Chhath Puja Geet मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

अंगना में पोखरी (Angana Me Pokhari) - Rajani Shakya Anjali Yadav Chhath Puja Geet

छठी मइया का पावन गीत 'अंगना में पोखरी' (Angana Me Pokhari) के संपूर्ण बोल एवं भावार्थ। रजनी शाक्य व अंजलि यादव द्वारा स्वरबद्ध इस छठ गीत का आनंद लें।

"अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया" (Angana Me Pokhari) छठ महापर्व के सबसे लोकप्रिय, पारंपरिक और हृदयस्पर्शी लोकगीतों में से एक है। लोकगायिका रजनी शाक्य और अंजलि यादव की सुमधुर एवं भक्तिमय आवाज में सजा यह गीत छठ पूजा की सात्विकता, पवित्रता और गहरी लोक-आस्था को अत्यंत खूबसूरती से प्रदर्शित करता है। इस पावन गीत में एक व्रती (उपवास रखने वाले भक्त) के मन की उस निश्छल और पवित्र भावना का चित्रण किया गया है, जहाँ वह अपने घर के आंगन में ही छठी मइया के लिए एक पवित्र पोखर (तालाब) खोदने की अभिलाषा प्रकट करता है। यह गीत केवल एक भजन या लोकगीत नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जल स्रोतों की महत्ता, मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक एकजुटता का एक जीवंत दस्तावेज है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन गीत के संपूर्ण बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़ी समृद्ध लोक परंपराओं का विद्वतापूर्ण विश्लेषण करेंगे, जो हमारे सांस्कृतिक विरासत को गहराई से समझने में सहायक होगा।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया,
अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया,
अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया।

कोन फूल से पूजन करबौ हे छठी मइया,
कोन फूल से पूजन करबौ हे छठी मइया,
अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया।

केतकी गुलाब से पूजन करबौ हे छठी मइया,
केतकी गुलाब से पूजन करबौ हे छठी मइया,
अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया।

कोन फल से अरघ डिगाइबौ हे छठी मइया,
कोन फल से अरघ डिगाइबौ हे छठी मइया,
अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया।

डबडब नुआ नींबू से अरघ डिगाइबौ हे छठी मइया,
डबडब नुआ नींबू से अरघ डिगाइबौ हे छठी मइया,
अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया।

कोन दउरा पूजन करबौ हे छठी मइया,
कोन दउरा पूजन करबौ हे छठी मइया,
अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया।

बाँस के दउरिया से पूजन करबौ हे छठी मइया,
बाँस के दउरिया से पूजन करबौ हे छठी मइया,
अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया।

केकरा लागी पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया,
केकरा लागी पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया,
अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया।

बालक बचवन लागी पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया,
बालक बचवन लागी पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया,
अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह गीत भक्त और आराध्य के बीच के अनन्य प्रेम का प्रतीक है। गीत के मुखड़े से लेकर अंतरे तक, हर पंक्ति में लोक-संस्कृति की महक और छठी मईया के प्रति अटूट निष्ठा झलकती है। व्रती या भक्त अपनी छठी मइया से संवाद करते हुए कहता है कि हे मइया! मैं अपने घर के ही आंगन में आपके स्नान और अर्घ्य के लिए एक सुंदर और पवित्र पोखर खुदवाऊँगा। यह इस बात का प्रतीक है कि भक्त अपने घर को ही तीर्थ के समान पवित्र बना लेना चाहता है, जहाँ साक्षात प्रकृति और छठी मइया का वास हो।

