रि पर्व: आश्विन और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान इस भजन का गायन घर और मंदिरों में विशेष रूप से किया जाता है।
- माता की चौकी और जागरण: किसी भी मांगलिक कार्य के अवसर पर आयोजित होने वाले माता के जागरण या चौकी में इस भजन को गाए बिना अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
- वैष्णो देवी यात्रा के समय: जब भक्त जम्मू स्थित माँ वैष्णो देवी की चढ़ाई करते हैं, तब यह भजन उनके मार्ग की थकान को दूर करने और उत्साह बढ़ाने का काम करता है।
- संध्या आरती: प्रतिदिन संध्याकाल में माँ दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाकर शांत मन से इस भजन का श्रवण करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा के सौम्य और करुणामयी रूप 'शेरावाली' और 'वैष्णो देवी' को समर्पित है। शाक्त परंपरा में माँ को संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी (आदिशक्ति) माना गया है। इस भजन के माध्यम से भक्त माँ के ममतामयी रूप की वंदना करता है। ऐतिहासिक रूप से, यह भजन आधुनिक युग के महान गायकों और संतों की परंपरा से जुड़ा है जिन्होंने संगीत को ईश्वर प्राप्ति का माध्यम बनाया। इस भजन को अमर बनाने में पार्श्व गायक नरेंद्र चंचल जी का विशेष योगदान रहा है, जिन्हें माता के भजनों का पर्याय माना जाता था।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह कालजयी भजन वर्ष 1980 में आई प्रसिद्ध हिंदी फिल्म 'आशा' का हिस्सा है। इस भजन की रचना महान गीतकार आनंद बख्शी ने की थी और इसे संगीत से सजाया था प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने। इस भजन को महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफी और प्रसिद्ध भेंट गायक नरेंद्र चंचल ने अपनी जादुई आवाजों से सजाया था। फिल्म के इस दृश्य में दिखाया गया है कि कैसे एक भक्त विपरीत परिस्थितियों में भी माँ के बुलावे पर उनके दरबार पहुँचता है। इस गीत ने पारंपरिक लोक भजनों को आधुनिक जनमानस तक पहुँचाने में एक सेतु का कार्य किया।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोक-प्रभाव से युक्त हिंदी है, जिसमें पंजाबी शब्दावली (जैसे 'शेरा वालिये', 'पहाड़ा वालिये', 'मेहरा वालिये') का बहुत ही सुंदर समन्वय किया गया है। इसकी काव्य शैली संवादात्मक और विवरणात्मक है। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं अत्यंत प्रभावशाली हैं:
- 'बंजारा' रूपक: संसार की नश्वरता को दर्शाने के लिए बंजारा शब्द का प्रयोग किया गया है।
- 'सूने मन में बाती जलना': अज्ञान के अंधकार में ज्ञान और विश्वास के प्रकाश के उदय होने का प्रतीक है।
- लयबद्धता: भजन की लय ऐसी है कि यह सुनते ही श्रोता को झूमने पर मजबूर कर देती है और मन में भक्ति का संचार करती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें केवल भक्ति ही नहीं सिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश भी देता है:
- अहंकार का त्याग: जब हम यह स्वीकार करते हैं कि "तुने मुझे बुलाया", तो हमारा यह भ्रम टूट जाता है कि हम अपनी मर्जी से सब कुछ कर रहे हैं। यह कर्ताभाव के अहंकार को समाप्त करता है।
- संतोष और कृतज्ञता: "बिन मांगे सब पाया" हमें जीवन में जो कुछ भी मिला है, उसके प्रति कृतज्ञ होना सिखाता है। ईश्वर हमारी आवश्यकताओं को हमारी प्रार्थनाओं से पहले जानते हैं।
- समानता और बंधुत्व: माँ के दरबार में सभी समान हैं। यही भाव हमें समाज में हर व्यक्ति को आदर देने और भेदभाव से दूर रहने की प्रेरणा देता है।
- धैर्य और दृढ़ संकल्प: "ऊँचे परबत लम्बा रास्ता" जीवन के संघर्षों का प्रतीक है। यह सिखाता है कि लक्ष्य चाहे कितना भी कठिन हो, यदि विश्वास दृढ़ हो तो हर बाधा पार की जा सकती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| शेरा वालिये | सिंह की सवारी करने वाली माता | शक्ति और निर्भयता की देवी माँ दुर्गा। |
| साँची ज्योत | सच्ची और शाश्वत ज्योति | परमात्मा की दिव्य चेतना जो कभी नष्ट नहीं होती। |
| बंजारा | अस्थायी रूप से घूमने वाला यात्री | संसार में जीवात्मा की क्षणभंगुर स्थिति। |
