🕉️ शिव शंकर की कृपा हो जाए – शिव भजन
(Shiv Shankar Ki Kripa Ho Jaye) – Bhole Nath Bhajan 2026
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
शिव शंकर की कृपा हो जाए
शिव, शंकर, की कृपा, हो जाए,
जीवन की, हर बाधा, मेरी हल, हो जाए ॥
दर्शन को, तेरे मंदिर आऊँ,
तेरा मंदिर, ही मेरा, दूसरा घर, हो जाए...
शिव, शंकर, की कृपा, हो जाए...
॥ अंतरा १ ॥
थाम ले, आकर, तूँ मुझको ।
बन जाए हर बात मेरी ।
रखवाला हर दुखिया का ।
तूँ ही सुनता बात मेरी ।
तेरी चौखट हो मेरा सर हो,
बस इतना ही हो जाए...
शिव, शंकर, की कृपा हो जाए...
॥ अंतरा २ ॥
अर्ज़ी मेरी स्वीकार करो ।
मुझको भाव से पार करो ।
नाव मेरी डगमग डोले ।
मेरा भी उद्धार करो ।
तेरे दर पे रहूँ, तेरे घर में रहूँ,
यूँ ही जीवन बीत ये जाए...
शिव, शंकर, की कृपा हो जाए...
🎵 शिव शंकर भजन | अरदास भजन
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भावपूर्ण भजन भगवान शिव (शंकर) से उनकी कृपा और आशीर्वाद की प्रार्थना है। "शिव शंकर की कृपा हो जाए, जीवन की हर बाधा मेरी हल हो जाए" – शिव शंकर की कृपा हो, जीवन की हर बाधा समाप्त हो जाए। भक्त की यही प्रार्थना है।
"दर्शन को तेरे मंदिर आऊँ, तेरा मंदिर ही मेरा दूसरा घर हो जाए" – भक्त कहता है कि वह शिव के मंदिर में दर्शन के लिए आए और शिव का मंदिर उसका दूसरा घर बन जाए।
"थाम ले आकर तूँ मुझको, बन जाए हर बात मेरी" – आकर मुझे थाम ले, मेरी हर बात पूरी हो जाए। "रखवाला हर दुखिया का, तूँ ही सुनता बात मेरी" – तू ही हर दुखी के रखवाले हैं, तू ही मेरी बात सुनता है। "तेरी चौखट हो मेरा सर हो, बस इतना ही हो जाए" – तेरी चौखट मेरा सिर (मस्तक) बन जाए, यानी मैं हमेशा तेरे द्वार पर सिर झुकाकर खड़ा रहूँ।
"अर्ज़ी मेरी स्वीकार करो, मुझको भाव से पार करो" – मेरी प्रार्थना स्वीकार करो, मुझे प्रेम से पार करो। "नाव मेरी डगमग डोले, मेरा भी उद्धार करो" – मेरी नाव (जीवन) डगमगा रही है, मेरा भी उद्धार करो। "तेरे दर पे रहूँ, तेरे घर में रहूँ, यूँ ही जीवन बीत ये जाए" – मैं तेरे दर पर रहूँ, तेरे घर में रहूँ, ऐसे ही मेरा जीवन बीत जाए।
यह भजन भक्त की पूर्ण शरणागति का भाव दर्शाता है। भक्त शिव के दरबार में अपनी सभी समस्याएँ रखता है और उनसे कृपा की याचना करता है।
📖 विशेष शब्दों के अर्थ
- शिव शंकर: भगवान शिव का एक नाम, कल्याणकारी
- कृपा: दया, आशीर्वाद
- बाधा: रुकावट, समस्या
- हल: समाधान
- थाम ले: पकड़ ले, सहारा दे
- रखवाला: रक्षक, संरक्षक
- चौखट: दरवाजे की देहलीज
- अर्ज़ी: प्रार्थना, याचना
- स्वीकार करो: मान लो, कबूल करो
- उद्धार: मुक्ति, पार होना
- डगमग: डोलती हुई, अस्थिर
- दर: दरबार, द्वार
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
🏠 मंदिर – दूसरा घर
भक्त की इच्छा है कि शिव का मंदिर उसका दूसरा घर बन जाए। यह उसकी अटूट श्रद्धा और आस्था को दर्शाता है। जो भक्त मंदिर को अपना घर मान लेता है, उसकी हर बाधा शिव हल कर देते हैं।
⛵ नाव डगमग
"नाव मेरी डगमग डोले" – जीवन रूपी नाव इस संसार सागर में डगमगा रही है। भक्त शिव से प्रार्थना करता है कि वे उसे पार कराएँ और उसका उद्धार करें। यह भवसागर से पार होने की कामना है।
🎯 संदेश : शिव शंकर भक्तों पर सदा कृपा बरसाते हैं। जो भी उनके दर पर आता है, उसकी हर बाधा हल हो जाती है। चाहे जीवन की नाव कितनी भी डगमगाए, शिव की कृपा से वह पार हो जाती है। बस जरूरत है तो उनकी चौखट पर सिर झुकाने और उनके मंदिर को अपना दूसरा घर बना लेने की।