प्रस्तावना एवं परिचय
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
अरघ सुरुज देव के
अरघ सुरुज देव के
छठी मैया के पुजवइया
अरघ सुरुज देव के
सूरज देव को अरघ दिहलीं
छठी मैया के आसीरवाद पइलीं
नई फसल के सुगंध उठल
खेत-खलिहान में खुशहाली भइल
डूबत सूरज को नमन कर�
उगत सूरज को पूजन कर�
छठ व्रत के महिमा अपार
सूरज देव हैं हमार उद्धार
देह-मन की शुद्धि पाई
नई जिंदगी की खुशियां आई
मंत्र-मंत्र में शक्ति बस�
छठ पूजा में आस्था रस�
अरघ सुरुज देव के
छठी मैया के पुजवइया
अरघ सुरुज देव के
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ यह भजन छठ पूजा के महान पर्व को समर्पित है जहां सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा का वर्णन किया गया है। 'अरघ सुरुज देव के' शीर्षक सूर्य देव को अर्घ्य प्रदान करने की प्राचीन परंपरा को दर्शाता है। भजन में सूर्य देव के प्रति गहरी भक्ति और समर्पण की भावना व्यक्त की गई है। छठी मैया (देवी षष्ठी) और सूर्य देव दोनों को संयुक्त रूप से पूजा जाता है क्योंकि वे जीवन, स्वास्थ्य और समृद्धि के देवता माने जाते हैं। भजन के माध्यम से कृषि से जुड़ी नई फसल की कामना, सूर्य के अस्त और उदय दोनों समय की पूजा, तथा व्रत की महिमा का गान किया जाता है। यह भजन बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में छठ पूजा के समय गाया जाता है।
इस भजन का भावार्थ मनुष्य के जीवन में सूर्य की महत्ता को रेखांकित करता है। सूर्य केवल खगोल पिंड नहीं, बल्कि जीवन शक्ति (प्राण शक्ति) के प्रतीक हैं। डूबते सूरज को नमन और उगते सूरज को पूजन की परंपरा यह संदेश देती है कि जीवन के प्रत्येक क्षण में ईश्वर का स्मरण आवश्यक है। 'देह-मन की शुद्धि पाई' पंक्ति व्रत के द्वारा शारीरिक और मानसिक पवित्रता की प्राप्ति को दर्शाती है। 'नई जिंदगी की खुशियां आई' से तात्पर्य है कि छठ व्रत से आध्यात्मिक और भौतिक दोनों सुख मिलते हैं। 'मंत्र-मंत्र में शक्ति बसी' पंक्ति यह कहती है कि समुचित मंत्र जप और पूजा से दिव्य शक्तियां सक्रिय होती हैं। यह भजन सामाजिक समरसता और पारिवारिक एकता का भी प्रतीक है।
इस भजन का धार्मिक और दार्शनिक सारार्थ भारतीय आध्यात्मिकता के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। सूर्य को देव मानने की परंपरा ऋग्वेद से जुड़ी है जहां सूर्य (आदित्य) को सर्वोच्च शक्ति माना गया है। छठ पूजा विशुद्ध भक्ति मार्ग (भक्ति योग) का अद्भुत उदाहरण है जहां सरल, सच्चे मन से ईश्वर को समर्पित होना ही मुख्य उद्देश्य है। यह व्रत और पूजा की परंपरा साधारण मनुष्य को भी सिद्धि प्रदान करती है। भजन में छठी मैया (देवी षष्ठी) का उल्लेख भारतीय नारी शक्ति और मातृत्व के सर्वोच्च आदर्श को दर्शाता है। सूर्य और छठी मैया दोनों के संयुक्त पूजन से कामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ छठ पूजा प्राचीन भारतीय परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है जो ऋग्वेद में वर्णित सूर्य पूजा से जुड़ा है। पुराणों में सूर्य को समस्त देवताओं का मुख माना गया है और उन्हें ब्रह्मा द्वारा सृष्टि के संचालन के लिए नियुक्त किया गया है। रामायण में राम और सीता के वनवास से लौटने पर छठ पूजा का वर्णन मिलता है। महाभारत में भी सूर्य पूजा का महत्व बताया गया है। छठ पूजा की परंपरा कार्तिक मास की अमावस्या के दिन आरंभ होती है जब नई फसल के आने का समय होता है। यह त्योहार कृषि से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पूजा है जो मानसून की समाप्ति के बाद नई फसल की कामना करता है। देवी षष्ठी को संतान की रक्षक और पालनहार माना जाता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। अरघ सुरुज देव के भजन के गायन और श्रवण से मन में शांति, स्थिरता और आध्यात्मिक जागृति आती है। सूर्य के प्रति भक्ति से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। नियमित छठ व्रत और इस भजन के माध्यम से मानसिक स्पष्टता, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति का विकास होता है। भौतिक स्तर पर यह भजन परिवार में सुख-समृद्धि, संतान सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायक माना जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से कर्म और भक्ति का सामंजस्य स्थापित होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि इस भजन का गायन और श्रवण सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सर्वाधिक प्रभावी है। छठ पूजा के समय तालाब, नदी या किसी जल स्रोत के पास सुबह और शाम को अर्घ्य देते समय यह भजन गाया जाता है। पूजा से पूर्व स्नान-ध्यान आवश्यक है। माला जप के दौरान बैठने की मुद्रा सीधी और स्थिर रखनी चाहिए। दीपक जलाएं, फूल और फल आदि से पूजा की तैयारी करें। शुद्ध मन से, भक्ति भावना से यह भजन गाएं। व्रत के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करें।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) अरघ्य देना छठ पूजा में क्यों महत्वपूर्ण है?अर्घ्य सूर्य देव को दिया गया जल का प्रसाद है जो शारीरिक और मानसिक शुद्धि का प्रतीक है। यह जल में व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा को संचारित करता है और सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है।
छठी मैया का छठ पूजा में क्या महत्व है?छठी मैया (देवी षष्ठी) संतान की रक्षक, पोषक और माता मानी जाती हैं। वे बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के लिए पूजी जाती हैं। सूर्य के साथ छठी का पूजन परिवार की सकल समृद्धि सुनिश्चित करता है।
इस भजन को किन महीनों में गाया जाता है?यह भजन कार्तिक मास (अक्टूबर-नवंबर) में छठ पूजा के अवसर पर गाया जाता है। यह पूजा कार्तिक मास की अमावस्या से दो दिन पूर्व प्रारंभ होती है और चार दिन तक चलती है। नई फसल के आने का यह समय माना जाता है।
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