| मेहरा वालिये | कृपा बरसाने वाली माता | भक्तों पर अकारण करुणा करने वाली दयामयी माँ। |
| सूने मन में बाती | हृदय में भक्ति का दीपक जलना | अज्ञानता के नाश और ज्ञान के उदय का प्रतीक। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"साँची ज्योतो वाली माता, तेरी जय जय कार।"
हे माता! आपकी ज्योति सच्ची है, जो कभी नहीं बुझती। आप ही इस संसार की परम सत्य हैं, मैं आपकी बार-बार जय-जयकार करता हूँ।
"तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये।"
हे सिंहवाहिनी माता! जब आपने मुझे अपने पावन धाम में आने का निमंत्रण दिया, तो मैं स्वयं को रोक नहीं पाया और आपके दर्शनों के लिए दौड़ा चला आया हूँ।
"सारा जग है इक बंजारा, सब की मंजिल तेरा द्वारा।"
यह संपूर्ण संसार एक अस्थायी सराय की तरह है जहाँ सब मुसाफिर हैं। अंततः सभी आत्माओं को शांति और मोक्ष आपके ही चरणों में प्राप्त होना है।
"ऊँचे परबत लम्बा रास्ता, पर मैं रह ना पाया शेरा वालिये।"
यद्यपि आपके धाम का मार्ग अत्यंत दुर्गम, ऊंचे पहाड़ों वाला और कठिन है, लेकिन आपके प्रेम की खींच इतनी प्रबल थी कि मैं घर पर रुक नहीं सका।
"सूने मन में जल गयी बाती, तेरी राहों में मिल गए साथी।"
जैसे ही मैंने आपकी ओर कदम बढ़ाए, मेरे सूने हृदय में श्रद्धा का दीपक जल उठा और इस भक्ति मार्ग पर मुझे कई अच्छे सहयात्री भी मिल गए।
"मुंह खोलूं क्या तुझ से मांगू, बिन मांगे सब पाया शेरा वालिये।"
हे सर्वज्ञानी माँ! मुझे आपसे कुछ भी मांगने की आवश्यकता नहीं है। आपने मेरी झोली को बिना मांगे ही खुशियों और आशीर्वाद से भर दिया है।
"कौन है राजा कौन भिखारी, एक बराबर तेरे सारे पुजारी।"
आपके दरबार में सांसारिक वैभव का कोई मूल्य नहीं है। आपके लिए राजा और रंक दोनों एक समान हैं, आप सभी पर समान रूप से अपनी कृपा बरसाती हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात माँ दुर्गा के इस सिद्ध मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है, जो इस भजन के भावों को और सुदृढ़ करता है:
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
अर्थ: जो सभी मंगलों में मंगल रूप हैं, कल्याणमयी हैं, पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं, शरण में आए हुओं की रक्षा करने वाली हैं, ऐसी गौरी नारायणी को मेरा बारंबार नमस्कार है।
इसके अतिरिक्त, माँ की शक्ति और सर्वव्यापकता को नमन करने के लिए इस श्लोक का पाठ भी किया जाता है:
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण का विषय | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये (Tune Mujhe Bulaya Sherawaliye) |
| मुख्य देवी/देवता | माँ दुर्गा, माँ वैष्णो देवी, शेरावाली माता |
| गीतकार / रचयिता | आनंद बख्शी (Anand Bakshi) |
| मूल गायक | मोहम्मद रफी एवं नरेंद्र चंचल |
| संगीतकार | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल |
| मुख्य रस / भाव | भक्ति रस, वात्सल्य भाव, शरणागति |
| सर्वोत्तम अवसर | नवरात्रि, माता का जागरण, वैष्णो देवी यात्रा, दुर्गा पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की व्याख्या और इसके दार्शनिक पहलुओं का संकलन सनातन धर्म के शाक्त ग्रंथों, पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों और भारतीय भक्ति संगीत के इतिहास के गहन अध्ययन के आधार पर किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और प्रामाणिक जानकारी पहुँचाना है ताकि वे इस भजन के केवल शब्दों को ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक संदेश को भी आत्मसात कर सकें।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्देवीभागवत पुराण: माँ आदिशक्ति की महिमा और उनके सर्वव्यापक स्वरूप का शास्त्रीय आधार।
- भारतीय भक्ति संगीत का इतिहास: आनंद बख्शी और नरेंद्र चंचल जी के भक्ति गीतों का योगदान।
- पारंपरिक शाक्त संकीर्तन परंपरा: उत्तर भारत में माता के जागरण और भेंट गायन की प्राचीन शैलियाँ।
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