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मृत्युंजय संजीवनी मंत्र (Mrityunjay Sanjivani Mantra) - Shiv Mantra Shankar Mahadevan

मृत्युंजय संजीवनी मंत्र (महामृत्युंजय मंत्र) का संपूर्ण पाठ, अर्थ एवं महिमा पढ़ें। भगवान शिव के इस शक्तिशाली मंत्र से पाएं मानसिक शांति और भय मुक्ति।

मृत्युंजय संजीवनी मंत्र, जिसे महामृत्युंजय मंत्र के नाम से भी जाना जाता है, सनातन धर्म के सबसे शक्तिशाली और पवित्र मंत्रों में से एक है। भगवान शिव के 'त्र्यम्बक' स्वरूप को समर्पित यह मंत्र ऋग्वेद के सातवें मंडल के 59वें सूक्त का 12वां मंत्र है। शंकर महादेवन की ओजस्वी और भक्तिपूर्ण आवाज में इस मंत्र का श्रवण साधक को न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि यह मृत्यु के भय से मुक्ति और आत्म-साक्षात्कार का मार्ग भी प्रशस्त करता है। 'मृत्युंजय' का अर्थ है—वह जो मृत्यु पर विजय प्राप्त कर ले, और 'संजीवनी' का अर्थ है—मृतप्राय को पुनः जीवित करने वाली शक्ति। यह मंत्र शिव की उस अनंत चेतना का आह्वान है, जो पंचमहाभूतों और कालचक्र को नियंत्रित करती है।

सम्पूर्ण मंत्र एवं शुद्ध पाठ | Complete Mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

मंत्र उच्चारण एवं पद-विच्छेद | Mantra Pronunciation

इस मंत्र का शुद्ध उच्चारण ही इसके फल को सुनिश्चित करता है। पद-विच्छेद इस प्रकार है:

ॐ त्र्यम्बकम् यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकम् इव बन्धनात् मृत्योः मुक्षीय मा अमृतात्॥

विस्तृत शब्दार्थ एवं पद-विच्छेद | Word-by-word Meaning

संस्कृत शब्द पद-विच्छेद सरल हिंदी अर्थ
त्र्यम्बकम्त्रि + अम्बकम्तीन नेत्रों वाले (भगवान शिव)
यजामहेयज् + महेहम पूजा/आराधना करते हैं
सुगन्धिम्सु + गन्धिम्सुगंधित, दिव्य स्वरूप
पुष्टिवर्धनम्पुष्टि + वर्धनम्जो पोषण और वृद्धि करने वाले हैं
उर्वारुकम्उर्वारुकम्ककड़ी (खीरा)
इवइवकी तरह
बन्धनात्बन्धनात्बंधन से (संसार के मोह-माया)
मृत्योःमृत्योःमृत्यु से
मुक्षीयमुक्षीयमुक्त करें
मामानहीं
अमृतात्अमृतात्अमरता से (मोक्ष)

सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Hindi Meaning & Bhavarth

इस मंत्र का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त भगवान शिव से प्रार्थना करता है कि, "हे तीन नेत्रों वाले महादेव! आप जो सुगंधित हैं और समस्त जगत का पोषण करने वाले हैं, मैं आपकी आराधना करता हूँ। जिस प्रकार एक ककड़ी अपने बेल के बंधन से पक जाने पर स्वयं अलग हो जाती है, उसी प्रकार आप मुझे भी सांसारिक मोह-माया और मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, ताकि मैं मोक्ष (अमरता) को प्राप्त कर सकूँ।"

यह मंत्र केवल शारीरिक मृत्यु से बचाव के लिए नहीं, बल्कि अज्ञानता रूपी मृत्यु से मुक्ति के लिए है। शंकर महादेवन द्वारा गाए गए इस मंत्र में वह लय और भाव है जो साधक को शिव के चरणों में पूर्ण समर्पण की अनुभूति कराता है। यह मंत्र हमें सिखाता है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य इस नश्वर शरीर के बंधनों को तोड़कर उस शाश्वत चेतना में विलीन होना है, जिसे शिव कहते हैं।

मंत्र का दार्शनिक एवं आध्यात्मिक महत्व | Philosophical Significance

महामृत्युंजय मंत्र का दर्शन 'अद्वैत' और 'भक्ति' का अद्भुत संगम है। यह मंत्र स्वीकार करता है कि आत्मा अमर है, केवल शरीर नश्वर है। 'उर्वारुक' (खीरे) का उदाहरण यह स्पष्ट करता है कि जैसे फल पकने पर बेल से अलग होता है, वैसे ही जब साधक का ज्ञान परिपक्व हो जाता है, तो वह संसार के बंधनों से सहज ही मुक्त हो जाता है। यह मंत्र भय को दूर कर साहस और विवेक प्रदान करता है।

मंत्र जप विधि, नियम एवं शुभ मुहूर्त | Chanting Method & Rules

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) सबसे उत्तम है।
  • माला: रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें।
  • संख्या: कम से कम 108 बार जप करना चाहिए।
  • विधि: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। शिव प्रतिमा या शिवलिंग के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
  • सावधानी: उच्चारण में स्पष्टता रखें। मंत्र का जप करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और शिव के प्रति समर्पण का भाव रखें।

एक नजर में मंत्र की जानकारी | Quick Information

मंत्र नाममहामृत्युंजय मंत्र (संजीवनी मंत्र)
देवताभगवान शिव
स्रोतऋग्वेद (7.59.12)
ऋषिवशिष्ठ
छंदअनुष्टुप
मुख्य लाभआरोग्य, दीर्घायु, मोक्ष, भय मुक्ति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इसका जप किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त में जप करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है।

हाँ, पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ कोई भी व्यक्ति इस मंत्र का जप कर सकता है।

यह मंत्र अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है और साधक को मानसिक व आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह लेख पौराणिक ग्रंथों और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

ऋग्वेद संहिता, शिव पुराण, और वैदिक मंत्रोच्चार परंपरा।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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