आगे के अंतरे में भक्त पूछता है कि हे मइया! मैं आपकी पूजा किस पुष्प से करूँ? उत्तर स्वयं देते हुए वह कहता है कि केतकी और गुलाब जैसे fragrant और सुंदर पुष्पों से आपकी पूजा की जाएगी। इसके पश्चात अर्घ्य देने की विधि पर चर्चा होती है कि किस फल से अर्घ्य दिया जाए। 'डबडब नुआ नींबू' (सुंदर, बड़े और ताजे नींबू व अन्य पारंपरिक फल) का उल्लेख यह बताता है कि छठ पूजा में प्रकृति द्वारा प्रदत्त मौसमी फलों का कितना अधिक महत्व है। बांस की दउरी (टोकरी) का जिक्र ग्रामीण शिल्प कौशल, पर्यावरण के अनुकूल सामग्री के प्रयोग और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को रेखांकित करता है। अंत में, जब यह प्रश्न उठता है कि यह पोखर किसके लिए खोदी जा रही है, तो भक्त अत्यंत भावुक होकर उत्तर देता है कि यह मेरे बालक और परिवार के बच्चों की लंबी उम्र, आरोग्यता और उज्जवल भविष्य के लिए खोदी जा रही है। यह मातृत्व प्रेम, परिवार कल्याण और लोक-आस्था का अद्भुत संगम है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना निष्कपट समर्पण, पारिवारिक कल्याण और प्रकृति प्रेम है। छठ महापर्व केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह सूर्य और जल की उपासना के माध्यम से प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का पर्व है। रजनी शाक्य और अंजलि यादव ने अपनी आवाज के माध्यम से इस लोकगीत में जो भाव पैदा किया है, वह श्रोताओं के मन को सीधे छू लेता है। गीत का संदेश यह है कि जब मनुष्य अपनी परंपराओं से जुड़ता है और अपने बच्चों के कल्याण की कामना पूरी निष्ठा से करता है, तो प्रकृति और ईश्वर स्वयं उसकी रक्षा करते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) तथ्य (Detail)
गीत का नाम अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया (Angana Me Pokhari)
गायिका रजनी शाक्य (Rajani Shakya) एवं अंजलि यादव (Anjali Yadav)
संगीत शैली पारंपरिक छठ लोकगीत / भजन
भाषा भोजपुरी / अवधी / लोकभाषा
मुख्य विषय छठी मइया की उपासना, प्रकृति प्रेम, संतान कल्याण
संबंधित पर्व छठ महापर्व (Chhath Puja)
संबंधित लेख अधिक जानकारी के लिए हमारे अन्य पावन छठ पूजा गीत संग्रह को देखें।

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

लोक संगीत की यह खूबसूरत विधा मौखिक परंपरा से होती हुई आधुनिक रिकॉर्डिंग माध्यमों तक पहुँची है। रजनी शाक्य और अंजलि यादव जैसी प्रतिष्ठित लोकगायिकाओं ने अपनी स्वर लहरियों से इस पारंपरिक गीत को अमर बना दिया है। उत्तर भारत विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के लोक-संस्कृति में रचे-बसे इन गीतों को जब ये कलाकार गाती हैं, तो श्रोता अनायास ही छठी मइया के दरबार में पहुँच जाते हैं। उनकी आवाज में जो ठेठपन और मिठास है, वह इस गीत की आत्मा को जीवंत कर देती है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) संदर्भ (Context)
अंगना आंगन (घर का खुला हुआ मुख्य भाग) घर के पवित्र परिसर में पूजा स्थल की कल्पना
पोखरी छछोटा तालाब या जलाशय छठ पूजा के अर्घ्य के लिए जल स्रोत
खुदइबौ खुदवाना / निर्माण करवाना भक्त द्वारा श्रद्धा से पोखर का निर्माण
अरघ डिगाइबौ अर्घ्य देना / जल अर्पित करना भगवान सूर्य और छठी मइया को जल चढ़ाना
दउरिया बांस से बनी छोटी टोकरी पूजा सामग्री रखने का पारंपरिक पात्र
केतकी एक सुगंधित पुष्प माता के पूजन में प्रयुक्त होने वाला फूल

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का पर्व भारतीय सनातन संस्कृति में एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते और उगते सूर्य दोनों की उपासना की जाती है। इस गीत के माध्यम से जल (पोखर) की महत्ता को रेखांकित किया गया है। सनातन धर्म में जल को जीवन और पवित्रता का आधार माना गया है। आंगन में पोखर खोदने की कल्पना यह दर्शाती है कि भक्त अपनी शुद्ध अंतःकरण और घरेलू परिवेश में ही परम पवित्रता का अनुभव करना चाहता है। यह गीत समाज को यह भी सिखाता है कि हमारी संस्कृति प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की सीख देती है। बांस की टोकरी, मौसमी फल, और फूलों का प्रयोग पूरी तरह से इको-फ्रेंडली (पर्यावरण के अनुकूल) संस्कृति को बढ़ावा देता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह गीत हमें कई व्यावहारिक और आध्यात्मिक जीवन सीख देता है:

