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Mahadev Shiv Bhajan

शिव शंकर की कृपा हो जाए – शिव भजन (Shiv Shankar Ki Kripa Ho Jaye) | Bhole Nath Bhajan

139 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।

🕉️ शिव शंकर की कृपा हो जाए – शिव भजन

(Shiv Shankar Ki Kripa Ho Jaye) – Bhole Nath Bhajan 2026

जीवन की हर बाधा मेरी हल हो जाए ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: भक्ति भजन
🏷️ श्रेणी: शिव भजन, अरदास भजन
📿 देवता: भगवान शिव (शंकर)

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

शिव शंकर की कृपा हो जाए
शिव, शंकर, की कृपा, हो जाए,
जीवन की, हर बाधा, मेरी हल, हो जाए ॥
दर्शन को, तेरे मंदिर आऊँ,
तेरा मंदिर, ही मेरा, दूसरा घर, हो जाए...
शिव, शंकर, की कृपा, हो जाए...

॥ अंतरा १ ॥

थाम ले, आकर, तूँ मुझको ।
बन जाए हर बात मेरी ।
रखवाला हर दुखिया का ।
तूँ ही सुनता बात मेरी ।
तेरी चौखट हो मेरा सर हो,
बस इतना ही हो जाए...
शिव, शंकर, की कृपा हो जाए...

॥ अंतरा २ ॥

अर्ज़ी मेरी स्वीकार करो ।
मुझको भाव से पार करो ।
नाव मेरी डगमग डोले ।
मेरा भी उद्धार करो ।
तेरे दर पे रहूँ, तेरे घर में रहूँ,
यूँ ही जीवन बीत ये जाए...
शिव, शंकर, की कृपा हो जाए...

🎵 शिव शंकर भजन | अरदास भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भावपूर्ण भजन भगवान शिव (शंकर) से उनकी कृपा और आशीर्वाद की प्रार्थना है। "शिव शंकर की कृपा हो जाए, जीवन की हर बाधा मेरी हल हो जाए" – शिव शंकर की कृपा हो, जीवन की हर बाधा समाप्त हो जाए। भक्त की यही प्रार्थना है।

"दर्शन को तेरे मंदिर आऊँ, तेरा मंदिर ही मेरा दूसरा घर हो जाए" – भक्त कहता है कि वह शिव के मंदिर में दर्शन के लिए आए और शिव का मंदिर उसका दूसरा घर बन जाए।

"थाम ले आकर तूँ मुझको, बन जाए हर बात मेरी" – आकर मुझे थाम ले, मेरी हर बात पूरी हो जाए। "रखवाला हर दुखिया का, तूँ ही सुनता बात मेरी" – तू ही हर दुखी के रखवाले हैं, तू ही मेरी बात सुनता है। "तेरी चौखट हो मेरा सर हो, बस इतना ही हो जाए" – तेरी चौखट मेरा सिर (मस्तक) बन जाए, यानी मैं हमेशा तेरे द्वार पर सिर झुकाकर खड़ा रहूँ।

"अर्ज़ी मेरी स्वीकार करो, मुझको भाव से पार करो" – मेरी प्रार्थना स्वीकार करो, मुझे प्रेम से पार करो। "नाव मेरी डगमग डोले, मेरा भी उद्धार करो" – मेरी नाव (जीवन) डगमगा रही है, मेरा भी उद्धार करो। "तेरे दर पे रहूँ, तेरे घर में रहूँ, यूँ ही जीवन बीत ये जाए" – मैं तेरे दर पर रहूँ, तेरे घर में रहूँ, ऐसे ही मेरा जीवन बीत जाए।

यह भजन भक्त की पूर्ण शरणागति का भाव दर्शाता है। भक्त शिव के दरबार में अपनी सभी समस्याएँ रखता है और उनसे कृपा की याचना करता है।

📖 विशेष शब्दों के अर्थ

  • शिव शंकर: भगवान शिव का एक नाम, कल्याणकारी
  • कृपा: दया, आशीर्वाद
  • बाधा: रुकावट, समस्या
  • हल: समाधान
  • थाम ले: पकड़ ले, सहारा दे
  • रखवाला: रक्षक, संरक्षक
  • चौखट: दरवाजे की देहलीज
  • अर्ज़ी: प्रार्थना, याचना
  • स्वीकार करो: मान लो, कबूल करो
  • उद्धार: मुक्ति, पार होना
  • डगमग: डोलती हुई, अस्थिर
  • दर: दरबार, द्वार

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🏠 मंदिर – दूसरा घर

भक्त की इच्छा है कि शिव का मंदिर उसका दूसरा घर बन जाए। यह उसकी अटूट श्रद्धा और आस्था को दर्शाता है। जो भक्त मंदिर को अपना घर मान लेता है, उसकी हर बाधा शिव हल कर देते हैं।

⛵ नाव डगमग

"नाव मेरी डगमग डोले" – जीवन रूपी नाव इस संसार सागर में डगमगा रही है। भक्त शिव से प्रार्थना करता है कि वे उसे पार कराएँ और उसका उद्धार करें। यह भवसागर से पार होने की कामना है।

🎯 संदेश : शिव शंकर भक्तों पर सदा कृपा बरसाते हैं। जो भी उनके दर पर आता है, उसकी हर बाधा हल हो जाती है। चाहे जीवन की नाव कितनी भी डगमगाए, शिव की कृपा से वह पार हो जाती है। बस जरूरत है तो उनकी चौखट पर सिर झुकाने और उनके मंदिर को अपना दूसरा घर बना लेने की।

॥ शिव शंकर की कृपा हो जाए ॥
॥ जीवन की हर बाधा मेरी हल हो जाए ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "शिव शंकर की कृपा हो जाए – शिव भजन (Shiv Shankar Ki Kripa Ho Jaye) | Bhole Nath Bhajan" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।

शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?

शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?

सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?

हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

श्रेणियां: Mahadev Shiv Bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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