Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

दुनिया में देव हजारों है हनुमान तुम्हारा क्या कहना लिरिक्स ( Duniya Mein Dev Hazaron Hain Lyrics in Hindi ) - Krishna Bhajan

हनुमान जी के अनुग्रह से बल और साहस प्राप्त करें। इस भजन का उच्चारण करें और भक्ति का अनुभव लें।

प्रस्तावना एवं परिचय

हनुमान: सभी देवताओं का सर्वोच्च

हनुमान जी के अनुग्रह से हर भक्त को शक्ति और साहस प्राप्त होता है। इस भजन का गायन करें और भक्ति का अनुभव करें।

दुनिया में देव हजारों हैं, हनुमान तुम्हारा क्या कहना। सब देवी-देवता साक्षात हैं, पर तुमसे बढ़कर क्या कहना। सुर सरित अपने सब साथी हैं, पर तुमसे बढ़कर क्या कहना। साक्षात राम के सेवक हैं, पर तुमसे बढ़कर क्या कहना। विद्या की देवी सरस्वती, धन की लक्ष्मी देवी। पर तुमसे बढ़कर क्या कहना। खुदगीर भी सदेव आपके, प्राणों की देवी दुर्गा। पर तुमसे बढ़कर क्या कहना। शिव ने करते प्रदीप्त अश्व के, द्वारों को खोल दिया। पर तुमसे बढ़कर क्या कहना। संसार में तुमने दीप जलाया, हर घड़ी तुमने किया। पर तुमसे बढ़कर क्या कहना। पवन सुत चरणों का पूजन, सिद्धि-दात्री आपसे बिन। पर तुमसे बढ़कर क्या कहना। जगत के हृदय में बसने वाले, सबका उद्धार तुमने किया। पर तुमसे बढ़कर क्या कहना।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान हनुमान की उनकी अद्भुतता और विशेषता का वर्णन किया गया है। पहले श्लोक में कहा गया है कि इस दुनिया में कई देवता हैं, पर हनुमान जी का महत्व अतुलनीय है। चंद्रमा से लेकर सूर्य तक सभी देवी-देवताओं का गुणगान करते हुए, यह भजन हमें बताता है कि हनुमान जी, जिन्हें राम का भक्त कहा जाता है, वे कितने महान और अनूठे हैं। हनुमान जी सर्वशक्तिमान हैं; उनके बिना राम का कार्य भी अधूरा है। यह गीत श्रद्धा और विश्वास से भरा हुआ है और हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

इस भजन का भावार्थ सभी भक्तों के लिए एक प्रेरणा है। यह दर्शाता है कि हनुमान जी सिर्फ एक देवता नहीं हैं, बल्कि वे एक ऐसा सखा हैं जो हर कठिनाई में अपने भक्तों के साथ खड़े रहते हैं। जब संसार में अन्य देवी-देवता अपने विशेषताएँ रखते हैं, तभी हनुमान जी का स्नेह और श्रद्धा हमें सबसे ऊपर दिखते हैं। यह हमें सीखाता है कि जब हम सच्चे मन से पुकारते हैं तो हनुमान जी हमारी हर मुश्किल का सामना करने में सहायता करते हैं। यह गीत जैसे भक्तों के मन में अडिग विश्वास भर देता है।

यह भजन भक्ति मार्ग की गहराई को दर्शाता है। हनुमान जी की कथा हमें सिखाती है कि भक्ति केवल उपासना नहीं, बल्कि अपने ह्रदय की सच्चाई है। उनकी लाम न केवल भक्ति को मजबूत करती है, बल्कि यह हमें योग, साधना और आत्मविकास के लिए भी प्रेरित करती है। भक्ति का यह मार्ग हमें भक्ति, समर्पण और सच्चे प्रेम के साक्षात्कार की ओर ले जाता है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। हनुमान जी, न केवल शक्ति और साहस, बल्कि ज्ञान और विवेक के भी प्रतीक हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान जी का नाम सुनते ही भक्तों के अंतर्मन में श्रद्धा और भक्ति का अनुभव होता है। रामायण के अनुसार, हनुमान जी ने भगवान राम की सेवा में असाधारण कार्य किए हैं। इसलिए उन्हें 'रामदूत' कहा जाता है। इस भजन में जो समर्पण और भक्ति के भाव दर्शाए गए हैं, वे देवी-देवताओं के प्रति अनन्य प्रेम का प्रतीक हैं। यह भजन दिखाता है कि ब्रह्मांड में हनुमान जी का स्थान इतना ऊँचा है कि अन्य देवताओं की भक्ति भी उनकी भक्ति से प्रेरित होती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान जी का ये भजन सुनने और गायन करने से मन में शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है। यह मानसिक तनाव को कम करता है, आत्मविश्वास को बढ़ाता है और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है। भक्तिपूर्ण हृदय के साथ इसे सुनने से भक्ति में वृद्धि होती है और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सामर्थ्य सही रूप से अनुभव करने के लिए सुबह या शाम का समय अनुकूल है। पूजा के दौरान एक दीपक जलाएं और हनुमान जी की छवि के आगे फूल या मिठाई का भोग लगाएं। शांतचित्त होकर और एकाग्रता के साथ इस भजन का गायन करें। भक्ति और श्रद्धा के साथ इसे गाने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी की पूजा के समय क्या विशेष ध्यान रखना चाहिए?

हनुमान जी की पूजा करते समय विशेष ध्यान रखें कि मन शांत और एकाग्र रहे। दीप जलाएं और मिठाई या फूल अवश्य अर्पित करें।

क्या हनुमान भजन का नियमित पाठ करना लाभकारी है?

हाँ, नियमित रूप से हनुमान भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मबल और बढ़ी हुई ऊर्जा का अनुभव होता है।

इस भजन के उच्चारण का सही समय क्या है?

इस भजन का उच्चारण सुबह के समय या शाम की आरती के समय करना सबसे उत्तम होता है, जिससे दिनभर की सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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