hari bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

कांच ही बांस के बहंगिया (Kaanch Hi Baans Ke Bahangiya Lyrics in Hindi) - Chhath Pooja Geet KALPANA

कांच ही बांस के बहंगिया भजन में सूर्य देवता की कृपा और छठ पूजा की महिमा को समर्पित किया गया है।

प्रस्तावना एवं परिचय

कांच ही बांस के बहंगिया: छठ पूजा का अनुपम गीत

इस भव्य भजन को गाकर सूर्य देवता की आराधना करें और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए निष्ठा से प्रार्थना करें।

कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगिया रे, बहंगिया... कांच ही बांस के बहंगिया, सोन पिया से, संग संग ले के चलूँ... सूरज देवता, चालू लगे हैं न, तिहरे तिहरे चरन जुदा... ... (lyrics would continue as per the original song)
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'कांच ही बांस के बहंगिया' मुख्यतः श्रद्धा और समर्पण की भावना को व्यक्त करता है। इस गीत में भक्त अपनी भावनाओं को गहराई से व्यक्त करते हैं, जैसे कि वे कांच की बांस की बहंगिया (साज-सज्जा) में अपनी प्रेमिका या प्रियतम को जोड़ रहे हों। गीत का आरंभ इस भाव से होता है कि जब सूरज की पहली किरणें धरती पर पड़ती हैं, तब भक्त अपने प्रिय से मिलन के लिए तैयार होते हैं। यह गीत समर्पण और भक्ति का प्रतीक है, जहाँ भक्त अपने मन, मिट्टी और प्रकृति से जुड़ाव महसूस करते हैं। यहाँ सुर्य का उल्लेख एक महत्वपूर्ण बिंदु है, जो छठ पूजा के दौरान विशेष रूप से विधिवत् अर्पित किया जाता है।

इस भजन का भावार्थ न केवल प्रेम बल्कि आस्था का भी है। भक्त सूर्योदय के समय जब प्रार्थना कर रहे होते हैं, तो उनकी मनोभावनाएँ प्रसिद्ध वैदिक तत्वों से जुड़ी होती हैं। जब भक्त कहते हैं, 'सोन पिया से संग संग ले के चलूँ', तो यह प्रगाढ़ प्रेम को दर्शाता है, जिससे भक्त का सर्विस्केव मीठा-सीधा रिश्ते में प्रगट होता है। भक्ति के इस मार्ग में, भक्त अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं और अपने प्रियतम की याद में रम जाते हैं। इस प्रकार, यह भजन न केवल एक आराधना का माध्यम है, बल्कि आंतरिक शांति और संतोष का भी अनुभव कराता है।

गीत के थिमार आस्था और श्रद्धा के स्त्रोत से भरे हुए हैं। भक्ति मार्ग में, भक्त अपने ईश्वर को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हैं और उनकी आराधना करते हैं। इस गीत में सूरज देवता की उपासना की गई है, जो जीवन के प्रकाश का प्रतीक है। हिन्दू धर्म में, सूर्य को जीवनदाता माना गया है। सूर्य की पहली किरण का स्वागत करते हुए, भक्त नए जीवन, नई आशाओं और नवीनीकरण का अनुभव करते हैं। अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का यह सफर, मानव जीवन के लिए अति महत्वपूर्ण है और चिंतन का कारण बनता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व छठ पूजा से जुड़ा हुआ है, जो सूर्य देवता की उपासना का एक प्रमुख पर्व है। पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि सूर्य देवता को तिल और जल के माध्यम से अर्पण करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पर्व न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित करता है, बल्कि मानवता में सद्भावना, स्वास्थ्य और पोषण का भी प्रतीक है। महाभारत और पुराणों में सूर्य देवता की पूजा का कई बार उल्लेख है, जो इस उद्देश्य को और भी गहरा बनाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन को गाने से मानसिक शांति और आंतरिक संतोष प्राप्त होता है। इसे नियमित रूप से गाने से भक्तों में आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है। प्राचीन विश्वास के अनुसार, सूर्य की आराधना से स्वास्थ्य में सुधार, समृद्धि और मानसिक स्पष्टता की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सही समय प्रात: काल है, खासकर सूर्योदय के समय। पूजा के लिए एक अल्पना बनाएं, दीप जलाएं और वहाँ अपने इष्ट देवता के चित्र के सामने सच्चे मन से भजन गाएं। ध्यान रखें कि मन शुद्ध और निस्वार्थ हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य सूर्य देवता की आराधना करना और छठ पूजा के अनुष्ठान को संपन्न करना है। यह भक्तों को प्राकृतिक सहायक ऊर्जा का अनुभव कराता है।

कांच ही बांस के बहंगिया का अर्थ क्या है?

यह वाक्यांश प्राकृतिक साज-सज्जा और प्रेम का प्रतीक है, जो परस्पर प्रेम को दर्शाता है। इसे छठ पूजा में विशेष रूप से सराहा जाता है।

भजन गाने का फल क्या है?

भजन गाने से मानसिक संतोष, स्वास्थ्य लाभ और समृद्धि की प्राप्ति होती है, साथ ही यह भक्तों में सकारात्मकता को बढ़ाता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!