  • परिश्रम और समर्पण: जिस प्रकार व्रती कठिन नियमों का पालन कर छठ व्रत रखती है, उसी प्रकार जीवन के लक्ष्यों को पाने के लिए अनुशासन जरूरी है।
  • परिवार और समाज का कल्याण: इस गीत में केवल अपने लिए नहीं, बल्कि 'बालक बचवन लागी' यानी बच्चों और परिवार के कल्याण की कामना की गई है, जो हमारी सामूहिक संस्कृति की भावना को दर्शाता है।
  • प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: फूल, फल, जल और सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करना हमारी प्राचीन जीवनशैली का हिस्सा है।
  • संबंधित आलेख के लिए पढ़ें: हरि भजन और लोक आस्था के आयाम।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले छठ महापर्व के दौरान संध्या अर्घ्य और प्रातकालीन अर्घ्य के समय गाया जाता है। इसके अलावा महिलाएं सामूहिक रूप से खरना के दिन और सूप-दउरा सजाते समय भी इस सुमधुर गीत का गान करती हैं। यह गीत महिलाओं के बीच समूह गायन (सोहर या लोकगीत शैली) में अत्यधिक लोकप्रिय है, जिससे उत्सव का माहौल और अधिक ऊर्जावान हो जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

घटक विवरण
गीत का शीर्षक अंगना में पोखरी खुदइबौ हे छठी मइया
गायिका द्वय रजनी शाक्य, अंजलि यादव
शैली लोकगीत / छठ भजन
मुख्य देवता छठी मइया, भगवान सूर्य
सांस्कृतिक मूल्य लोक आस्था, पारिवारिक स्नेह, पर्यावरण संरक्षण
संबंधित पर्व छठ पूजा (Chhath Puja Mahaparv)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय छठ लोकगीत को प्रसिद्ध लोकगायिका रजनी शाक्य और अंजलि यादव ने अपनी सुमधुर आवाज में गाया है।

इस गीत में महान लोक पर्व 'छठ महापर्व' (Chhath Puja) का अत्यंत सजीव और सुंदर वर्णन किया गया है।

आंगन में पोखर खोदने का अर्थ भक्त की उस परम निष्ठा को दर्शाना है, जहाँ वह अपने घर को ही छठी मइया की उपासना के लिए पूरी तरह पवित्र और समर्पित कर देना चाहता है।

बांस से बनी दउरी और सूप प्रकृति के अनुकूल पारंपरिक हस्तशिल्प हैं, जिनमें पूजा के फल, ठेकुआ और प्रसाद रखकर भगवान सूर्य एवं छठी मइया को अर्पित किया जाता है।

यह गीत मुख्य रूप से संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और पारिवारिक कल्याण की कामना के लिए गाया जाता है।

यह मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों मेंारंभ हुआ था, लेकिन अब यह देश-विदेश में जहाँ भी पूर्वांचल के लोग रहते हैं, भव्यता से मनाया जाता है।

इसे मुख्य रूप से कार्तिक मास के छठ पर्व के चार दिनों के अनुष्ठान के दौरान, विशेषकर महिलाओं द्वारा समूह में गाया जाता है।

हाँ, आप हमारे माता रानी भजन संग्रह और अन्य सांस्कृतिक पृष्ठों पर जाकर ऐसे कई और पारंपरिक गीत व भजन पढ़ सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस आलेख को तैयार करते समय पारंपरिक लोक-साहित्य, लोकगीतों की मौखिक परंपराओं और क्षेत्रीय संस्कृति के मानदंडों का पूर्ण ध्यान रखा गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक autentic और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुँचाना है ताकि हमारी अमूल्य लोक विरासत सुरक्षित रह सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी एवं अवधी लोकगीत संकलन
  • छठ महापर्व की लोक-संस्कृति और परंपराएं (क्षेत्रीय शोध आलेख)
  • भक्तिकाल एवं लोक साहित्य के विविध आयाम
  • संदर्भित पृष्ठ: श्री रामचरितमानस एवं लोक-आस्था

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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