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Mahadev Shiv Bhajan

आत्मा ने परमात्मा को लिया देख (शिवोहम शिवोहम) शिव भजन लिरिक्स | Aatma Ne Parmatma Ko Liya Dekh Shivoham Shivoham Shiv Bhajan Lyrics

144 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 आत्मा ने परमात्मा को लिया देख – शिवोहम शिवोहम

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।

(Aatma Ne Parmatma Ko Liya Dekh – Shivoham Shivoham) – शिव भजन / अद्वैत गीत

🕉️ एक ओंकार निरंजन निरंकार – आत्मा का परमात्मा में लीन होना, शिवोहम का अनुभव

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: शिव भजन / अद्वैत वेदांत / ध्यान गीत
🎶 भाव: आत्मबोध, समर्पण, शिवत्व का अनुभव
📍 विशेषता: “शिवोहम” (मैं शिव हूँ) का बोध – अद्वैत दर्शन का सरल गीत
📀 प्रचलन: शिव भक्तों और आध्यात्मिक साधकों में प्रिय, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

आत्मा ने परमात्मा को
लिया देख ध्यान की दृष्टि से।
प्रकाश हुआ हृदय-हृदय,
बेड़ा पार हुआ इस सृष्टि से।
है एक ओंकार निरंजन निरंकार,
है अजर अमर आकार विश्वधार मन भजे।
शिवोहम शिवोहम शिवोहम..
शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

भूख में तपसी तप रहा,
भोजन बीच पठाय।
विलाप में साधु हंस रहा,
अपना ही उपजा खाय।
शेष अशेष विशेष में समर्पण के भाव में।
शिवोहम शिवोहम शिवोहम..
शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

ठहर शांत एकांत में,
साधके मूलाधार।
सर्जन स्वाधिष्ठान से,
सूर्य मणि चमकार।
विशुद्धि आज्ञा सहस्रार तक गूंजे अनाहत।
शिवोहम शिवोहम शिवोहम..
शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

खाली को तो भर दिया,
भरे में भरा न जाए।
पानी में प्यासा रहा,
तट पे बैठ लखाय।
प्रश्न व्यसन में उलझ-उलझ हां व्यर्थ गया जन्म।
शिवोहम शिवोहम शिवोहम..
शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / अद्वैत भक्ति काव्य

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अद्वैत भावना से ओतप्रोत शिव भजन है। “आत्मा ने परमात्मा को लिया देख ध्यान की दृष्टि से” – जब साधक गहरे ध्यान में होता है, तो उसकी आत्मा परमात्मा का साक्षात्कार करती है। तब हृदय में प्रकाश होता है, और इस सृष्टि के बंधनों से मुक्ति (बेड़ा पार) मिलती है।

“है एक ओंकार निरंजन निरंकार, है अजर अमर आकार विश्वधार” – परम सत्ता एक है – ओंकार, जो निरंजन (माया से परे), निरंकार (बिना रूप का) और अजर-अमर (अविनाशी) है। वही विश्व को धारण करता है।

पहले अंतरे में – “भूख में तपसी तप रहा, भोजन बीच पठाय” – यह दिखाता है कि जब साधक तप करता है, तो परमात्मा उसके लिए भोजन की व्यवस्था करता है। “विलाप में साधु हंस रहा, अपना ही उपजा खाय” – अर्थात जो कुछ हमें मिलता है, वह अपना ही उपजा है – यह अद्वैत का भाव है कि सब एक है।

दूसरे अंतरे में – मूलाधार, स्वाधिष्ठान, विशुद्धि, आज्ञा, सहस्रार, अनाहत – ये सभी सप्त चक्रों के नाम हैं। साधक ध्यान में इन चक्रों से गुजरते हुए शिवत्व (शिवोहम) की अनुभूति करता है।

तीसरे अंतरे में – “खाली को तो भर दिया, भरे में भरा न जाए” – जो विनम्र है, उसे ईश्वर भर देता है, लेकिन जो स्वयं को भरा हुआ मानता है, उसमें कुछ नहीं भरा जा सकता। “पानी में प्यासा रहा, तट पे बैठ लखाय” – यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सत्य के करीब होते हुए भी उसे नहीं पहचानते, प्यासे रह जाते हैं।

भजन का मूल मंत्र है “शिवोहम” – मैं शिव हूँ। यह अहं ब्रह्मास्मि (मैं ब्रह्म हूँ) की उपनिषदों की घोषणा है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

शिवोहम का उच्चारण: “शिवोहम” (शिवः + अहम्) का अर्थ है “मैं शिव हूँ”। यह अद्वैत वेदांत के “तत्वमसि” (तू वह है) जैसा महावाक्य है। इस भजन का बार-बार “शिवोहम” का जप साधक को आत्मबोध कराता है।

ध्यान और चक्रों का वर्णन: दूसरा अंतरा योग साधना का सुंदर चित्रण करता है – मूलाधार से सहस्रार तक ऊर्जा का जागरण और अनाहत (हृदय चक्र) में ध्वनि का गूंजना।

अद्वैत दर्शन का सरल प्रस्तुतिकरण: “अपना ही उपजा खाय”, “खाली को भरना” आदि पंक्तियाँ गहरे दार्शनिक सत्य को सहज भाषा में व्यक्त करती हैं।

💖 शिवत्व का अनुभव

🎯 संदेश

तुम शिव हो, तुम्हीं ब्रह्म हो। यह शरीर, मन, बुद्धि – सब माया है। सच्चा ध्यान और समर्पण ही आत्मा को परमात्मा से मिला सकता है। “शिवोहम” का जप करते हुए अपने सच्चे स्वरूप को पहचानो।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन उन साधकों के लिए प्रेरणादायक है जो आत्म-साक्षात्कार की यात्रा पर हैं। “शिवोहम” के जप से मन शांत होता है और एकात्मता का अनुभव होता है।

🕉️ ॐ नमः शिवाय ।। शिवोहम शिवोहम ।। हर हर महादेव ।।

॥ इति शिव अद्वैत भजनम् ॥
॥ आत्मा ने परमात्मा को लिया देख ध्यान की दृष्टि से – शिवोहम शिवोहम ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "आत्मा ने परमात्मा को लिया देख (शिवोहम शिवोहम) शिव भजन लिरिक्स | Aatma Ne Parmatma Ko Liya Dekh Shivoham Shivoham Shiv Bhajan Lyrics" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।

शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?

शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?

सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?

हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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